स्वास्थ्य क्या है?
स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ़ 'रोग न होना' नहीं है। इसका मतलब है शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों ठीक हों।
तीन चीज़ें हमें स्वस्थ रखती हैं: अच्छे जीन, साफ़ वातावरण और अच्छी आदतें (संतुलित भोजन, व्यायाम, नींद, साफ़ हाथ)।
जब कोई अंग या तंत्र ठीक से काम न करे, वह रोग है। संक्रामक रोग एक से दूसरे में फैलता है (जैसे ज़ुकाम)। असंक्रामक रोग नहीं फैलता (जैसे कैंसर)।
रोगजनक और सामान्य रोग
रोगजनक कोई भी जीव है जो रोग करे: जीवाणु, वायरस, कवक, प्रोटोज़ोआ (एककोशिकीय जंतु) या कृमि।
| रोग | रोगजनक | कैसे फैलता है | मुख्य लक्षण |
|---|---|---|---|
| टाइफ़ॉइड (मोतीझरा) | साल्मोनेला टाइफ़ी (जीवाणु) | गंदा भोजन और पानी | लंबा तेज़ बुखार, पेट दर्द, कमज़ोरी; आँत में छेद हो सकता है। विडाल जाँच से पुष्टि। |
| निमोनिया | स्ट्रेप्टोकोकस न्यूमोनी, हीमोफ़िलस इन्फ़्लुएंज़ी (जीवाणु) | खाँसी-छींक की बूँदें, साझा गिलास | वायु-कूपिकाओं में द्रव; बुखार, खाँसी, साँस में कठिनाई; होंठ और नाखून नीले पड़ सकते हैं |
| सामान्य ज़ुकाम | राइनो वायरस | बूँदें, चीज़ें छूना | बंद नाक, गले में खराश; फेफड़े प्रभावित नहीं; 3–7 दिन |
| मलेरिया | प्लाज़्मोडियम (प्रोटोज़ोआ): P. वाइवैक्स, P. मलेरी, P. फ़ैल्सीपेरम (सबसे ख़तरनाक) | मादा एनॉफ़िलीज़ मच्छर का काटना | ठंड लगकर तेज़ बुखार, हर 3–4 दिन में लौटता है |
| अमीबता | एंटअमीबा हिस्टोलिटिका | मक्खियाँ भोजन तक ले जाती हैं | पेट दर्द, मल में श्लेष्मा और रक्त |
| ऐस्कैरिसता | ऐस्कैरिस (गोलकृमि) | मिट्टी, पानी, बिना धुली सब्ज़ी में अंडे | पेट दर्द, रक्ताल्पता; आँत में रुकावट |
| फ़ाइलेरिएसिस (फीलपाँव) | वुचेरेरिया (कृमि) | मादा क्यूलेक्स मच्छर का काटना | लसीका वाहिनियाँ सूजती हैं, पैर बहुत मोटे |
| दाद (रिंगवर्म) | कवक: माइक्रोस्पोरम, ट्राइकोफ़ाइटॉन, एपिडर्मोफ़ाइटॉन | तौलिया, कंघी, नम पसीने वाली त्वचा | त्वचा, नाखून, सिर पर सूखे, खुजली वाले गोल चकत्ते |
| डेंगू और चिकनगुनिया | वायरस | एडीज़ मच्छर (दिन में काटता है) | बुखार, तेज़ जोड़ों का दर्द, चकत्ते; डेंगू में प्लेटलेट घटते हैं |
प्लाज़्मोडियम (मलेरिया परजीवी) का जीवन चक्र
- संक्रमित मादा एनॉफ़िलीज़ काटती है। छोटे रूप स्पोरोज़ॉइट हमारे रक्त में आते हैं।
- ये यकृत (लिवर) में पहुँचकर बढ़ते हैं।
- फिर लाल रक्त कोशिकाओं में घुसकर बढ़ते हैं। लाल कोशिकाएँ फटती हैं और हीमोज़ोइन नाम का विष निकलता है। इसी से हर 3–4 दिन ठंड और तेज़ बुखार आता है।
- कुछ रूप रक्त में युग्मकजनक (गैमीटोसाइट) बनते हैं।
- नया मच्छर यह रक्त चूसता है। उसकी आँत में नर और मादा युग्मक मिलते हैं। नए स्पोरोज़ॉइट बनकर उसकी लार ग्रंथियों में जाते हैं। अब यह मच्छर अगले व्यक्ति को संक्रमित कर सकता है।
यानी प्लाज़्मोडियम को दो पोषक चाहिए: मनुष्य (अलैंगिक गुणन) और मच्छर (लैंगिक अवस्था)।
इन रोगों को कैसे रोकें?
