वर्गीकरण के आधार
जंतु बहुत अलग दिखते हैं, फिर भी शरीर की बनावट के कुछ गुण उन्हें बाँटने देते हैं।
संगठन के स्तर
- कोशिकीय: कोशिकाएँ ढीले समूह में (स्पंज)।
- ऊतक: एक काम करने वाली कोशिकाएँ ऊतक बनाती हैं (सीलेंटरेट, टीनोफ़ोर)।
- अंग: ऊतक मिलकर अंग (चपटे कृमि)।
- अंग-तंत्र: अंग मिलकर काम करते हैं (ऐनेलिड से कॉर्डेट तक)। आहारनाल अपूर्ण (एक द्वार) या पूर्ण (मुख और गुदा) हो सकती है। रक्त परिसंचरण खुला (रक्त खुली जगहों में) या बंद (रक्त वाहिनियों में) हो सकता है।
सममिति
- असममित: कोई तल शरीर को बराबर हिस्सों में नहीं बाँटता (ज़्यादातर स्पंज)।
- अरीय: केंद्र से गुज़रता हर तल बराबर हिस्से देता है (सीलेंटरेट, टीनोफ़ोर, वयस्क इकाइनोडर्म)।
- द्विपार्श्व: केवल एक तल दाएँ-बाएँ बराबर हिस्से देता है (ऐनेलिड, आर्थ्रोपोड, कॉर्डेट)।
जनन स्तर, देहगुहा, खंडीभवन और पृष्ठरज्जु
- द्विकोरिक: दो भ्रूणीय परतें, बाह्यत्वचा (एक्टोडर्म) और अंतर्त्वचा (एंडोडर्म), बीच में जेली जैसी मीसोग्लिया (सीलेंटरेट)। त्रिकोरिक: बीच में तीसरी परत, मध्यजनस्तर (मीसोडर्म) (चपटे कृमि से कॉर्डेट तक)।
- प्रगुहा (सीलोम) = मीसोडर्म से ढकी देहगुहा। अगुहीय में नहीं होती (चपटे कृमि)। कूटगुहिक में गुहा है पर मीसोडर्म केवल बिखरी थैलियों में (गोल कृमि)। प्रगुही में असली प्रगुहा (ऐनेलिड, मोलस्क, आर्थ्रोपोड, इकाइनोडर्म, हेमीकॉर्डेट, कॉर्डेट)।
- विखंडीय खंडीभवन: शरीर दोहराते खंडों में बँटा, जैसे केंचुआ।
- पृष्ठरज्जु (नोटोकॉर्ड): भ्रूण में मीसोडर्म से बनी पीठ की ओर कड़ी छड़। जिनमें यह है वे रज्जुकी; जिनमें नहीं, वे अरज्जुकी।
अरज्जुकी: एक-एक संघ (भाग 1)
1. पोरीफ़ेरा (स्पंज)
ज़्यादातर समुद्री, असममित, कोशिकीय स्तर। पानी छोटे छिद्रों (ऑस्टिया) से नाल तंत्र में घुसता है और ऑस्कुलम से निकलता है। नालों में कॉलर कोशिकाएँ (कोएनोसाइट)। कंकाल कंटिकाओं या स्पंजिन तंतुओं का। उभयलिंगी; निषेचन आंतरिक, परिवर्धन अप्रत्यक्ष। जैसे साइकॉन, स्पंजिला (मीठे पानी का), यूस्पंजिया (स्नान स्पंज)।
2. सीलेंटरेटा (नाइडेरिया)
