विकास (व्यक्तिवृत्त) क्या है?
व्यक्तिवृत्त (ontogenesis) एक जीव का युग्मनज से मृत्यु तक का पूरा जीवन है। इसके दो बड़े काल हैं:
- भ्रूणीय काल: युग्मनज से जन्म या अंडे से निकलने तक।
- भ्रूणोत्तर काल: वृद्धि, वयस्क होना, प्रजनन, बुढ़ापा और मृत्यु।
विकास में तीन काम साथ चलते हैं: कोशिका विभाजन (ज़्यादा कोशिकाएँ), वृद्धि (बड़ा होना) और विभेदन (खास प्रकार की कोशिकाएँ बनना)। चौथा, आकारजनन (morphogenesis), शरीर को आकार देता है।
शुरुआती भ्रूण: विदलन, कोरकपुटी और कंदुकन
विदलन: युग्मनज के तेज़ समसूत्री विभाजन। बीच में वृद्धि नहीं होती, इसलिए कोशिकाएँ (कोरकखंड, blastomeres) छोटी होती जाती हैं। लगभग 16–32 कोशिकाओं की ठोस गेंद तूतक (morula) कहलाती है, शहतूत जैसी।
कोरकपुटी (blastula): कोशिकाएँ बाहर की ओर जाती हैं और बीच में द्रव भरी गुहा, कोरकगुहा (blastocoel), बनती है। स्तनधारियों में यह ब्लास्टोसिस्ट है जो गर्भाशय में चिपकता है।
कंदुकन (gastrulation): कोशिकाएँ एक छेद (blastopore) से अंदर जाती हैं। अब तीन जनन स्तर हैं:
- बाह्यत्वचा (ectoderm): त्वचा, बाल, नाख़ून, दिमाग़, मेरुरज्जु, तंत्रिकाएँ, आँख का लेंस।
- मध्यजनस्तर (mesoderm): मांसपेशी, हड्डी, हृदय, रक्त, गुर्दे, जनन अंग।
- अंतर्जनस्तर (endoderm): आहार नाल की परत, फेफड़े, यकृत, अग्न्याशय।
स्पंज और निडेरिया (जैसे जेलीफ़िश) में दो ही परतें; ज़्यादातर बाकी जंतुओं में तीन।
ऊतक और अंग बनना: तंत्रिका नली, ऊतकजनन, अंगजनन
कॉर्डेट्स में अगला चरण न्यूरुला है। पीठ की बाह्यत्वचा मुड़कर तंत्रिका नली बनाती है, जो दिमाग़ और मेरुरज्जु बनती है। उसके नीचे मध्यजनस्तर से एक छड़, पृष्ठरज्जु (notochord), बनती है।
ऊतकजनन (histogenesis) यानी ऊतक बनना; अंगजनन (organogenesis) यानी इन ऊतकों से अंग बनना। मनुष्य में ज़्यादातर अंग पहले 8 हफ़्तों में शुरू होते हैं, इसलिए हानिकारक दवाएँ, शराब और कुछ संक्रमण गर्भ की शुरुआत में सबसे ख़तरनाक हैं।
विभेदन, स्टेम कोशिकाएँ, प्रेरण और जीन नियंत्रण
शरीर की लगभग हर कोशिका में एक जैसा DNA है। तंत्रिका और मांसपेशी कोशिका अलग इसलिए हैं क्योंकि वे अलग जीन चालू करती हैं। यही विभेदन है, जिसे जीन नियमन (ट्रांसक्रिप्शन फ़ैक्टर जीन चालू-बंद करते हैं) चलाता है।
स्टेम कोशिकाएँ बँट सकती हैं और दूसरे प्रकार भी बन सकती हैं:
- पूर्णशक्त (totipotent): पूरा जीव, अपरा तक बना सकती हैं (युग्मनज, पहली कुछ कोशिकाएँ)।
- बहुशक्त (pluripotent): शरीर की कोई भी कोशिका (ब्लास्टोसिस्ट का आंतरिक कोशिका पिंड)।
- बहुक्षम (multipotent): कुछ मिलते-जुलते प्रकार (अस्थि मज्जा की रक्त स्टेम कोशिकाएँ)।
भ्रूणीय प्रेरण (induction): कोशिकाओं का एक समूह रासायनिक संकेत भेजकर पास की कोशिकाओं को बताता है कि क्या बनना है। एक प्रसिद्ध प्रयोग में उभयचर भ्रूण का छोटा टुकड़ा (ऑर्गनाइज़र) दूसरे भ्रूण पर लगाने से दूसरा शरीर-अक्ष बन गया।
होमियोटिक (Hox) जीन मुख्य जीन हैं जो हर शरीर-खंड की पहचान (सिर, वक्ष, उदर) तय करते हैं। इनमें उत्परिवर्तन से अंग ग़लत जगह बन सकता है, जैसे फल-मक्खी में एंटीना की जगह टाँगें। ऐसे Hox जीन मक्खी, मछली और मनुष्य सबमें हैं।
भ्रूण के बाद: वृद्धि, कायांतरण, बुढ़ापा और पुनरुद्भवन
- प्रत्यक्ष विकास: बच्चा छोटे वयस्क जैसा दिखता है (मनुष्य, पक्षी, सरीसृप)।
- अप्रत्यक्ष विकास (कायांतरण): लार्वा बिल्कुल अलग दिखता है। पूर्ण: अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क (तितली)। अपूर्ण: अंडा → निम्फ़ → वयस्क (टिड्डा)। मेंढक: टैडपोल से मेंढक।
जीवन चक्र सरल (एक रूप) या जटिल (कई रूप या कई पोषी) हो सकता है। पौधों में बीजाणु बनाने वाली और युग्मक बनाने वाली पीढ़ियों का पीढ़ी एकांतरण होता है।
