कोशिका की संरचना और ऊर्जा
कोशिका जीवन की मूल इकाई है। केंद्रक में DNA होता है। कोशिका झिल्ली तय करती है कि क्या अंदर-बाहर जाए। राइबोसोम प्रोटीन बनाते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया भोजन से ऊर्जा निकालते हैं।
कोशिकीय श्वसन और ATP
कोशिका ग्लूकोज़ सीधे इस्तेमाल नहीं कर सकती। श्वसन में ग्लूकोज़ कदम-कदम पर टूटता है (कोशिकाद्रव्य में ग्लाइकोलिसिस, फिर माइटोकॉन्ड्रिया में क्रेब्स चक्र और इलेक्ट्रॉन परिवहन)। ऊर्जा ATP नाम के अणु में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ एक ग्लूकोज़ से लगभग 30 से 32 ATP बनते हैं। ऑक्सीजन के बिना केवल 2 ATP बनते हैं (किण्वन)।
प्रकाश-संश्लेषण
पौधे हरितलवक में प्रकाश पकड़कर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से ग्लूकोज़ बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। लगभग सारे जीवन का भोजन और ऊर्जा यहीं से आती है।
नियमन और रक्षा
शरीर अपने अंदर का संतुलन (समस्थापन) ऋणात्मक पुनर्निवेशन से बनाए रखता है। रक्त में शर्करा बढ़ती है तो अग्न्याशय इंसुलिन छोड़ता है, कोशिकाएँ शर्करा लेती हैं और स्तर वापस घटता है। तंत्रिकाएँ पलक झपकते काम करती हैं; हार्मोन धीरे पर देर तक काम करते हैं।
प्रतिरक्षा रक्षा
त्वचा और श्लेष्मा पहली दीवार हैं। रोगाणु अंदर आए तो श्वेत रक्त कोशिकाएँ उस पर हमला करती हैं। B कोशिकाएँ प्रतिरक्षी (एंटीबॉडी) बनाती हैं, Y आकार के प्रोटीन जो रोगाणु की एक विशेष आकृति (प्रतिजन) पर फिट होते हैं। कुछ B और T कोशिकाएँ स्मृति कोशिकाएँ बनी रहती हैं, इसलिए अगला संक्रमण जल्दी रुकता है। टीका रोग हुए बिना यह स्मृति तैयार करता है।
जीवन की निरंतरता: DNA और आनुवंशिकता
DNA दोहरी कुंडली है जिसकी दो लड़ियाँ क्षारक जोड़ों से जुड़ी हैं: A के साथ T और C के साथ G। जीन DNA का वह टुकड़ा है जिसमें एक प्रोटीन के निर्देश होते हैं।
DNA प्रतिकृति
कोशिका बँटने से पहले कुंडली खुलती है। हर पुरानी लड़ी साँचा बनती है और नए क्षारक उससे जुड़ते हैं। इससे दो एक जैसे DNA बनते हैं, हर एक में एक पुरानी और एक नई लड़ी (अर्द्ध-संरक्षी)।
गुण आगे बढ़ना
शरीर की कोशिकाएँ समसूत्री विभाजन से एक जैसी कोशिकाएँ बनाती हैं। जनन कोशिकाएँ अर्द्धसूत्री विभाजन से बनती हैं और आधे गुणसूत्र रखती हैं, इसलिए संतान को हर माता-पिता से एक सेट मिलता है। नकल की गलतियाँ उत्परिवर्तन हैं, जो विविधता का स्रोत हैं।
जैव प्रौद्योगिकी
जैव प्रौद्योगिकी जीवित कोशिकाओं या उनके अंशों से उपयोगी चीज़ें बनाती है। पुराने रूप हैं दही, रोटी-ब्रेड और शराब बनाना। आधुनिक आनुवंशिक इंजीनियरी एक जीव का जीन दूसरे में डालती है।
जीन क्लोनिंग के चरण
- प्रतिबंधन एंज़ाइम (आणविक कैंची) से चाहा हुआ जीन काटो।
- उसी एंज़ाइम से प्लास्मिड काटो ताकि सिरे मेल खाएँ।
- लाइगेज़ (आणविक गोंद) से जीन को प्लास्मिड में जोड़ो।
- प्लास्मिड जीवाणु में डालो। वे बढ़कर जीन और उसके प्रोटीन की बहुत प्रतियाँ बनाते हैं।
उपयोग: इंसुलिन, टीके, रोग-प्रतिरोधी फसलें, अपराध और पारिवारिक जाँच में DNA फ़िंगरप्रिंटिंग। सुरक्षा, न्याय और प्रकृति के लिए सावधान नियम चाहिए।
करके देखो: ATP की खपत महसूस करो
आराम से एक मिनट अपनी साँसें गिनो। फिर 30 जंपिंग जैक करो और दोबारा गिनो। तुम्हारी मांसपेशियों ने ज़्यादा ATP इस्तेमाल किया, इसलिए ज़्यादा ऑक्सीजन चाहिए थी और साँस की दर बढ़ी। 3D में ग्लूकोज़ की पट्टी खिसकाओ और ATP की गिनती बढ़ते देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- श्वसन: ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन -> कार्बन डाइऑक्साइड + पानी + ऊर्जा (लगभग 30-32 ATP)
- प्रकाश-संश्लेषण: कार्बन डाइऑक्साइड + पानी + प्रकाश -> ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन
- क्षारक जोड़े: A-T और C-G
- प्रतिकृति अर्द्ध-संरक्षी है: हर नए DNA में एक पुरानी और एक नई लड़ी
हल किए गए उदाहरण
1. एक कोशिका को 4 ग्लूकोज़ अणु मिले और उसने ऑक्सीजन के साथ पूरे जलाए। अगर हर ग्लूकोज़ से 30 ATP बनें, तो कुल लगभग कितने ATP बने?
4 x 30 = 120 ATP।
2. DNA की एक लड़ी A-T-G-C है। उसकी जोड़ीदार लड़ी क्या होगी?
A के साथ T और C के साथ G जुड़ता है, इसलिए साथी लड़ी T-A-C-G है।
3. उसी रोगाणु का दूसरा संक्रमण आम तौर पर हल्का क्यों होता है?
स्मृति कोशिकाएँ रोगाणु को याद रखती हैं। वे सही प्रतिरक्षी बहुत जल्दी बनाती हैं, इसलिए रोगाणु फैलने से पहले रुक जाता है।
आम गलतियाँ
- ATP को ऊर्जा ही कह देना। ATP ऊर्जा ले जाने वाला अणु है।
- यह सोचना कि पौधे श्वसन नहीं करते। वे दिन-रात करते हैं; प्रकाश-संश्लेषण केवल रोशनी में होता है।
- A-T और C-G का जोड़ा उलटना या A को C से जोड़ देना।
- यह सोचना कि एक प्रतिरक्षी हर रोगाणु पर चलता है। हर प्रतिरक्षी एक ही प्रतिजन पर फिट होता है।