जैवमंडल क्या है?
पृथ्वी को चार जुड़े हुए मंडलों में देख सकते हैं:
- स्थलमंडल (Geosphere): चट्टानें, मिट्टी और ठोस पृथ्वी।
- जलमंडल (Hydrosphere): समुद्र, नदियाँ, झीलें, भूजल और बर्फ़।
- वायुमंडल (Atmosphere): पृथ्वी के चारों ओर हवा की परत।
- जैवमंडल (Biosphere): सभी जीव और वे जगहें जहाँ वे रहते हैं।
जैवमंडल कोई अलग खोल नहीं है। यह बाकी तीनों के मिलने का क्षेत्र है। पौधे को एक साथ मिट्टी, पानी और हवा चाहिए। बायोस (यूनानी) = जीवन।
पृथ्वी के सारे पारितंत्र (ecosystems), जैसे तालाब, जंगल, प्रवाल भित्ति, मिलकर जैवमंडल बनाते हैं। यह पारिस्थितिकी का सबसे बड़ा स्तर है: जीव → समष्टि → समुदाय → पारितंत्र → बायोम → जैवमंडल।
जैवमंडल की विशेषताएँ और सीमाएँ
- पतला: जीवन लगभग 10 km ऊपर हवा (बीजाणु, जीवाणु, ऊँचा उड़ने वाले पक्षी) से लगभग 11 km गहरी समुद्री खाइयों तक मिलता है। कुल लगभग 20 km, जबकि पृथ्वी की त्रिज्या 6371 km है।
- ज़्यादातर जीवन सतह के पास: मिट्टी के ऊपरी कुछ मीटर और समुद्र के धूप वाले ऊपरी 200 m में।
- सीमाएँ तय करते हैं: कम तापमान, तरल पानी की कमी, प्रकाश की कमी, ऊपर कम ऑक्सीजन और कम दाब, नीचे बहुत ज़्यादा दाब, और हानिकारक पराबैंगनी किरणें (ओज़ोन परत बचाती है)।
- ऊर्जा के लिए खुला, पदार्थ के लिए बंद: धूप आती है, ऊष्मा जाती है, पर पदार्थ लगभग न आता है न जाता है।
- स्वयं-नियंत्रित: जीव परिस्थितियाँ लगभग स्थिर रखते हैं, जैसे पौधे CO₂ लेते हैं।
- विविध: लाखों प्रजातियाँ, असमान रूप से फैली; ज़्यादातर गर्म और नम जगहों पर।
जीवित पदार्थ पृथ्वी को बदलता है
वैज्ञानिक व्लादिमीर वर्नाडस्की (1926) ने कहा कि जीवन एक बड़ी शक्ति है जो पृथ्वी की सतह बदलती है। सभी जीव मिलकर जीवित पदार्थ (living matter) कहलाते हैं। इसके मुख्य काम:
- ऊर्जा: पौधे प्रकाश संश्लेषण से धूप पकड़कर भोजन में रखते हैं।
- गैस: जीव ऑक्सीजन बनाते और CO₂ लेते हैं; आज की ऑक्सीजन वाली हवा इन्हीं की देन है।
- संचय: जीव तत्व जमा करते हैं, जैसे सीपियाँ कैल्शियम, जिनसे बाद में चूना-पत्थर और खड़िया बनती है।
- ऑक्सीकरण-अपचयन: जीवाणु लोहे, सल्फ़र और नाइट्रोजन के यौगिक बदलते हैं।
- अपघटन: अपघटक मृत पदार्थ तोड़कर पोषक तत्व लौटाते हैं; लाइकेन धीरे-धीरे चट्टान को मिट्टी बनाते हैं।
कोयला, तेल, मिट्टी और चूना-पत्थर, सब पुराने जीवन की वजह से हैं।
बायोम, ऊर्जा प्रवाह और पदार्थ चक्र
बायोम
बायोम एक बड़ा क्षेत्र है जिसकी जलवायु, पौधे और जंतु मिलते-जुलते हों। तापमान और वर्षा बायोम तय करते हैं। भूमध्य रेखा से ध्रुव तक: उष्ण कटिबंधीय वर्षावन, सवाना और मरुस्थल, शीतोष्ण वन और घास के मैदान, टैगा (शंकुधारी वन), टुंड्रा, ध्रुवीय बर्फ़। ऊँचाई भी यही करती है: पहाड़ चढ़ना ध्रुव की ओर चलने जैसा है।
ऊर्जा प्रवाह
ऊर्जा धूप के रूप में आती है, उत्पादक उसे पकड़ते हैं, फिर उपभोक्ता और अपघटक; हर कदम पर ज़्यादातर ऊर्जा ऊष्मा बनकर खो जाती है। अगले स्तर तक लगभग 10% ही जाती है। ऊर्जा चक्र में नहीं घूमती।
पदार्थ चक्र
कार्बन, पानी, नाइट्रोजन और ऑक्सीजन बार-बार इस्तेमाल होते हैं: कार्बन चक्र (प्रकाश संश्लेषण, श्वसन, जलना, सड़ना), जल चक्र (वाष्पन, संघनन, वर्षा) और नाइट्रोजन चक्र (मिट्टी के जीवाणु)।
मनुष्य और जैवमंडल
मनुष्य जैवमंडल को तेज़ी से बदल रहा है: जंगल काटना, खेती, शहर बनाना, हवा-पानी का प्रदूषण, जीवाश्म ईंधन जलाना (जलवायु परिवर्तन) और ज़रूरत से ज़्यादा मछली पकड़ना। इससे जैव विविधता घटती है। बचाव के तरीके: संरक्षित क्षेत्र और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र (कोर क्षेत्र, बफ़र क्षेत्र, संक्रमण क्षेत्र), ऊर्जा बचाना, कम कचरा, टिकाऊ खेती और मछली पालन।
खुद करके देखो: जार में जैवमंडल
चाहिए: ढक्कन वाला पारदर्शी जार, थोड़ी मिट्टी, छोटे कंकड़, एक छोटा पौधा या काई, थोड़ा पानी।
- पहले कंकड़, फिर मिट्टी, फिर पौधा। कुछ चम्मच पानी डालो। ढक्कन बंद करो।
- अनुमान लगाओ: क्या पौधा हफ़्तों तक बिना नई हवा-पानी के जिएगा?
