जीन पूल और एलील आवृत्ति
समष्टि (population) एक जगह रहने वाले और आपस में प्रजनन करने वाले एक ही जाति के जीवों का समूह है। इसका जीन पूल सभी सदस्यों के हर जीन के सारे एलील हैं।
एलील आवृत्ति = उस एलील की प्रतियाँ ÷ उस जीन की कुल प्रतियाँ। हर द्विगुणित जीव में 2 प्रतियाँ होती हैं।
उदाहरण: 10 पौधे: 4 AA, 4 Aa, 2 aa। A की प्रतियाँ = 4×2 + 4 = 12; a की = 4 + 2×2 = 8; कुल = 20। तो p = 12/20 = 0.6, q = 0.4। हमेशा p + q = 1।
जैविक जाति अवधारणा में जाति वह समूह है जो आपस में प्रजनन कर उपजाऊ संतान पैदा कर सके, इसलिए एक जाति का एक जीन पूल होता है। (यह अलैंगिक जीवों और जीवाश्मों पर ठीक लागू नहीं होती।)
हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत और गणना
1908 में जी. एच. हार्डी और विल्हेम वाइनबर्ग ने दिखाया कि आदर्श आबादी में एलील और जीनोटाइप आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी नहीं बदलतीं। यादृच्छिक संगम पूल से दो एलील निकालने जैसा है:
p² + 2pq + q² = 1 (AA + Aa + aa)
पाँच शर्तें
- बहुत बड़ी आबादी (विचलन नहीं)
- यादृच्छिक संगम
- प्रवास नहीं (जीन प्रवाह नहीं)
- उत्परिवर्तन नहीं
- प्राकृतिक चयन नहीं
हल करने का तरीका
अप्रभावी लक्षण से शुरू कीजिए, क्योंकि केवल aa को पहचाना जा सकता है: q² = अप्रभावी लक्षण वालों का अंश → q = √q² → p = 1 − q → वाहक = 2pq।
अगर देखी गई संख्याएँ p², 2pq, q² से साफ़ अलग हों, तो कोई शर्त टूटी है और आबादी विकसित हो रही है। अंतर संयोग से बड़ा है या नहीं, इसके लिए काई-वर्ग (chi-square) परीक्षण होता है।
एलील आवृत्ति कौन बदलता है
- आनुवंशिक विचलन (genetic drift): संयोग से बदलाव, छोटी आबादी में सबसे ज़्यादा। बॉटलनेक प्रभाव: आपदा के बाद थोड़े जीव बचे (जैसे चीता, जिनमें विविधता बहुत कम है)। संस्थापक प्रभाव: कुछ जीव नई आबादी शुरू करें (जैसे अलग-थलग द्वीपों या समुदायों में कुछ रोग ज़्यादा)।
- जीन प्रवाह: प्रवासी एलील लाते या ले जाते हैं; आबादियाँ एक जैसी बनती हैं।
- उत्परिवर्तन: नए एलील का मूल स्रोत; अकेले धीमा।
- प्राकृतिक चयन: जीने और प्रजनन में मददगार एलील बढ़ते हैं। यह दिशात्मक, स्थायीकारी या विदारक हो सकता है।
- चुनकर संगम: जैसे मिलते-जुलते साथी चुनना या अंतःप्रजनन; समयुग्मजी बढ़ते हैं।
नई जातियाँ कैसे बनती हैं: जाति-उद्भव
जाति-उद्भव (speciation) यानी एक जीन पूल का दो ऐसे पूलों में बँटना जो फिर न मिल सकें। कुंजी है प्रजनन पृथक्करण:
- युग्मनज-पूर्व बाधाएँ: अलग आवास, अलग प्रजनन ऋतु, अलग प्रणय-व्यवहार, अंगों का मेल न होना, युग्मक न जुड़ना।
- युग्मनज-पश्च बाधाएँ: संकर मर जाते हैं या बाँझ होते हैं (घोड़ा × गधा = खच्चर)।
एलोपैट्रिक ("अलग वतन")
भौगोलिक बाधा (नदी का रास्ता बदलना, पहाड़ उठना, समुद्र-स्तर, द्वीप पर बसना) आबादियों को अलग करती है। उत्परिवर्तन, विचलन और अलग चयन से जीन पूल दूर होते जाते हैं। उदाहरण: गहरी घाटी के दोनों किनारों की गिलहरियाँ।
सिम्पैट्रिक ("एक वतन")
