क्लोन क्या है?
क्लोन ऐसा जीव है जिसके जीन एक जैसे हों। जीन DNA में लिखे निर्देश हैं।
प्रकृति बिना प्रयोगशाला के क्लोन बनाती है। एक जैसे जुड़वाँ एक निषेचित अंड के दो में बँटने से बनते हैं। जीवाणु बँटकर अपनी दो प्रतियाँ बनाता है। मनी प्लांट की कलम उसी जीन वाला नया पौधा बन जाती है।
क्लोन जीन की प्रतिलिपि हैं, यादों या आदतों की नहीं। क्लोन की गई बिल्ली का रंग-रूप या स्वभाव अलग हो सकता है, क्योंकि वातावरण भी असर डालता है।
जंतु कोशिका संवर्धन और कोशिका संलयन
कोशिका संवर्धन का मतलब है जंतु कोशिकाओं को साफ़ फ़्लास्क में भोजन और गर्मी (37 °C) के साथ उगाना। इसका विस्तार जंतु कोशिका संवर्धन वाले पाठ में है।
कोशिका संलयन का मतलब है दो कोशिकाओं को जोड़कर एक करना। रसायन (जैसे PEG), हानिरहित वायरस या हल्का विद्युत झटका यह कर सकते हैं। नई कोशिका में दोनों केंद्रक होते हैं, जो बाद में मिलकर एक हो सकते हैं।
- बिना कोशिका-भित्ति की दो पादप कोशिकाओं (प्रोटोप्लास्ट) का संलयन कायिक संकर देता है।
- प्रतिरक्षी बनाने वाली B कोशिका और लंबे समय जीने वाली मायलोमा कोशिका का संलयन हाइब्रिडोमा देता है।
एकल-क्लोनी प्रतिरक्षी (मोनोक्लोनल एंटीबॉडी)
B कोशिका एक ही प्रकार का प्रतिरक्षी बनाती है, पर जल्दी मर जाती है। मायलोमा (कैंसर जैसी) कोशिका हमेशा बँटती रहती है। हाइब्रिडोमा दोनों करता है: लंबा जीता है और एक ही प्रकार का प्रतिरक्षी बनाता है।
इसकी सब कोशिकाएँ एक कोशिका की क्लोन हैं, इसलिए प्रतिरक्षी एकल-क्लोनी (“एक क्लोन”) कहलाता है। चरण: चूहे में प्रतिजन (एंटीजन) डालें, तिल्ली से B कोशिकाएँ लें, मायलोमा कोशिकाओं से जोड़ें, सही प्रतिरक्षी बनाने वाला हाइब्रिडोमा चुनें और बड़ी टंकियों में उगाएँ।
उपयोग: गर्भ जाँच की पट्टी, खून में रोगाणु पहचानना, कुछ कैंसर और प्रतिरक्षा रोगों का इलाज। पूरा पाठ एकल-क्लोनी प्रतिरक्षी वाले पाठ में है।
केंद्रक स्थानांतरण द्वारा क्लोनिंग
हर शरीर कोशिका में जानवर के सभी जीन होते हैं, पर अधिकतर बंद रहते हैं। केंद्रक स्थानांतरण उन्हें फिर से जगा देता है।
- दाता कोशिका: जिस जानवर की प्रतिलिपि चाहिए, उसकी शरीर कोशिका (थन या त्वचा की) लें।
- खाली अंड: दूसरे जानवर का अंड लें और उसका केंद्रक निकाल दें।
- स्थानांतरण: दाता केंद्रक को खाली अंड में डालें। हल्का विद्युत झटका उन्हें जोड़कर विभाजन शुरू करा देता है।
- भ्रूण: अंड थाली में कुछ दिन बँटता है।
- सरोगेट: भ्रूण को उसी प्रजाति की मादा के गर्भाशय में रखें।
- जन्म: दाता के जीन वाला बच्चा पैदा होता है।
डॉली का जन्म 1996 में स्कॉटलैंड में हुआ। एक स्वस्थ मेमने के लिए कई कोशिशें करनी पड़ीं। वह लगभग 6 साल जीवित रही।