जलीय, अरीय, द्विकोरिक, ऊतक स्तर। स्पर्शकों पर दंश कोशिकाएँ (निडोब्लास्ट) बचाव और शिकार के लिए। एक द्वार (अधोमुख) से जठर-गुहा। दो रूप: पॉलिप (जमा हुआ, जैसे हाइड्रा) और मेड्यूसा (तैरता, जैसे ऑरेलिया); कुछ में दोनों बारी-बारी (मेटाजेनेसिस, जैसे ओबीलिया)। प्रवाल में कैल्शियम कार्बोनेट का कंकाल। जैसे फ़ाइसेलिया, एडम्सिया (समुद्री ऐनीमोन), पेन्नाटुला, गॉर्गोनिया, मिएंड्रिना।
3. टीनोफ़ोरा (कंकत जेली)
समुद्री, अरीय, द्विकोरिक। तैरने के लिए पक्ष्माभ वाली कंकत पट्टियों की आठ बाहरी पंक्तियाँ। जैवदीप्ति (चमकना) आम। जैसे प्लूरोब्रैकिया, टीनोप्लाना।
4. प्लेटीहेल्मिंथीज़ (चपटे कृमि)
ऊपर-नीचे से चपटे, द्विपार्श्व, त्रिकोरिक, अगुहीय, अंग स्तर। कई परजीवी, अंकुश और चूषक के साथ। उत्सर्जन में ज्वाला कोशिकाएँ। प्लेनेरिया खोए हिस्से फिर उगा लेता है। जैसे टीनिया (फ़ीताकृमि), फ़ैसिओला (यकृत कृमि)।
5. ऐस्केल्मिंथीज़ (गोल कृमि)
काट में गोल, द्विपार्श्व, त्रिकोरिक, कूटगुहिक। पूर्ण आहारनाल, पेशीय ग्रसनी। नर-मादा अलग; मादा नर से लंबी। जैसे ऐस्केरिस (गोलकृमि), वुचेरेरिया (फ़ाइलेरिया कृमि), ऐंकाइलोस्टोमा (अंकुश कृमि)।
अरज्जुकी: एक-एक संघ (भाग 2)
6. ऐनेलिडा
द्विपार्श्व, त्रिकोरिक, प्रगुही, विखंडीय खंडीभवन (शरीर छल्लों जैसा)। बंद परिसंचरण। उत्सर्जन वृक्कक (नेफ़्रिडिया) से। पेशियों और शूक (सीटी) या पार्श्वपाद से चलना। जैसे नेरीस, फ़ेरेटिमा (केंचुआ), हिरुडिनेरिया (जोंक)।
7. आर्थ्रोपोडा
सबसे बड़ा संघ (नामित जातियों का लगभग दो-तिहाई)। संधियुक्त पैर और काइटिन का कड़ा बाह्यकंकाल; शरीर सिर, वक्ष और उदर में। खुला परिसंचरण। श्वसन क्लोम, पुस्त क्लोम, पुस्त फुप्फुस या श्वासनलिकाओं से; उत्सर्जन मैल्पीघी नलिकाओं से। जैसे आर्थिक: एपिस (मधुमक्खी), बॉम्बिक्स (रेशम कीट), लैसिफ़र (लाख कीट); रोगवाहक: ऐनोफ़िलीज़, क्यूलेक्स, एडीज़; पीड़क: लोकस्टा (टिड्डी); जीवित जीवाश्म: लिमुलस (राज कर्कट)।
8. मोलस्का
दूसरा सबसे बड़ा संघ। मुलायम शरीर, कैल्शियम कार्बोनेट के कवच से ढका; शरीर सिर, पेशीय पाद और आंतरांग ककुद में; त्वचा की मुलायम तह प्रावार (मैंटल)। मुख में रेती जैसी जीभ, रेडुला। जैसे पाइला (सेब घोंघा), पिंकटाडा (मोती सीप), सीपिया (कटलफ़िश), लोलिगो (स्क्विड), ऑक्टोपस।
9. इकाइनोडर्मेटा
सभी समुद्री; काँटेदार चूनेदार कंकाल (इकाइनोस = काँटेदार)। वयस्क अरीय, लार्वा द्विपार्श्व। अनोखा जल-संवहन तंत्र, नाल पादों के साथ, चलने, भोजन पकड़ने और श्वसन के लिए। उत्सर्जन तंत्र नहीं। जैसे ऐस्टेरियस (तारामीन), इकाइनस (समुद्री अर्चिन), एंटीडॉन (समुद्री लिली), कुकुमेरिया (समुद्री ककड़ी), ओफ़िउरा (भंगुर तारा)।