एक ही जगह नई जाति बनती है। पौधों में अक्सर बहुगुणिता (polyploidy) से: गलती से गुणसूत्र सेट दुगने (2n → 4n), और 4n पौधा 2n जनकों से उपजाऊ संतान नहीं बना पाता। गेहूँ बहुगुणिता से बना। जंतु आवास या साथी-पसंद से बँट सकते हैं, जैसे अफ़्रीकी झीलों की सिक्लिड मछलियाँ।
अनुकूली विकिरण, अपसरण और अभिसरण
अपसारी विकास: संबंधित जातियाँ अलग जीवन-शैली के अनुसार अलग बनती हैं। उनमें समजात अंग (एक मूल, अलग काम) रहते हैं, जैसे मनुष्य, व्हेल और चमगादड़ के अग्रपाद।
अनुकूली विकिरण: एक पूर्वज का तेज़ी से कई निचों में फैलना: गैलापागोस के डार्विन फ़िंच (बीज तोड़ने वाली, कीट खाने वाली चोंच) या ऑस्ट्रेलिया के शिशुधानी।
अभिसारी विकास: असंबंधित जातियाँ एक जैसी समस्या के कारण एक जैसे लक्षण विकसित करती हैं। ये समरूप अंग (अलग मूल, एक काम) हैं: पक्षी और कीट के पंख, शार्क और डॉल्फ़िन का धारारेखी शरीर, ऑक्टोपस और मनुष्य की आँख।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- p + q = 1
- p² + 2pq + q² = 1 (AA + Aa + aa)
- एलील आवृत्ति = एलील की प्रतियाँ ÷ (2 × जीवों की संख्या)
- q = √(अप्रभावी लक्षण का अंश); p = 1 − q; वाहक = 2pq
- शर्तें: बड़ी आबादी, यादृच्छिक संगम, प्रवास नहीं, उत्परिवर्तन नहीं, चयन नहीं
- एलोपैट्रिक = भौगोलिक बाधा; सिम्पैट्रिक = एक ही जगह (बहुगुणिता, व्यवहार, आवास)
- अपसरण → समजात अंग; अभिसरण → समरूप अंग
हल किए गए उदाहरण
1. 500 लोगों में 320 AA, 160 Aa और 20 aa हैं। p और q निकालिए।
A की प्रतियाँ = 2×320 + 160 = 800। कुल = 2×500 = 1000। p = 0.8। q = 1 − 0.8 = 0.2। (जाँच: a = 160 + 40 = 200 → 0.2।)
2. क्या ऊपर की आबादी हार्डी-वाइनबर्ग संतुलन में है?
अपेक्षित AA = 0.64 × 500 = 320; Aa = 0.32 × 500 = 160; aa = 0.04 × 500 = 20। देखा = अपेक्षित, इसलिए हाँ, संतुलन में है।
3. किसी क्षेत्र में ऐल्बिनिज़्म (अप्रभावी) 400 में से 1 व्यक्ति में है। वाहक कितने अंश हैं?
q² = 1/400 = 0.0025 → q = 0.05, p = 0.95। वाहक = 2pq = 2 × 0.95 × 0.05 = 0.095, लगभग 9.5% (करीब 10 में 1)।
4. 1,000 भेड़ों में 90 की ऊन काली (अप्रभावी bb) है। कितनी विषमयुग्मजी होंगी?
q² = 0.09 → q = 0.3, p = 0.7। 2pq = 0.42 → 0.42 × 1000 = 420 भेड़ें।
5. अगली पीढ़ी में उसी झुंड में p = 0.75 है। इसका क्या मतलब?
p 0.7 से 0.75 हुआ, आवृत्ति स्थिर नहीं: कोई शर्त टूटी है (जैसे किसान सफ़ेद भेड़ें चुनते हैं = चयन)। आबादी विकसित हो रही है।
6. तूफ़ान के बाद द्वीप की बड़ी आबादी के केवल 5 पक्षी बचे; 4 में केवल एलील R है। बिना फ़ायदे के भी R स्थिर क्यों हो सकता है?
यह बॉटलनेक है। इतने कम जीवों में संयोग तय करता है कि कौन-से एलील आगे जाएँ (विचलन)। R पहले से ऊँची आवृत्ति (लगभग 0.8+) पर है, इसलिए संयोग से 1.0 तक पहुँच सकता है और बाकी एलील खो सकते हैं, बिना किसी चयन के।
आम गलतियाँ
- प्रभावी लक्षण से q निकालना: हमेशा अप्रभावी लक्षण से शुरू करें, q² = aa का अंश।
- वर्गमूल लेना भूलना: q² = 0.16 हो तो q = 0.4, 0.16 नहीं।
- यह मानना कि प्रभावी एलील अपने-आप बढ़ते हैं; हार्डी-वाइनबर्ग में प्रभाविता आवृत्ति नहीं बदलती।
- एलोपैट्रिक (बाधा से अलग) और सिम्पैट्रिक (एक ही जगह) को मिला देना।