उपयोग, सीमाएँ और नैतिकता
- खेती-पशुपालन: अधिक दूध देने वाले पशुओं की प्रतियाँ।
- संरक्षण: बहुत दुर्लभ प्रजातियों की मदद।
- चिकित्सा: मानव रोग का जीन रखने वाले पशु, इलाज के परीक्षण के लिए; दूध में उपयोगी प्रोटीन बनाने वाले पशु।
- स्टेम कोशिकाएँ (चिकित्सीय क्लोनिंग): भ्रूण की कोशिकाएँ जो मरम्मत के लिए ऊतक बना सकती हैं। यह अभी शोध है।
सीमाएँ: सफलता दर बहुत कम (अक्सर 100 में 1 या कम), कई क्लोन बीमार पैदा होते हैं, और ख़र्च अधिक है। क्लोन 100% एक जैसा भी नहीं होता, क्योंकि अंड के माइटोकॉन्ड्रिया में थोड़ा DNA रह जाता है और वातावरण भी असर डालता है।
नैतिकता: क्लोन किया हुआ मानव शिशु बनाना (जनन क्लोनिंग) अधिकतर देशों में प्रतिबंधित या अनुमति के बाहर है, सुरक्षा और मानव गरिमा के कारण। जैव-नैतिकता वाला पाठ पढ़िए।
करके देखिए
3D में तीन दाता बटन दबाइए और देखिए कि मेमने का रंग केंद्रक के साथ बदलता है। घर पर मनी प्लांट या पुदीने की कलम पानी में रखिए: उसकी नई जड़ें ऐसा पौधा बनाती हैं जो मूल पौधे का क्लोन है। एक तालिका बनाइए: केंद्रक किसने दिया, अंड किसने दिया, बच्चे को किसने पाला।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्लोन = दाता जैसे जीन
- केंद्रक स्थानांतरण = दाता केंद्रक + खाली अंड + सरोगेट माँ
- हाइब्रिडोमा = B कोशिका + मायलोमा कोशिका (हमेशा एक प्रकार का प्रतिरक्षी बनाती है)
- n विभाजनों के बाद कोशिकाएँ = 2ⁿ
- सफलता दर (%) = स्वस्थ क्लोन ÷ कोशिशें × 100
हल किए गए उदाहरण
1. काली भेड़ केंद्रक देती है, सफ़ेद भेड़ अंड देती है, भूरी भेड़ सरोगेट है। मेमने का रंग क्या होगा?
काला। रंग के जीन केंद्रक में होते हैं। अंड दाता और सरोगेट अपने जीन नहीं देतीं।
2. वैज्ञानिक 200 पुनर्निर्मित अंड बनाते हैं और 4 जीवित, स्वस्थ मेमने मिलते हैं। सफलता दर क्या है?
4 ÷ 200 × 100 = 2%।
3. मनुष्य की लाल रक्त कोशिका केंद्रक स्थानांतरण के लिए क्यों नहीं ली जा सकती?
परिपक्व मानव लाल रक्त कोशिका में केंद्रक नहीं होता, इसलिए स्थानांतरण के लिए जीन नहीं मिलते। हमें केंद्रक वाली शरीर कोशिका चुननी होगी, जैसे त्वचा की कोशिका।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सरोगेट माँ अपनी शक्ल बच्चे को देती है। वह केवल गर्भ और भोजन देती है; जीन केंद्रक दाता से आते हैं।
- यह सोचना कि क्लोनिंग में शुक्राणु और अंड जुड़ते हैं। केंद्रक स्थानांतरण में शुक्राणु नहीं होता; शरीर कोशिका का केंद्रक अंड में जाता है।
- क्लोन को हर तरह से पूरी नक़ल मानना। माइटोकॉन्ड्रिया का DNA, गर्भ, भोजन और जीवन के अनुभव से छोटे अंतर आ जाते हैं।
- क्लोन (वही जीन) और संकर (दो अलग जीवों के जीन) को मिला देना।