Russia 11 класс Biology (basic)
अध्याय: 4
1. Evolutionary biology
Evolutionary theory
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
2. Origin and development of life
Origin of life and human
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
3. Organisms and environment
Ecology
- जीव और समष्टियाँ: वृद्धि और पारस्परिक क्रिया – समष्टि (population) यानी एक ही जाति के वे सब जीव जो एक समय पर एक जगह रहते हैं। समष्टि के ऐसे गुण होते हैं जो अकेले जीव में नहीं होते: घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना। जन्म और आप्रवासन से N बढ़ता है, मृत्यु और उत्प्रवासन से घटता है। भोजन असीमित हो तो तेज़ वृद्धि (J-वक्र, dN/dt = rN); सीमित हो तो वृद्धि धीमी होकर वहन क्षमता K पर रुकती है (S-वक्र, dN/dt = rN(1 − N/K))। जातियाँ एक-दूसरे पर असर डालती हैं: सहोपकारिता (+/+), स्पर्धा (−/−), परभक्षण और परजीविता (+/−), सहभोजिता (+/0), असहभोजिता (−/0)।
4. Communities and ecosystems
Ecosystems and biosphere
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।