वृद्धि जीन, हार्मोन (वृद्धि हार्मोन, थायरॉइड हार्मोन; कीटों में एक्डाइसोन निर्मोचन कराता है) और भोजन से नियंत्रित है। कुछ जंतु जीवन भर बढ़ते हैं (मछली), कुछ रुक जाते हैं (स्तनधारी)।
बुढ़ापा: DNA और प्रोटीन में क्षति जमा होती है, हर विभाजन पर गुणसूत्रों के सिरे (टेलोमियर) छोटे होते हैं, मरम्मत धीमी पड़ती है। वैज्ञानिक इसे कई कारणों का मेल मानते हैं।
पुनरुद्भवन (regeneration): छिपकली पूँछ उगाती है, प्लेनेरिया पूरा शरीर, मानव यकृत खोया भाग फिर बना लेता है। चिकित्सा इसका उपयोग करती है: अंग प्रत्यारोपण, स्टेम कोशिका उपचार, ऊतक इंजीनियरिंग और त्वचा या उपास्थि की 3D बायोप्रिंटिंग।
पौधों का भ्रूण और प्रजनन चिकित्सा
फूलदार पौधों में बीज के अंदर युग्मनज बँटकर भ्रूण बनाता है, जिसमें मूलांकुर (भावी जड़), प्रांकुर (भावी तना) और एक या दो बीजपत्र होते हैं। पौधों में जीवन भर स्टेम कोशिका वाले क्षेत्र, विभज्योतक (meristem), रहते हैं, इसलिए वे बढ़ते रहते हैं।
प्रजनन चिकित्सा तब मदद करती है जब स्वाभाविक गर्भधारण कठिन हो: IVF (शरीर के बाहर निषेचन, फिर भ्रूण गर्भाशय में), अंडे या भ्रूण को जमाकर रखना, और आनुवंशिक रोगों की जाँच। इनसे नैतिक प्रश्न भी उठते हैं।
खुद करो: 3D में और घर पर
3D में: 6 विभाजन के बाद कितनी कोशिकाएँ होंगी? अनुमान लगाओ, फिर स्लाइडर खिसकाओ। (2⁶ = 64)
घर पर: कुछ मूँग या चने रात भर भिगोओ, एक को खोलो। मूलांकुर, प्रांकुर और दो बीजपत्र ढूँढो। बाकी को गीली रुई पर रखकर 5 दिन रोज़ चित्र बनाओ: यह भ्रूणोत्तर वृद्धि है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- n विदलन विभाजनों के बाद कोशिकाएँ = 2ⁿ
- क्रम: युग्मनज → विदलन → तूतक → कोरकपुटी → कंदुक → न्यूरुला → अंगजनन
- बाह्यत्वचा → त्वचा, तंत्रिका तंत्र; मध्यजनस्तर → मांसपेशी, हड्डी, रक्त, हृदय, गुर्दा; अंतर्जनस्तर → आहार नाल की परत, फेफड़े, यकृत, अग्न्याशय
- पूर्णशक्त > बहुशक्त > बहुक्षम (स्टेम कोशिका कितने प्रकार बना सकती है)
- पूर्ण कायांतरण: अंडा → लार्वा → प्यूपा → वयस्क; अपूर्ण: अंडा → निम्फ़ → वयस्क
हल किए गए उदाहरण
1. 5 विदलन विभाजनों के बाद कितनी कोशिकाएँ होंगी (हर कोशिका हर बार बँटे)?
2⁵ = 32। हर विभाजन संख्या दोगुनी करता है।
2. एक शिशु की मेरुरज्जु में दोष है। यह ऊतक किस जनन स्तर से बना?
मेरुरज्जु तंत्रिका नली से बनती है, जो बाह्यत्वचा (ectoderm) से आती है।
3. एक ही व्यक्ति की यकृत और त्वचा कोशिका इतनी अलग क्यों दिखती हैं?
DNA वही है पर अलग जीन चालू हैं। यकृत कोशिका यकृत के प्रोटीन बनाती है, त्वचा कोशिका केराटिन। यह जीन नियमन से विभेदन है।
4. तितली, मनुष्य, टिड्डा, मेंढक को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विकास में बाँटो।
प्रत्यक्ष: मनुष्य। अप्रत्यक्ष: तितली (पूर्ण कायांतरण), टिड्डा (अपूर्ण), मेंढक (टैडपोल से वयस्क)।
5. एक भ्रूण का ऊतक-टुकड़ा दूसरे भ्रूण के पेट वाली ओर लगाया गया। वहाँ दूसरा तंत्रिका तंत्र बन गया। इससे क्या पता चलता है?
भ्रूणीय प्रेरण: लगाए गए ऑर्गनाइज़र ने संकेत भेजे जिनसे मेज़बान की बाह्यत्वचा तंत्रिका ऊतक बनी।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि विदलन में भ्रूण बड़ा होता है। कोशिकाएँ बढ़ती हैं, कुल आकार लगभग वही रहता है।
- जनन स्तर मिलाना: दिमाग़ और तंत्रिकाएँ बाह्यत्वचा से बनती हैं, मध्यजनस्तर से नहीं।
- कहना कि अलग कोशिकाओं का DNA अलग है। DNA एक है; इस्तेमाल होने वाले जीन अलग हैं।
- कोरकपुटी और कंदुक में भ्रम। कोरकपुटी खोखली गेंद है; कंदुक में अंदर मुड़ने से परतें बनती हैं।