South 고등학교 2학년 Genetics of Organisms
अध्याय: 3
1. Genes and genetic material
Inheritance of traits · Studying human inheritance · Polygenic inheritance · Chromosome and gene abnormalities · DNA structure and its discovery · Gene structure in prokaryotes and eukaryotes · Semi-conservative replication
- वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत – जीन जोड़ों में होते हैं (अलील)। हर माता-पिता हर जोड़े से एक अलील बच्चे को देता है। मेंडल ने प्रभाविता (3 : 1), पृथक्करण और स्वतंत्र अपव्यूहन (9 : 3 : 3 : 1) दिखाया। असली जीवन में मोड़ भी हैं: अपूर्ण प्रभाविता (1 : 2 : 1), सहप्रभाविता (AB रक्त), बहुविकल्पी अलील, बहुप्रभाविता (एक जीन, कई असर) और बहुजीनी लक्षण (कई जीन, एक लक्षण)। जीन गुणसूत्रों पर होते हैं, इसलिए एक ही गुणसूत्र के जीन सहलग्न रहते हैं और केवल जीन विनिमय से अलग होते हैं। लिंग गुणसूत्र लिंग तय करते हैं (मनुष्य XX-XY, पक्षी ZW, मधुमक्खी अगुणित-द्विगुणित) और लिंग-सहलग्न जीन रखते हैं (हीमोफीलिया, वर्णांधता)। जीन की गड़बड़ी से मेंडलीय विकार (थैलेसीमिया, सिकल-सेल) और गुणसूत्र संख्या की गड़बड़ी से डाउन, टर्नर, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम होते हैं।
- गुणसूत्र, जीन, एलील और बहुजीनी वंशागति – हर कोशिका के केंद्रक में DNA से बने गुणसूत्र होते हैं। किसी जीव का सारा DNA उसका जीनोम है। जीन DNA का वह टुकड़ा है जो गुणसूत्र पर तय जगह पर होता है; उसके अलग रूप एलील हैं। गुणसूत्र जोड़ों में होते हैं, एक माता से और एक पिता से। अर्धसूत्री विभाजन में हर जोड़ी का एक गुणसूत्र हर युग्मक में जाता है और निषेचन में जोड़ियाँ लौट आती हैं। लंबाई जैसे गुण कई जीनों पर निर्भर (बहुजीनी) होते हैं, इसलिए उनमें सहज बदलाव दिखता है। सब जीव एक ही चार-अक्षरी DNA कोड इस्तेमाल करते हैं।
- वंशागति का आणविक आधार – ज़्यादातर जीवों में DNA आनुवंशिक पदार्थ है (कुछ वायरस में RNA)। यह द्विकुंडली है: न्यूक्लियोटाइड के दो प्रतिसमांतर सूत्र; A–T दो हाइड्रोजन बंध से, G–C तीन से। लंबा DNA हिस्टोन पर लिपटकर न्यूक्लियोसोम और फिर क्रोमैटिन बनाता है। DNA अर्धसंरक्षी ढंग से प्रतिकृति बनाता है (मेसेल्सन–स्टाल)। केंद्रीय सिद्धांत: DNA → RNA → प्रोटीन। अनुलेखन एक सूत्र से RNA बनाता है; यूकैरियोट में hnRNA पर कैप, पूँछ और स्प्लाइसिंग होती है। आनुवंशिक कूट त्रिक है, 64 कोडॉन (61 अमीनो अम्ल, 3 समापन), AUG से शुरू, लगभग सार्वत्रिक और अपह्रासित। राइबोसोम tRNA की मदद से mRNA को प्रोटीन में बदलता है। जीन चालू-बंद होते हैं; लैक ओपेरॉन इसका उदाहरण है। मानव और चावल जीनोम परियोजनाओं ने पूरा जीनोम पढ़ा, और DNA फिंगरप्रिंटिंग दोहराव वाले DNA (VNTR) से व्यक्ति की पहचान करती है।
- जीन की संरचना: एक जीन के अंदर क्या है? – जीन DNA का वह हिस्सा है जिसमें एक काम का उत्पाद, आमतौर पर प्रोटीन (कभी-कभी RNA), बनाने की सूचना होती है। एक सामान्य जीन में प्रमोटर (जहाँ RNA पॉलिमरेज़ जुड़कर अनुलेखन शुरू करता है), कोडिंग भाग (संदेश) और टर्मिनेटर (जहाँ अनुलेखन रुकता है) होते हैं। टेम्पलेट रज्जुक पढ़ा जाता है; कोडिंग रज्जुक का क्रम mRNA जैसा होता है (T की जगह U)। प्रोकैरियोट में जीन लगातार होते हैं (इंट्रॉन नहीं) और जुड़े जीन अक्सर एक प्रमोटर वाले ऑपेरॉन में होते हैं, जिससे एक बहुसिस्ट्रॉनी mRNA बनती है। यूकैरियोट में जीन विभक्त होते हैं: कोडिंग एक्सॉन के बीच अकोडिंग इंट्रॉन। पूरा जीन पहले प्री-mRNA में बदलता है; फिर इंट्रॉन हटते हैं, एक्सॉन जुड़ते हैं (स्प्लाइसिंग), कैप और पॉली-A पूँछ लगती है। वैकल्पिक स्प्लाइसिंग से एक जीन कई प्रोटीन बना सकता है। जीनोम किसी जीव का पूरा DNA है; मनुष्य में सिर्फ़ 1–2% प्रोटीन के लिए कोड करता है।
2. Gene expression
