जीवन की उत्पत्ति
ब्रह्मांड लगभग 20 अरब साल पुराना है (बिग बैंग)। पृथ्वी लगभग 4.5 अरब साल पहले बनी। शुरुआती वायुमंडल में जलवाष्प, मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड और अमोनिया थे, पर मुक्त ऑक्सीजन नहीं। UV प्रकाश और बिजली से ऊर्जा मिली।
- विशेष सृष्टिवाद: जीवन ईश्वर ने बनाया (जाँच नहीं सकते)।
- पैनस्पर्मिया: जीवन के "बीज" अंतरिक्ष से आए।
- स्वतः जनन: सड़ते पदार्थ से जीवन। लुई पाश्चर ने हंस-गर्दन फ्लास्क से ग़लत साबित किया: उबला शोरबा सूक्ष्मजीव-रहित रहा।
- रासायनिक विकास (ओपेरिन–हाल्डेन): सरल अकार्बनिक अणु → कार्बनिक अणु (अमीनो अम्ल, शर्करा, क्षार) → बड़े अणु → पहले कोशिका जैसे रूप।
मिलर–यूरे प्रयोग (1953)
स्टेनली मिलर ने CH₄, H₂, NH₃ और जलवाष्प को बंद फ्लास्क में 800 °C पर रखा और बिजली की चिंगारी दी। एक हफ़्ते बाद अमीनो अम्ल मिले। दूसरों ने ऐसे ही प्रयोगों में शर्करा, क्षार, वर्णक और वसा पाए। पहला अकोशिकीय जीवन शायद 3 अरब साल पहले स्वयं-प्रतिकृति अणुओं (RNA) के रूप में आया, और पहली कोशिकाएँ लगभग 2000 मिलियन साल पहले पानी में।
विकास के प्रमाण
- जीवाश्म विज्ञान: अलग उम्र की चट्टानों में अलग जीव; पुरानी परतों में सरल रूप। जीवाश्म विलुप्त जीव और समूहों के बीच की कड़ियाँ दिखाते हैं।
- समजात अंग (एक ढाँचा, अलग काम) = अपसारी विकास: व्हेल, चमगादड़, चीता और मनुष्य के अग्रपाद (ह्यूमरस, रेडियस, अल्ना, कार्पल्स…); कशेरुकियों के हृदय और मस्तिष्क; बोगनविलिया का काँटा और कुकुरबिटा का प्रतान (दोनों रूपांतरित तना)।
- समरूप अंग (अलग ढाँचा, एक काम) = अभिसारी विकास: तितली और पक्षी के पंख; ऑक्टोपस और स्तनधारी की आँख; पेंगुइन और डॉल्फ़िन के फ्लिपर; शकरकंद (जड़) और आलू (तना)।
- भ्रूण विज्ञान: सब कशेरुकी भ्रूणों में क्लोम दरारें। हेकल का विचार कि भ्रूण पूर्वजों के वयस्क रूप दोहराते हैं, वॉन बेयर ने नकारा: भ्रूण दूसरे जंतुओं की वयस्क अवस्था से नहीं गुज़रते।
- आणविक समानता: संबंधित जीवों में मिलते-जुलते प्रोटीन और जीन (जैसे साइटोक्रोम c, DNA)।
- आज दिखता विकास: इंग्लैंड में कारख़ानों के पास पतंगों में औद्योगिक मेलानिनता; खरपतवारनाशी, कीटनाशी और एंटीबायोटिक प्रतिरोध; कुत्तों, पशुओं और फ़सलों में कृत्रिम वरण।
डार्विन, लैमार्क और डी व्रीस
लैमार्क ने कहा कि अंग उपयोग-अनुपयोग से बदलते हैं और ये बदलाव आगे जाते हैं (जैसे जिराफ़ का गर्दन खींचना)। यह सही नहीं: उपार्जित लक्षण वंशागत नहीं होते।
चार्ल्स डार्विन ने H.M.S. बीगल पर यात्रा में फिंच, कछुए और जीवाश्म देखे। अल्फ़्रेड वॉलेस (मलय द्वीपसमूह) के साथ उन्होंने प्राकृतिक वरण का सिद्धांत दिया:
- जीव जितने बच सकते हैं उससे बहुत ज़्यादा बच्चे पैदा करते हैं (अति-उत्पादन)।
- संसाधन सीमित हैं, इसलिए जीवन संघर्ष होता है।
- जीवों में विभिन्नता है; कुछ वंशागत है।
- उपयोगी विभिन्नता वाले ज़्यादा बचते और बच्चे देते हैं (योग्यता = प्रजनन सफलता)।
- कई पीढ़ियों में उपयोगी विभिन्नता फैलती है और नई जातियाँ बनती हैं (शाखित अवतरण)।
ह्यूगो डी व्रीस ने ईवनिंग प्रिमरोज़ पर काम करके कहा कि बड़े अचानक बदलाव, उत्परिवर्तन, विकास करते हैं (साल्टेशन), डार्विन की छोटी दिशात्मक विभिन्नताओं से अलग।
आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत
