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सरीसृप: सूखी त्वचा, खोल वाले अंडे, शीत-रक्त

सरीसृप (छिपकली, साँप, कछुआ, मगरमच्छ) शीत-रक्तीय कशेरुकी जंतु हैं। इनकी त्वचा सूखी और शल्कों से ढकी होती है। ये फेफड़ों से साँस लेते हैं और ज़्यादातर चमड़े जैसे खोल वाले अंडे ज़मीन पर देते हैं। इनके शरीर का ताप आसपास पर निर्भर है, इसलिए ये धूप सेंकते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. त्वचा देखो। वह सूखी है और सख़्त शल्कों से ढकी है। शल्क शरीर का पानी निकलने से रोकते हैं।
  2. अंडे पर चमड़े जैसा खोल है। खोल की वजह से सरीसृप सूखी ज़मीन पर अंडे दे पाते हैं, तालाब नहीं चाहिए।
  3. सरीसृप जीवन भर फेफड़ों से साँस लेता है। सूखी त्वचा हवा नहीं लेती, इसलिए सारा काम फेफड़े करते हैं।
  4. ठंडी सुबह है। सरीसृप ठंडा और सुस्त है, क्योंकि उसके शरीर की गर्मी हवा के साथ चलती है।
  5. धूप निकल आई। शरीर गर्म हुआ और सरीसृप तेज़ चलने लगा। सरीसृप शीत-रक्तीय होते हैं।
  6. खुद खेलो: छिपकली, साँप, कछुआ या मगरमच्छ चुनो और हवा का तापमान बदलकर उसकी गति देखो।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

शल्क क्यों ज़रूरी हैं?

वे त्वचा को सूखा और सख़्त बनाते हैं ताकि शरीर का पानी बचे। चरण 1 में बड़े किए शल्क देखो।

सरीसृप को अंडों के लिए तालाब क्यों नहीं चाहिए?

खोल अंडे को सूखने से बचाता है। चरण 2 में अंडा देखो।

क्या सरीसृप मेंढक की तरह त्वचा से साँस ले सकता है?

नहीं। सूखी शल्कदार त्वचा हवा अंदर नहीं जाने देती। वह केवल फेफड़े इस्तेमाल करता है।

ठंड में छिपकली सुस्त क्यों हो जाती है?

शीत-रक्तीय जंतु हवा के साथ ठंडे हो जाते हैं और उनकी माँसपेशियाँ धीमे काम करती हैं। चरण 4 देखो।

क्या शीत-रक्तीय का मतलब ठंडा ख़ून है?

नहीं। धूप में ख़ून भी गर्म हो जाता है। इसका मतलब है कि शरीर अपने आप स्थिर गर्मी नहीं रख पाता।

सरीसृप क्या हैं?

सरीसृप रेंगने या सरकने वाले कशेरुकी (रीढ़ वाले) जंतु हैं। 'सरीसृप' शब्द का अर्थ है 'सरक कर चलने वाला'।

उदाहरण: छिपकली, गिरगिट, साँप, कछुआ, मगरमच्छ, घड़ियाल।

मुख्य लक्षण

सरीसृपों के चार समूह

सरीसृप और उभयचर में अंतर

दोनों शीत-रक्तीय हैं। पर उभयचर की त्वचा गीली और नंगी होती है, अंडे नरम और पानी में होते हैं और बच्चे गिल्स से साँस लेते हैं। सरीसृप की त्वचा सूखी और शल्कदार होती है, अंडों पर खोल होता है और जन्म से फेफड़ों से साँस लेते हैं। इसीलिए सरीसृप पानी से दूर भी रह सकते हैं।

खुद करो

3D में हवा का तापमान 10 डिग्री रखकर सरीसृप को देखो। फिर 35 डिग्री करो और लिखो कि वह कितना तेज़ चलने लगा। घर पर सुबह और दोपहर में दीवार की छिपकली की दौड़ की तुलना करो।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. सरीसृप रेगिस्तान में रह सकता है पर मेंढक नहीं, क्यों?

सरीसृप की सूखी शल्कदार त्वचा पानी रोकती है और उसके अंडों पर खोल होता है। मेंढक को गीली त्वचा चाहिए और वह पानी में अंडे देता है।

2. छिपकली सुबह 8 बजे सुस्त और दोपहर में तेज़ क्यों होती है?

वह शीत-रक्तीय है। सुबह हवा ठंडी है इसलिए शरीर ठंडा और सुस्त है। दोपहर तक धूप से शरीर गर्म हो जाता है और वह तेज़ चलती है।

3. समूह बताओ: गेको, कोबरा, स्थल कछुआ, एलीगेटर।

गेको: छिपकली। कोबरा: साँप। स्थल कछुआ: कछुओं का समूह। एलीगेटर: मगरमच्छ का समूह।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सरीसृप का शरीर किससे ढका होता है?
2. सरीसृप ज़मीन पर अंडे क्यों दे सकते हैं?
3. सरीसृप साँस लेने के लिए किस अंग का उपयोग करते हैं?
4. शीत-रक्तीय जंतु वह है जिसका:
5. इनमें से सरीसृप नहीं है:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सरीसृपों के लक्षण क्या हैं?

सूखी शल्कदार त्वचा, फेफड़ों से साँस, शीत-रक्तीय शरीर और ज़मीन पर चमड़े जैसे खोल वाले अंडे (कुछ सीधे बच्चे देते हैं)।

सरीसृप और उभयचर में क्या अंतर है?

सरीसृप की त्वचा सूखी शल्कदार, अंडों पर खोल और जन्म से फेफड़े होते हैं। उभयचर की त्वचा गीली नंगी, अंडे नरम और पानी में होते हैं और बच्चों में गिल्स होते हैं।

सरीसृप धूप क्यों सेंकते हैं?

वे शीत-रक्तीय हैं और अपनी गर्मी नहीं बना सकते। धूप से शरीर गर्म होता है तब वे चल और शिकार कर पाते हैं।

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