Russia 7 класс Biology (advanced)
अध्याय: 4
1. Introduction
Cytology and cell theory
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
2. Bacteria and archaea
Prokaryotes
- बैक्टीरिया (जीवाणु): छोटी कोशिकाएँ, बड़ा काम – बैक्टीरिया एक-कोशिकीय प्रोकैरियोट हैं: इनमें केंद्रक और झिल्ली से घिरे अंगक नहीं होते। इनका DNA एक गोल लूप (न्यूक्लिऑइड) है, अक्सर साथ में छोटे छल्ले प्लाज़्मिड। इनमें 70S राइबोसोम, कोशिका झिल्ली, पेप्टिडोग्लाइकन की कोशिका भित्ति, और कभी-कभी कैप्सूल, पिलि और कशाभ होते हैं। आकार: कोकस, बैसिलस, स्पिरिलम, विब्रियो। ये द्विखंडन से जनन करते हैं और संयुग्मन, रूपांतरण और पारक्रमण से जीन बगल में बाँट सकते हैं। ये प्रकाश-संश्लेषण, रसायन-संश्लेषण, अपघटन, सहजीविता या परजीविता से भोजन लेते हैं और कार्बन व नाइट्रोजन चक्र चलाते हैं। आर्किया दिखने में मिलते-जुलते हैं पर उनकी भित्ति और झिल्ली का रसायन अलग है और वे अक्सर कठिन जगहों पर रहते हैं।
3. Unicellular eukaryotes
Protists
- प्रोटिस्ट: एक कोशिका, असली केंद्रक – प्रोटिस्ट ज़्यादातर एक कोशिका वाले जीव हैं जिनकी कोशिका में असली केंद्रक होता है (यानी ये यूकैरियोट हैं)। जंतु जैसे प्रोटिस्ट (प्रोटोजोआ) जैसे अमीबा, पैरामीशियम भोजन पकड़ते हैं; पौधे जैसे यूग्लीना, डायटम रोशनी में भोजन बनाते हैं; कवक जैसे स्लाइम मोल्ड भोजन सोखते हैं। ये कूटपाद, पक्ष्माभ या कशाभ से चलते हैं, संकुचनशील रिक्तिका से पानी बाहर निकालते हैं, बँटकर बढ़ते हैं और बुरे समय में पुटी बनाते हैं। कुछ रोग फैलाते हैं: मलेरिया, जियार्डियासिस, टॉक्सोप्लाज़्मोसिस, ट्राइकोमोनिएसिस।
4. Archaeplastids (plants)
Botany and plant organisation · Algae · Spore plants · Seed plants · Shoot, bud, stem · Leaf · Root and soil · Vegetative propagation · Classification of flowering plants · Plant ecology · Plants and people
- ऊतक: पादप और जंतु ऊतक – ऊतक एक जैसी कोशिकाओं का समूह है जो मिलकर एक काम करता है। कोशिकाएँ ऊतक बनाती हैं, ऊतक अंग, अंग अंग तंत्र और तंत्र मिलकर जीव। पौधों में बँटने वाला विभज्योतक और न बँटने वाला स्थायी ऊतक होता है, जिसमें जाइलम (पानी ऊपर) और फ्लोएम (भोजन दोनों ओर) शामिल हैं। जंतुओं में उपकला, संयोजी, पेशी और तंत्रिका ऊतक होते हैं। हड्डियों, पेशियों और जोड़ों को सही मुद्रा, व्यायाम और कैल्शियम वाला भोजन चाहिए।
- शैवाल (Algae) – शैवाल सरल जीव हैं जो ज़्यादातर पानी में रहते हैं और धूप से खाना बनाते हैं। इनमें असली जड़, तना या पत्ती नहीं होती। ये एक कोशिका के भी हो सकते हैं और बहुत लंबे भी। हरे, भूरे और लाल शैवाल में अलग-अलग वर्णक होते हैं। ये ऑक्सीजन बनाते हैं और जल-जीवों को भोजन देते हैं।
- फूल वाले पौधे (आवृतबीजी) – आवृतबीजी वे पौधे हैं जिनमें फूल आते हैं और बीज फल के अंदर बनते हैं। इनके दो समूह हैं। द्विबीजपत्री में 2 बीजपत्र, मूसला जड़, जालीदार नसों वाली पत्ती और 4 या 5 के गुणज में पंखुड़ियाँ होती हैं। एकबीजपत्री में 1 बीजपत्र, रेशेदार जड़, समानांतर नसें और 3 के गुणज में पंखुड़ियाँ होती हैं।
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
- जीव जनन कैसे करते हैं? DNA प्रतिकृति और अलैंगिक जनन – जनन में DNA की प्रतिकृति (कॉपी) बनती है। कॉपी कभी पूरी तरह एक जैसी नहीं होती; यही छोटे बदलाव (विभिन्नताएँ) बदलते माहौल में प्रजाति को बचाते हैं। अलैंगिक जनन में एक ही जनक विखंडन, खंडन, पुनरुद्भवन, मुकुलन, कायिक प्रवर्धन या बीजाणु से नए जीव बनाता है।
- पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन – लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक मिलते हैं, जिससे दो जनकों का DNA मिलता है और विभिन्नता बढ़ती है। फूल में परागकोश का पराग वर्तिकाग्र पर पहुँचता है (परागण), परागनलिका बीजांड तक बढ़ती है और नर युग्मक अंडकोशिका से मिलता है (निषेचन)। युग्मनज भ्रूण बनता है, बीजांड बीज और अंडाशय फल।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।