- व्यक्तिगत स्वच्छता: साफ़ शरीर, हाथ धोना, उबला या छना पानी, साफ़ भोजन।
- सार्वजनिक स्वच्छता: कचरे और मल का सही निपटान, पानी की टंकी और शौचालय साफ़।
- हवा से फैलाव रोकें: खाँसते समय मुँह ढकें, बीमार से दूरी, गिलास साझा न करें।
- रोगवाहक (मच्छर, मक्खी) रोकें: घर के पास रुका पानी नहीं, कूलर हर हफ़्ते खाली, मच्छरदानी और जाली, तालाबों में गैम्बूसिया मछली (मच्छर के लार्वा खाती है)।
- टीके और दवाएँ: पोलियो, डिप्थीरिया, टिटनेस, चेचक (स्मॉलपॉक्स), निमोनिया जैसे रोग टीकों से काबू में हैं; जीवाणु रोगों में प्रतिजैविक काम आते हैं।
प्रतिरक्षा: सहज और उपार्जित
प्रतिरक्षा शरीर की कीटाणुओं से लड़ने की शक्ति है। यह दो तरह की है।
सहज प्रतिरक्षा (जन्म से)
यह हर कीटाणु पर एक जैसे काम करती है। इसमें याददाश्त नहीं होती। इसके चार रोधक हैं:
- भौतिक: त्वचा; नाक, फेफड़े, आँत की श्लेष्मा जो कीटाणु फँसाती है।
- कार्यिकीय: पेट का अम्ल, लार, आँसू।
- कोशिकीय: न्यूट्रोफ़िल, मोनोसाइट, प्राकृतिक मारक (NK) कोशिकाएँ और ऊतकों में महाभक्षकाणु (मैक्रोफ़ेज) कीटाणु खाते या मारते हैं।
- साइटोकाइन: वायरस-संक्रमित कोशिकाएँ इंटरफ़ेरॉन छोड़ती हैं, जो पास की कोशिकाओं को बचाते हैं।
उपार्जित प्रतिरक्षा (सीखी हुई)
यह हर कीटाणु को अलग पहचानती है और याद रखती है। पहली मुलाकात में धीमी, कमज़ोर प्राथमिक अनुक्रिया; उसी कीटाणु से दोबारा मिलने पर तेज़, तीव्र द्वितीयक (एनेमनेस्टिक) अनुक्रिया।
B लसीकाणु रक्त में प्रतिरक्षी छोड़ते हैं (तरल / ह्यूमोरल प्रतिरक्षा)। T लसीकाणु B कोशिकाओं की मदद करते हैं और संक्रमित कोशिकाओं को खुद मारते हैं (कोशिका-माध्यित प्रतिरक्षा)। इसी कारण प्रत्यारोपित अंग अस्वीकार हो सकता है, इसलिए दाता का मिलान ज़रूरी है।
प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) की संरचना
प्रतिरक्षी एक Y आकार का प्रोटीन है। इसमें चार शृंखलाएँ हैं: दो लंबी भारी शृंखलाएँ और दो छोटी हल्की शृंखलाएँ। इसे H2L2 लिखते हैं। Y के दोनों सिरे कीटाणु के चिह्न (प्रतिजन/एंटीजन) को पकड़ते हैं। प्रकार: IgA, IgM, IgE, IgG (और IgD)।
सक्रिय और निष्क्रिय प्रतिरक्षा; टीकाकरण
- सक्रिय प्रतिरक्षा: हमारा शरीर खुद प्रतिरक्षी बनाता है (संक्रमण या टीके के बाद)। शुरू होने में समय लगता है, पर लंबे समय तक रहती है।
- निष्क्रिय प्रतिरक्षा: तैयार प्रतिरक्षी दी जाती है। उदाहरण: खीस (कोलोस्ट्रम, माँ का पहला पीला दूध) में IgA; अपरा से भ्रूण में प्रतिरक्षी; साँप काटने या टिटनेस में प्रतिविष (एंटीटॉक्सिन) का इंजेक्शन। तुरंत काम करती है, पर कम समय रहती है।
टीकाकरण: कमज़ोर, मृत या निष्क्रिय कीटाणु (या उसका प्रोटीन) शरीर में दिया जाता है। B और T स्मृति कोशिकाएँ बनती हैं। बाद में असली कीटाणु जल्दी नष्ट होता है। पुनर्योगज DNA तकनीक से कुछ टीकों के प्रोटीन यीस्ट या जीवाणु में बनाए जाते हैं, जैसे हेपेटाइटिस B का टीका।
एलर्जी, स्व-प्रतिरक्षा और लसीकाभ अंग