- जार को उजाले में रखो, सीधी धूप में नहीं। हर कुछ दिन देखो कि काँच पर पानी की बूँदें बनती हैं या नहीं।
- पानी चक्र में घूमता है (बूँदें बनती-गिरती हैं), पौधा ऑक्सीजन बनाता और CO₂ लेता है, और सिर्फ़ प्रकाश अंदर आता है। यही है जार में जैवमंडल: ऊर्जा के लिए खुला, पदार्थ के लिए बंद।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जैवमंडल = स्थलमंडल + जलमंडल + वायुमंडल के मिलन का क्षेत्र जहाँ जीवन है
- सीमाएँ: लगभग +10 km (हवा) से लगभग −11 km (सबसे गहरा समुद्र); ज़्यादातर जीवन ऊपरी मिट्टी और समुद्र के ऊपरी 200 m में
- स्तर: जीव → समष्टि → समुदाय → पारितंत्र → बायोम → जैवमंडल
- 10% नियम: अगले पोषी स्तर तक लगभग 10% ऊर्जा जाती है
- ऊर्जा एक दिशा में बहती है (सूर्य → उत्पादक → उपभोक्ता → ऊष्मा); पदार्थ चक्र में घूमता है (C, H₂O, N, O)
- प्रकाश संश्लेषण: कार्बन डाइऑक्साइड + पानी + प्रकाश → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन
हल किए गए उदाहरण
1. नदी की मछली किन मंडलों का उपयोग करती है?
जलमंडल: वह नदी के पानी में रहती है। वायुमंडल: हवा की ऑक्सीजन पानी में घुलती है और मछली उसे लेती है। स्थलमंडल: नदी का तल खनिज और छिपने की जगह देता है। मछली स्वयं जैवमंडल का हिस्सा है।
2. खेत के पौधे 20,000 kJ ऊर्जा पकड़ते हैं। 10% नियम से उन्हें खाने वाली बकरियों और बकरियों को खाने वाले शेर तक कितनी ऊर्जा पहुँचेगी?
बकरियाँ (प्राथमिक उपभोक्ता): 20,000 का 10% = 2,000 kJ। शेर (द्वितीयक उपभोक्ता): 2,000 का 10% = 200 kJ। बाकी हर कदम पर ज़्यादातर ऊष्मा बनकर खो जाती है।
3. माउंट एवरेस्ट की चोटी (8.8 km) पर लगभग जीवन क्यों नहीं है?
वहाँ बहुत ठंड है (अक्सर −30 °C से कम), तरल पानी नहीं (सिर्फ़ बर्फ़), हवा पतली है और ऑक्सीजन कम, और पराबैंगनी किरणें तेज़ हैं। ये सीमित करने वाले कारक ज़्यादातर जीवन रोकते हैं, इसलिए यह जैवमंडल की ऊपरी सीमा के पास है।
4. जैवमंडल को 'ऊर्जा के लिए खुला, पदार्थ के लिए बंद' क्यों कहते हैं?
रोज़ धूप आती है और ऊष्मा अंतरिक्ष में जाती है, यानी ऊर्जा गुज़रती है। पर परमाणु लगभग न आते हैं न जाते हैं (कुछ उल्कापिंड और गैस छोड़कर)। इसलिए कार्बन, पानी और नाइट्रोजन को चक्रों में दोबारा इस्तेमाल होना पड़ता है।
आम गलतियाँ
- जैवमंडल को वायुमंडल के ऊपर एक अलग परत समझना। यह बाकी मंडलों के मिलन का क्षेत्र है जहाँ जीवन है।
- कहना कि ऊर्जा भी पदार्थ की तरह चक्र में घूमती है। ऊर्जा एक दिशा में बहकर ऊष्मा बनकर निकलती है; केवल पदार्थ घूमता है।
- पारितंत्र और जैवमंडल को एक मानना। पारितंत्र एक क्षेत्र है (जैसे तालाब); जैवमंडल सारे पारितंत्र मिलकर।
- यह मानना कि जीवन हर जगह बराबर फैला है। ज़्यादातर जीवन सतह के पास पतली पट्टी में, खासकर गर्म और नम जगहों पर है।