कोशिका सिद्धांत: हर कोशिका, कोशिका से
कोशिका सजीव का वह सबसे छोटा भाग है जो अपने दम पर जी सकता है। ल्यूवेनहॉक ने सबसे पहले जीवित कोशिका देखी। रॉबर्ट ब्राउन ने केंद्रक खोजा। 1838 में श्लाइडेन ने कहा कि सभी पौधे कोशिकाओं से बने हैं। 1839 में श्वान ने यही बात जंतुओं के लिए कही, और देखा कि पादप कोशिका में एक अतिरिक्त भित्ति होती है। 1855 में विरशॉ ने छूटी हुई बात जोड़ी: ओमनिस सेलुला-ए सेलुला – हर कोशिका पहले से मौजूद कोशिका से बनती है।
आधुनिक कोशिका सिद्धांत (दो बातें)
- सभी सजीव कोशिकाओं और उनके उत्पादों से बने हैं।
- सभी कोशिकाएँ पहले से मौजूद कोशिकाओं से बनती हैं।
कोशिका का आकार बहुत अलग-अलग: माइकोप्लाज़्मा लगभग 0.3 µm, जीवाणु 3–5 µm, मानव लाल रक्त कोशिका लगभग 7 µm, और शुतुरमुर्ग का अंडा सबसे बड़ी एकल कोशिका। तंत्रिका कोशिकाएँ सबसे लंबी कोशिकाओं में हैं।
प्रोकैरियोटी और यूकैरियोटी कोशिका
प्रोकैरियोटी का मतलब "केंद्रक से पहले"। जीवाणु, नील-हरित शैवाल (सायनोबैक्टीरिया), माइकोप्लाज़्मा और PPLO प्रोकैरियोट हैं।
- DNA एक गोल गुणसूत्र है जो केंद्रकाभ (न्यूक्लियॉइड) में खुला पड़ा रहता है; केंद्रक आवरण नहीं।
- कई में छोटे अतिरिक्त DNA छल्ले प्लाज़्मिड होते हैं, जिनमें एंटीबायोटिक-प्रतिरोध जैसे जीन हो सकते हैं।
- झिल्ली वाले कोशिकांग नहीं। राइबोसोम 70S।
- ज़्यादातर में तीन परतों वाला आवरण: ग्लाइकोकैलिक्स (ढीली अवपंक परत या मज़बूत संपुटिका), कोशिका भित्ति और कोशिका झिल्ली।
- झिल्ली अंदर मुड़कर मीसोसोम बनाती है, जो भित्ति बनाने, DNA दोहराने, श्वसन और स्राव में मदद करता है।
- कुछ में कशाभिका (तंतु, हुक, आधारीय काय), पिली और फ़िम्ब्री होते हैं जो सतह से चिपकने में मदद करते हैं। एक mRNA पर कई राइबोसोम = पॉलीसोम। भंडारित भोजन अंतर्विष्ट पिंडों में (फ़ॉस्फ़ेट कण, ग्लाइकोजन कण, गैस रिक्तिका)।
ग्राम अभिरंजन: जो जीवाणु रंग पकड़े रहते हैं वे ग्राम धनात्मक, जो छोड़ देते हैं वे ग्राम ऋणात्मक।
यूकैरियोटी कोशिकाओं (प्रोटिस्ट, कवक, पौधे, जंतु) में केंद्रक आवरण वाला असली केंद्रक, झिल्ली वाले कई कोशिकांग, कोशिका कंकाल और 80S राइबोसोम होते हैं।
पादप कोशिका बनाम जंतु कोशिका
| पादप कोशिका | जंतु कोशिका |
|---|---|
| सेलुलोज़ की कोशिका भित्ति | भित्ति नहीं |
| लवक (हरितलवक) होते हैं | लवक नहीं |
| एक बड़ी केंद्रीय रिक्तिका | छोटी या कोई रिक्तिका नहीं |
| तारककेंद्र नहीं (ज़्यादातर में) | तारककेंद्र होते हैं |
| आमतौर पर डिब्बे जैसी | आकार बदल सकता है |
दोनों में कोशिका झिल्ली, केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, ER, गॉल्जी, राइबोसोम और कोशिका कंकाल होते हैं।