- एलर्जी: शरीर हानिरहित चीज़ों (धूल, परागकण, माइट) पर ज़्यादा प्रतिक्रिया करता है। IgE बनती है। मास्ट कोशिकाएँ हिस्टामिन और सेरोटोनिन छोड़ती हैं: छींक, आँखों से पानी, साँस फूलना। दवा: एंटी-हिस्टामिन, एड्रीनलिन, स्टीरॉयड।
- स्व-प्रतिरक्षा: शरीर अपनी ही कोशिकाओं पर हमला करता है। उदाहरण: आमवाती संधिशोथ (रूमेटॉइड आर्थराइटिस)।
- प्राथमिक लसीकाभ अंग (जहाँ लसीकाणु बनते और परिपक्व होते हैं): अस्थि मज्जा और थाइमस।
- द्वितीयक लसीकाभ अंग (जहाँ लसीकाणु कीटाणुओं से मिलते हैं): प्लीहा, लसीका ग्रंथियाँ, टॉन्सिल, छोटी आँत के पेयर पैच, परिशेषिका (अपेंडिक्स) और MALT (श्लेष्मा से जुड़ा लसीकाभ ऊतक, शरीर के लगभग आधे लसीकाभ ऊतक)।
एड्स और HIV
एड्स = उपार्जित प्रतिरक्षा न्यूनता संलक्षण (Acquired Immuno Deficiency Syndrome)। 'उपार्जित' यानी जन्म से नहीं होता। इसका कारण HIV है, एक रेट्रोवायरस (इसके जीन RNA में हैं)।
कैसे फैलता है: संक्रमित व्यक्ति से असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त, साझा सुई (नशा करने वालों में), और संक्रमित माँ से शिशु। यह छूने, गले मिलने, साथ खाने या मच्छर से नहीं फैलता।
कैसे काम करता है:
- HIV महाभक्षकाणु में घुसता है। रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ एंज़ाइम उसके RNA से DNA बनाता है। यह DNA कोशिका के DNA में जुड़ जाता है। महाभक्षकाणु 'वायरस फ़ैक्टरी' बन जाता है।
- फिर HIV सहायक T कोशिकाओं (TH) में घुसकर प्रतियाँ बनाता और उन्हें मारता है।
- कई सालों में TH संख्या धीरे-धीरे घटती है। बुखार, दस्त, वज़न कम होना हो सकता है।
- जब बहुत कम TH बचें, कमज़ोर कीटाणु (माइकोबैक्टीरियम, टॉक्सोप्लाज़्मा, कवक) भी गंभीर रोग करते हैं।
जाँच: ELISA। इलाज: प्रति-रेट्रोवायरस दवाएँ इसे धीमा करती हैं, ठीक नहीं करतीं। बचाव: सुरक्षित रक्त, एक बार प्रयोग वाली सुई, कंडोम, जागरूकता। भारत में NACO (राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन) इस पर काम करता है। HIV वाले लोगों को डर नहीं, देखभाल और सम्मान चाहिए।
कैंसर
सामान्य कोशिकाएँ नियंत्रित ढंग से बँटती हैं। दूसरी कोशिकाओं को छूते ही बँटना रोक देती हैं। इसे संपर्क संदमन कहते हैं। कैंसर कोशिकाओं में यह गुण खो जाता है। वे बँटती जाती हैं और गाँठ बनाती हैं जिसे अर्बुद (ट्यूमर) कहते हैं।
- सुदम (बिनाइन) अर्बुद: एक जगह रहता है, कम नुकसान।
- दुर्दम (मैलिग्नेंट) अर्बुद: तेज़ी से बढ़ता है, आसपास के ऊतक में घुसता है, और कुछ कोशिकाएँ रक्त से दूर जाकर नए अर्बुद बनाती हैं। इसे मेटास्टेसिस कहते हैं।
कारण (कैंसरजन): X-किरणें और गामा किरणें (आयनकारी विकिरण), UV किरणें (अनायनकारी), तंबाकू के धुएँ के रसायन, और कुछ वायरस (ऑन्कोजेनिक वायरस)। कोशिकाओं में आद्य-ऑन्कोजीन (कोशिकीय ऑन्कोजीन) होते हैं; गलत ढंग से सक्रिय होने पर कैंसर शुरू हो सकता है।
पहचान: बायोप्सी (ऊतक का पतला टुकड़ा सूक्ष्मदर्शी से), रक्त और अस्थि मज्जा जाँच (ल्यूकेमिया के लिए), X-रे, CT स्कैन, MRI, और कैंसर चिह्नों के विरुद्ध प्रतिरक्षी।