डार्विन जीन के बारे में नहीं जानते थे। आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत डार्विन के प्राकृतिक वरण को मेंडल की आनुवंशिकी और आबादी अध्ययन से जोड़ता है। विकास = पीढ़ियों में आबादी के जीन पूल में अलील आवृत्तियों का बदलना।
पाँच कारक अलील आवृत्ति बदलते हैं: उत्परिवर्तन, आनुवंशिक पुनर्योजन, जीन प्रवाह (प्रवासन), आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण। फिर पृथक्करण (भौगोलिक या जनन) समूहों को अलग रखता है और नई जातियाँ बनती हैं।
उत्परिवर्तन, पुनर्योजन और प्राकृतिक वरण के प्रकार
- उत्परिवर्तन: DNA बदलने से नया अलील आता है। यह हर नई विभिन्नता का पहला स्रोत है। लेडरबर्ग के प्रतिकृति पट्टिका प्रयोग ने दिखाया कि जीवाणुओं में उत्परिवर्तन दवा से मिलने से पहले ही होते हैं; दवा बस उन्हें चुनती है।
- पुनर्योजन: अर्धसूत्रण में जीन विनिमय और यादृच्छिक निषेचन अलीलों के नए मेल बनाते हैं।
प्राकृतिक वरण के तीन प्रकार (घंटी जैसे ग्राफ़ में सोचो)
- स्थायीकारी: औसत रूप को लाभ; दोनों किनारे हटते हैं। ग्राफ़ पतला और ऊँचा। उदाहरण: 3–3.5 kg के शिशु सबसे अच्छे बचते हैं।
- दिशात्मक: एक किनारे को लाभ; चोटी खिसकती है। उदाहरण: कारख़ानों के पास गहरे पतंगे, एंटीबायोटिक प्रतिरोध।
- विदारक: दोनों किनारों को लाभ, बीच वाले हटते हैं; दो चोटियाँ बनती हैं। उदाहरण: द्वीप पर केवल छोटे या कठोर बीज हों तो बहुत छोटी या बहुत बड़ी चोंच वाले पक्षी।
जीन प्रवाह और आनुवंशिक विचलन
जीन प्रवाह (प्रवासन): जीव एक आबादी से दूसरी में जाते हैं और अलील साथ ले जाते हैं। इससे आबादियाँ एक जैसी होती हैं।
आनुवंशिक विचलन: संयोग से अलील आवृत्ति का बदलना, छोटी आबादी में सबसे ज़्यादा। इसका उपयोगिता से कोई लेना-देना नहीं।
- संस्थापक प्रभाव: कुछ जीव नई आबादी शुरू करते हैं (जैसे द्वीप पर); संयोग से उनके अलील आम हो जाते हैं।
- बॉटलनेक प्रभाव: आपदा में ज़्यादातर मर जाते हैं; बचे हुए अलीलों का छोटा, संयोग वाला सेट रखते हैं (जैसे चीतों में बहुत कम विविधता)।
हार्डी–वाइनबर्ग सिद्धांत
बड़ी आबादी में यादृच्छिक संगम हो, और उत्परिवर्तन, जीन प्रवाह, विचलन या वरण न हो, तो अलील और जीनोटाइप आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी वही रहती हैं। इसे आनुवंशिक संतुलन कहते हैं।
अलील A की आवृत्ति p और a की q हो तो:
- p + q = 1
- (p + q)² = p² + 2pq + q² = 1, जहाँ p² = AA, 2pq = Aa, q² = aa।
प्रश्न कैसे हल करें
- अप्रभावी (aa) भाग से q² निकालो।
- q = √q²। फिर p = 1 − q।
- वाहक (Aa) = 2pq। प्रभावी समयुग्मजी (AA) = p²।
देखी गई संख्याएँ इन अनुमानों से अलग हों, तो आबादी में विकास हो रहा है: पाँच में से कोई कारक काम कर रहा है।
अनुकूली विकिरण
जब एक पूर्वज समूह कई अलग आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाता है, हर एक अपनी जगह के अनुकूल, तो यह अनुकूली विकिरण है (अपसारी विकास का एक रूप)।
- डार्विन की फिंच (गैलापागोस): बीज खाने वाले पूर्वज से कीट खाने वाली और शाकाहारी फिंच बनीं, अलग चोंच के साथ।
- ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी: एक पूर्वज से कंगारू, कोआला, वॉम्बैट, शिशुधानी छछूँदर, तस्मानियाई भेड़िया, शुगर ग्लाइडर आदि।
- जब अलग महाद्वीपों में दो अलग विकिरण एक जैसे दिखने वाले रूप बनाते हैं (अपरा भेड़िया और तस्मानियाई भेड़िया, उड़ने वाली गिलहरी और उड़ने वाला फैलेंजर), तो यह अभिसारी विकास दिखाता है।
जीवन का छोटा इतिहास
