जैव प्रक्रम क्या हैं?
शरीर देखने में शांत लगे, तब भी अंदर मरम्मत और रख-रखाव चलता रहता है। कोशिकाएँ टूटती-बनती हैं, अणु इधर-उधर जाते हैं। इसके लिए ऊर्जा चाहिए, और ऊर्जा भोजन से आती है।
जीवन बनाए रखने वाले मूल कामों को जैव प्रक्रम कहते हैं:
- पोषण: बाहर से भोजन (ऊर्जा और कच्चा माल) लेना।
- श्वसन: कोशिका में भोजन तोड़कर ऊर्जा निकालना।
- परिवहन: भोजन, ऑक्सीजन और पानी हर कोशिका तक पहुँचाना।
- उत्सर्जन: शरीर में बने हानिकारक अपशिष्ट बाहर निकालना।
एककोशिकीय जीव यह सब अपनी सतह से कर लेता है। बड़े बहुकोशिकीय शरीर की ज़्यादातर कोशिकाएँ बाहर से दूर होती हैं, इसलिए हर काम के लिए ख़ास अंग चाहिए।
पोषण के प्रकार: स्वपोषी और विषमपोषी
स्वपोषी (autotroph) जीव सरल अकार्बनिक पदार्थों, कार्बन डाइऑक्साइड और पानी, से अपना भोजन ख़ुद बनाते हैं, जैसे हरे पौधे और कुछ जीवाणु। विषमपोषी (heterotroph) ऐसा नहीं कर पाते; वे दूसरों का बनाया भोजन खाते हैं, जैसे जंतु और कवक।
हर आहार शृंखला की नींव स्वपोषी ही हैं, इसलिए पूरा जीवन उन पर टिका है।
प्रकाश संश्लेषण: पौधे भोजन कैसे बनाते हैं
प्रकाश संश्लेषण वह प्रक्रम है जिसमें हरे पौधे सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से कार्बन डाइऑक्साइड और जल को ग्लूकोज में बदलते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
6CO₂ + 6H₂O → (सूर्य प्रकाश, क्लोरोफिल) → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
प्रकाश संश्लेषण की तीन घटनाएँ
- क्लोरोफिल द्वारा प्रकाश ऊर्जा का अवशोषण।
- प्रकाश ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में बदलना और जल का हाइड्रोजन व ऑक्सीजन में टूटना।
- कार्बन डाइऑक्साइड का कार्बोहाइड्रेट में अपचयन।
ये तीनों तुरंत एक के बाद एक हों, ज़रूरी नहीं। रेगिस्तानी पौधे रात में (ठंडक में) रंध्र खोलकर CO₂ लेते और जमा करते हैं, और दिन में धूप मिलने पर उसका उपयोग करते हैं।
कहाँ होता है
ज़्यादातर पत्ती की उन कोशिकाओं में जिनमें हरितलवक भरे होते हैं। तुरंत काम न आने वाला ग्लूकोज मंड (स्टार्च) बनकर जमा होता है।
रंध्र और कच्चा माल
रंध्र पत्ती की सतह (ज़्यादातर निचली सतह) पर बहुत छोटे छिद्र हैं। हर रंध्र के दोनों ओर सेम के आकार की द्वार कोशिकाएँ होती हैं। इनमें पानी भरता है तो ये फूलती हैं और छिद्र खुलता है; पानी निकलने पर सिकुड़ती हैं और छिद्र बंद होता है। रंध्र से CO₂ अंदर और O₂ बाहर जाती है, साथ में जलवाष्प भी निकलती है, इसलिए पानी की कमी में पौधा इन्हें बंद कर लेता है।
- CO₂: हवा से, रंध्रों द्वारा।
- जल: मिट्टी से, जड़ और जाइलम द्वारा।
- खनिज (नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, लोहा): मिट्टी से। नाइट्रोजन नाइट्रेट/नाइट्राइट के रूप में लेकर प्रोटीन बनाते हैं; मैग्नीशियम क्लोरोफिल का हिस्सा है।
प्रयोग और बोर्ड परीक्षा