Transcription and translation · Genetic code · Regulation of gene expression · Cell differentiation in development · Development and gene control
- वंशागति का आणविक आधार – ज़्यादातर जीवों में DNA आनुवंशिक पदार्थ है (कुछ वायरस में RNA)। यह द्विकुंडली है: न्यूक्लियोटाइड के दो प्रतिसमांतर सूत्र; A–T दो हाइड्रोजन बंध से, G–C तीन से। लंबा DNA हिस्टोन पर लिपटकर न्यूक्लियोसोम और फिर क्रोमैटिन बनाता है। DNA अर्धसंरक्षी ढंग से प्रतिकृति बनाता है (मेसेल्सन–स्टाल)। केंद्रीय सिद्धांत: DNA → RNA → प्रोटीन। अनुलेखन एक सूत्र से RNA बनाता है; यूकैरियोट में hnRNA पर कैप, पूँछ और स्प्लाइसिंग होती है। आनुवंशिक कूट त्रिक है, 64 कोडॉन (61 अमीनो अम्ल, 3 समापन), AUG से शुरू, लगभग सार्वत्रिक और अपह्रासित। राइबोसोम tRNA की मदद से mRNA को प्रोटीन में बदलता है। जीन चालू-बंद होते हैं; लैक ओपेरॉन इसका उदाहरण है। मानव और चावल जीनोम परियोजनाओं ने पूरा जीनोम पढ़ा, और DNA फिंगरप्रिंटिंग दोहराव वाले DNA (VNTR) से व्यक्ति की पहचान करती है।
- जीन नियमन: कोशिका जीन को चालू और बंद कैसे करती है – हर कोशिका में एक जैसा DNA है, पर वह कुछ ही जीन इस्तेमाल करती है। नियंत्रण ज़्यादातर अनुलेखन (transcription) की शुरुआत पर होता है। बैक्टीरिया में लैक ऑपेरॉन कई जीनों का एक समूह है जिसका एक प्रमोटर और एक ऑपरेटर है: लैक्टोज़ न हो तो रिप्रेसर उसे बंद रखता है; लैक्टोज़ रिप्रेसर को हटा देता है और जीन पढ़े जाते हैं (प्रेरणीय ऑपेरॉन)। यूकैरियोट में ट्रांसक्रिप्शन फ़ैक्टर, एन्हांसर और साइलेंसर हर जीन को नियंत्रित करते हैं, और एपिजेनेटिक निशान (DNA मिथाइलेशन, हिस्टोन पैकिंग) DNA का क्रम बदले बिना जीन बंद रख सकते हैं। अलग-अलग चालू/बंद पैटर्न से अलग कोशिकाएँ बनती हैं (विभेदन)।
- विकास: एक कोशिका से पूरा शरीर – विकास (व्यक्तिवृत्त, ontogenesis) एक जीव की जीवन कहानी है। युग्मनज विदलन से बँटकर कोशिकाओं की गेंद (कोरकपुटी) बनाता है। कंदुकन में कोशिकाएँ अंदर जाती हैं और तीन जनन स्तर बनते हैं: बाह्यत्वचा, मध्यजनस्तर, अंतर्जनस्तर। फिर कोशिकाएँ विभेदित होती हैं: सबमें एक जैसे जीन, पर हर प्रकार अलग जीन चालू करता है। कोशिकाओं के संकेत (प्रेरण) और Hox जैसे मुख्य जीन तय करते हैं कि कौन-सा अंग कहाँ बने। जन्म के बाद जीव बढ़ता है, सीधे या कायांतरण से विकसित होता है, बूढ़ा होता है और कभी-कभी अंग दोबारा उगा सकता है।
3. Biotechnology
History of biotechnology · Antibodies, stem cells, gene editing · Fields related to biotechnology · Living modified organisms · Ethical issues
- जैव प्रौद्योगिकी एवं उसके उपयोग – आनुवंशिक इंजीनियरिंग के औज़ार दवा, खेती और शोध में काम आते हैं। जीवाणु मानव इंसुलिन बनाते हैं; यीस्ट सुरक्षित टीका-प्रोटीन बनाता है। स्टेम कोशिकाएँ कई प्रकार की कोशिकाओं में बदल सकती हैं। जीन थेरेपी रोगी की कोशिकाओं में सही जीन डालती है। Bt कपास जैसी GM फसलों में कीट मारने वाले प्रोटीन का जीन होता है। पारजीनी जंतु रोग समझने या दवा बनाने में मदद करते हैं। ये शक्तिशाली हैं, इसलिए भारत में GEAC इन पर नज़र रखती है और कानून बायोपायरेसी व अनुचित पेटेंट से बचाते हैं।
- जैवनैतिकता: जीवविज्ञान और चिकित्सा में सही क्या है – जैवनैतिकता पूछती है कि जीवविज्ञान और चिकित्सा जो करने देते हैं, क्या हमें वह करना चाहिए। इसके चार सिद्धांत हैं: स्वायत्तता (पसंद का सम्मान), हितकारिता (भला करो), अहानिकारिता (नुक़सान न करो) और न्याय (बराबरी)। मानव गरिमा का अर्थ है कि इंसान कभी सिर्फ़ साधन नहीं, इसलिए सूचित सहमति ज़रूरी है। चिकित्सीय क्लोनिंग सख़्त नियमों से कहीं-कहीं मान्य है; इंसान की प्रजनन क्लोनिंग ज़्यादातर देशों में प्रतिबंधित है। जीवन की शुरुआत और अंत के सवाल फ़ायदों बनाम जोखिमों और मूल्यों पर तौले जाते हैं।