गुणसूत्र, डीएनए और जीन
हर जीवित कोशिका में एक कंट्रोल रूम होता है, जिसे केंद्रक (नाभिक) कहते हैं। उसके अंदर धागे जैसे पैकेट होते हैं, जिन्हें गुणसूत्र (क्रोमोसोम) कहते हैं। कोशिका के बँटने से ठीक पहले ये सबसे साफ़ दिखते हैं।
एक गुणसूत्र डीएनए के एक बहुत लंबे अणु से बना होता है। वह प्रोटीन पर लिपटा और कई बार मुड़ा होता है, ताकि छोटी-सी जगह में आ जाए। एक इंसानी कोशिका का डीएनए सीधा करें तो लगभग 2 मीटर लंबा होगा।
जीन डीएनए का छोटा टुकड़ा है जिसमें एक निर्देश लिखा होता है, जैसे एक प्रोटीन कैसे बनाना है। जीन रक्त समूह या बालों के प्रकार जैसे लक्षण तय करते हैं।
आकार का क्रम: जीन < डीएनए अणु < गुणसूत्र < केंद्रक < कोशिका। एक गुणसूत्र पर सैकड़ों से हज़ारों जीन होते हैं।
गुणसूत्रों की संख्या और जोड़े
हर प्रजाति की शरीर-कोशिका में गुणसूत्रों की अपनी तय संख्या होती है।
- मनुष्य: 46 (23 जोड़े)
- फल-मक्खी: 8 (4 जोड़े)
- मटर: 14 (7 जोड़े)
- धान: 24 (12 जोड़े)
- कुत्ता: 78 (39 जोड़े)
ज़्यादा संख्या का मतलब ज़्यादा समझदार या जटिल जीव नहीं है। यह सिर्फ़ गिनती है।
मनुष्य में 22 जोड़े लड़के और लड़की दोनों में एक जैसे होते हैं। इन्हें अलिंग गुणसूत्र (ऑटोसोम) कहते हैं। 23वाँ जोड़ा लिंग गुणसूत्र है: लड़की में XX, लड़के में XY।
जोड़े के दोनों गुणसूत्र समजात (होमोलोगस) कहलाते हैं। उनका आकार, रूप और जीन की जगहें एक जैसी होती हैं। एक माँ से आता है, एक पिता से।
अंडाणु और शुक्राणु से जीन आगे कैसे जाते हैं
शरीर-कोशिका में 46 गुणसूत्र हैं। अगर अंडाणु और शुक्राणु में भी 46 होते, तो बच्चे में 92 हो जाते और अगले बच्चे में 184। ऐसा नहीं चल सकता।
इसलिए जनन कोशिकाएँ (युग्मक) एक खास कोशिका-विभाजन से बनती हैं, जिसे अर्धसूत्री विभाजन (मीओसिस) कहते हैं। यह संख्या आधी कर देता है। हर अंडाणु या शुक्राणु को हर जोड़े से एक गुणसूत्र मिलता है, यानी 23।
निषेचन में अंडाणु (23) और शुक्राणु (23) मिलकर बच्चे की पहली कोशिका, युग्मनज (ज़ाइगोट) बनाते हैं। उसमें 46 गुणसूत्र, 23 जोड़ों में होते हैं। आधे जीन माँ के, आधे पिता के।
जोड़े का कौन-सा गुणसूत्र किस अंडाणु में जाएगा, यह संयोग की बात है। 23 जोड़ों से 80 लाख से ज़्यादा तरह के अंडाणु बन सकते हैं, शुक्राणु भी उतने। इसीलिए भाई-बहन अलग होते हैं।
बच्चे का लिंग पिता के शुक्राणु से तय होता है। अंडाणु में हमेशा X होता है। शुक्राणु में X या Y होता है। X + X = लड़की, X + Y = लड़का। संभावना लगभग आधी-आधी है।
जीन गुणसूत्र पर होते हैं: सटन और मॉर्गन
मेंडल (1860 के दशक) ने "कारकों" की बात की, पर उन्हें पता नहीं था कि वे कहाँ हैं। 1902 में वॉल्टर सटन (और थियोडोर बोवेरी) ने देखा कि गुणसूत्र ठीक मेंडल के कारकों जैसा व्यवहार करते हैं: वे जोड़ों में होते हैं, युग्मकों में अलग हो जाते हैं और निषेचन में फिर जुड़ते हैं। इसलिए कारक गुणसूत्रों पर ही होने चाहिए।
लगभग 1910 में थॉमस हंट मॉर्गन ने फल-मक्खी से यह साबित किया। लाल आँख वाली मक्खियों में उन्हें एक सफ़ेद आँख वाला नर मिला। उसकी संतानों में सफ़ेद आँख मक्खी के लिंग के साथ-साथ आगे गई। इससे पता चला कि आँख के रंग का जीन X गुणसूत्र पर है। यह पहला साफ़ प्रमाण था कि जीन किसी खास गुणसूत्र का हिस्सा होता है।
