📘 CodingMarble Learn

जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग

आनुवंशिक इंजीनियरिंग के औज़ार दवा, खेती और शोध में काम आते हैं। जीवाणु मानव इंसुलिन बनाते हैं; यीस्ट सुरक्षित टीका-प्रोटीन बनाता है। स्टेम कोशिकाएँ कई प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। जीन थेरेपी रोगी की कोशिकाओं में सही जीन डालती है। Bt कपास जैसी GM फसलों में कीट मारने वाले प्रोटीन का जीन होता है। पारजीनी जंतु रोग समझने या दवा बनाने में मदद करते हैं। ये शक्तिशाली हैं, इसलिए भारत में GEAC इन पर नज़र रखती है और कानून बायोपायरेसी व अनुचित पेटेंट से बचाते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. मानव इंसुलिन में दो छोटी शृंखलाएँ A और B होती हैं, जो सल्फ़र पुलों से जुड़ी हैं। E. coli के दो अलग समूह एक-एक शृंखला बनाते हैं। इन्हें शुद्ध करके जोड़ते हैं। नतीजा हूबहू मानव इंसुलिन।
  2. स्टेम कोशिका अविशेषित कोशिका है। यह विभाजित होकर और स्टेम कोशिकाएँ बना सकती है, और रक्त, तंत्रिका, पेशी या त्वचा जैसी विशेष कोशिका भी बन सकती है। इससे क्षतिग्रस्त ऊतक ठीक हो सकता है।
  3. ADA की कमी वाला बच्चा एक एंज़ाइम नहीं बना पाता, इसलिए प्रतिरक्षा तंत्र काम नहीं करता। डॉक्टर उसकी श्वेत रक्त कोशिकाएँ निकालते हैं, एक हानिरहित वायरस सही ADA जीन अंदर पहुँचाता है, और कोशिकाएँ वापस डाल दी जाती हैं।
  4. Bt कपास में मिट्टी के जीवाणु बैसिलस थुरिंजिएंसिस का cry जीन है। Cry प्रोटीन पौधे में निष्क्रिय रहता है। जब इल्ली पत्ती खाती है, उसकी क्षारीय आँत प्रोटीन को सक्रिय कर देती है और आँत में छेद हो जाते हैं। कीट मर जाता है।
  5. पारजीनी जंतु में किसी दूसरे जीव का जीन होता है। जैसे ऐसी गाय जिसके दूध में मानव प्रोटीन हो, या टीके जाँचने और रोग समझने के लिए चूहे।
  6. खुद करके देखो: मेनू से उपयोग चुनो (इंसुलिन, टीका, स्टेम कोशिका, जीन थेरेपी, Bt फसल, पारजीनी जंतु) और देखो क्या होता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सुअर और गाय का इंसुलिन ही क्यों नहीं?

मात्रा सीमित है और कुछ लोगों को एलर्जी होती है। जीवाणु से बना मानव इंसुलिन हमारे अपने जैसा है और बड़ी मात्रा में बनता है।

A और B शृंखला अलग क्यों बनाईं?

अलग बनाने से C-पेप्टाइड हटाने का झंझट नहीं रहा और हर जीवाणु को छोटी शृंखला ही बनानी पड़ी।

क्या वयस्क स्टेम कोशिकाएँ भ्रूणीय जितनी शक्तिशाली हैं?

नहीं। भ्रूणीय लगभग कोई भी कोशिका बन सकती हैं; वयस्क (जैसे अस्थि मज्जा की) कम प्रकार बनाती हैं।

क्या जीन थेरेपी का वायरस ख़तरनाक है?

उसे निरस्त्र किया जाता है: रोग वाले जीन हटा दिए जाते हैं, वह केवल जीन को कोशिका तक ले जाता है।

क्या Bt कपास के बीज का तेल हमें नुकसान करेगा?

विष को क्षारीय आँत और कुछ कीटों में मिलने वाले खास ग्राही चाहिए। हमारा पेट अम्लीय है और वे ग्राही नहीं।

ज़्यादातर पारजीनी जंतु चूहे क्यों?

