Romania Clasa a X-a Biology
अध्याय: 5
1. Plant and animal tissues
Plant tissues · Animal tissues
- पुष्पी पादपों का शारीर – शारीर (एनाटॉमी) का मतलब है पौधे की अंदरूनी बनावट, जो पतली काट (सेक्शन) काटकर देखी जाती है। कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं और ऊतक तीन ऊतक तंत्र: बाह्यत्वचीय (त्वचा), भरण (भराव) और संवहनी (जाइलम-फ्लोएम की नलियाँ)। द्विबीजपत्री और एकबीजपत्री की जड़, तने और पत्ती में ये तंत्र अलग ढंग से सजे होते हैं।
- प्राणियों में संरचनात्मक संगठन: मेंढक – प्राणियों में कोशिकाएँ मिलकर ऊतक, ऊतक मिलकर अंग और अंग मिलकर अंग तंत्र बनाते हैं। भारतीय मेंढक (राना टिग्रिना, अब हॉप्लोबैट्रेकस टाइगरिनस) इसका अच्छा उदाहरण है: शरीर में सिर और धड़, और अंदर पाचन, श्वसन, परिसंचरण, तंत्रिका, उत्सर्जन, अंतःस्रावी और जनन तंत्र। यह त्वचा और फेफड़े दोनों से साँस लेता है, इसका हृदय 3 कोष्ठ का है और यह पानी में अंडे देता है।
2. Nutrition
Autotrophic nutrition · Heterotrophic nutrition · Digestive system of mammals · Respiration · Circulation · Excretion
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- मानव पाचन तंत्र और विषमपोषी पोषण – विषमपोषी जीव दूसरे जीवों से बना-बनाया भोजन लेते हैं। मनुष्य प्राणिसम (holozoic) पोषण करता है: पूरा भोजन खाकर एक लंबी नली, आहार नाल, में उसे तोड़ता है। दाँत, लार, आमाशय का अम्ल, एंज़ाइम, पित्त और अग्न्याशयी रस बड़े अणुओं को छोटा करते हैं, जिन्हें क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम रक्त में सोख लेते हैं।
- पादप में श्वसन – श्वसन में ग्लूकोज़ जैसा भोजन टूटता है और ऊर्जा ATP के रूप में जमा होती है। पौधे रंध्रों और वातरंध्रों से O₂ लेते हैं। कोशिका-द्रव्य में ग्लाइकोलिसिस ग्लूकोज़ को दो पाइरुवेट में तोड़ता है। O₂ न हो तो पाइरुवेट का किण्वन होकर एथेनॉल या लैक्टिक अम्ल बनता है। O₂ हो तो पाइरुवेट माइटोकॉन्ड्रिया में जाता है, क्रेब्स चक्र चलता है और इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र O₂ की मदद से सबसे ज़्यादा ATP बनाता है: एक ग्लूकोज़ से 38 तक। यही पथ अणु बनाता भी है (उभयचयी)। RQ = निकली CO₂ ÷ ली गई O₂।
- शरीर द्रव तथा परिसंचरण – रक्त और लसीका शरीर के परिवहन द्रव हैं। रक्त = प्लाज़्मा (लगभग 55%) + संगठित पदार्थ: RBC, WBC और प्लेटलेट्स। रक्त समूह (ABO, Rh) RBC पर लगे प्रतिजनों से तय होते हैं। फाइब्रिनोजन से फाइब्रिन धागे बनकर थक्का बनाते हैं। मानव हृदय में चार कक्ष हैं और रक्त दो परिपथों में जाता है: फेफड़ों तक और शरीर तक (दोहरा परिसंचरण)। SA पर्व हर धड़कन शुरू करता है; एक धड़कन लगभग 0.8 s का हृद चक्र है, जिसे ECG में P, QRS, T तरंगों में देखा जाता है। हृद निकास = प्रवाह आयतन × हृदय दर ≈ 5 L/मिनट।