जीन एक कतार में होते हैं
जीन गुणसूत्र पर धागे में मोतियों की तरह एक के बाद एक लगे होते हैं। हर जीन की अपनी तय जगह होती है, जिसे स्थान (लोकस) कहते हैं। जोड़े के दोनों गुणसूत्रों पर एक ही लोकस पर एक ही जीन होता है, पर उसके रूप (विकल्पी, एलील) अलग हो सकते हैं।
एक ही गुणसूत्र पर पास-पास के जीन अक्सर साथ-साथ चलते हैं। मॉर्गन के शिष्य आल्फ़्रेड स्टर्टवेंट ने इसी बात का उपयोग किया: दो जीन जितनी ज़्यादा बार अलग होते हैं, वे उतनी दूर हैं। ऐसी गिनतियों से उन्होंने पहला जीन-नक्शा बनाया, एक सीधी रेखा जिस पर जीन क्रम से रखे थे।
आज वैज्ञानिक इंसान के पूरे डीएनए के अक्षर पढ़ लेते हैं। इसे जीनोम अनुक्रमण (सीक्वेंसिंग) कहते हैं।
करके देखो: बच्चे की कोशिका बनाओ
ऊपर का 3D इस्तेमाल करो। चरण 6 पर "निषेचन करो" दबाओ, फिर "फिर से मिलाओ" पाँच बार दबाओ। हर बार लड़का या लड़की लिखो। लगभग आधे लड़के आने चाहिए। फिर दोस्त के साथ 10 जोड़ों के लिए सिक्का उछालो: चित यानी "गुलाबी वाला लो", पट यानी "नीला वाला लो"। देखो तुम्हारे दोनों युग्म कितने अलग हैं। घर पर: 23 गुलाबी और 23 नीली कागज़ की पट्टियाँ काटो, जोड़े बनाओ और हर जोड़े से एक उठाकर "अंडाणु" बनाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मनुष्य की शरीर-कोशिका: 2n = 46 (23 जोड़े)
- युग्मक (अंडाणु या शुक्राणु): n = 23
- n + n = 2n (निषेचन: 23 + 23 = 46)
- अलिंग गुणसूत्र: 22 जोड़े; लिंग गुणसूत्र: 1 जोड़ा (XX लड़की, XY लड़का)
- एक व्यक्ति से बनने वाले युग्मक: 2^23 = 83,88,608 (क्रॉसिंग ओवर के बिना)
हल किए गए उदाहरण
1. फल-मक्खी की शरीर-कोशिका में 8 गुणसूत्र हैं। उसके अंडाणु में कितने होंगे? कितने जोड़े हैं?
अंडाणु में आधे: 8 ÷ 2 = 4 गुणसूत्र। शरीर-कोशिका में 4 जोड़े हैं।
2. माँ 23 गुणसूत्र देती है। पिता से बच्चे को कितने मिलेंगे और कुल कितने?
पिता से भी 23। कुल = 23 + 23 = 46।
3. छोटे से बड़े के क्रम में रखो: गुणसूत्र, जीन, कोशिका, केंद्रक, डीएनए अणु।
जीन, डीएनए अणु, गुणसूत्र, केंद्रक, कोशिका।
4. मटर के पौधे की पत्ती की कोशिका में 14 गुणसूत्र हैं। परागकण (युग्मक) में कितने? संयोग से एक पौधा कितने अलग सेट बना सकता है (2^n)?
युग्मक: 14 ÷ 2 = 7। अलग सेट: 2^7 = 128।
5. एक बच्चे की कोशिका में 46 की जगह 47 गुणसूत्र हैं। गड़बड़ी किस चरण में हुई होगी?
सबसे संभव है अर्धसूत्री विभाजन में, जब अंडाणु या शुक्राणु बना: उस युग्मक में 23 की जगह 24 आ गए। निषेचन के बाद (24 + 23) बच्चे की कोशिकाओं में 47 हैं।
6. एक ही माता-पिता के पहले लड़की और फिर लड़का क्यों हो सकता है?
माँ के अंडाणु में हमेशा X होता है। पिता के शुक्राणु में संयोग से X या Y होता है। X वाला शुक्राणु लड़की देता है, Y वाला लड़का। इसलिए हर बच्चे में दोनों की लगभग 50% संभावना है।
आम गलतियाँ
- शब्द मिलाना: जीन डीएनए का छोटा हिस्सा है; गुणसूत्र डीएनए का लंबा पैकेट है जिस पर कई जीन हैं।
- अंडाणु में 46 गुणसूत्र कहना। युग्मक में 23 (आधे) होते हैं; 46 सिर्फ़ युग्मनज में होते हैं।
- यह सोचना कि ज़्यादा गुणसूत्र मतलब ज़्यादा विकसित जीव। कुत्ते में 78 हैं, इंसान में 46।
- यह मानना कि माँ बच्चे का लिंग तय करती है। शुक्राणु में X या Y होता है, इसलिए पिता का शुक्राणु तय करता है।