चूहे छोटे हैं, जल्दी प्रजनन करते हैं और उनके कई जीन मनुष्य जैसे हैं, इसलिए रोग और परीक्षण के अच्छे मॉडल हैं।

इंसुलिन और टीके का उत्पादन

इंसुलिन रक्त शर्करा नियंत्रित करता है। पहले इसे मवेशियों और सुअरों के अग्न्याशय से निकाला जाता था। कुछ रोगियों को इससे एलर्जी होती थी और मात्रा भी सीमित थी।

शरीर में इंसुलिन पहले प्राक्-इंसुलिन (प्रो-इंसुलिन) के रूप में बनता है: शृंखला A, B और एक अतिरिक्त भाग C-पेप्टाइड। परिपक्व हॉर्मोन में C-पेप्टाइड हट जाता है। 1983 में अमेरिकी कंपनी एली लिली ने तरीका निकाला: A और B शृंखला के लिए दो DNA टुकड़े बनाए, हर एक को E. coli के प्लाज़्मिड में डाला, शृंखलाएँ अलग-अलग बनवाईं, शुद्ध कीं और डाइसल्फ़ाइड बंधों से जोड़ दीं। इसे ह्यूमुलिन कहते हैं। C-पेप्टाइड हटाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी।

पुनर्योगज टीके

टीका प्रतिरक्षा तंत्र को रोगाणु पहचानना सिखाता है। पूरे रोगाणु की जगह केवल एक सतही प्रोटीन (प्रतिजन) का जीन यीस्ट या जीवाणु में डालते हैं। वे जो प्रोटीन बनाते हैं, वही टीका है। पूरा रोगाणु नहीं, इसलिए रोग नहीं होता। यीस्ट में बना हेपेटाइटिस B टीका मुख्य उदाहरण है। ये सुरक्षित हैं और बड़ी मात्रा में बनते हैं।

दवा में अन्य उपयोग: आणविक निदान। PCR बहुत कम मात्रा में वायरस या जीवाणु (जैसे संदिग्ध एड्स रोगी में HIV) लक्षण से पहले पकड़ लेता है। ELISA प्रतिजन या प्रतिरक्षी पहचानता है। प्रोब (चिह्नित एकल-स्ट्रैंड DNA/RNA) मेल खाते क्रम से चिपककर खराब जीन बताता है।

स्टेम कोशिकाएँ

स्टेम कोशिका अभी विशेषित नहीं हुई कोशिका है। इसकी दो शक्तियाँ हैं: विभाजित होकर अपनी जैसी कोशिकाएँ बनाना (स्व-नवीकरण) और विशेष कोशिका में बदलना (विभेदन)। स्रोत:

उपयोग: रक्त कैंसर और थैलेसीमिया में अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण; हृदय, तंत्रिका और त्वचा की मरम्मत पर शोध। चिंताएँ: भ्रूण के उपयोग पर नैतिक प्रश्न; शरीर दाता कोशिकाएँ अस्वीकार कर सकता है; अनियंत्रित वृद्धि से ट्यूमर का ख़तरा।

जीन थेरेपी (जीन चिकित्सा)

जीन थेरेपी यानी खराब जीन से होने वाले रोग को ठीक करने के लिए रोगी की कोशिकाओं या भ्रूण में सही जीन डालना। पहली बार 1990 में 4 साल की बच्ची में ADA (एडीनोसीन डीएमिनेज़) की कमी का इलाज हुआ। ADA के बिना प्रतिरक्षा तंत्र काम नहीं करता (SCID का एक रूप)।

  1. रोगी के रक्त से लिम्फोसाइट (श्वेत रक्त कोशिका) निकालकर शरीर के बाहर उगाओ।
  2. रेट्रोवायरस वाहक (हानिरहित किया वायरस) से उनमें सही ADA जीन डालो।
  3. कोशिकाएँ वापस रोगी में डालो।

लिम्फोसाइट सदा जीवित नहीं रहतीं, इसलिए बार-बार इलाज चाहिए। अगर ADA जीन शुरुआती भ्रूण अवस्था में (या अस्थि मज्जा की स्टेम कोशिकाओं में) डाला जाए तो स्थायी इलाज हो सकता है। अस्थि मज्जा प्रत्यारोपण और एंज़ाइम इंजेक्शन भी हैं, पर वे पूरा इलाज नहीं।

GM जीव, Bt फसलें और RNAi

आनुवंशिकतः रूपांतरित जीव (GMO) वह पौधा, जंतु या सूक्ष्मजीव है जिसके जीन आनुवंशिक इंजीनियरिंग से बदले गए हों। GM पौधे: सूखा, ठंड, लवण और गर्मी सह सकते हैं; रासायनिक कीटनाशक की ज़रूरत घटाते हैं; कटाई के बाद का नुकसान घटाते हैं; खनिजों का बेहतर उपयोग करते हैं; पोषण बेहतर करते हैं, जैसे विटामिन A वाला सुनहरा धान (गोल्डन राइस)।