- उत्सर्जी उत्पाद एवं उनका निष्कासन – जीवों को नाइट्रोजन अपशिष्ट निकालना होता है। अमोनिया सबसे विषैली है और बहुत पानी माँगती है; यूरिया कम विषैला; यूरिक अम्ल को सबसे कम पानी चाहिए। मनुष्य यूरियोत्सर्जी हैं। हर वृक्क में लगभग 10 लाख वृक्काणु हैं। मूत्र तीन चरणों में बनता है: गुच्छीय निस्यंदन (लगभग 125 mL/मिनट, 180 L/दिन), पुनरवशोषण (लगभग 99% वापस) और स्रावण। हेनले लूप और वासा रेक्टा प्रतिधारा से मध्यांश को नमकीन बनाते हैं, जिससे गाढ़ा मूत्र बनता है। ADH, रेनिन-एंजियोटेंसिन-एल्डोस्टेरोन तंत्र और ANF जल व लवण नियंत्रित करते हैं। फेफड़े, यकृत, त्वचा भी मदद करते हैं। वृक्क फेल हों तो डायलिसिस या प्रत्यारोपण।
3. Relation functions
Sensitivity and movement · Locomotion
- तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय – समन्वय यानी अंगों का मिलकर काम करना। तंत्रिका तंत्र यह तेज़ी से तंत्रिका कोशिकाओं से करता है। तंत्रिका कोशिका में कोशिका काय, द्रुमिकाएँ और तंत्रिकाक्ष हैं; कई तंत्रिकाक्षों पर रैनवियर पर्व वाला माइलिन आच्छद है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क, मेरुरज्जु) सूचना संसाधित करता है; परिधीय तंत्र (तंत्रिकाएँ) उसे ढोता है। PNS के दो भाग: कायिक (कंकाली पेशियाँ) और स्वायत्त (अनुकंपी, परानुकंपी), जो अंदर के अंगों यानी अंतरंग तंत्र को चलाता है। आराम में तंत्रिकाक्ष ध्रुवित है: अंदर −, बाहर +, लगभग −70 mV। उद्दीपन से Na+ अंदर आकर क्रिया विभव बनाता है जो आगे दौड़ता है। सिनैप्स पर तंत्रिका संचारी संकेत अगली कोशिका तक पहुँचाते हैं।
- गमन एवं संचलन – संचलन यानी शरीर के किसी भाग की स्थिति बदलना; गमन यानी पूरे शरीर का एक जगह से दूसरी जगह जाना। कोशिकाएँ तीन तरह चलती हैं: अमीबीय, पक्ष्माभी और कशाभिकीय। मनुष्य पेशीय गति करता है। पेशियाँ कंकाली, अंतरंग या हृद होती हैं। कंकाली पेशी तंतुओं से बनी है; हर तंतु में पेशी तंतुक हैं जो एक्टिन-मायोसिन वाले सार्कोमियरों की श्रृंखला हैं। तंत्रिका संकेत से Ca2+ छूटता है, मायोसिन सिर ATP से एक्टिन खींचते हैं और सार्कोमियर छोटा होता है (सर्पी तंतु सिद्धांत)। कंकाल में 206 हड्डियाँ हैं। संधियाँ रेशेदार, उपास्थिल या साइनोवियल (कंदुक-खल्लिका, कब्ज़ा, धुराग्र, विसर्पी, सैडल) होती हैं। रोग: मायस्थेनिया ग्रेविस, अपतानिका, पेशीय दुष्पोषण, संधिशोथ, अस्थि सुषिरता, गाउट।
4. Reproduction
Reproduction in plants · Reproduction in animals
- पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन – लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक मिलते हैं, जिससे दो जनकों का DNA मिलता है और विभिन्नता बढ़ती है। फूल में परागकोश का पराग वर्तिकाग्र पर पहुँचता है (परागण), परागनलिका बीजांड तक बढ़ती है और नर युग्मक अंडकोशिका से मिलता है (निषेचन)। युग्मनज भ्रूण बनता है, बीजांड बीज और अंडाशय फल।
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
5. Ecological imbalances
Ecological imbalances
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