इलाज: शल्य क्रिया, विकिरण चिकित्सा, रसायन चिकित्सा (तेज़ी से बँटती कोशिकाओं को मारने वाली दवाएँ), और प्रतिरक्षा चिकित्सा – जैसे α-इंटरफ़ेरॉन प्रतिरक्षा तंत्र को अर्बुद नष्ट करने में मदद करता है।
किशोरावस्था में नशा और शराब का दुरुपयोग
किशोरावस्था लगभग 12 से 18 वर्ष है: शरीर और मन तेज़ी से बदलते हैं। जिज्ञासा, दोस्तों का दबाव, परीक्षा का तनाव और 'बड़ा दिखने' की चाह कुछ किशोरों को तंबाकू, शराब या नशे की ओर ले जाती है।
| समूह | स्रोत | असर |
|---|---|---|
| ओपिऑइड (हेरोइन/स्मैक) | पोस्त के पौधे पैपेवर सोम्नीफ़ेरम के मॉर्फ़ीन से | शरीर को सुस्त करते हैं (अवसादक); मस्तिष्क और आँत के ओपिऑइड ग्राही से जुड़ते हैं |
| कैनाबिनॉइड (मारिजुआना, हशीश, चरस, गाँजा) | कैनाबिस सैटाइवा | हृदय और रक्त वाहिकाओं पर असर |
| कोकेन (कोक, क्रैक) | कोका पौधा एरिथ्रोज़ाइलम कोका | डोपामिन का हटना रोकता है: झूठी खुशी और ऊर्जा; ज़्यादा मात्रा में भ्रम (मतिभ्रम) |
| विभ्रमजनक | एट्रोपा बेलाडोना, धतूरा | जो नहीं है वह दिखना या सुनना |
| तंबाकू | निकोटिन | रक्तचाप और धड़कन बढ़ाता है; धूम्रपान से फेफड़े, गले, मूत्राशय का कैंसर; कार्बन मोनोऑक्साइड रक्त में ऑक्सीजन घटाती है |
व्यसन (लत) का मतलब शरीर और मन को नशा बार-बार ज़्यादा चाहिए। निर्भरता का मतलब छोड़ने पर दर्दनाक लक्षण (बेचैनी, कंपकंपी, पसीना)। शराब यकृत (सिरोसिस) और तंत्रिकाओं को नुकसान करती है। साझा सुई से HIV और हेपेटाइटिस B फैलते हैं। कुछ खिलाड़ी स्टीरॉयड का दुरुपयोग करते हैं, जो शरीर को नुकसान करते हैं।
चेतावनी के संकेत: अंक गिरना, स्कूल से गायब रहना, शौक में रुचि खत्म, छिपकर व्यवहार, नींद और भूख में बदलाव।
बचाव: 'हमेशा अव्वल' के दबाव से बचें, दोस्तों को 'ना' कहना सीखें, माता-पिता, शिक्षक और भरोसेमंद दोस्तों से बात करें, डॉक्टर और परामर्शदाता से जल्दी मदद लें।
आज़माएँ: मच्छर पनपने की जगहें गिनें
घर और स्कूल में देखें। गिनें कि कहाँ पानी एक हफ़्ते तक रुका रहता है: कूलर की ट्रे, गमले की प्लेट, पुराने टायर, बिना ढक्कन की टंकी। संख्या लिखें। हर जगह खाली करें या ढकें। एक हफ़्ते बाद फिर जाँचें। डेंगू और मलेरिया ऐसे ही रोके जाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रतिरक्षी = H₂L₂ (2 भारी + 2 हल्की शृंखलाएँ, Y आकार)
- सहज प्रतिरक्षा: जन्म से, अविशिष्ट, याद नहीं
- उपार्जित प्रतिरक्षा: विशिष्ट, याद रखती है (प्राथमिक धीमी → द्वितीयक तेज़)
- तरल (B कोशिका, प्रतिरक्षी) बनाम कोशिका-माध्यित (T कोशिका)
- HIV: RNA → DNA (रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़); निशाना = सहायक T कोशिकाएँ
- मलेरिया: प्लाज़्मोडियम + मादा एनॉफ़िलीज़; डेंगू: वायरस + एडीज़; फ़ाइलेरिएसिस: वुचेरेरिया + क्यूलेक्स
हल किए गए उदाहरण
1. एक बच्चा सड़क किनारे का पानी पीता है और उसे लंबा तेज़ बुखार व पेट दर्द होता है। विडाल जाँच पॉज़िटिव है। रोग और कीटाणु बताइए।
टाइफ़ॉइड। कीटाणु जीवाणु साल्मोनेला टाइफ़ी है। यह गंदे पानी और भोजन से फैलता है। विडाल जाँच से पुष्टि होती है।
2. मलेरिया में बुखार हर कुछ दिन बाद बार-बार क्यों आता है, लगातार क्यों नहीं?
