श्वसन क्या है?
कोशिकीय श्वसन में कोशिका के अंदर भोजन के C–C बंध टूटते हैं और ऊर्जा निकलती है। यह ऊर्जा ATP में जमा होती है, जो कोशिका का ऊर्जा-सिक्का है। जो भोजन टूटता है उसे श्वसन-क्रियाधार कहते हैं। अक्सर ग्लूकोज़, पर वसा, प्रोटीन और कार्बनिक अम्ल भी काम आते हैं। ऊर्जा धीरे-धीरे, कदम-कदम पर निकलती है, ताकि कोशिका उसे पकड़ सके।
क्या पौधे साँस लेते हैं? गैस विनिमय
पौधों के फेफड़े नहीं हैं, पर हर जीवित कोशिका श्वसन करती है। गैसें साधारण विसरण से आती-जाती हैं:
- पत्तियों के रंध्र (stomata),
- तने और जड़ों के वातरंध्र (lenticels)।
यह काफ़ी है क्योंकि (1) हर भाग अपनी गैस खुद लेता-देता है, (2) पौधों को जंतुओं से बहुत कम गैस विनिमय चाहिए, (3) ज़्यादातर जीवित कोशिकाएँ सतह के पास हैं (तने का भीतरी भाग मृत लकड़ी है), और (4) दिन में प्रकाश-संश्लेषण की O₂ पत्ती के अंदर ही मिल जाती है।
ग्लाइकोलिसिस: शर्करा का टूटना
ग्लाइकोलिसिस (EMP पथ) हर जीवित कोशिका के कोशिका-द्रव्य में होता है और इसे O₂ नहीं चाहिए। ग्लूकोज़ (6C) लगभग दस एंजाइम-कदमों में दो पाइरुविक अम्ल (3C) में टूटता है।
- खर्च: ग्लूकोज़ को सक्रिय करने में 2 ATP (ग्लूकोज़ → ग्लूकोज़-6-फॉस्फेट; फ्रक्टोज़-6-फॉस्फेट → फ्रक्टोज़-1,6-बिसफॉस्फेट)।
- टूटना: फ्रक्टोज़-1,6-बिसफॉस्फेट दो 3C शर्कराओं (PGAL) में बँटता है।
- कमाई: सीधे 4 ATP, और PGAL के ऑक्सीकरण पर 2 NADH।
शुद्ध: प्रति ग्लूकोज़ 2 ATP + 2 NADH + 2 पाइरुवेट। पौधों में सुक्रोज़ पहले इनवर्टेज़ से ग्लूकोज़ और फ्रक्टोज़ में टूटता है।
किण्वन: बिना ऑक्सीजन का जीवन
O₂ न हो तो कोशिकाएँ किण्वन करके ग्लाइकोलिसिस चालू रखती हैं।
- एल्कोहॉली किण्वन (यीस्ट): पाइरुवेट → ऐसीटैल्डिहाइड + CO₂ → एथेनॉल। एंजाइम: पाइरुविक अम्ल डीकार्बोक्सिलेज़ और एल्कोहॉल डीहाइड्रोजिनेज़।
- लैक्टिक अम्ल किण्वन (कुछ जीवाणु, कड़ी कसरत में हमारी मांसपेशियाँ): पाइरुवेट → लैक्टिक अम्ल, लैक्टेट डीहाइड्रोजिनेज़ से।
दोनों में NADH फिर NAD⁺ बनता है, जिससे ग्लाइकोलिसिस चलता रहे। कोई अतिरिक्त ATP नहीं बनता; ग्लूकोज़ की 7% से कम ऊर्जा निकलती है। लगभग 13% से अधिक एल्कोहॉल होने पर यीस्ट मर जाता है।
कड़ी अभिक्रिया और क्रेब्स (TCA) चक्र
O₂ हो तो पाइरुवेट माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में जाता है।
कड़ी अभिक्रिया
पाइरुवेट + CoA + NAD⁺ → ऐसिटिल CoA + CO₂ + NADH (एंजाइम: पाइरुविक डीहाइड्रोजिनेज़)।
TCA चक्र (साइट्रिक अम्ल चक्र)
- ऐसिटिल CoA (2C) + ऑक्सैलोऐसीटिक अम्ल (OAA, 4C) + पानी → साइट्रिक अम्ल (6C), सिट्रेट सिंथेज़ से। साइट्रिक अम्ल में तीन कार्बोक्सिल समूह हैं, इसलिए TCA।