10. हेमीकॉर्डेटा
कृमि जैसे समुद्री जंतु। शरीर शुंड, कॉलर और धड़ में। कॉलर में छोटा मुखरज्जु (स्टोमोकॉर्ड), जिसे पहले पृष्ठरज्जु समझा गया, इसलिए पहले इन्हें कॉर्डेट के साथ रखा गया था। श्वसन क्लोम से। जैसे बैलैनोग्लॉसस, सैकोग्लॉसस।
कॉर्डेटा: लक्षण और उपसंघ
जीवन की किसी अवस्था में तीन मूल लक्षण:
- पृष्ठरज्जु: पीठ की ओर कड़ी छड़।
- पृष्ठीय, खोखली, एकल तंत्रिका रज्जु।
- ग्रसनी क्लोम छिद्र।
इनका हृदय पेट (अधर) की ओर और गुदा के पीछे पूँछ होती है।
| रज्जुकी | अरज्जुकी |
|---|---|
| पृष्ठरज्जु है | पृष्ठरज्जु नहीं |
| तंत्रिका रज्जु पृष्ठीय, खोखली, एकल | तंत्रिका रज्जु अधरीय, ठोस, दोहरी |
| क्लोम छिद्र हैं | क्लोम छिद्र नहीं |
| हृदय अधरीय | हृदय पृष्ठीय (या नहीं) |
| गुदा-पश्च पूँछ है | गुदा-पश्च पूँछ नहीं |
उपसंघ
- यूरोकॉर्डेटा: पृष्ठरज्जु केवल लार्वा की पूँछ में, जैसे ऐसिडिया, सैल्पा, डोलिओलम।
- सेफ़ैलोकॉर्डेटा: पृष्ठरज्जु सिर से पूँछ तक, जीवन भर, जैसे ब्रैंकियोस्टोमा (ऐम्फ़िऑक्सस)।
- वर्टिब्रेटा (कशेरुकी): भ्रूण की पृष्ठरज्जु वयस्क में मेरुदंड (कशेरुक दंड) से बदल जाती है। हर कशेरुकी रज्जुकी है, पर हर रज्जुकी कशेरुकी नहीं।
कशेरुकी वर्ग: मछलियाँ और उभयचर
साइक्लोस्टोमेटा
जबड़ा-रहित (ऐग्नेथा), चूसने वाला गोल मुख, 6–15 जोड़ी क्लोम छिद्र, शल्क और युग्मित पख नहीं, उपास्थि का कंकाल। समुद्री, पर अंडे देने मीठे पानी में आते हैं, फिर मर जाते हैं। जैसे पेट्रोमाइज़ॉन (लैम्प्रे), मिक्सीन (हैगफ़िश)।
कॉन्ड्रिक्थीज़ (उपास्थिल मछली)
समुद्री, जबड़े, उपास्थि का कंकाल, मुख नीचे की ओर, क्लोम छिद्र ढके नहीं (प्रच्छद नहीं), छोटे पट्टाभ शल्क, दाँत बदले हुए शल्क। वायु आशय नहीं, इसलिए डूबने से बचने को लगातार तैरना पड़ता है। कुछ में विद्युत अंग (टॉरपीडो) या विष डंक (ट्राइगॉन)। जैसे स्कोलिओडॉन (कुत्ता मछली), प्रिस्टिस (आरा मछली), कारकेरोडॉन (बड़ी सफ़ेद शार्क)।
ऑस्टिक्थीज़ (अस्थिल मछली)
