गति के प्रकार
संचलन यानी शरीर या उसके किसी भाग की स्थिति बदलना, जैसे पलक झपकना। गमन वह संचलन है जो पूरे शरीर को दूसरी जगह ले जाए, जैसे चलना या तैरना। हर गमन संचलन है, पर हर संचलन गमन नहीं।
मानव शरीर में तीन तरह की गति
- अमीबीय: कोशिकाद्रव्य के बहाव से कोशिकाएँ कूटपाद निकालती हैं; सूक्ष्मतंतु मदद करते हैं। उदाहरण: रक्त के महाभक्षक और श्वेताणु।
- पक्ष्माभी: बहुत से छोटे बाल जैसे पक्ष्माभ (सीलिया) साथ चलते हैं। श्वासनली में ये धूल-रोगाणु बाहर करते हैं; अंडवाहिनी में अंडे को आगे बढ़ाते हैं।
- पेशीय: पेशियाँ सिकुड़कर हाथ-पैर, जबड़े, जीभ और पूरा शरीर हिलाती हैं। पेशी, हड्डी और तंत्रिका साथ काम करते हैं।
कशाभिकीय गति (एक लंबा चाबुक जैसा कशाभ) शुक्राणु को तैराती है; यूग्लीना में भी दिखती है। पैरामीशियम सीलिया से चलता है और भोजन ग्रसिका में धकेलता है।
पेशियों के प्रकार
पेशी ऐसा ऊतक है जो सिकुड़ सकता है, संकेत से उत्तेजित होता है, खिंचता है और वापस आता है। वयस्क के वज़न का लगभग 40–50% पेशी है।
| प्रकार | दिखावट | नियंत्रण | कहाँ |
|---|---|---|---|
| कंकाली | धारीदार (रेखित) | ऐच्छिक | हड्डियों से जुड़ी |
| अंतरंग (चिकनी) | धारी नहीं | अनैच्छिक | आहारनाल, रक्त वाहिकाएँ, मूत्राशय की दीवार |
| हृद | धारीदार, शाखित | अनैच्छिक | सिर्फ़ हृदय |
कंकाली पेशी और सार्कोमियर की संरचना
- पेशी पूलिकाओं (गुच्छों) से बनी है, जिन्हें मज़बूत परत प्रावरणी (फेशिया) बाँधती है।
- हर पूलिका में कई पेशी तंतु। तंतु एक लंबी बहुकेंद्रकी कोशिका है (संकोशिका, सिंसीशियम)। इसकी झिल्ली सार्कोलेमा, कोशिकाद्रव्य सार्कोप्लाज़्म, और ER सार्कोप्लाज़्मिक जालिका है, जो Ca2+ जमा रखती है।
- हर तंतु धागे जैसे पेशी तंतुकों से भरा है, जिनमें हल्की-गहरी पट्टियाँ हैं; इसलिए पेशी धारीदार दिखती है।
सार्कोमियर
दो Z रेखाओं के बीच का भाग सार्कोमियर है, संकुचन की इकाई।
- I पट्टी (समदैशिक, हल्की): सिर्फ़ पतले एक्टिन तंतु। Z रेखा इसके बीच से गुज़रती है।
- A पट्टी (असमदैशिक, गहरी): मोटे मायोसिन तंतु की पूरी लंबाई, दोनों सिरों पर एक्टिन से ढकी।
- H क्षेत्र: A पट्टी का बीच का भाग जहाँ एक्टिन नहीं पहुँचता।
- M रेखा: A पट्टी के बीच की पतली रेखा जो मायोसिन को थामे रखती है।
संकुचनशील प्रोटीन
- एक्टिन (पतला तंतु): दो F-एक्टिन लड़ियाँ (G-एक्टिन इकाइयों से) आपस में लिपटी, साथ में ट्रोपोमायोसिन और बीच-बीच में ट्रोपोनिन। आराम में ट्रोपोनिन एक्टिन पर मायोसिन के जुड़ने की जगह ढके रहता है।
- मायोसिन (मोटा तंतु): कई मेरोमायोसिन इकाइयाँ। हर एक का सिर और छोटी भुजा (भारी मेरोमायोसिन) क्रॉस भुजा की तरह बाहर निकली, और पूँछ (हल्की मेरोमायोसिन)। सिर पर ATPase और एक्टिन से जुड़ने की जगह।
पेशी संकुचन की क्रियाविधि: सर्पी तंतु सिद्धांत
- प्रेरक तंत्रिका संकेत भेजती है। तंत्रिका-पेशी संधि पर एसिटाइलकोलीन छूटता है, सार्कोलेमा में क्रिया विभव बनता है। एक प्रेरक तंत्रिका और उससे जुड़े तंतु = प्रेरक इकाई।