कोशिका झिल्ली और कोशिका भित्ति
कोशिका झिल्ली मुख्य रूप से लिपिड (ज़्यादातर फ़ॉस्फ़ोलिपिड) की दो परतों से बनी है, साथ में प्रोटीन और कुछ कार्बोहाइड्रेट। मानव लाल रक्त कोशिका की झिल्ली में लगभग 52% प्रोटीन और 40% लिपिड। हर लिपिड का पानी-प्रेमी (ध्रुवीय) सिर बाहर और पानी से दूर रहने वाली (अध्रुवीय) पूँछ अंदर।
तरल मोज़ेक मॉडल
सिंगर और निकोलसन (1972) ने दिया। लिपिड परत गाढ़े द्रव जैसी है, इसलिए प्रोटीन बगल में खिसक सकते हैं – "तरल"। प्रोटीन इसमें टुकड़ों की तरह बिखरे हैं – "मोज़ेक"। समाकल प्रोटीन परत में धँसे रहते हैं; परिधीय प्रोटीन सतह पर। तरलता से कोशिका बढ़ पाती है, बँट पाती है, जुड़ाव बना पाती है और स्राव कर पाती है।
चीज़ें कैसे पार होती हैं
- निष्क्रिय परिवहन: ढाल की दिशा में, बिना ऊर्जा – सरल विसरण; पानी परासरण से।
- ध्रुवीय अणुओं को वाहक प्रोटीन चाहिए।
- सक्रिय परिवहन: ढाल के उलट, ATP ख़र्च – जैसे Na⁺/K⁺ पंप।
कोशिका भित्ति
पौधों, कवक और जीवाणु में झिल्ली के बाहर निर्जीव, सख़्त परत। यह आकार देती है, चोट और रोगाणुओं से बचाती है, और कोशिकाओं के बीच संपर्क में मदद करती है। पादप भित्ति: सेलुलोज़, हेमीसेलुलोज़, पेक्टिन, प्रोटीन। शैवाल भित्ति: सेलुलोज़, गैलेक्टन, मैनन, कैल्शियम कार्बोनेट। परतें: मध्य पटलिका (कैल्शियम पेक्टेट, पड़ोसियों को चिपकाती है) → प्राथमिक भित्ति (नई, फैल सकती है) → द्वितीयक भित्ति (अंदर, मोटी)। जीवद्रव्य तंतु (प्लाज़्मोडेस्मेटा) भित्ति के आर-पार पड़ोसी कोशिकाओं के कोशिकाद्रव्य को जोड़ते हैं।
अंतःझिल्ली तंत्र: ER, गॉल्जी, लयनकाय, रिक्तिका
ये चारों मिलकर काम करते हैं, इसलिए अंतःझिल्ली तंत्र कहलाते हैं। माइटोकॉन्ड्रिया, हरितलवक और परऑक्सीसोम इसमें नहीं आते, क्योंकि उनका काम इनसे जुड़ा नहीं।
- अंतर्द्रव्यी जालिका (ER): छोटी नलियों का जाल जो कोशिकाद्रव्य को अंदरूनी (अवकाशी) और बाहरी भाग में बाँटता है। खुरदरी ER (RER) पर राइबोसोम होते हैं; यह प्रोटीन बनाकर स्रावित करती है – स्राव करने वाली कोशिकाओं में ज़्यादा। चिकनी ER (SER) पर राइबोसोम नहीं; यह लिपिड बनाती है, जंतुओं में स्टेरॉयड हॉर्मोन भी।
- गॉल्जी उपकरण (कैमिलो गॉल्जी, 1898): चपटी थैलियों (कुंडिकाओं) के ढेर, 0.5–1.0 µm चौड़े। सिस (निर्माण) फलक ER से पुटिकाएँ लेता है; ट्रांस (परिपक्व) फलक उन्हें बाहर भेजता है। यह सामान पैक करता है और यहीं ग्लाइकोप्रोटीन व ग्लाइकोलिपिड बनते हैं।
- लयनकाय (लाइसोसोम): गॉल्जी से बनी एक-झिल्ली वाली पुटिकाएँ, जल-अपघटनी एंज़ाइमों (लाइपेज़, प्रोटिएज़, कार्बोहाइड्रेज़) से भरी, जो अम्लीय pH पर सबसे अच्छा काम करते हैं। ये कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल पचाते हैं।