Bt कपास: विष कैसे काम करता है

मिट्टी का जीवाणु बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bt) Cry प्रोटीन बनाता है जो कुछ कीटों को मारता है: लेपिडोप्टेरा (बॉलवर्म, तंबाकू बडवर्म), कोलिओप्टेरा (भृंग) और डिप्टेरा (मक्खी, मच्छर)। जीवाणु इसे निष्क्रिय प्राक्-विष (प्रोटॉक्सिन) क्रिस्टल के रूप में रखता है, इसलिए ख़ुद को नुकसान नहीं होता। कीट की आँत के क्षारीय pH में क्रिस्टल घुलता है और प्रोटीन सक्रिय हो जाता है। यह आँत की कोशिकाओं से जुड़कर छिद्र बनाता है, कोशिकाएँ फूलकर फट जाती हैं और कीट मर जाता है। जीन को cry कहते हैं: cryIAc और cryIIAb कपास के बॉलवर्म को, cryIAb मक्के के छेदक (कॉर्न बोरर) को नियंत्रित करते हैं। मनुष्य और मवेशी का पेट अम्लीय है और उनमें मेल खाते ग्राही नहीं, इसलिए हमें नुकसान नहीं।

RNAi से पीड़क-प्रतिरोधी पौधे

सूत्रकृमि मेलॉइडोगाइनी इनकॉग्निटा तंबाकू की जड़ों को संक्रमित करता है। वैज्ञानिकों ने एग्रोबैक्टीरियम की मदद से सूत्रकृमि के जीन पौधे में डाले, ताकि पौधा सेंस और एंटी-सेंस RNA दोनों बनाए। ये जुड़कर द्वि-स्ट्रैंडी RNA बनाते हैं, जो RNA अंतरक्षेप (RNAi) शुरू करता है: सूत्रकृमि का मेल खाता mRNA चुप हो जाता है और परजीवी जड़ में जीवित नहीं रहता। RNAi सभी यूकैरियोट में प्राकृतिक रक्षा तरीका है।

पारजीनी जंतु

जिस जंतु के DNA में बाहरी जीन डालकर उसे व्यक्त कराया गया हो, वह पारजीनी है। चूहे, खरगोश, सुअर, भेड़, गाय और मछली बनाए गए हैं; 95% से ज़्यादा चूहे हैं। क्यों?

जैव सुरक्षा, बायोपायरेसी और पेटेंट

नैतिकता और जैव सुरक्षा: जीवों को बदलने से पर्यावरण और स्वास्थ्य पर अनजाने असर हो सकते हैं। भारत ने GEAC (जेनेटिक इंजीनियरिंग अप्रेज़ल कमेटी) बनाई, जो तय करती है कि GM शोध सही है या नहीं और GM जीवों को जनता के उपयोग के लिए छोड़ना सुरक्षित है या नहीं।

पेटेंट: सरकार द्वारा आविष्कारक को दिया गया कानूनी अधिकार, ताकि तय समय तक दूसरे उसकी नकल न करें। समस्या तब होती है जब कंपनियाँ पारंपरिक ज्ञान या किसी देश के जैव संसाधनों पर पेटेंट लेने की कोशिश करती हैं।

बायोपायरेसी (जैव-दस्युता): किसी देश के जैव संसाधन या पारंपरिक ज्ञान का बिना अनुमति और बिना उचित भुगतान के उपयोग। उदाहरण: एक अमेरिकी कंपनी को 1997 में भारतीय बासमती को अर्ध-बौनी किस्मों से संकरित कर बने चावल पर पेटेंट मिला; हल्दी और नीम के उपयोगों पर भी पेटेंट की कोशिश हुई। भारत ने इन्हें चुनौती दी और 2002 में पेटेंट विधेयक में संशोधन किया। अमीर देशों के पास पैसा और तकनीक है; भारत जैसे देशों के पास जैव विविधता और पारंपरिक ज्ञान। लाभ का न्यायपूर्ण बँटवारा ज़रूरी है।

करके देखो: GM है या नहीं?

अगली बार सूती कमीज़ देखो तो याद करो कि कपास शायद Bt कपास थी। घर पर दो कॉलम बनाओ: "GM फसलों के लाभ" और "GM फसलों की चिंताएँ"। हर कॉलम में कम से कम चार बातें लिखो (जैसे कम छिड़काव बनाम कीटों में प्रतिरोध)। फिर 3D मेनू से हर उपयोग देखो और लिखो कि कौन सा तुम्हें सबसे उपयोगी लगा।

बोर्ड परीक्षा टिप: अक्सर पूछा जाता है: Bt विष कीट को कैसे मारता है और पौधे को क्यों नहीं; एली लिली का इंसुलिन उत्पादन; तंबाकू में RNAi; पहली जीन थेरेपी; पारजीनी जंतुओं के उपयोग; बायोपायरेसी भारतीय उदाहरण सहित; GEAC की भूमिका।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. Bt विष बैसिलस जीवाणु या कपास के पौधे को क्यों नहीं मारता?