समुद्री और मीठे पानी की, हड्डी का कंकाल, क्लोम प्रच्छद (ऑपरकुलम) से ढके, मुख आगे, चक्राभ या कंकताभ शल्क, तैरने के लिए वायु आशय। जैसे समुद्री: एक्सोसीटस (उड़न मछली), हिप्पोकैम्पस (समुद्री घोड़ा); मीठे पानी की: लेबियो (रोहू), कतला, क्लेरियस (मांगुर); एक्वेरियम: बेटा, टेरोफ़ाइलम (एंजेल मछली)।
एम्फ़ीबिया (उभयचर)
पानी और ज़मीन दोनों पर; दो जोड़ी पाद; नम, शल्क-रहित त्वचा; कर्णपटह (टिम्पेनम) बाहर; अवस्कर (क्लोएका), एक साझा द्वार; श्वसन क्लोम, फेफड़ों और त्वचा से; तीन कक्षों वाला हृदय; असमतापी (ठंडे ख़ून वाले)। जैसे राना (मेंढक), बुफ़ो (टोड), हायला (वृक्ष मेंढक), सैलामैंड्रा, इक्थियोफ़िस (पादरहित)।
कशेरुकी वर्ग: सरीसृप, पक्षी और स्तनधारी
रेप्टीलिया (सरीसृप)
ज़्यादातर ज़मीन पर रेंगने वाले; सूखी त्वचा पर शृंगी शल्क या प्रशल्क; बाहरी कान का छेद नहीं; हृदय प्रायः तीन कक्षों का, पर मगरमच्छ में चार; असमतापी; ज़मीन पर कवच वाले अंडे। साँप और छिपकली केंचुल छोड़ते हैं। जैसे कीलोन (कछुआ), टेस्टूडो (थल कछुआ), गिरगिट, कैलोटीज़ (बगीचे की छिपकली), क्रोकोडाइलस, नाजा (नाग), वाइपेरा।
एवीज़ (पक्षी)
पर (पंख); चोंच; अग्रपाद पंखों में बदले; पश्चपाद पर शल्क; पूँछ की तेल ग्रंथि के अलावा त्वचा ग्रंथियाँ नहीं; हल्के वज़न के लिए खोखली वातिल अस्थियाँ; आहारनाल में अन्नपुट और पेषणी; फेफड़ों के साथ वायु कोष; चार कक्षों वाला हृदय; समतापी (गरम ख़ून वाले)। जैसे कॉर्वस (कौआ), कोलम्बा (कबूतर), सिटैकुला (तोता), स्ट्रुथियो (शुतुरमुर्ग), पावो (मोर), ऐप्टेनोडाइटीज़ (पेंगुइन)।
मैमेलिया (स्तनधारी)
बच्चों के लिए दूध बनाने वाली स्तन ग्रंथियाँ; शरीर पर बाल; बाहरी कान (कर्णपल्लव); अलग-अलग तरह के दाँत; चार कक्षों वाला हृदय; समतापी; ज़्यादातर बच्चों को जन्म देते हैं (जरायुज), अंडे देने वाले प्लैटिपस को छोड़कर। जैसे ऑर्निथोरिंकस (प्लैटिपस, अंडे देता है), मैक्रोपस (कंगारू), टेरोपस (उड़न लोमड़ी), कैमेलस (ऊँट), मकाका (बंदर), रैटस (चूहा), कैनिस (कुत्ता), फ़ेलिस (बिल्ली), एलिफ़ास (हाथी), इक्वस (घोड़ा), डेल्फ़ीनस (डॉल्फ़िन), बैलीनॉप्टेरा (नीली व्हेल), Panthera tigris, Panthera leo।
करके देखें: घर के जंतु बाँटिए