- रिक्तिका: एक झिल्ली, टोनोप्लास्ट, से घिरी जगह। पौधों में यह कोशिका का 90% तक भर सकती है। टोनोप्लास्ट आयनों को अंदर पंप करता है, इसलिए अंदर उनकी मात्रा कोशिकाद्रव्य से बहुत ज़्यादा होती है। अमीबा में संकुचनशील रिक्तिका अतिरिक्त पानी निकालती है; प्रोटिस्ट में खाद्य रिक्तिका बनती है।
माइटोकॉन्ड्रिया, राइबोसोम, लवक और सूक्ष्मकाय
- माइटोकॉन्ड्रिया: सॉसेज या प्याले जैसे, 0.2–1.0 µm चौड़े और 1.0–4.1 µm लंबे। दो झिल्लियाँ; भीतरी झिल्ली मुड़कर क्रिस्टी बनाती है ताकि सतह बढ़े। अंदर मैट्रिक्स में गोल DNA, कुछ RNA, 70S राइबोसोम और एंज़ाइम। वायवीय श्वसन का स्थान; ATP बनाते हैं, इसलिए "ऊर्जा घर"। विखंडन से बँटते हैं।
- लवक (पौधे, यूग्लीनॉइड): हरितलवक (क्लोरोफ़िल और कैरोटिनॉइड, प्रकाश-संश्लेषण), वर्णीलवक (कैरोटीन, ज़ैंथोफ़िल: पीला, नारंगी, लाल रंग) और अवर्णीलवक (रंगहीन भंडार: एमाइलोप्लास्ट – मंड, जैसे आलू; इलायोप्लास्ट – तेल व वसा; एल्यूरोप्लास्ट – प्रोटीन)। हरितलवक लेंस जैसा, दोहरी झिल्ली वाला; अंदर स्ट्रोमा में चपटी थैलियाँ थाइलेकॉइड, जो सिक्कों की तरह ढेर होकर ग्रैना बनाती हैं और स्ट्रोमा पटलिकाओं से जुड़ी हैं। स्ट्रोमा में एंज़ाइम, गोल DNA और 70S राइबोसोम।
- राइबोसोम (जॉर्ज पैलेड ने पहली बार देखे): RNA और प्रोटीन के कण, झिल्ली नहीं। यूकैरियोटी 80S = 60S + 40S; प्रोकैरियोटी 70S = 50S + 30S। "S" स्वेडबर्ग इकाई है – अपकेंद्रण में कण कितनी तेज़ी से बैठता है, उसका माप।
- सूक्ष्मकाय: एंज़ाइमों से भरी एक-झिल्ली वाली छोटी पुटिकाएँ, पौधों और जंतुओं दोनों में।
कोशिका कंकाल, पक्ष्माभ, कशाभिका और तारककेंद्र
- कोशिका कंकाल: प्रोटीन तंतुओं का जाल – सूक्ष्मनलिकाएँ, सूक्ष्मतंतु और मध्यवर्ती तंतु। यह सहारा और आकार देता है, कोशिका और उसके भागों की गति में मदद करता है।
- पक्ष्माभ (सिलिया) (छोटे, बहुत, चप्पू की तरह) और कशाभिका (फ़्लैजेला) (लंबे, कम, चाबुक की तरह) कोशिका झिल्ली से ढके बाल जैसे उभार हैं। इनका केंद्र, अक्षसूत्र (एक्सोनीम), में घेरे पर सूक्ष्मनलिकाओं के 9 जोड़े और बीच में 2 अकेली: 9 + 2 व्यवस्था। बीच की नलिकाएँ पुलों से जुड़ी और केंद्रीय आवरण से ढकी होती हैं, और अरीय तीलियों से घेरे के जोड़ों से जुड़ी हैं। दोनों आधारीय काय से निकलते हैं। प्रोकैरियोटी कशाभिका की बनावट अलग होती है।
- तारककाय: एक-दूसरे से समकोण पर पड़े दो बेलनाकार तारककेंद्र। हर एक में ट्यूबुलिन के 9 बराबर दूरी वाले त्रिक (गाड़ी का पहिया), बीच में धुरी: 9 + 0। तारककेंद्र पक्ष्माभ व कशाभिका का आधारीय काय बनाते हैं और जंतु कोशिका विभाजन में तर्कु।
केंद्रक और गुणसूत्र