- संकेत फैलता है और सार्कोप्लाज़्मिक जालिका Ca2+ छोड़ती है।
- Ca2+ ट्रोपोनिन से जुड़ता है; ट्रोपोमायोसिन हटता है और एक्टिन पर जगहें खुलती हैं।
- ATP → ADP + Pi तोड़कर ऊर्जा पाया मायोसिन सिर एक्टिन से जुड़कर क्रॉस ब्रिज बनाता है।
- सिर झुककर एक्टिन को बीच की ओर खींचता है (पावर स्ट्रोक); ADP और Pi निकलते हैं।
- नया ATP जुड़ता है, क्रॉस ब्रिज टूटता है, सिर फिर ऊर्जा पाता है, चक्र दोहराता है।
नतीजा: एक्टिन मायोसिन पर फिसलता है, Z रेखाएँ पास आती हैं, सार्कोमियर छोटा होता है। I पट्टी और H क्षेत्र छोटे, A पट्टी वैसी ही। Ca2+ वापस पंप होने पर जगहें फिर ढकती हैं और पेशी शिथिल होती है।
लाल और सफ़ेद तंतु; थकान
- लाल तंतु: बहुत मायोग्लोबिन (लाल, O2 रखता है), बहुत माइटोकॉन्ड्रिया: वायवीय, देर से थकते।
- सफ़ेद तंतु: कम मायोग्लोबिन, कम माइटोकॉन्ड्रिया, ज़्यादा सार्कोप्लाज़्मिक जालिका: तेज़, अवायवीय।
- O2 की कमी में बार-बार संकुचन से लैक्टिक अम्ल जमा होकर थकान लाता है।
मानव कंकाल तंत्र
वयस्क कंकाल में 206 हड्डियाँ और कुछ उपास्थियाँ हैं। दो भाग:
अक्षीय कंकाल (80 हड्डियाँ)
- खोपड़ी (22): 8 कपाल हड्डियाँ मस्तिष्क बचाती हैं; 14 चेहरे की। साथ में U-आकार की कंठिका (हायॉइड) 1 और हर मध्य कर्ण में 3 कर्ण अस्थिकाएँ (मैलियस, इंकस, स्टेपीज़) = 6। खोपड़ी दो अनुकपाल अस्थिकंदों से रीढ़ से जुड़ती है (द्विकंदीय)।
- मेरुदंड (26): ग्रीवा 7, वक्षीय 12, कटि 5, त्रिक 1 (5 जुड़ी), अनुत्रिक 1। मेरुरज्जु की रक्षा। जिराफ़ सहित सभी स्तनधारियों में 7 ग्रीवा कशेरुक।
- उरोस्थि (1) और पसलियाँ (12 जोड़ी = 24)। पहली 7 जोड़ी सीधे उरोस्थि से (वास्तविक पसलियाँ)। 8वीं, 9वीं, 10वीं 7वीं की उपास्थि से (कूट पसलियाँ)। 11वीं, 12वीं आगे से मुक्त (प्लावी पसलियाँ)। पसलियाँ, रीढ़, उरोस्थि मिलकर पसली पिंजर।
उपांगीय कंकाल (126 हड्डियाँ)
- हर हाथ (30): ह्यूमरस, रेडियस, अल्ना, कार्पल (8), मेटाकार्पल (5), अंगुलास्थि (14)।
- हर पैर (30): फीमर (सबसे लंबी), टिबिया, फिबुला, टार्सल (7), मेटाटार्सल (5), अंगुलास्थि (14), और घुटने की टोपी पटेला।
- अंसमेखला (हर ओर क्लैविकल + स्कैपुला) हाथ जोड़ती है। स्कैपुला की प्याली अंस गुहा (ग्लीनॉइड) में ह्यूमरस का सिर।
- श्रोणि मेखला (दो कॉक्सल हड्डियाँ, हर एक इलियम, इस्कियम, प्यूबिस से) पैर जोड़ती है। फीमर की प्याली श्रोणि उलूखल (एसिटैबुलम)। दोनों आधे आगे प्यूबिक सिम्फ़िसिस पर मिलते हैं।
संधियाँ
संधि वह जगह है जहाँ दो या ज़्यादा हड्डियाँ (या हड्डी और उपास्थि) मिलती हैं। पेशियाँ हड्डी खींचती हैं और संधि आलंब (फ़ल्क्रम) का काम करती है।
- रेशेदार संधि: कोई गति नहीं; घने रेशों से जुड़ी। उदाहरण: खोपड़ी की सीवनें।
- उपास्थिल संधि: थोड़ी गति; उपास्थि से जुड़ी। उदाहरण: पास-पास के कशेरुक।
- साइनोवियल संधि: मुक्त गति; हड्डियों के बीच द्रव भरी साइनोवियल गुहा।