मंड परीक्षण: गमले के पौधे को 3 दिन अंधेरे में रखें (ताकि मंड ख़त्म हो जाए), फिर धूप में। पत्ती को ऐल्कोहॉल में (पानी के बर्तन में रखकर) उबालें ताकि हरा रंग निकल जाए, फिर आयोडीन डालें। जिन भागों को धूप और क्लोरोफिल दोनों मिले, वे नीले-काले हो जाते हैं।
क्या क्लोरोफिल ज़रूरी है? चितकबरी (हरी-सफ़ेद) पत्ती लें। केवल हरा भाग नीला-काला होता है।
क्या CO₂ ज़रूरी है? पौधे को पोटैशियम हाइड्रॉक्साइड (जो CO₂ सोखता है) के साथ बंद जार में रखें। उसकी पत्ती में मंड नहीं मिलता।
परीक्षा टिप: समीकरण, तीन घटनाएँ, रंध्र का खुलना-बंद होना और मंड-रहित करने वाला प्रयोग लगभग हर साल 2–3 अंक के लिए पूछे जाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 6CO₂ + 6H₂O → (सूर्य प्रकाश, क्लोरोफिल) → C₆H₁₂O₆ + 6O₂
- जैव प्रक्रम = पोषण + श्वसन + परिवहन + उत्सर्जन
- स्वपोषी: अपना भोजन ख़ुद बनाते हैं; विषमपोषी: दूसरों पर निर्भर
- क्लोरोफिल: हरितलवक का हरा वर्णक जो प्रकाश सोखता है
- रंध्र: गैसों के आदान-प्रदान का छिद्र, द्वार कोशिकाएँ खोलती-बंद करती हैं
- मंड (स्टार्च): ग्लूकोज का संचित रूप; आयोडीन से नीला-काला
हल किए गए उदाहरण
1. प्रकाश संश्लेषण का कच्चा माल और उत्पाद बताइए।
कच्चा माल: कार्बन डाइऑक्साइड (हवा से) और जल (मिट्टी से)। ज़रूरी शर्तें: सूर्य प्रकाश और क्लोरोफिल। उत्पाद: ग्लूकोज (मंड के रूप में जमा) और ऑक्सीजन (बाहर)।
2. मंड परीक्षण से पहले पौधे को 2–3 दिन अंधेरे में क्यों रखते हैं?
अंधेरे में पौधा भोजन नहीं बना पाता और पत्तियों का पुराना मंड इस्तेमाल कर लेता है। अब प्रयोग के बाद मंड मिले तो पक्का है कि वह प्रयोग के दौरान ही बना।
3. धूप में रखी चितकबरी क्रोटन पत्ती पर आयोडीन डालने पर क्या दिखेगा और इससे क्या सिद्ध होता है?
केवल हरे भाग नीले-काले होते हैं, सफ़ेद भाग भूरे रहते हैं। मंड वहीं बना जहाँ क्लोरोफिल था, इसलिए प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल ज़रूरी है।
4. गर्म दोपहर में द्वार कोशिकाएँ रंध्र क्यों बंद कर देती हैं?
गर्मी में रंध्रों से बहुत पानी भाप बनकर उड़ता है। पानी घटने पर द्वार कोशिकाएँ ढीली पड़कर छिद्र बंद कर देती हैं। इससे पानी बचता है, पर CO₂ कम आने से प्रकाश संश्लेषण धीमा हो जाता है।
5. स्वपोषियों को पृथ्वी के सारे जीवन की नींव क्यों कहते हैं?
केवल वही प्रकाश ऊर्जा को भोजन की ऊर्जा में बदलते हैं। शाकाहारी पौधे खाते हैं, मांसाहारी शाकाहारियों को, और अपघटक सबके मृत शरीर को। स्वपोषी न हों तो शृंखला में ऊर्जा आएगी ही नहीं।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि पौधे श्वसन की जगह प्रकाश संश्लेषण करते हैं। पौधे दोनों करते हैं: हरे भागों में धूप में प्रकाश संश्लेषण, और हर कोशिका में हर समय श्वसन।
- यह मानना कि निकलने वाली ऑक्सीजन CO₂ से आती है। वह पानी के टूटने से आती है।
- यह लिखना कि रंध्र ऊपरी सतह पर होते हैं। ज़्यादातर पत्तियों में वे मुख्यतः निचली सतह पर होते हैं।
- आयोडीन डालने से पहले पत्ती को ऐल्कोहॉल में उबालकर रंगहीन करना भूल जाना; हरा रंग परिणाम छिपा देता है।