Ukraine 11 клас Biology and Ecology
अध्याय: 5
1. Adaptations
Adaptation principles · Habitats, symbiosis, parasitism · Biological rhythms
- रूपांतरण: कहानी किताब से फ़िल्म, नाटक या गेम तक कैसे पहुँचती है – रूपांतरण (adaptation) एक नई रचना है जो किसी पुरानी रचना (स्रोत) की कहानी को दूसरे माध्यम में फिर से कहती है, जैसे उपन्यास से फ़िल्म, नाटक, कॉमिक, धारावाहिक या गेम। हर माध्यम की अपनी ताक़त और सीमा है, इसलिए कुछ हटाना, मिलाना, बदलना और जोड़ना पड़ता है। रूपांतरण वफ़ादार, ढीला या खुला (नई जगह-समय में) हो सकता है। तुलना करते समय पूछो: क्या बदला, क्यों बदला, और इससे अर्थ कैसे बदला।
- जीव और समष्टियाँ: वृद्धि और पारस्परिक क्रिया – समष्टि (population) यानी एक ही जाति के वे सब जीव जो एक समय पर एक जगह रहते हैं। समष्टि के ऐसे गुण होते हैं जो अकेले जीव में नहीं होते: घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना। जन्म और आप्रवासन से N बढ़ता है, मृत्यु और उत्प्रवासन से घटता है। भोजन असीमित हो तो तेज़ वृद्धि (J-वक्र, dN/dt = rN); सीमित हो तो वृद्धि धीमी होकर वहन क्षमता K पर रुकती है (S-वक्र, dN/dt = rN(1 − N/K))। जातियाँ एक-दूसरे पर असर डालती हैं: सहोपकारिता (+/+), स्पर्धा (−/−), परभक्षण और परजीविता (+/−), सहभोजिता (+/0), असहभोजिता (−/0)।
2. Biological basis of a healthy lifestyle
Healthy lifestyle
- स्वस्थ जीवनशैली: रोज़ की आदतें जो तुम्हें ठीक रखें – स्वस्थ जीवनशैली रोज़ की अच्छी आदतों का नाम है: पाँच भोजन-समूहों वाला संतुलित आहार, भरपूर पानी, स्कूली बच्चों के लिए 9–11 घंटे और किशोरों के लिए लगभग 8–10 घंटे नींद, रोज़ कम से कम 60 मिनट खेल-कूद, सही मुद्रा, साफ-सुरक्षित भोजन, और तंबाकू, शराब व नशे से दूरी। इनसे टाइप 2 मधुमेह, हृदय रोग और कुछ कैंसर जैसे जीवनशैली रोगों का खतरा घटता है।
3. Ecology
Ecological factors · Populations · Ecosystems and succession · Biosphere
- पारिस्थितिकी की बुनियाद: पारिस्थितिक कारक – पारिस्थितिकी यह पढ़ती है कि जीव और उनका परिवेश एक-दूसरे पर कैसे असर डालते हैं। यह असर पारिस्थितिक कारकों से होता है: अजैविक (निर्जीव), जैविक (सजीव) और मानवजनित। हर जीव हर कारक की एक सीमा में ही जी पाता है (सहनशीलता का नियम), और वृद्धि सबसे कम मिलने वाले कारक से रुकती है (न्यूनतम का नियम)। संकरी सीमा वाले जीव स्टेनो, चौड़ी सीमा वाले यूरी कहलाते हैं।
- जीव और समष्टियाँ: वृद्धि और पारस्परिक क्रिया – समष्टि (population) यानी एक ही जाति के वे सब जीव जो एक समय पर एक जगह रहते हैं। समष्टि के ऐसे गुण होते हैं जो अकेले जीव में नहीं होते: घनत्व, जन्म दर, मृत्यु दर, लिंग अनुपात और आयु संरचना। जन्म और आप्रवासन से N बढ़ता है, मृत्यु और उत्प्रवासन से घटता है। भोजन असीमित हो तो तेज़ वृद्धि (J-वक्र, dN/dt = rN); सीमित हो तो वृद्धि धीमी होकर वहन क्षमता K पर रुकती है (S-वक्र, dN/dt = rN(1 − N/K))। जातियाँ एक-दूसरे पर असर डालती हैं: सहोपकारिता (+/+), स्पर्धा (−/−), परभक्षण और परजीविता (+/−), सहभोजिता (+/0), असहभोजिता (−/0)।
- पारितंत्र: संरचना, उत्पादकता, ऊर्जा प्रवाह और पिरामिड – पारितंत्र प्रकृति की एक कार्यशील इकाई है जहाँ जैविक (जीवित) और अजैविक (निर्जीव) घटक आपस में मिलकर काम करते हैं। पौधे जिस दर से भोजन बनाते हैं वह उत्पादकता है: सकल (GPP) में से श्वसन घटाओ तो शुद्ध (NPP = GPP − R)। मृत पदार्थ पाँच चरणों में टूटता है: खंडन, निक्षालन, अपचय, ह्यूमीकरण और खनिजीकरण। ऊर्जा धूप से आती है, पोषी स्तरों में एक ही दिशा में बहती है और हर बार लगभग 10% ही आगे जाती है। संख्या और जीवभार के पिरामिड उल्टे हो सकते हैं, पर ऊर्जा का पिरामिड हमेशा सीधा होता है।
