एक कोशिका, कई काम: विभेदन क्या है?
एक वयस्क मनुष्य में लगभग 37 खरब कोशिकाएँ होती हैं। वे बहुत अलग दिखती हैं: तंत्रिका कोशिका लंबी और शाखाओं वाली, पेशी कोशिका लंबी और मोटी, लाल रक्त कोशिका छोटी गोल तश्तरी जैसी। फिर भी सब एक ही कोशिका से शुरू हुईं।
विभेदन (differentiation) वह प्रक्रिया है जिसमें एक कच्ची, अविशेषित कोशिका बदलकर एक विशेष आकार और काम वाली विशिष्ट कोशिका बन जाती है।
- शरीर की हर कोशिका में वही DNA (वही जीन) होता है।
- कोशिका कुछ जीन चालू रखती है और बाकी बंद।
- चालू जीन जो प्रोटीन बनाते हैं, वे आकार और काम तय करते हैं।
यानी विभेदन में DNA नहीं बदलता। बदलता है यह कि कौन-से जीन इस्तेमाल हो रहे हैं।
पूर्ण-क्षमता: जो कोशिका सब कुछ बन सकती है
पूर्णशक्त (totipotent) कोशिका पूरा नया जीव बना सकती है। अंडे और शुक्राणु के मिलने से बना युग्मनज पूर्णशक्त होता है। उसके बाद की शुरुआती कुछ कोशिकाएँ (लगभग 8 कोशिकाओं तक) भी लगभग पूर्णशक्त होती हैं।
पौधे खास हैं: कई पौधों की कोशिकाएँ पूर्णशक्त बनी रहती हैं। गाजर या पत्ते का छोटा टुकड़ा, सही पोषण और हॉर्मोन के साथ प्रयोगशाला में, पूरा पौधा बन सकता है। इसे ऊतक संवर्धन (tissue culture) कहते हैं।
जंतुओं में विभेदन आमतौर पर एक ही दिशा में होता है। तंत्रिका कोशिका अपने आप त्वचा की कोशिका नहीं बन जाती।
क्षमता के स्तर, ज़्यादा से कम:
- पूर्णशक्त: पूरा जीव बना सकती है (युग्मनज)।
- बहुशक्त (pluripotent): शरीर की कोई भी कोशिका बना सकती है, पूरा जीव नहीं (भ्रूणीय स्टेम कोशिका)।
- बहु-प्रकारी (multipotent): कुछ मिलते-जुलते प्रकार बना सकती है (अस्थि-मज्जा की स्टेम कोशिका रक्त की अलग-अलग कोशिकाएँ बनाती है)।
- विशिष्ट कोशिका: एक पक्का काम, अक्सर ज़्यादा बँट नहीं पाती।
कोशिका चुनाव कैसे करती है? जीन के स्विच
हर जीन को बिजली का स्विच समझिए। तंत्रिका कोशिका में तंत्रिका-प्रोटीन वाले स्विच चालू होते हैं। पेशी कोशिका में पेशी-प्रोटीन (एक्टिन और मायोसिन) के स्विच चालू होते हैं। लाल रक्त कोशिका में हीमोग्लोबिन का स्विच चालू होता है।
कुछ जीन हर कोशिका में चालू रहते हैं, जैसे ऊर्जा बनाने वाले जीन। इन्हें हाउसकीपिंग जीन कहते हैं।
स्विच कौन पलटता है? पास की कोशिकाओं और शरीर से आने वाले रासायनिक संकेत, और भ्रूण में कोशिका की जगह। संकेत नाभिक तक पहुँचकर तय करते हैं कि कौन-से जीन पढ़े जाएँ।
स्विच के हिसाब से खास बनावट आती है: तंत्रिका कोशिका संदेश ले जाने के लिए लंबा तंतु बनाती है, पेशी कोशिका में सिकुड़ने वाले तंतु होते हैं, और परिपक्व लाल रक्त कोशिका हीमोग्लोबिन के लिए जगह बनाने को अपना नाभिक खो देती है।
स्टेम कोशिकाएँ (Stem cells)
स्टेम कोशिका वह अविशेषित कोशिका है जो (1) बार-बार बँट सकती है और (2) एक या अधिक प्रकार की विशिष्ट कोशिकाओं में बदल सकती है।
स्टेम कोशिका बँटे तो एक स्टेम कोशिका + एक ऐसी कोशिका जो आगे विशिष्ट बनेगी बन सकती है। इसे स्व-नवीनीकरण (self-renewal) कहते हैं। इससे जीवन भर स्टेम कोशिकाओं का भंडार बना रहता है।
- भ्रूणीय स्टेम कोशिकाएँ: बहुत छोटे भ्रूण से। बहुशक्त।