प्लाज़्मोडियम लाल रक्त कोशिकाओं में बढ़ता है। जब बहुत सी कोशिकाएँ एक साथ फटती हैं, हीमोज़ोइन विष निकलता है और ठंड-बुखार आता है। अगला चक्र लगभग 3–4 दिन में पूरा होता है, इसलिए बुखार चक्रों में लौटता है।
3. किसी को खसरा एक बार हुआ, फिर कभी नहीं हुआ, भले ही बाद में भाई को हुआ। समझाइए।
पहले संक्रमण से स्मृति B और T कोशिकाएँ बनीं। दोबारा मिलने पर तेज़, तीव्र द्वितीयक अनुक्रिया हुई और वायरस बीमार करने से पहले मारा गया। यह सक्रिय उपार्जित प्रतिरक्षा है।
4. साँप काटे मरीज़ को प्रतिविष का इंजेक्शन दिया गया। यह सक्रिय है या निष्क्रिय? टीका क्यों नहीं दिया?
निष्क्रिय, क्योंकि तैयार प्रतिरक्षी दी गई। विष मिनटों में असर करता है, और शरीर को अपनी प्रतिरक्षी बनाने में दिन लगते। इसलिए तुरंत मदद चाहिए।
5. किसी व्यक्ति की सहायक T कोशिकाएँ आठ साल में लगभग 1000 से घटकर 150 प्रति माइक्रोलीटर रह गईं। कौन-सा रोग संभव है और साधारण संक्रमण अब ख़तरनाक क्यों हैं?
HIV संक्रमण जो एड्स की ओर बढ़ रहा है। सहायक T कोशिकाएँ B कोशिकाओं और मारक T कोशिकाओं को निर्देश देती हैं। इनके बिना प्रतिरक्षा जवाब नहीं दे पाती, इसलिए टॉक्सोप्लाज़्मा या कवक जैसे कमज़ोर कीटाणु भी गंभीर रोग करते हैं।
6. एक गाँठ की सीमा साफ़ है और फैली नहीं। दूसरे व्यक्ति की गाँठ से कोशिकाएँ फेफड़ों तक पहुँच गईं। कौन-सी सुदम और कौन-सी दुर्दम है?
पहली सुदम (एक जगह रहती है)। दूसरी दुर्दम, क्योंकि कोशिकाएँ मेटास्टेसिस से दूसरे अंग तक गईं।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि मच्छर HIV फैलाते हैं। नहीं फैलाते। HIV असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त या सुई, और माँ से शिशु द्वारा फैलता है।
- मच्छरों में गड़बड़ी: एनॉफ़िलीज़ = मलेरिया, एडीज़ = डेंगू और चिकनगुनिया, क्यूलेक्स = फ़ाइलेरिएसिस।
- सोचना कि प्रतिजैविक ज़ुकाम या फ़्लू ठीक करते हैं। ये वायरस रोग हैं; प्रतिजैविक सिर्फ़ जीवाणुओं पर काम करते हैं।
- खीस या प्रतिविष को 'सक्रिय' प्रतिरक्षा कहना। तैयार प्रतिरक्षी = निष्क्रिय प्रतिरक्षा।