जबड़ा-रहित मछली (लगभग 350 मिलियन वर्ष पूर्व) → सीलाकैंथ जैसी पालि-पख मछली → उभयचर → सरीसृप (लगभग 200 मिलियन वर्ष पूर्व, डायनासोर) → पक्षी और स्तनधारी। पौधे पानी से ज़मीन पर आए: समुद्री शैवाल → फ़र्न → अनावृतबीजी → आवृतबीजी।
मानव विकास
| रूप | समय (वर्ष पहले) | मस्तिष्क (cc) | मुख्य बात |
|---|---|---|---|
| ड्रायोपिथेकस, रामापिथेकस | ~1.5 करोड़ | — | बालों वाले, कपि जैसे चलते; रामापिथेकस ज़्यादा मनुष्य जैसा |
| ऑस्ट्रेलोपिथेकस | ~20 लाख | ~450 | पूर्वी अफ़्रीका के घास के मैदान, पत्थर के हथियार, फल खाते |
| होमो हैबिलिस | ~20 लाख | 650–800 | पहला मनुष्य जैसा जीव, शायद मांस नहीं खाता था |
| होमो इरेक्टस | ~15 लाख | ~900 | मांस खाता था |
| निएंडरथल मानव | 1,00,000–40,000 | ~1400 | मृतकों को दफ़नाता था, निकट पूर्व और मध्य एशिया में |
| होमो सेपियंस | 75,000–10,000 | ~1450 | अफ़्रीका में उत्पन्न, महाद्वीपों में फैला, ~18,000 साल पहले गुफा चित्र, ~10,000 साल पहले खेती |
मनुष्य आज के चिंपैंज़ी से नहीं बने; दोनों का एक साझा पूर्वज है। मुख्य रुझान: बड़ा मस्तिष्क, सीधा चलना, छोटे जबड़े और दाँत, औज़ार, भाषा और संस्कृति।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- p + q = 1
- p² + 2pq + q² = 1 (AA + Aa + aa)
- q = √(अप्रभावी aa जीवों का भाग)
- वाहक (Aa) आवृत्ति = 2pq
- A की अलील आवृत्ति = (2 × AA + Aa) ÷ (2 × कुल जीव)
हल किए गए उदाहरण
1. एक आबादी में p = 0.7 है। q और AA, Aa, aa के भाग निकालो।
चरण 1: q = 1 − 0.7 = 0.3। चरण 2: AA = p² = 0.49। चरण 3: Aa = 2pq = 0.42। चरण 4: aa = q² = 0.09। जाँच: 0.49 + 0.42 + 0.09 = 1।
2. 1000 लोगों में 90 जीभ नहीं मोड़ सकते (अप्रभावी, aa)। q और p निकालो।
चरण 1: q² = 90/1000 = 0.09। चरण 2: q = √0.09 = 0.3। चरण 3: p = 0.7।
3. पिछले उदाहरण में 1000 में कितने वाहक (Aa) हैं?
चरण 1: 2pq = 2 × 0.7 × 0.3 = 0.42। चरण 2: 0.42 × 1000 = 420 वाहक।
4. आबादी में 360 AA, 480 Aa और 160 aa हैं। A की अलील आवृत्ति निकालो।
चरण 1: कुल अलील = 2 × 1000 = 2000। चरण 2: A अलील = 2 × 360 + 480 = 1200। चरण 3: p = 1200/2000 = 0.6, तो q = 0.4।
5. क्या 360 AA : 480 Aa : 160 aa वाली आबादी हार्डी–वाइनबर्ग संतुलन में है?
चरण 1: p = 0.6, q = 0.4 से अपेक्षित AA = 0.36, Aa = 0.48, aa = 0.16। चरण 2: देखे गए 0.36, 0.48, 0.16 वही हैं। उत्तर: हाँ, संतुलन में है।
6. एक अप्रभावी विकार 10,000 में 1 शिशु में होता है। कितने लोग वाहक हैं?
चरण 1: q² = 1/10000, q = 0.01। चरण 2: p = 0.99। चरण 3: 2pq = 2 × 0.99 × 0.01 = 0.0198 ≈ 2%, लगभग 50 में 1।
7. आबादी में 16% aa थे। अगले साल 9% aa हैं, कोई प्रवासन नहीं। इससे क्या पता चलता है?
चरण 1: q, √0.16 = 0.4 से √0.09 = 0.3 हो गया। चरण 2: अलील आवृत्ति बदली, तो संतुलन नहीं है। चरण 3: aa के विरुद्ध वरण (या छोटी आबादी में विचलन) काम कर रहा है: आबादी विकसित हो रही है।
आम गलतियाँ
- "योग्यतम की उत्तरजीविता" का मतलब सबसे ताक़तवर समझना। योग्यता = ज़्यादा बच्चे छोड़ना, ताक़त नहीं।
- प्रभावी भाग का वर्गमूल लेकर p निकालना। हमेशा अप्रभावी aa से शुरू करो: q = √q²।
- सोचना कि मनुष्य चिंपैंज़ी से बने। दोनों का साझा पूर्वज है।
- समजात और समरूप अंग मिलाना। एक ढाँचा, अलग काम = समजात (अपसारी); अलग ढाँचा, एक काम = समरूप (अभिसारी)।