इस हफ़्ते देखे 10 जंतुओं की सूची बनाइए: चींटी, केंचुआ, घोंघा, कबूतर, छिपकली, मेंढक, मछली, गाय, मकड़ी, मच्छर। हर एक के लिए पूछिए: रीढ़ है? खंड हैं? संधियुक्त पैर? कवच? पर? बाल? उसका संघ या वर्ग लिखिए। फिर 3D के आख़िरी चरण में वही जंतु चुनकर अपने जवाब जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्तर: कोशिकीय → ऊतक → अंग → अंग-तंत्र
- सममिति: असममित (स्पंज) · अरीय (सीलेंटरेट, टीनोफ़ोर, वयस्क इकाइनोडर्म) · द्विपार्श्व (बाकी)
- द्विकोरिक (सीलेंटरेट, टीनोफ़ोर) बनाम त्रिकोरिक (चपटे कृमि से आगे)
- अगुहीय (चपटे कृमि) · कूटगुहिक (गोल कृमि) · प्रगुही (ऐनेलिड से आगे)
- रज्जुकी तिकड़ी: पृष्ठरज्जु + पृष्ठीय खोखली तंत्रिका रज्जु + ग्रसनी क्लोम छिद्र
- कशेरुकी वर्ग: साइक्लोस्टोमेटा, कॉन्ड्रिक्थीज़, ऑस्टिक्थीज़, एम्फ़ीबिया, रेप्टीलिया, एवीज़, मैमेलिया
हल किए गए उदाहरण
1. एक जंतु के स्पर्शकों पर दंश कोशिकाएँ हैं और आहार गुहा का एक ही द्वार है। संघ और उदाहरण बताइए।
सीलेंटरेटा (नाइडेरिया)। उदाहरण: हाइड्रा या जेलीफ़िश ऑरेलिया।
2. गोल कृमि को कूटगुहिक क्यों कहते हैं?
इसमें देहगुहा है, पर मीसोडर्म एक्टोडर्म और एंडोडर्म के बीच केवल बिखरी थैलियों में है, पूरी गुहा को नहीं ढकता। इसलिए यह कूट (झूठी) प्रगुहा है।
3. किस संघ में जल-संवहन तंत्र है? इसका काम बताइए।
इकाइनोडर्मेटा। पानी की नलियाँ और नाल पाद चलने, भोजन पकड़ने और श्वसन में मदद करते हैं।
4. शार्क आराम में भी तैरती रहती है, पर रोहू स्थिर रह सकती है। क्यों?
शार्क (कॉन्ड्रिक्थीज़) में वायु आशय नहीं, रुकते ही डूबती है। रोहू (ऑस्टिक्थीज़) का वायु आशय उसे तैराए रखता है।
5. प्लैटिपस अंडे देता है। फिर भी स्तनधारी क्यों?
इसके शरीर पर बाल हैं और बच्चों के लिए दूध बनाने वाली स्तन ग्रंथियाँ हैं, जो मैमेलिया के मुख्य लक्षण हैं।
6. वर्गीकृत कीजिए: केंचुआ, तिलचट्टा, ऑक्टोपस, तारामीन, बैलैनोग्लॉसस।
केंचुआ: ऐनेलिडा। तिलचट्टा: आर्थ्रोपोडा। ऑक्टोपस: मोलस्का। तारामीन: इकाइनोडर्मेटा। बैलैनोग्लॉसस: हेमीकॉर्डेटा।
आम गलतियाँ
- तारामीन (स्टारफ़िश) को मछली मानना। यह इकाइनोडर्म है; जेलीफ़िश नाइडेरियन और सिल्वरफ़िश कीट है।
- हेमीकॉर्डेट को रज्जुकी कहना। इनका मुखरज्जु असली पृष्ठरज्जु नहीं।
- लिखना कि सब रज्जुकी में मेरुदंड है। यूरोकॉर्डेट और सेफ़ैलोकॉर्डेट में नहीं; केवल कशेरुकी में।
- कहना कि सब सरीसृपों का हृदय तीन कक्षों का है। मगरमच्छ में चार कक्ष हैं।