पारितंत्र: संरचना और घटक
पारितंत्र प्रकृति का वह हिस्सा है जहाँ जीव और उनका परिवेश मिलकर एक इकाई की तरह काम करते हैं। यह बड़ा (जंगल, समुद्र) या छोटा (तालाब, मछलीघर) हो सकता है। खेत या एक्वेरियम मानव-निर्मित पारितंत्र हैं।
घटक
- अजैविक: धूप, तापमान, पानी, मिट्टी, हवा, खनिज।
- जैविक: उत्पादक (हरे पौधे, पादपप्लवक), उपभोक्ता (शाकाहारी, मांसाहारी), अपघटक (बैक्टीरिया, कवक)।
संरचना
संरचना यानी कौन-सी जातियाँ हैं और कैसे व्यवस्थित हैं। जाति संघटन = जातियों की सूची। स्तरीकरण = ऊर्ध्वाधर परतें: जंगल में ऊपर पेड़, फिर झाड़ियाँ, फिर शाक और घास। हर परत को अलग मात्रा में रोशनी मिलती है।
चार कार्य
हर पारितंत्र चार काम करता है: उत्पादकता, अपघटन, ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्रण।
तालाब: सरल उदाहरण
अजैविक: पानी, घुले खनिज, धूप। उत्पादक: पादपप्लवक, शैवाल, तैरते व जड़ वाले पौधे। उपभोक्ता: प्राणिप्लवक, छोटी और बड़ी मछलियाँ। अपघटक: तली में बैक्टीरिया और कवक।
उत्पादकता: GPP और NPP
प्राथमिक उत्पादन = पौधों द्वारा एक समय में प्रति क्षेत्र बनाया गया जैव पदार्थ। इसे बनाने की दर ही उत्पादकता है, इकाई g m⁻² yr⁻¹ या kcal m⁻² yr⁻¹।
- सकल प्राथमिक उत्पादकता (GPP): प्रकाश-संश्लेषण में जैव पदार्थ बनने की कुल दर।
- श्वसन (R): GPP का वह भाग जो पौधे खुद इस्तेमाल करते हैं।
- शुद्ध प्राथमिक उत्पादकता (NPP): जानवरों और अपघटकों के लिए बचा: NPP = GPP − R।
- द्वितीयक उत्पादकता: उपभोक्ताओं द्वारा नया जैव पदार्थ बनाने की दर।
उत्पादकता पौधे की जाति, धूप, तापमान, पानी और पोषक तत्वों पर निर्भर है। पूरी पृथ्वी लगभग 170 अरब टन (शुष्क भार) जैव पदार्थ हर साल बनाती है। समुद्र सतह का लगभग 70% है पर सिर्फ़ लगभग 55 अरब टन देता है, क्योंकि गहरे पानी में रोशनी और पोषक कम हैं।
अपघटन: पाँच चरण
अपघटक जटिल मृत पदार्थ (अपरद: गिरी पत्तियाँ, छाल, फूल, मरे जानवर, गोबर) को CO₂, पानी और पोषक जैसे सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ते हैं।
- खंडन: केंचुए जैसे अपरदाहारी अपरद को छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं।
- निक्षालन: पानी में घुलनशील पोषक मिट्टी में नीचे जाकर लवण बनकर जमा होते हैं।
- अपचय: बैक्टीरिया और कवक के एंज़ाइम अपरद को सरल अकार्बनिक पदार्थों में तोड़ते हैं।
- ह्यूमीकरण: गहरे रंग का स्पंज जैसा ह्यूमस बनता है। यह सूक्ष्मजीवों से बचता है, बहुत धीरे टूटता है और पोषक का भंडार है।
- खनिजीकरण: सूक्ष्मजीव ह्यूमस को धीरे-धीरे तोड़कर अकार्बनिक पोषक मुक्त करते हैं।
गति किस पर निर्भर
अपरद में नाइट्रोजन और शर्करा ज़्यादा हो और मौसम गर्म और नम हो तो तेज़। लिग्निन और काइटिन ज़्यादा हो, या ठंड, सूखा, ऑक्सीजन की कमी हो तो धीमा। अपघटन को ऑक्सीजन चाहिए।
ऊर्जा प्रवाह
लगभग हर पारितंत्र का ऊर्जा स्रोत सूर्य है (गहरे समुद्र के गर्म जल छिद्र अपवाद हैं)। धूप का 50% से कम भाग प्रकाश-संश्लेषी सक्रिय विकिरण (PAR) है, और पौधे PAR का सिर्फ़ 2–10% पकड़ते हैं। इसी छोटे हिस्से से सारा जीव जगत चलता है।
ऊर्जा एक दिशा में बहती है: सूर्य → उत्पादक → उपभोक्ता। यह पुनः चक्रित नहीं होती। हर स्थानांतरण पर बहुत ऊर्जा ऊष्मा बनकर खो जाती है (ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम)।
खाद्य श्रृंखला और पोषी स्तर
- चारण खाद्य श्रृंखला (GFC): हरे पौधों से शुरू: घास → बकरी → मनुष्य।
- अपरद खाद्य श्रृंखला (DFC): मृत पदार्थ से शुरू: अपरद → अपघटक (कवक, बैक्टीरिया) → अपरदाहारी। स्थलीय पारितंत्र में DFC से GFC से ज़्यादा ऊर्जा बहती है।
- श्रृंखलाएँ जुड़कर खाद्य जाल बनाती हैं।