- कंदुक-खल्लिका: ह्यूमरस-स्कैपुला (कंधा), फीमर-श्रोणि (कूल्हा)। हर दिशा में।
- कब्ज़ा: घुटना, कोहनी। एक दिशा में।
- धुराग्र: एटलस और एक्सिस (सिर घुमाना)।
- विसर्पी: कार्पल्स के बीच।
- सैडल: अँगूठे की कार्पल और मेटाकार्पल के बीच।
पेशी और कंकाल तंत्र के रोग
- मायस्थेनिया ग्रेविस: स्व-प्रतिरक्षी रोग जो तंत्रिका-पेशी संधि को नुकसान करता है; थकान, कमज़ोरी और कंकाली पेशी का लकवा।
- पेशीय दुष्पोषण (मस्कुलर डिस्ट्रॉफ़ी): कंकाली पेशी का धीरे-धीरे टूटना, ज़्यादातर आनुवंशिक।
- अपतानिका (टिटेनी): शरीर द्रव में कम Ca2+ से पेशी में तेज़ दर्दभरी ऐंठन।
- संधिशोथ (आर्थ्राइटिस): संधियों में सूजन।
- अस्थि सुषिरता (ऑस्टियोपोरोसिस): उम्र के साथ हड्डी का द्रव्यमान घटना, हड्डियाँ आसानी से टूटती हैं। महिलाओं में एस्ट्रोजन घटना आम कारण।
- गाउट: संधियों में यूरिक अम्ल क्रिस्टल जमा होने से सूजन।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सार्कोमियर = दो Z रेखाओं के बीच की दूरी
- संकुचन में: A पट्टी स्थिर; I पट्टी ↓, H क्षेत्र ↓, सार्कोमियर ↓
- कुल छोटापन = सार्कोमियरों की संख्या × हर सार्कोमियर का छोटापन
- हड्डियाँ: 206 = अक्षीय 80 + उपांगीय 126
- कशेरुक: C7 + T12 + L5 + S1 + Co1 = 26
- हर अंग (हाथ/पैर): 30 हड्डियाँ
हल किए गए उदाहरण
1. सार्कोमियर 2.5 µm से 2.1 µm होता है। एक पेशी तंतुक में 10,000 सार्कोमियर पंक्ति में हैं। कितना छोटा होगा?
हर एक में 0.4 µm। कुल = 10,000 × 0.4 = 4000 µm = 4 mm।
2. A पट्टी = 1.6 µm, सार्कोमियर = 2.4 µm। कुल I पट्टी निकालें।
I पट्टी (दोनों आधे मिलाकर) = 2.4 − 1.6 = 0.8 µm (हर ओर 0.4 µm)।
3. हर एक्टिन तंतु 1.0 µm है, सार्कोमियर 2.4 µm। H क्षेत्र निकालें।
H = सार्कोमियर − 2 × एक्टिन = 2.4 − 2.0 = 0.4 µm।
4. अक्षीय कंकाल की हड्डियाँ गिनें।
खोपड़ी 22 + कंठिका 1 + कर्ण अस्थिकाएँ 6 + कशेरुक 26 + उरोस्थि 1 + पसलियाँ 24 = 80।
5. एक हाथ की हड्डियाँ गिनें।
ह्यूमरस 1 + रेडियस 1 + अल्ना 1 + कार्पल 8 + मेटाकार्पल 5 + अंगुलास्थि 14 = 30।
6. उपांगीय हड्डियाँ गिनकर 206 जाँचें।
हाथ 2 × 30 = 60, पैर 2 × 30 = 60, अंसमेखला 2 × 2 = 4, श्रोणि मेखला 2। कुल 126। 80 + 126 = 206।
7. 3 cm लंबा पेशी तंतु अपनी लंबाई का 20% छोटा होता है। नई लंबाई?
छोटापन = 0.2 × 3 = 0.6 cm। नई लंबाई = 3 − 0.6 = 2.4 cm।
8. तेज़ दौड़ के बाद धावक की टाँग थकती और दुखती है। समझाइए।
तेज़ दौड़ में सफ़ेद तंतु अवायवीय काम करते हैं। O2 कम होने से ग्लाइकोजन लैक्टिक अम्ल में टूटता है, जो जमा होकर थकान लाता है।
आम गलतियाँ
- कहना कि संकुचन में A पट्टी छोटी होती है। A पट्टी वैसी रहती है; I पट्टी और H क्षेत्र छोटे होते हैं।
- सोचना कि एक्टिन और मायोसिन ख़ुद छोटे होते हैं। वे एक-दूसरे पर फिसलते हैं; लंबाई नहीं बदलती।
- घुटने को कंदुक-खल्लिका संधि कहना। घुटना कब्ज़ा है; कंधा और कूल्हा कंदुक-खल्लिका।
- अपतानिका (कम Ca2+ से ऐंठन) को टिटनेस (जीवाणु संक्रमण) समझना।