- वयस्क (ऊतक) स्टेम कोशिकाएँ: अस्थि-मज्जा, त्वचा, आँत आदि में। बहु-प्रकारी। ये घिसी कोशिकाओं की मरम्मत और बदली करती हैं।
- प्रेरित बहुशक्त स्टेम कोशिकाएँ (iPS): शरीर की कोशिकाएँ जिन्हें वैज्ञानिक प्रयोगशाला में ऐसा बना देते हैं कि वे भ्रूणीय स्टेम कोशिका जैसी काम करें।
स्टेम कोशिकाओं के उपयोग और सावधानी
उपयोग: रक्त रोगों में अस्थि-मज्जा प्रत्यारोपण, गंभीर जलने पर त्वचा उगाना, आँख की कॉर्निया उगाना, और प्रयोगशाला में उगाए ऊतक पर नई दवाओं की जाँच।
सावधानी: भ्रूणीय स्टेम कोशिकाओं के प्रयोग में नैतिक सवाल उठते हैं क्योंकि भ्रूण इस्तेमाल होता है। स्टेम कोशिका का इलाज केवल मान्य अस्पतालों में ही कराना चाहिए। कई ऑनलाइन क्लिनिक ऐसे इलाज का दावा करते हैं जो साबित नहीं हैं, इसलिए सतर्क रहें।
करके देखिए (Try it)
3D में: जीन के स्विच वाले चरण पर जाइए। कोशिका का प्रकार दबाने से पहले अंदाज़ा लगाइए कि कौन-से स्विच चालू होंगे। फिर जाँचिए। देखिए कि स्विच 1 हर कोशिका में चालू है।
घर पर: 6 पत्तों (कार्ड) का एक सेट लीजिए (ये "जीन" हैं)। तीन दोस्तों को वही 6 पत्ते दीजिए। हर एक से कहिए कि अपने काम (धावक, गायक, रसोइया) के लिए केवल 3 पत्ते "चालू" रखे। वही पत्ते, अलग काम: यही विभेदन है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- विभेदन = वही DNA + अलग जीन चालू
- युग्मनज (पूर्णशक्त) → भ्रूणीय स्टेम कोशिका (बहुशक्त) → वयस्क स्टेम कोशिका (बहु-प्रकारी) → विशिष्ट कोशिका
- स्टेम कोशिका का विभाजन = 1 स्टेम कोशिका + 1 कोशिका जो विशिष्ट बनेगी (स्व-नवीनीकरण)
हल किए गए उदाहरण
1. एक ही व्यक्ति की तंत्रिका कोशिका और पेशी कोशिका बहुत अलग हैं। क्या उनका DNA अलग है?
नहीं। दोनों का DNA वही है क्योंकि दोनों एक ही युग्मनज से कोशिका विभाजन द्वारा बनीं। फ़र्क़ इसलिए है कि अलग जीन चालू हैं।
2. एक वैज्ञानिक गाजर की एक जड़-कोशिका से तश्तरी में पूरा गाजर का पौधा उगाता है। यह कोशिका की कौन-सी क्षमता दिखाता है?
पूर्ण-क्षमता (totipotency)। अकेली पौधे की कोशिका में हर प्रकार की कोशिका और पूरा पौधा बनाने की शक्ति बनी रही। इस विधि को ऊतक संवर्धन कहते हैं।
3. एक स्टेम कोशिका 4 बार बँटती है, हर बार एक स्टेम कोशिका और एक विशिष्ट कोशिका देती है। अंत में कितनी स्टेम और कितनी विशिष्ट कोशिकाएँ होंगी?
हर विभाजन में 1 स्टेम कोशिका बची रहती है और 1 विशिष्ट कोशिका जुड़ती है। 4 विभाजन के बाद: 1 स्टेम कोशिका और 4 विशिष्ट कोशिकाएँ।
4. अस्थि-मज्जा की स्टेम कोशिकाएँ लाल और श्वेत रक्त कोशिकाएँ बना लेती हैं, पर तंत्रिका कोशिका क्यों नहीं?
वे बहु-प्रकारी हैं, बहुशक्त नहीं। वे केवल मिलते-जुलते सीमित प्रकार (रक्त कोशिकाएँ) बना सकती हैं।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में अलग DNA होता है। DNA वही रहता है; केवल चालू/बंद जीन अलग होते हैं।
- पूर्णशक्त (पूरा जीव) और बहुशक्त (शरीर की कोई भी कोशिका, पूरा जीव नहीं) को आपस में मिला देना।
- यह मानना कि स्टेम कोशिका हमेशा विशिष्ट ही बनती है। वह अपनी नकल बनाकर अविशेषित भी रह सकती है।
- यह कहना कि लाल रक्त कोशिका में नाभिक होता है। मनुष्य की परिपक्व लाल रक्त कोशिका में नाभिक नहीं होता।