China 八年级(初二) Biology
अध्याय: 8
1. U4 Ch.6 Regulation of human life activities
Sensing the environment (eye, ear) · Nervous regulation; reflex arc · Movement under nervous control (muscles, bones, joints) · Hormonal regulation (thyroid, insulin, sex hormones)
- ज्ञानेंद्रियाँ – ज्ञानेंद्रियाँ हमें आसपास के बदलाव (उद्दीपन) पहचानने देती हैं। आँख प्रकाश, कान ध्वनि और संतुलन, नाक गंध, जीभ स्वाद और त्वचा स्पर्श, दबाव, गरमी, ठंडक व दर्द पहचानती है। हर इंद्रिय में ग्राही कोशिकाएँ उद्दीपन को तंत्रिका संकेत में बदलती हैं। संकेत संवेदी तंत्रिका से मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक जाता है, जो मांसपेशी को आदेश भेजता है: यही अनुक्रिया है।
- तंत्रिका तंत्र, प्रतिवर्ती क्रिया और मानव मस्तिष्क – तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन) संदेश को विद्युत आवेग के रूप में ले जाती हैं और सिनैप्स नाम के छोटे अंतर को रसायनों से पार करती हैं। झटपट बचाव वाली क्रियाएँ (प्रतिवर्ती क्रिया) मेरुरज्जु सँभालता है; सोचना और नियंत्रण मस्तिष्क करता है, जिसे खोपड़ी और तरल की गद्दी बचाती है।
- कंकाल तंत्र – कंकाल शरीर का ढाँचा है; बड़े व्यक्ति में 206 हड्डियाँ होती हैं। इसके पाँच मुख्य कार्य हैं: सहारा और आकार, सुरक्षा, गति (मांसपेशियों के साथ), लाल अस्थि-मज्जा में रक्त कोशिकाएँ बनाना और कैल्शियम जैसे खनिज जमा करना। हड्डियाँ जोड़ों (संधि) पर मिलती हैं: कब्ज़ा जोड़ (कोहनी, घुटना) एक दिशा में मुड़ता है, कंदुक-खल्लिका जोड़ (कंधा, कूल्हा) हर दिशा में घूमता है। स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से, कंडरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, उपास्थि सिरों पर गद्दी है। मांसपेशियाँ सिर्फ़ खींचती हैं, इसलिए जोड़ी में काम करती हैं, जैसे बाइसेप्स और ट्राइसेप्स।
- जंतुओं में हॉर्मोन: अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और पुनर्भरण – अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हॉर्मोन नाम के रासायनिक संदेशवाहक सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त उन्हें पूरे शरीर में ले जाता है, पर वे केवल लक्ष्य कोशिकाओं पर असर करते हैं। हॉर्मोन वृद्धि, उपापचय, आपातकालीन प्रतिक्रिया, रक्त शर्करा और यौवनारंभ नियंत्रित करते हैं, और उनकी मात्रा पुनर्भरण (फ़ीडबैक) से ठीक रहती है।
2. U4 Ch.7 Healthy living
Infectious diseases and prevention · Immunity and vaccination programme · Medicines and first aid (CPR, bleeding) · Healthy lifestyle (tobacco, alcohol, drugs, chronic disease) · Project: health promotion show
- संक्रामक रोग: रोगाणु कैसे फैलते हैं और हम उन्हें कैसे रोकें – संक्रामक (संचारी) रोग एक बहुत छोटे जीव से होता है, जिसे रोगाणु (pathogen) कहते हैं: बैक्टीरिया, वायरस, कवक या प्रोटिस्ट। यह हवा, पानी-खाना, छूने या मच्छर जैसे वाहक से एक व्यक्ति से दूसरे में जाता है। शरीर त्वचा, बलगम, पेट के अम्ल और श्वेत रक्त कोशिकाओं से लड़ता है। टीका प्रतिरक्षा तंत्र को पहले से तैयार कर देता है। हाथ धोना, साफ पानी, अच्छी तरह पका खाना, मच्छरदानी और बीमार होने पर घर रहना फैलाव कम करते हैं।
- प्रतिरक्षा तंत्र: शरीर रोगाणुओं से कैसे लड़ता है – रोगाणु (रोगजनक) संक्रामक रोग करते हैं। शरीर में रक्षा की तीन पंक्तियाँ हैं: अवरोध (त्वचा, श्लेष्मा, अम्ल), तेज़ सामान्य (सहज) प्रतिरक्षा (सूजन, बुखार, भक्षक कोशिकाएँ) और धीमी पर विशिष्ट (उपार्जित) प्रतिरक्षा (B कोशिकाएँ एंटीबॉडी बनाती हैं, T कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाएँ मारती हैं)। स्मृति कोशिकाएँ दूसरे हमले को जल्दी रोकती हैं। टीका सुरक्षित रूप से स्मृति बनाता है। गड़बड़ी: एलर्जी, स्व-प्रतिरक्षी रोग, प्रतिरक्षा की कमी (जैसे HIV)।
