Germany Jahrgangsstufe 13 Biology
अध्याय: 4
1. Biology: gaining, communicating, evaluating knowledge
Biology subject knowledge · Scientific inquiry in biology · Communicating biology · Evaluating bioethical issues
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- शोध कौशल: प्रश्न से पूरे प्रोजेक्ट तक – शोध उत्तर खोजने का सावधान तरीका है। आप एक साफ़, सीमित प्रश्न पूछते हैं, उसका उत्तर पाने की योजना बनाते हैं, जानकारी खोजते हैं और हर स्रोत पर भरोसे की जाँच करते हैं, अपने आँकड़े जुटाकर विश्लेषण करते हैं, सबूत पर टिका निष्कर्ष निकालते हैं, और हर स्रोत को श्रेय देते हुए उसे साझा करते हैं।
- जैवनैतिकता: जीवविज्ञान और चिकित्सा में सही क्या है – जैवनैतिकता पूछती है कि जीवविज्ञान और चिकित्सा जो करने देते हैं, क्या हमें वह करना चाहिए। इसके चार सिद्धांत हैं: स्वायत्तता (पसंद का सम्मान), हितकारिता (भला करो), अहानिकारिता (नुक़सान न करो) और न्याय (बराबरी)। मानव गरिमा का अर्थ है कि इंसान कभी सिर्फ़ साधन नहीं, इसलिए सूचित सहमति ज़रूरी है। चिकित्सीय क्लोनिंग सख़्त नियमों से कहीं-कहीं मान्य है; इंसान की प्रजनन क्लोनिंग ज़्यादातर देशों में प्रतिबंधित है। जीवन की शुरुआत और अंत के सवाल फ़ायदों बनाम जोखिमों और मूल्यों पर तौले जाते हैं।
2. Neural information processing
Neurons and nerve signals
- तंत्रिकीय नियंत्रण एवं समन्वय – समन्वय यानी अंगों का मिलकर काम करना। तंत्रिका तंत्र यह तेज़ी से तंत्रिका कोशिकाओं से करता है। तंत्रिका कोशिका में कोशिका काय, द्रुमिकाएँ और तंत्रिकाक्ष हैं; कई तंत्रिकाक्षों पर रैनवियर पर्व वाला माइलिन आच्छद है। केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (मस्तिष्क, मेरुरज्जु) सूचना संसाधित करता है; परिधीय तंत्र (तंत्रिकाएँ) उसे ढोता है। PNS के दो भाग: कायिक (कंकाली पेशियाँ) और स्वायत्त (अनुकंपी, परानुकंपी), जो अंदर के अंगों यानी अंतरंग तंत्र को चलाता है। आराम में तंत्रिकाक्ष ध्रुवित है: अंदर −, बाहर +, लगभग −70 mV। उद्दीपन से Na+ अंदर आकर क्रिया विभव बनाता है जो आगे दौड़ता है। सिनैप्स पर तंत्रिका संचारी संकेत अगली कोशिका तक पहुँचाते हैं।
3. Cell metabolism physiology
Photosynthesis · Plant metabolism and enzymes · Fermentation and cellular respiration
- उच्च पादपों में प्रकाश-संश्लेषण – हरे पौधे प्रकाश की मदद से CO₂ और पानी से शर्करा बनाते हैं। यह क्लोरोप्लास्ट में होता है। थायलाकॉइड में प्रकाश अभिक्रिया पानी तोड़ती है, O₂ छोड़ती है और ATP व NADPH बनाती है। स्ट्रोमा में केल्विन चक्र इसी ATP और NADPH से CO₂ को शर्करा में बदलता है। C₄ पौधे CO₂ पंप करके प्रकाश-श्वसन की बर्बादी रोकते हैं। जो कारक सबसे कम हो, वही दर तय करता है।
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- पादप में श्वसन – श्वसन में ग्लूकोज़ जैसा भोजन टूटता है और ऊर्जा ATP के रूप में जमा होती है। पौधे रंध्रों और वातरंध्रों से O₂ लेते हैं। कोशिका-द्रव्य में ग्लाइकोलिसिस ग्लूकोज़ को दो पाइरुवेट में तोड़ता है। O₂ न हो तो पाइरुवेट का किण्वन होकर एथेनॉल या लैक्टिक अम्ल बनता है। O₂ हो तो पाइरुवेट माइटोकॉन्ड्रिया में जाता है, क्रेब्स चक्र चलता है और इलेक्ट्रॉन परिवहन तंत्र O₂ की मदद से सबसे ज़्यादा ATP बनाता है: एक ग्लूकोज़ से 38 तक। यही पथ अणु बनाता भी है (उभयचयी)। RQ = निकली CO₂ ÷ ली गई O₂।
4. Ecology and biodiversity
Dynamic processes in ecosystems · Human impact and value of biodiversity · Ecology of the biosphere
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।