संक्रामक रोग क्या है?
संक्रामक रोग एक रोगाणु (pathogen) से होता है। रोगाणु एक बहुत छोटा जीव या कण है जो शरीर को नुकसान पहुँचाता है। ये रोग एक व्यक्ति से दूसरे में जाते हैं, इसलिए इन्हें संचारी रोग भी कहते हैं।
असंचारी रोग एक से दूसरे में नहीं फैलता, जैसे मधुमेह, ज़्यादातर हृदय रोग और कैंसर। ये जीन, उम्र और जीवनशैली से होते हैं।
रोगाणुओं के चार मुख्य प्रकार
- बैक्टीरिया: एक कोशिका वाले, बहुत तेज़ी से बढ़ते हैं, कुछ ज़हर (टॉक्सिन) बनाते हैं। उदाहरण: हैजा, टाइफाइड, टीबी। कई का इलाज एंटीबायोटिक से होता है।
- वायरस: बैक्टीरिया से भी बहुत छोटे। ये सिर्फ़ हमारी कोशिकाओं के अंदर अपनी नकल बनाते हैं। उदाहरण: फ्लू, खसरा, सर्दी-ज़ुकाम, HIV। एंटीबायोटिक वायरस को नहीं मारते।
- कवक (fungi): दाद, पैरों में फंगल संक्रमण।
- प्रोटिस्ट: केंद्रक वाली एक कोशिका। उदाहरण: मलेरिया, जो मच्छर फैलाता है।
कुछ कृमि (जैसे गोलकृमि) भी रोग करते हैं।
रोगाणु कैसे फैलते हैं
- हवा: खाँसी-छींक की छोटी बूँदें (फ्लू, टीबी, खसरा)।
- पानी और खाना: गंदा पानी या कच्चा-अधपका खाना (हैजा, टाइफाइड)।
- सीधा संपर्क: छूना, खून या शरीर के द्रव, साझा चीज़ें (दाद, खून से HIV)।
- वाहक (vector): जो जीव रोगाणु को एक से दूसरे तक ले जाए। मच्छर मलेरिया और डेंगू फैलाते हैं। गर्म मौसम से मच्छर नई जगहों पर पनपते हैं, इसलिए ये रोग और दूर तक फैल सकते हैं।
शरीर अपनी रक्षा कैसे करता है
पहली पंक्ति: त्वचा मज़बूत दीवार है। नाक के बाल और चिपचिपा बलगम रोगाणु पकड़ते हैं। पेट का अम्ल खाने के रोगाणु मारता है। आँसू बैक्टीरिया मारते हैं। त्वचा और आँत के अच्छे बैक्टीरिया बुरे बैक्टीरिया को जगह नहीं देते, इसलिए हमारा शरीर एक छोटे पारितंत्र जैसा है।
दूसरी पंक्ति: श्वेत रक्त कोशिकाएँ। कुछ रोगाणु निगल लेती हैं। कुछ एंटीबॉडी बनाती हैं जो एक खास रोगाणु से चिपकती हैं, और एंटीटॉक्सिन जो ज़हर को रोकते हैं। बीमारी के बाद स्मृति कोशिकाएँ रोगाणु को याद रखती हैं। इसे प्रतिरक्षा (immunity) कहते हैं।
टीका, दवा और बचाव
टीके (vaccine) में रोगाणु का मरा, कमज़ोर या हानिरहित हिस्सा होता है। शरीर बिना बीमार हुए एंटीबॉडी और स्मृति कोशिकाएँ बना लेता है। असली रोगाणु आए तो तुरंत मारा जाता है।
जब ज़्यादातर लोगों को टीका लगा हो, तो रोगाणु को नया व्यक्ति नहीं मिलता। इससे उन्हें भी सुरक्षा मिलती है जो टीका नहीं ले सकते। इसे सामूहिक प्रतिरक्षा (herd immunity) कहते हैं।
दवा: एंटीबायोटिक सिर्फ़ बैक्टीरिया मारते हैं। पूरा कोर्स करो; गलत इस्तेमाल से बैक्टीरिया प्रतिरोधी (resistant) हो जाते हैं।
आसान बचाव: साबुन से हाथ धोओ, साफ पानी पियो, खाना अच्छी तरह पकाओ, खाँसते समय मुँह ढको, बीमार हो तो घर रहो, मच्छरदानी लगाओ, जमा पानी हटाओ। यात्रा से पहले उस जगह के लिए ज़रूरी टीके और सावधानियाँ पता करो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- रोगाणु (pathogen): रोग पैदा करने वाला सूक्ष्मजीव
- संचारी = एक से दूसरे में फैलने वाला
- वाहक (vector): रोगाणु ढोने वाला जीव, जैसे मच्छर
- एंटीबॉडी: श्वेत कोशिकाओं का प्रोटीन जो एक रोगाणु से चिपकता है
- टीका: प्रतिरक्षा सिखाने वाला हानिरहित रोगाणु
- सामूहिक प्रतिरक्षा: इतने लोग सुरक्षित कि रोग न फैले
- एंटीबायोटिक: बैक्टीरिया मारने वाली दवा, वायरस नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. राहुल को वायरस से सर्दी हुई है। दोस्त कहता है, "एंटीबायोटिक ले लो।" क्या यह सही है?
नहीं। सर्दी वायरस से होती है और एंटीबायोटिक सिर्फ़ बैक्टीरिया मारते हैं। आराम, पानी और समय मदद करते हैं; दवा डॉक्टर तय करें।
2. बारिश के बाद एक गाँव में मलेरिया बढ़ गया। फैलाव कम करने के दो उपाय बताओ।
मलेरिया मच्छर (वाहक) से फैलता है। 1) जमा पानी हटाओ जहाँ मच्छर पनपते हैं। 2) मच्छरदानी और क्रीम इस्तेमाल करो। वाहक रुका तो रोग रुका।
3. 20 बच्चों की कक्षा में 16 को खसरे का टीका लगा है। एक बच्चा खसरा लेकर आता है। कम बच्चे बीमार क्यों होते हैं?
रोगाणु को आगे बढ़ने के लिए बिना सुरक्षा वाला व्यक्ति चाहिए। 20 में से 16 सुरक्षित हैं, तो ज़्यादातर रास्ते बंद हैं और शृंखला जल्दी टूटती है। यह सामूहिक प्रतिरक्षा है, जो बाकी 4 को भी बचाती है।
4. वर्गीकरण करो: हैजा, फ्लू, दाद, मलेरिया, मधुमेह।
हैजा: बैक्टीरिया (पानी)। फ्लू: वायरस (हवा)। दाद: कवक (संपर्क)। मलेरिया: प्रोटिस्ट (मच्छर)। मधुमेह: असंचारी, कोई रोगाणु नहीं।
आम गलतियाँ
- सोचना कि एंटीबायोटिक सर्दी-फ्लू जैसे वायरस रोग ठीक करते हैं। ये सिर्फ़ बैक्टीरिया पर काम करते हैं।
- मानना कि सभी सूक्ष्मजीव हानिकारक हैं। ज़्यादातर बैक्टीरिया हानिरहित या उपयोगी हैं (आँत में, दही में)।
- टीके को बीमार व्यक्ति की दवा समझना। टीका संक्रमण से पहले प्रतिरक्षा सिखाता है।
- मच्छर को मलेरिया का कारण कहना। कारण प्रोटिस्ट है; मच्छर सिर्फ़ वाहक है।