शैवाल क्या हैं?
शैवाल ऐसे जीव हैं जो अपना खाना खुद बना लेते हैं। इसके लिए ये धूप, पानी और हवा काम में लेते हैं। इसे प्रकाश-संश्लेषण कहते हैं। इनमें क्लोरोफिल होता है, यानी पत्तों वाला हरा पदार्थ।
शैवाल में असली जड़, तना या पत्ती नहीं होती। पूरे शरीर को थैलस कहते हैं। ज़्यादातर तालाब, नदी और समुद्र में रहते हैं। कुछ गीली मिट्टी, चट्टान या पेड़ की छाल पर भी रहते हैं।
शैवाल सरल हैं, पर सब छोटे ही नहीं होते। कुछ एक कोशिका के होते हैं, कुछ लंबी लड़ी जैसे, और केल्प जैसे कई मीटर लंबे।
हरे शैवाल
हरे शैवाल में वही क्लोरोफिल होता है जो पौधों में होता है, इसलिए ये पौधों जैसे दिखते हैं। ये ज़्यादातर मीठे पानी, जैसे तालाब, में रहते हैं।
- क्लैमाइडोमोनास: एक कोशिका, दो पूँछ से तैरता है।
- स्पाइरोगाइरा: पतला तंतु, हर कोशिका में हरा सर्पिल फीता। छूने पर चिकना लगता है।
- अल्वा (sea lettuce): पत्ती जैसी पतली चपटी चादर।
इनका भोजन स्टार्च के रूप में जमा होता है, जैसे ज़मीन के पौधों में।
भूरे और लाल शैवाल
भूरे शैवाल ठंडे समुद्र में रहते हैं। इनमें भूरा वर्णक (फ्यूकोज़ैंथिन) होता है जो हरे रंग को ढक देता है। केल्प और सारगासम इनके उदाहरण हैं। कुछ में हवा की छोटी थैलियाँ होती हैं जो इन्हें रोशनी की ओर तैराए रखती हैं। इनका भोजन लैमिनेरिन या मैनिटॉल के रूप में जमा होता है।
लाल शैवाल ज़्यादातर गर्म समुद्र में, गहराई तक रहते हैं। लाल वर्णक (फाइकोएरिथ्रिन) गहरे पानी में पहुँचने वाली कमज़ोर नीली रोशनी पकड़ने में मदद करता है। उदाहरण: ग्रैसिलेरिया और पोरफायरा। अगार लाल शैवाल से मिलता है।
शैवाल कैसे बढ़ते हैं (जनन)
शैवाल तीन तरीकों से बढ़ते हैं।
- खंडन (fragmentation): तंतु टुकड़ों में टूटता है। हर टुकड़ा बढ़कर पूरा नया शैवाल बनता है। स्पाइरोगाइरा में यह खूब होता है।
- बीजाणु (spores): छोटी कोशिकाएँ (अक्सर पूँछ वाली) माँ से अलग होकर तैरती हैं और नया शैवाल बनाती हैं।
- लैंगिक जनन: दो कोशिकाएँ मिलती हैं। स्पाइरोगाइरा में दो तंतु पास-पास आते हैं और एक कोशिका की सामग्री दूसरे तंतु की कोशिका में चली जाती है। इसे संयुग्मन (conjugation) कहते हैं। इससे मोटी दीवार वाला युग्मनज (zygote) बनता है जो सूखे समय में बचा रहता है।
शैवाल का महत्व
शैवाल बहुत काम के हैं।
- ये दुनिया की बहुत सारी ऑक्सीजन बनाते हैं।
- पानी में खाद्य शृंखला की पहली कड़ी ये ही हैं। छोटे जीव इन्हें खाते हैं और मछलियाँ उन्हें।
- लोग कुछ शैवाल खाते हैं (नोरी, केल्प) और इनसे अगार और एल्जिन (आइसक्रीम गाढ़ी करने वाला) बनाते हैं।
- कुछ खाद और ईंधन की खोज में काम आते हैं।
पर बहुत ज़्यादा शैवाल (शैवाल प्रस्फुटन, algal bloom) मरकर सड़ें तो तालाब की ऑक्सीजन खत्म कर देते हैं और मछलियाँ मर जाती हैं।
Try it (खुद करके देखो)
एक पारदर्शी ढक्कन वाले जार में थोड़ा तालाब का पानी रखो। उसे एक हफ़्ते तेज़ रोशनी वाली खिड़की के पास रखो। पानी हरा होते देखो। दूसरा जार अँधेरी अलमारी में रखो। पहले अनुमान लगाओ: कौन-सा जार हरा होगा? फिर जाँचो। तुम देखोगे कि शैवाल को बढ़ने के लिए रोशनी चाहिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शैवाल = प्रकाश-संश्लेषण से खाना बनाते हैं, असली जड़-तना-पत्ती नहीं (शरीर = थैलस)
- हरा: क्लोरोफिल, स्टार्च जमा, ज़्यादातर मीठा पानी (स्पाइरोगाइरा, अल्वा)
- भूरा: फ्यूकोज़ैंथिन, ठंडे समुद्र (केल्प, सारगासम)
- लाल: फाइकोएरिथ्रिन, गर्म और गहरे समुद्र (ग्रैसिलेरिया, पोरफायरा); अगार देता है
- जनन: खंडन, बीजाणु, संयुग्मन (लैंगिक)
हल किए गए उदाहरण
1. गर्मी में तालाब हरा हो जाता है। क्यों?
गर्म पानी और तेज़ धूप में शैवाल तेज़ी से बढ़ते हैं। बहुत सारे शैवाल साथ तैरें तो पानी हरा दिखता है।
2. स्पाइरोगाइरा को ब्लेड से 4 टुकड़ों में काटा गया। कुछ दिन बाद क्या होगा?
हर टुकड़ा बढ़कर नया तंतु बन सकता है। यह खंडन है। इसलिए 4 नए तंतु मिल सकते हैं।
3. गर्म समुद्र की गहराई में कौन-सा शैवाल मिलेगा और कौन-सा वर्णक मदद करता है?
लाल शैवाल। इसका वर्णक फाइकोएरिथ्रिन गहरे पानी तक पहुँचने वाली नीली रोशनी पकड़ता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि शैवाल में जड़ और पत्ती होती है। इनका सरल शरीर थैलस कहलाता है।
- यह सोचना कि भूरे शैवाल में क्लोरोफिल नहीं होता। होता है, पर फ्यूकोज़ैंथिन उसे ढक देता है।
- यह सोचना कि सारे शैवाल समुद्र में रहते हैं। कई हरे शैवाल मीठे पानी में रहते हैं।
- यह सोचना कि शैवाल हमेशा अच्छे हैं। शैवाल प्रस्फुटन ऑक्सीजन खत्म करके मछलियाँ मार सकता है।