- सिट्रेट → आइसोसिट्रेट → दो कदम, हर एक में CO₂ निकलती है → α-कीटोग्लूटेरेट (5C) → सक्सिनिल CoA (4C)।
- सक्सिनिल CoA → सक्सिनेट में एक GTP (= 1 ATP) बनता है, क्रियाधार-स्तर फॉस्फोरिलेशन से।
- सक्सिनेट → फ्यूमेरेट → मैलेट → OAA; इसमें FADH₂ और NADH बनते हैं। OAA अगले ऐसिटिल CoA के लिए तैयार।
हर चक्कर: 2 CO₂, 3 NADH, 1 FADH₂, 1 GTP। एक ग्लूकोज़ से दो पाइरुवेट, इसलिए चक्र दो बार घूमता है।
इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र और ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलेशन
NADH और FADH₂ को अपने इलेक्ट्रॉन देने होते हैं। यह माइटोकॉन्ड्रिया की भीतरी झिल्ली पर होता है।
- संकुल I (NADH डीहाइड्रोजिनेज़) NADH से इलेक्ट्रॉन लेता है।
- FADH₂ इलेक्ट्रॉन संकुल II को देता है।
- इलेक्ट्रॉन यूबिक्विनोन → संकुल III (साइटोक्रोम bc₁) → साइटोक्रोम c → संकुल IV (साइटोक्रोम c ऑक्सीडेज़) से गुज़रते हैं।
- अंत में O₂ इलेक्ट्रॉन और H⁺ लेकर पानी बनाती है। O₂ अंतिम इलेक्ट्रॉन-ग्राही है।
इलेक्ट्रॉन चलते समय H⁺ दोनों झिल्लियों के बीच के स्थान में पंप होते हैं। H⁺ ATP सिंथेज़ (संकुल V) से वापस बहते हैं: F₀ नली है, F₁ सिर है जो ATP बनाता है। ऑक्सीकरण की ऊर्जा से ATP बनाना ऑक्सीकारी फॉस्फोरिलेशन है।
ATP की गिनती: हिसाब-किताब
नियम: 1 NADH → 3 ATP और 1 FADH₂ → 2 ATP।
| चरण | सीधे ATP | NADH | FADH₂ | ATP |
|---|---|---|---|---|
| ग्लाइकोलिसिस | 2 | 2 | 0 | 2 + 6 = 8 |
| कड़ी अभिक्रिया (×2) | 0 | 2 | 0 | 6 |
| क्रेब्स चक्र (×2) | 2 | 6 | 2 | 2 + 18 + 4 = 24 |
| कुल | 4 | 10 | 2 | 38 |
38 सबसे अच्छी स्थिति की संख्या है। इसमें माना गया है कि पथ तय क्रम में चलता है, ग्लाइकोलिसिस का NADH बिना नुकसान माइटोकॉन्ड्रिया पहुँचता है, और बीच से कुछ दूसरे कामों में नहीं जाता। असल कोशिकाओं में अक्सर कम मिलता है। किण्वन से केवल 2 ATP।
उभयचयी पथ
तोड़ना अपचय (catabolism) है; बनाना उपचय (anabolism)। श्वसन पथ दोनों करता है:
- वसा → ग्लिसरॉल (PGAL बनकर जुड़ता है) + वसा अम्ल (ऐसिटिल CoA बनते हैं)।
- प्रोटीन → अमीनो अम्ल, जो पाइरुवेट, ऐसिटिल CoA या क्रेब्स के अम्ल बनकर जुड़ते हैं।
- जब कोशिका को वसा अम्ल बनाने हों, तो ऐसिटिल CoA पथ से बाहर निकाला जाता है; अमीनो अम्ल चाहिए तो क्रेब्स के अम्ल।
तोड़ने और बनाने दोनों में काम आने से इसे उभयचयी (amphibolic, amphi = दोनों) कहते हैं, केवल अपचयी नहीं।
श्वसन गुणांक (RQ)
RQ = निकली CO₂ का आयतन ÷ ली गई O₂ का आयतन। इससे पता चलता है कौन-सा भोजन जल रहा है।
- कार्बोहाइड्रेट: C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O. RQ = 6/6 = 1।
- वसा (ट्राइपामिटिन): 2C₅₁H₉₈O₆ + 145O₂ → 102CO₂ + 98H₂O. RQ = 102/145 ≈ 0.7। वसा में ऑक्सीजन कम है, इसलिए ज़्यादा O₂ चाहिए।