रॉबर्ट ब्राउन ने 1831 में केंद्रक का वर्णन किया। फ़्लेमिंग ने रंग पकड़ने वाले पदार्थ को क्रोमैटिन नाम दिया।
- केंद्रक आवरण: दो झिल्लियाँ, बीच में जगह (परिकेंद्रकी अवकाश, 10–50 nm)। केंद्रक छिद्र RNA और प्रोटीन को आने-जाने देते हैं।
- केंद्रकद्रव्य में केंद्रिका (झिल्ली नहीं, rRNA बनाने का व्यस्त स्थान) और क्रोमैटिन (DNA + हिस्टोन नाम के क्षारीय प्रोटीन + कुछ नॉन-हिस्टोन प्रोटीन + RNA)।
- एक मानव कोशिका में लगभग 2 मीटर DNA, 46 गुणसूत्रों (23 जोड़े) में।
- स्तनधारियों की परिपक्व लाल रक्त कोशिकाओं और पौधों की चालनी नलिका कोशिकाओं में केंद्रक नहीं होता।
गुणसूत्रबिंदु की जगह से गुणसूत्र के प्रकार
गुणसूत्रबिंदु (सेंट्रोमियर) (प्राथमिक संकीर्णन) दोनों क्रोमैटिड को पकड़े रहता है; इसके दोनों ओर तश्तरी जैसे काइनेटोकोर। इसकी जगह के अनुसार:
- मध्यकेंद्री: बीच में – दोनों भुजाएँ बराबर।
- उप-मध्यकेंद्री: बीच से थोड़ा हटकर – एक छोटी, एक लंबी भुजा।
- अग्रकेंद्री: एक सिरे के बहुत पास – एक बहुत छोटी, एक बहुत लंबी भुजा।
- अंतकेंद्री: बिल्कुल सिरे पर।
कुछ गुणसूत्रों में बिना रंग वाला द्वितीयक संकीर्णन होता है, जो एक छोटा टुकड़ा, सैटेलाइट, अलग करता है।
घर पर करके देखिए: असली कोशिकाएँ
प्याज़ की एक परत के अंदर की पतली झिल्ली उतारिए, काँच की स्लाइड पर पानी की एक बूँद और आयोडीन या लाल स्याही की एक बूँद के साथ रखिए, और खिलौना सूक्ष्मदर्शी या फ़ोन के मैक्रो लेंस से देखिए। ईंट जैसी भित्ति वाली कोशिकाएँ दिखेंगी, हर एक में गहरा बिंदु (केंद्रक)। फिर साफ़ आइसक्रीम स्टिक से गाल के अंदर से हल्का सा खुरचकर यही कीजिए: कोशिकाएँ गोल हैं और भित्ति नहीं। 3D के चरण 3 से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कोशिका सिद्धांत: सभी सजीव कोशिकाओं से बने हैं; हर कोशिका पहले से मौजूद कोशिका से बनती है (विरशॉ)
- प्रोकैरियोट: केंद्रकाभ, केंद्रक आवरण नहीं, 70S राइबोसोम (50S + 30S), झिल्ली वाले कोशिकांग नहीं
- यूकैरियोट: असली केंद्रक, झिल्ली वाले कोशिकांग, 80S राइबोसोम (60S + 40S)
- तरल मोज़ेक मॉडल: लिपिड द्विपरत + समाकल और परिधीय प्रोटीन (सिंगर व निकोलसन, 1972)
- अंतःझिल्ली तंत्र = ER + गॉल्जी + लयनकाय + रिक्तिका
- पक्ष्माभ व कशाभिका: 9 + 2 सूक्ष्मनलिकाएँ; तारककेंद्र: 9 त्रिक + 0 (पहिया)
- दोहरी झिल्ली वाले कोशिकांग: केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, हरितलवक
- गुणसूत्र प्रकार: मध्यकेंद्री, उप-मध्यकेंद्री, अग्रकेंद्री, अंतकेंद्री
हल किए गए उदाहरण
1. एक कोशिका में 70S राइबोसोम हैं, कोशिकाद्रव्य में गोल DNA है और केंद्रक आवरण नहीं है। यह कैसी कोशिका है?
