National Year 10 Biology
अध्याय: 4
1. 4.1 Cell biology
4.1.1 Cell structure · 4.1.2 Cell division · 4.1.3 Transport in cells
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
- कोशिका विभाजन: एक कोशिका से दो (या चार) कैसे बनती हैं – हर जीव इसलिए बढ़ता है क्योंकि उसकी कोशिकाएँ बँटती हैं। हर कोशिका किसी दूसरी कोशिका से ही बनती है (कोशिका सिद्धांत)। बँटने से पहले कोशिका अपने गुणसूत्रों की कॉपी बनाती है। समसूत्री विभाजन (माइटोसिस) से 2 एक जैसी कोशिकाएँ बनती हैं, गुणसूत्र उतने ही रहते हैं; यह वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस) दो बार बँटकर 4 कोशिकाएँ बनाता है, हर एक में आधे गुणसूत्र; इससे युग्मक बनते हैं।
- झिल्ली परिवहन: कोशिका में चीज़ें अंदर-बाहर कैसे जाती हैं – कोशिका झिल्ली वसा जैसे अणुओं की पतली दोहरी परत है जिसमें प्रोटीन लगे होते हैं. यह कुछ पदार्थों को जाने देती है और कुछ को रोकती है (चयनात्मक पारगम्य). विसरण में कण ज़्यादा सांद्रता से कम सांद्रता की ओर बिना ऊर्जा जाते हैं. सुसाध्य विसरण यही काम प्रोटीन चैनल से करता है. परासरण आंशिक पारगम्य झिल्ली से पानी का विसरण है. सक्रिय परिवहन ATP और प्रोटीन पंप से कणों को कम से ज़्यादा सांद्रता की ओर ले जाता है. बहुत बड़ी चीज़ें बुलबुलों में आती-जाती हैं (एंडोसाइटोसिस, एक्सोसाइटोसिस).
2. 4.2 Organisation
4.2.1 Principles of organisation · 4.2.2 Animal tissues, organs and organ systems · 4.2.3 Plant tissues, organs and systems
- ऊतक: पादप और जंतु ऊतक – ऊतक एक जैसी कोशिकाओं का समूह है जो मिलकर एक काम करता है। कोशिकाएँ ऊतक बनाती हैं, ऊतक अंग, अंग अंग तंत्र और तंत्र मिलकर जीव। पौधों में बँटने वाला विभज्योतक और न बँटने वाला स्थायी ऊतक होता है, जिसमें जाइलम (पानी ऊपर) और फ्लोएम (भोजन दोनों ओर) शामिल हैं। जंतुओं में उपकला, संयोजी, पेशी और तंत्रिका ऊतक होते हैं। हड्डियों, पेशियों और जोड़ों को सही मुद्रा, व्यायाम और कैल्शियम वाला भोजन चाहिए।
- मानव शरीर के अंग तंत्र – हमारा शरीर स्तरों में बना है: कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग, अंग मिलकर अंग तंत्र और सारे तंत्र मिलकर पूरा जीव यानी हम। हर तंत्र का एक मुख्य काम है: कंकाल (ढाँचा), पेशी (गति), परिसंचरण (ढुलाई), श्वसन (गैसों का लेन-देन), पाचन (भोजन), उत्सर्जन (कचरा), तंत्रिका और अंतःस्रावी (नियंत्रण), प्रतिरक्षा (बचाव), त्वचा तंत्र और जनन तंत्र। कोई तंत्र अकेले काम नहीं करता: व्यायाम में पेशियाँ, दिल, फेफड़े और नसें साथ बदलकर शरीर के अंदर का हाल स्थिर रखते हैं (समस्थिति)।
3. 4.3 Infection and response
4.3.1 Communicable diseases · 4.3.2 Monoclonal antibodies (Biology only) (HT) · 4.3.3 Plant disease (Biology only)
- संक्रामक रोग: रोगाणु कैसे फैलते हैं और हम उन्हें कैसे रोकें – संक्रामक (संचारी) रोग एक बहुत छोटे जीव से होता है, जिसे रोगाणु (pathogen) कहते हैं: बैक्टीरिया, वायरस, कवक या प्रोटिस्ट। यह हवा, पानी-खाना, छूने या मच्छर जैसे वाहक से एक व्यक्ति से दूसरे में जाता है। शरीर त्वचा, बलगम, पेट के अम्ल और श्वेत रक्त कोशिकाओं से लड़ता है। टीका प्रतिरक्षा तंत्र को पहले से तैयार कर देता है। हाथ धोना, साफ पानी, अच्छी तरह पका खाना, मच्छरदानी और बीमार होने पर घर रहना फैलाव कम करते हैं।
- मोनोक्लोनल एंटीबॉडी – एंटीबॉडी Y आकार का प्रोटीन है जो सिर्फ़ एक एंटीजन से जुड़ता है। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी एक ही एंटीबॉडी की ढेर सारी एक जैसी प्रतियाँ हैं, जो कोशिकाओं के एक क्लोन से बनती हैं। चूहे को एंटीजन का इंजेक्शन देकर उसकी लिम्फोसाइट ली जाती हैं और तेज़ी से बँटने वाली ट्यूमर कोशिकाओं से जोड़कर हाइब्रिडोमा बनाया जाता है। हाइब्रिडोमा का क्लोन एक जैसी एंटीबॉडी बनाता है। इनका उपयोग प्रेगनेंसी टेस्ट, लैब जाँच, थक्के या कैंसर कोशिका ढूँढने और कैंसर कोशिका तक दवा पहुँचाने में होता है। ये बहुत विशिष्ट हैं, पर दुष्प्रभाव और ऊँची लागत भी है।
- पादप रोग और पौधों का बचाव – पौधे भी बीमार होते हैं। रोग के लक्षण: रुकी हुई बढ़त, पत्तियों पर धब्बे, सड़न, गाँठें, टेढ़े-मेढ़े तने या पत्तियाँ, रंग बदलना और दिखने वाले कीट। कारण: रोगाणु (वायरस, जीवाणु, कवक), एफ़िड जैसे कीट, और खनिज आयनों की कमी: नाइट्रेट कम हो तो बढ़त रुकती है, मैग्नीशियम कम हो तो पत्तियाँ पीली (क्लोरोसिस)। रोग की पहचान गाइड या वेबसाइट, लैब जाँच या एंटीबॉडी वाली टेस्ट किट से होती है। पौधे भौतिक (मोमी परत, सेलुलोज़ भित्ति, छाल), रासायनिक (जीवाणुरोधी रसायन, ज़हर) और यांत्रिक (काँटे, रोएँ, पत्ते मुड़ना, नक़ल) तरीक़ों से बचाव करते हैं।
4. 4.4 Bioenergetics
4.4.1 Photosynthesis · 4.4.2 Respiration
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- श्वसन: वायवीय, अवायवीय और मानव फेफड़े – श्वसन वह प्रक्रम है जिसमें कोशिका के अंदर भोजन (ज़्यादातर ग्लूकोज) टूटकर ऊर्जा देता है, जो ATP में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) ग्लूकोज पूरा टूटकर CO₂ और जल बनता है और बहुत ऊर्जा मिलती है; ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय) थोड़ी ऊर्जा मिलती है और एथेनॉल (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशी) बनता है। फेफड़ों की लाखों कूपिकाएँ रक्त तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।