- पोषी स्तर: उत्पादक (पहला), शाकाहारी (दूसरा), मांसाहारी (तीसरा), तृतीयक उपभोक्ता (चौथा)।
- खड़ी फ़सल: किसी पोषी स्तर पर एक समय में जीवित पदार्थ का भार।
10 प्रतिशत नियम
एक स्तर की ऊर्जा का सिर्फ़ लगभग 10% अगले स्तर तक जाता है (लिंडेमान)। 10,000 J → 1,000 J → 100 J → 10 J। इसीलिए खाद्य श्रृंखला में 4–5 से ज़्यादा स्तर कम ही होते हैं।
पारिस्थितिक पिरामिड: संख्या, जीवभार, ऊर्जा
उत्पादकों को आधार बनाओ और ऊपर हर पोषी स्तर रखो। पिरामिड संख्या, जीवभार (शुष्क भार) या ऊर्जा दिखा सकता है।
- संख्या का पिरामिड: घास का मैदान सीधा (बहुत घास, कम टिड्डे, कम मेंढक)। एक बड़े पेड़ पर बहुत कीड़े-पक्षी हों तो उल्टा या तर्कु आकार।
- जीवभार का पिरामिड: ज़मीन पर आमतौर पर सीधा। समुद्र में उल्टा: पादपप्लवक बहुत तेज़ी से बढ़ते और खाए जाते हैं, इसलिए एक समय पर उनका भार कम, मछलियों का ज़्यादा।
- ऊर्जा का पिरामिड: हमेशा सीधा, क्योंकि हर कदम पर ऊर्जा खोती है और कोई स्तर अपने नीचे वाले से ज़्यादा ऊर्जा नहीं पा सकता।
पिरामिड की सीमाएँ
एक जाति दो स्तरों पर हो सकती है, यह नहीं दिखता; सरल श्रृंखला मानी जाती है (प्रकृति में जाल है); और मृतजीवी (अपघटक) छूट जाते हैं जबकि वे बहुत ज़रूरी हैं।
बोर्ड परीक्षा में क्या पूछा जाता है
आम प्रश्न: GPP और NPP की परिभाषा और NPP = GPP − R; अपघटन के चरण और कारक; ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा क्यों; उल्टे संख्या या जीवभार पिरामिड का उदाहरण; 10% नियम से ऊपरी स्तर की ऊर्जा; चारण और अपरद श्रृंखला की तुलना। संख्यात्मक प्रश्न छोटे पर आसान अंक हैं: पहले सूत्र लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. एक खेत की GPP = 20,000 kcal m⁻² yr⁻¹ और श्वसन 4,000। NPP?
NPP = 20,000 − 4,000 = 16,000 kcal m⁻² yr⁻¹।
2. झील की NPP = 6,000 और R = 2,000 kcal m⁻² yr⁻¹। GPP?
GPP = NPP + R = 8,000 kcal m⁻² yr⁻¹।
3. पौधे 50,000 J पकड़ते हैं। 10% नियम से द्वितीयक उपभोक्ता को कितनी?
प्राथमिक: 5,000 J। द्वितीयक: 500 J।
4. साँप (तृतीयक उपभोक्ता) को 25 J मिलती है। उत्पादकों में कितनी ऊर्जा थी?
पीछे चलो, हर कदम × 10: द्वितीयक 250 J, प्राथमिक 2,500 J, उत्पादक 25,000 J।
5. जंगल पर 10,00,000 J PAR पड़ता है और GPP में 20,000 J जमा होती है। दक्षता?
20,000 ÷ 10,00,000 × 100 = 2%। यह सामान्य 2–10% सीमा में है।
6. घास के मैदान में शाकाहारियों में 1,500 kJ और उन्हें खाने वाले मांसाहारियों में 120 kJ। दक्षता?
120 ÷ 1,500 × 100 = 8%। 10% से थोड़ी कम, जो सामान्य है: 10% सिर्फ़ औसत है।
7. फ़सल की GPP 30,000 kcal m⁻² yr⁻¹, श्वसन GPP का 30%। गायें NPP का 10% खाती हैं। गायों को कितनी ऊर्जा?
R = 9,000; NPP = 21,000; गायें 10% = 2,100 kcal m⁻² yr⁻¹।
8. खाद्य श्रृंखला में पाँच से ज़्यादा स्तर क्यों नहीं होते? 1,00,000 J से दिखाओ।
1,00,000 → 10,000 → 1,000 → 100 → 10 → 1 J। छठे स्तर पर सिर्फ़ 1 J, जो किसी समष्टि के लिए बहुत कम है।
9. कौन-सा पिरामिड उल्टा? (a) बरगद और कीड़ों का संख्या पिरामिड, (b) समुद्र का जीवभार पिरामिड, (c) तालाब का ऊर्जा पिरामिड।
(a) उल्टा। (b) उल्टा। (c) कभी नहीं, ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा।
आम गलतियाँ
- NPP = GPP + R लिखना। श्वसन हानि है, इसलिए NPP = GPP − R।
- कहना कि ऊर्जा पुनः चक्रित होती है। पोषक चक्रित होते हैं; ऊर्जा एक दिशा में बहकर ऊष्मा बन जाती है।
- सोचना कि जीवभार का पिरामिड हमेशा सीधा है। समुद्र में यह उल्टा होता है।
- ह्यूमीकरण (ह्यूमस बनना) और खनिजीकरण (ह्यूमस टूटकर खनिज निकलना) को मिला देना।