- प्रोटीन: लगभग 0.9।
- कार्बनिक अम्ल (जैसे मैलिक अम्ल, ऑक्सीजन से भरपूर): RQ 1 से अधिक।
- अवायवीय श्वसन: CO₂ निकलती है पर O₂ नहीं ली जाती, RQ अनंत।
करके देखो: यीस्ट गुब्बारा
- आधी बोतल गुनगुने पानी में 2 चम्मच चीनी और 1 चम्मच सूखा यीस्ट डालो।
- मुँह पर गुब्बारा चढ़ाओ। एक बोतल गर्म जगह, एक फ्रिज में रखो।
- अनुमान लगाओ कौन-सा गुब्बारा ज़्यादा फूलेगा। एक घंटे बाद देखो। गर्म वाला फूलता है: यीस्ट चीनी का किण्वन करके CO₂ देता है।
- 3D के आख़िरी चरण में हर भोजन चुनने से पहले उसका RQ अनुमान लगाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा
- ग्लाइकोलिसिस शुद्ध: 2 ATP + 2 NADH + 2 पाइरुवेट
- कड़ी: पाइरुवेट + CoA + NAD⁺ → ऐसिटिल CoA + CO₂ + NADH
- क्रेब्स प्रति चक्कर: 2 CO₂ + 3 NADH + 1 FADH₂ + 1 GTP
- 1 NADH → 3 ATP · 1 FADH₂ → 2 ATP
- वायवीय कुल = प्रति ग्लूकोज़ 38 ATP (अधिकतम)
- RQ = निकली CO₂ ÷ ली गई O₂
हल किए गए उदाहरण
1. ग्लूकोज़ का RQ निकालो।
C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O. RQ = 6 CO₂ ÷ 6 O₂ = 1।
2. ट्राइपामिटिन: 2C₅₁H₉₈O₆ + 145O₂ → 102CO₂ + 98H₂O. RQ निकालो।
RQ = 102 ÷ 145 = 0.70।
3. मैलिक अम्ल: C₄H₆O₅ + 3O₂ → 4CO₂ + 3H₂O. RQ निकालो और अर्थ बताओ।
RQ = 4 ÷ 3 = 1.33। यह 1 से अधिक है, क्योंकि अम्ल में पहले से बहुत ऑक्सीजन है और बाहर से कम O₂ चाहिए।
4. एक बीज 50 mL CO₂ छोड़ता है और 70 mL O₂ लेता है। वह शायद क्या जला रहा है?
RQ = 50 ÷ 70 = 0.71, लगभग 0.7, यानी वसा। मूँगफली और सरसों जैसे तिलहन अंकुरण में ऐसा करते हैं।
5. एक ग्लूकोज़ के लिए क्रेब्स चक्र से ATP गिनो।
दो चक्कर: 2 GTP (2 ATP) + 6 NADH × 3 = 18 + 2 FADH₂ × 2 = 4। कुल 2 + 18 + 4 = 24 ATP।
6. वायवीय श्वसन में एक ग्लूकोज़ से कुल ATP निकालो।
ग्लाइकोलिसिस 2 ATP + 2 NADH (6) = 8। कड़ी 2 NADH = 6। क्रेब्स = 24। कुल 8 + 6 + 24 = 38 ATP।
7. प्रति ग्लूकोज़ वायवीय श्वसन किण्वन से कितने गुना ATP देता है?
वायवीय 38, किण्वन 2। 38 ÷ 2 = 19 गुना।
8. वायवीय श्वसन में एक ग्लूकोज़ से कितनी CO₂ निकलती है, और कहाँ?
कड़ी: हर पाइरुवेट से 1, × 2 = 2। क्रेब्स: हर चक्कर 2, × 2 = 4। कुल 6 CO₂, सब माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि ग्लाइकोलिसिस को O₂ चाहिए। यह O₂ के साथ या बिना, कोशिका-द्रव्य में होता है।
- ग्लाइकोलिसिस का लाभ 4 ATP गिनना। 4 बनते हैं पर 2 पहले खर्च हुए, इसलिए शुद्ध 2।
- सोचना कि क्रेब्स चक्र में O₂ लगती है। O₂ केवल ETS के अंत में अंतिम इलेक्ट्रॉन-ग्राही के रूप में लगती है।
- RQ को O₂ ÷ CO₂ लिखना। यह निकली CO₂ ÷ ली गई O₂ है।