- प्राथमिक चिकित्सा: आपात स्थिति में क्या करें – प्राथमिक चिकित्सा वह मदद है जो प्रशिक्षित मदद आने तक घायल या बीमार व्यक्ति को दी जाती है। लक्ष्य: जान बचाना, हालत बिगड़ने से रोकना, ठीक होने में मदद। DRABC अपनाएँ: ख़तरा, प्रतिक्रिया, श्वास मार्ग, साँस, CPR/कॉल। बेहोश पर साँस चल रही → करवट स्थिति। सामान्य साँस नहीं → CPR 30:2, प्रति मिनट 100-120 दबाव, 5-6 सेमी गहरा, और AED। ख़ून → सीधा दबाव। जलना → 20 मिनट बहता पानी। गला अटकना → पीठ थपकी और पेट धक्के। मोच → RICE।
- स्वस्थ जीवनशैली: रोज़ की आदतें जो तुम्हें ठीक रखें – स्वस्थ जीवनशैली रोज़ की अच्छी आदतों का नाम है: पाँच भोजन-समूहों वाला संतुलित आहार, भरपूर पानी, स्कूली बच्चों के लिए 9–11 घंटे और किशोरों के लिए लगभग 8–10 घंटे नींद, रोज़ कम से कम 60 मिनट खेल-कूद, सही मुद्रा, साफ-सुरक्षित भोजन, और तंबाकू, शराब व नशे से दूरी। इनसे टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसे जीवनशैली रोगों का खतरा घटता है।
3. U5 Ch.1 Ecosystems
Organisms and environment interact · Ecosystem structure and function; food chains and webs · The biosphere · Project: sealed ecosphere bottle
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
- जैवमंडल (Biosphere) – जैवमंडल पृथ्वी का वह भाग है जहाँ जीवन है। यह एक पतली परत है जहाँ स्थलमंडल (चट्टान और मिट्टी), जलमंडल (पानी) और वायुमंडल (हवा) मिलते हैं, समुद्र तल से लगभग 10 km ऊपर से लगभग 11 km नीचे तक। पृथ्वी के सभी पारितंत्र मिलकर जैवमंडल बनाते हैं। इसमें ऊर्जा एक ही दिशा में बहती है: सूर्य → पौधे → जंतु → ऊष्मा, जबकि कार्बन, पानी, नाइट्रोजन जैसे पदार्थ चक्र में घूमते हैं। जीव बाकी मंडलों को भी बदलते हैं: ऑक्सीजन बनाते हैं, मिट्टी बनाते हैं, कार्बन जमा करते हैं। आज मनुष्य इसे तेज़ी से बदल रहा है, इसलिए इसकी रक्षा ज़रूरी है।
4. U5 Ch.2 Ecological security
Human impact on the environment · Protecting ecological security (invasive species etc.)
- पर्यावरणीय समस्याएँ: कारण, प्रभाव और समाधान – पर्यावरणीय समस्याएँ हवा, पानी, ज़मीन, जलवायु और जीवों में होने वाले हानिकारक बदलाव हैं, जो ज़्यादातर इंसानों के कामों से होते हैं। मुख्य समस्याएँ हैं: वायु, जल और भूमि प्रदूषण, कचरा, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि और संसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल। ये लोगों की संख्या और हर व्यक्ति की खपत (पारिस्थितिक पदचिह्न) के साथ बढ़ती हैं। साफ़ ऊर्जा, बचत, रीसाइक्लिंग, गंदे पानी की सफ़ाई, जंगलों की रक्षा और अच्छे कानूनों से हम इन्हें घटा सकते हैं।
- पारिस्थितिक सुरक्षा: आक्रामक प्रजातियाँ और प्रकृति की रक्षा – पारिस्थितिक सुरक्षा का मतलब है पारितंत्रों को स्वस्थ रखना ताकि वे हमें साफ़ पानी, भोजन और हवा देते रहें। आक्रामक प्रजातियाँ, जो दूसरी जगह से आकर तेज़ी से फैलती हैं क्योंकि उनके प्राकृतिक शत्रु नहीं होते, बड़ा खतरा हैं। हम प्रकृति को उसके घर में (आरक्षित क्षेत्र, उद्यान: स्व-स्थाने), घर से दूर (बीज बैंक, चिड़ियाघर: बाह्य-स्थाने) और शिकार व व्यापार के खिलाफ़ कानूनों से बचाते हैं।
5. U6 Ch.1 Reproduction
Asexual reproduction · Project: cuttings or grafting · Sexual reproduction (plants, insects, amphibians, birds) · Project: build a device to raise an animal
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
- जीव जनन कैसे करते हैं? DNA प्रतिकृति और अलैंगिक जनन – जनन में DNA की प्रतिकृति (कॉपी) बनती है। कॉपी कभी पूरी तरह एक जैसी नहीं होती; यही छोटे बदलाव (विभिन्नताएँ) बदलते माहौल में प्रजाति को बचाते हैं। अलैंगिक जनन में एक ही जनक विखंडन, खंडन, पुनरुद्भवन, मुकुलन, कायिक प्रवर्धन या बीजाणु से नए जीव बनाता है।
- पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन – लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक मिलते हैं, जिससे दो जनकों का DNA मिलता है और विभिन्नता बढ़ती है। फूल में परागकोश का पराग वर्तिकाग्र पर पहुँचता है (परागण), परागनलिका बीजांड तक बढ़ती है और नर युग्मक अंडकोशिका से मिलता है (निषेचन)। युग्मनज भ्रूण बनता है, बीजांड बीज और अंडाशय फल।
- जंतुओं में जनन – जंतु दो तरह से बच्चे पैदा करते हैं। अलैंगिक जनन में एक ही जनक अपनी प्रति बनाता है (हाइड्रा में मुकुलन, टूटकर बढ़ना, या बिना निषेचन वाले अंडे)। लैंगिक जनन में नर युग्मक (शुक्राणु) मादा युग्मक (अंडाणु) से मिलकर युग्मनज बनाता है; इससे जीन मिलते हैं और विविधता आती है। निषेचन शरीर के बाहर पानी में (मेंढक, मछली) या शरीर के अंदर (कीट, सरीसृप, पक्षी, स्तनधारी) होता है। ज़मीन के जंतु खोल वाले अंडे देते हैं या बच्चे को अंदर रखते हैं। कई जंतुओं में कायांतरण होता है: पूर्ण (अंडा, लार्वा, प्यूपा, वयस्क) या अपूर्ण (अंडा, निम्फ, वयस्क)।
6. U6 Ch.2 Heredity and variation
Genes and traits · Passing genes to offspring (DNA, chromosomes) · Dominant and recessive genes · Human sex determination · Variation; breeding and GM
- गुणसूत्र, जीन, एलील और बहुजीनी वंशागति – हर कोशिका के केंद्रक में DNA से बने गुणसूत्र होते हैं। किसी जीव का सारा DNA उसका जीनोम है। जीन DNA का वह टुकड़ा है जो गुणसूत्र पर तय जगह पर होता है; उसके अलग रूप एलील हैं। गुणसूत्र जोड़ों में होते हैं, एक माता से और एक पिता से। अर्धसूत्री विभाजन में हर जोड़ी का एक गुणसूत्र हर युग्मक में जाता है और निषेचन में जोड़ियाँ लौट आती हैं। लंबाई जैसे गुण कई जीनों पर निर्भर (बहुजीनी) होते हैं, इसलिए उनमें सहज बदलाव दिखता है। सब जीव एक ही चार-अक्षरी DNA कोड इस्तेमाल करते हैं।
- गुणसूत्र: जहाँ हमारे जीन रहते हैं – गुणसूत्र (क्रोमोसोम) केंद्रक के अंदर डीएनए का धागे जैसा पैकेट है। जीन उसी डीएनए के छोटे टुकड़े हैं जो एक के बाद एक कतार में लगे होते हैं। इंसान की हर शरीर-कोशिका में 46 गुणसूत्र, यानी 23 जोड़े होते हैं: हर जोड़े में एक माँ से और एक पिता से। अंडाणु और शुक्राणु में सिर्फ़ 23-23 होते हैं, इसलिए बच्चे में फिर 46 हो जाते हैं। सटन ने देखा कि गुणसूत्र मेंडल के कारकों जैसा व्यवहार करते हैं और मॉर्गन ने दिखाया कि जीन उन पर कतार में होते हैं।
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
- मानव में लिंग निर्धारण – मानव कोशिका में 23 जोड़ी गुणसूत्र होते हैं: 22 जोड़ी अलिंग गुणसूत्र और 1 जोड़ी लिंग गुणसूत्र। स्त्री XX, पुरुष XY। हर अंडाणु में X होता है; आधे शुक्राणुओं में X और आधों में Y। X + X = लड़की, X + Y = लड़का। संभावना 50:50 है और पिता का शुक्राणु तय करता है।
- जीवों में विभिन्नता – एक ही जाति के जीवों के बीच के अंतर को विभिन्नता कहते हैं। सतत विभिन्नता में किसी सीमा के भीतर हर मान हो सकता है (लंबाई, भार); असतत विभिन्नता साफ़ समूहों में बँटी होती है (रक्त समूह, फूल का रंग)। विभिन्नता जीन से, वातावरण से या दोनों से आती है। सिर्फ जीन वाले बदलाव ही अगली पीढ़ी में जाते हैं। मनुष्य चयनात्मक और संकर प्रजनन में विभिन्नता का उपयोग करता है, और आनुवंशिक संशोधन (GM) सीधे एक उपयोगी जीन जोड़ देता है।
7. U6 Ch.3 Evolution
Origin of life · History of evolution; fossils · Causes of evolution; natural selection · Human origins
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
8. U6 Ch.4 Biodiversity
Evolution and biodiversity · Living in harmony with nature
- जैव विविधता और विकास – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता। इसके तीन स्तर हैं: प्रजाति विविधता (कई तरह के जीव), आनुवंशिक विविधता (एक जाति के भीतर अंतर) और पारिस्थितिकी-तंत्र विविधता (कई तरह के आवास)। यह विविधता विकास से बनी: जीव कई पीढ़ियों में बदलते हैं और प्राकृतिक चयन उपयोगी बदलाव बचा लेता है, इसलिए एक पूर्वज से कई जातियाँ बन सकती हैं।