यह निष्क्रिय प्रोटॉक्सिन के रूप में रहता है। केवल कीट की क्षारीय आँत में सक्रिय होता है। पौधे और जीवाणु में न वह क्षारीय आँत है, न ग्राही।

2. मानव इंसुलिन बनाने में C-पेप्टाइड की समस्या कैसे टली?

A और B शृंखलाएँ अलग DNA से E. coli में अलग-अलग बनीं और फिर डाइसल्फ़ाइड बंधों से जुड़ीं। प्रो-इंसुलिन बना ही नहीं, तो C-पेप्टाइड हटाना नहीं पड़ा।

3. लिम्फोसाइट द्वारा ADA जीन थेरेपी में बार-बार इलाज क्यों?

लिम्फोसाइट की आयु सीमित है। वे मरती हैं तो डाला गया जीन भी खो जाता है, इसलिए नई कोशिकाएँ फिर देनी पड़ती हैं।

4. पुनर्योगज हेपेटाइटिस B टीके में वायरस नहीं, फिर भी रक्षा कैसे?

इसमें वायरस का सतही प्रोटीन (प्रतिजन) है। प्रतिरक्षा तंत्र इसे पहचानना सीखता है और स्मृति कोशिकाएँ बनाता है, जो बाद में असली वायरस से लड़ती हैं।

5. RNAi तंबाकू को सूत्रकृमि से कैसे बचाता है?

सूत्रकृमि के जीन पौधे में डालकर सेंस और एंटी-सेंस RNA बनवाते हैं। ये द्वि-स्ट्रैंडी RNA बनाकर सूत्रकृमि का mRNA चुप कर देते हैं। सूत्रकृमि जड़ में जीवित नहीं रहता।

6. कोई कंपनी घाव भरने में हल्दी के पारंपरिक भारतीय उपयोग पर पेटेंट ले। क्या यह बायोपायरेसी है?

हाँ। यह भारत में पहले से मौजूद पारंपरिक ज्ञान का बिना अनुमति और बिना उचित लाभ-बँटवारे के उपयोग है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पहली जीन थेरेपी (1990) किस रोग के लिए थी?
2. Bt विष सक्रिय होता है क्योंकि कीट की आँत:
3. तंबाकू में RNAi किससे बचाता है?
4. पहली पारजीनी गाय रोज़ी के दूध में क्या था?
5. भारत में GM फसल छोड़ने का निर्णय कौन करता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सुनहरा धान (गोल्डन राइस) क्या है?

GM चावल जो बीटा-कैरोटीन बनाता है (शरीर इसे विटामिन A में बदलता है), ताकि विटामिन A की कमी दूर हो।

क्या GM भोजन सुरक्षित है?

हर GM फसल मंज़ूरी से पहले जाँची जाती है; भारत में GEAC सुरक्षा देखती है। एलर्जी, जंगली पौधों में जीन फैलना और कीटों में प्रतिरोध जैसी चिंताएँ हैं, इसलिए निगरानी जारी रहती है।

पेटेंट और बायोपायरेसी में क्या अंतर है?

पेटेंट सच्चे नए आविष्कार की तय समय तक रक्षा करता है। बायोपायरेसी किसी देश के जैव संसाधन या पारंपरिक ज्ञान को बिना अनुमति या उचित बँटवारे के लेना है, कई बार उस पर पेटेंट लेकर।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

कनाडा (ओंटारियो)Grade 12F. Biotechnology
पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IIIVIII. Biotechnology and genetic engineering basics
पोलैंडLiceum ogólnokształcące, klasa IVXV. Biotechnology and genetic engineering basics
स्पेन2º BachilleratoBiotechnology
स्पेन2º BachilleratoBiology for the 21st century
यूक्रेन11 класBreeding and biotechnology
यूक्रेन11 класApplied biology: medicine, breeding, biotechnology
सीबीएसई (भारत)कक्षा 12जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग
जापान高校(専門学科)1〜3年Plant Biotechnology
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Biotechnology
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Biotechnology and life
चीन高三Sel.3 Ch.3 Genetic engineering
चीन高三Sel.3 Ch.4 Biosafety and ethics

पहले यह पढ़ें

इससे जुड़े पाठ

सभी जीव विज्ञान पाठ