- जैवमंडल (Biosphere) – जैवमंडल पृथ्वी का वह भाग है जहाँ जीवन है। यह एक पतली परत है जहाँ स्थलमंडल (चट्टान और मिट्टी), जलमंडल (पानी) और वायुमंडल (हवा) मिलते हैं, समुद्र तल से लगभग 10 km ऊपर से लगभग 11 km नीचे तक। पृथ्वी के सभी पारितंत्र मिलकर जैवमंडल बनाते हैं। इसमें ऊर्जा एक ही दिशा में बहती है: सूर्य → पौधे → जंतु → ऊष्मा, जबकि कार्बन, पानी, नाइट्रोजन जैसे पदार्थ चक्र में घूमते हैं। जीव बाकी मंडलों को भी बदलते हैं: ऑक्सीजन बनाते हैं, मिट्टी बनाते हैं, कार्बन जमा करते हैं। आज मनुष्य इसे तेज़ी से बदल रहा है, इसलिए इसकी रक्षा ज़रूरी है।
4. Sustainable development and nature use
Pollution and protection · Environmental policy
- प्रदूषण: वायु, जल, भूमि और ध्वनि – प्रदूषण यानी हवा, पानी या ज़मीन में हानिकारक पदार्थ या ऊर्जा इतनी तेज़ी से डालना कि प्रकृति उसे हटा न सके। मुख्य वायु प्रदूषक हैं कण (PM), कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फ़र डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और ओज़ोन; इनसे अम्लीय वर्षा और स्मॉग बनते हैं। पोषक तत्व, सीवेज और ज़हरीले रसायन पानी में सुपोषण और जैव आवर्धन करते हैं। स्रोत पर उत्सर्जन घटाकर, कचरा छोड़ने से पहले साफ़ करके और 3R से प्रदूषण घटता है।
- संधारणीयता (Sustainability) – संधारणीयता यानी आज अपनी ज़रूरतें ऐसे पूरी करना कि आने वाली पीढ़ियाँ भी अपनी ज़रूरतें पूरी कर सकें। यह तीन स्तंभों पर टिकी है — पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था। कोई संसाधन तभी टिकाऊ ढंग से इस्तेमाल होता है जब हम उसे उसके नवीकरण से तेज़ न लें। आज मानवता हर साल लगभग 1.7 पृथ्वी जितना इस्तेमाल करती है, और यह इस्तेमाल बहुत असमान है। देखभाल (stewardship), समझदार योजना और GIS जैसे औज़ार हमें संधारणीयता की ओर ले जाते हैं।
- पर्यावरण और धारणीय विकास – पर्यावरण हमें संसाधन देता है, हमारा कचरा सोखता है, जीवन चलाता है और सुंदरता देता है। जब हम संसाधन प्रकृति के नवीकरण से तेज़ लेते हैं, या कचरा उसकी सोखने की क्षमता से ज़्यादा फेंकते हैं, तो धारण क्षमता पार होती है और पर्यावरण संकट आता है। भारत में भूमि अपक्षय, वायु-जल प्रदूषण, वन और जैव-विविधता की हानि है। जीवाश्म ईंधन जलाने से गर्मी फँसती है और वैश्विक उष्णता होती है; CFC ओज़ोन परत पतली करते हैं। धारणीय विकास आज की ज़रूरतें पूरी करता है बिना भावी पीढ़ियों की क्षमता घटाए।
5. Applied biology: medicine, breeding, biotechnology
Breeding · Biotechnology and biosafety
- पादप प्रजनन: बेहतर फ़सलें बनाना – पादप प्रजनन = फ़सल के जीन जान-बूझकर बदलकर बेहतर क़िस्में बनाना: अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता, रोग-कीट प्रतिरोध, और सूखा, लवण, गर्मी या ठंड सहनशीलता। सबसे पुरानी विधि कृत्रिम चयन है: पीढ़ी दर पीढ़ी केवल अच्छे पौधों के बीज रखना। संकरण दो जनकों को मिलाता है ताकि संतान को दोनों के अच्छे गुण मिलें। अंतःप्रजनन (निकट संबंधी या स्व-परागण) शुद्ध वंश बनाता है; ज़्यादा हो तो अंतःप्रजनन अवसाद। बहिःप्रजनन असंबंधित वंशों को मिलाता है; दो शुद्ध वंशों का F1 संकर अक्सर दोनों से बेहतर होता है (संकर ओज)। अंतरजातीय संकरण (गेहूँ × राई = ट्रिटिकेल) में गुणसूत्र दोगुने करने पड़ते हैं। आधुनिक औज़ार: उत्परिवर्तन, बहुगुणिता, ऊतक संवर्धन, DNA मार्कर और जीन संपादन। वाविलोव ने बताया कि फ़सलों के उत्पत्ति केंद्र होते हैं और संबंधित प्रजातियों में विविधता की समजात श्रेणी होती है।
- जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग – आनुवंशिक इंजीनियरिंग के औज़ार दवा, खेती और शोध में काम आते हैं। जीवाणु मानव इंसुलिन बनाते हैं; यीस्ट सुरक्षित टीका-प्रोटीन बनाता है। स्टेम कोशिकाएँ कई प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। जीन थेरेपी रोगी की कोशिकाओं में सही जीन डालती है। Bt कपास जैसी GM फसलों में कीट मारने वाले प्रोटीन का जीन होता है। पारजीनी जंतु रोग समझने या दवा बनाने में मदद करते हैं। ये शक्तिशाली हैं, इसलिए भारत में GEAC इन पर नज़र रखती है और कानून बायोपायरेसी व अनुचित पेटेंट से बचाते हैं।