केंद्रक आवरण नहीं + केंद्रकाभ में DNA + 70S राइबोसोम = प्रोकैरियोटी कोशिका, जैसे जीवाणु।
2. एक नमूने में कोशिका भित्ति, बड़ी केंद्रीय रिक्तिका और हरितलवक हैं, पर तारककेंद्र नहीं। पादप या जंतु?
भित्ति + बड़ी रिक्तिका + लवक, तारककेंद्र नहीं → पादप कोशिका।
3. अग्न्याशय की कोशिका से बाहर भेजे जाने वाले पाचक एंज़ाइम का रास्ता बताइए।
खुरदरी ER के राइबोसोम पर बनता है → पुटिका में गॉल्जी के सिस फलक तक → बदला और पैक किया जाता है → ट्रांस फलक से स्रावी पुटिका में निकलता है → पुटिका कोशिका झिल्ली से मिलकर उसे बाहर छोड़ देती है।
4. एक गुणसूत्र का गुणसूत्रबिंदु एक सिरे के बहुत पास है, एक भुजा बहुत छोटी और एक बहुत लंबी। प्रकार बताइए।
अग्रकेंद्री। (बीच में = मध्यकेंद्री, थोड़ा हटकर = उप-मध्यकेंद्री, सिरे पर = अंतकेंद्री।)
5. पक्ष्माभ के अक्षसूत्र की अनुप्रस्थ काट में कुल कितनी सूक्ष्मनलिकाएँ?
9 जोड़े = 18 घेरे पर + 2 बीच में = 20 सूक्ष्मनलिकाएँ (9 + 2 व्यवस्था)।
6. माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक को अर्ध-स्वायत्त क्यों कहते हैं?
इनमें अपना गोल DNA और 70S राइबोसोम हैं, इसलिए ये अपने कुछ प्रोटीन बना सकते हैं और ख़ुद बँट सकते हैं – पर बहुत से प्रोटीन के लिए इन्हें केंद्रक पर निर्भर रहना पड़ता है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि श्लाइडेन और श्वान ने पूरा कोशिका सिद्धांत दिया। वे नई कोशिका बनने की बात नहीं बता पाए; "हर कोशिका, कोशिका से" विरशॉ ने जोड़ा।
- माइटोकॉन्ड्रिया या हरितलवक को अंतःझिल्ली तंत्र में गिनना। इसमें सिर्फ़ ER, गॉल्जी, लयनकाय और रिक्तिका हैं।
- स्वेडबर्ग इकाइयाँ जोड़ना: 50S + 30S = 80S नहीं। प्रोकैरियोटी राइबोसोम 70S है; S आकार और आकृति पर निर्भर है, सिर्फ़ भार पर नहीं।
- पक्ष्माभ का 9 + 2 (जोड़े, बीच में दो) और तारककेंद्र का 9 + 0 (त्रिक, बीच में कुछ नहीं) मिला देना।