पौधों का वर्गीकरण कैसे होता है
शुरुआती पद्धतियाँ केवल आसानी से दिखने वाले गुण (पेड़, झाड़ी, शाक) देखती थीं; इन्हें कृत्रिम पद्धति कहते हैं। बाद की प्राकृतिक पद्धतियों ने अंदरूनी बनावट समेत कई गुण देखे। आज की जातिवृत्तीय (फ़ाइलोजेनेटिक) पद्धतियाँ विकासीय संबंध दिखाती हैं। वैज्ञानिक संख्यात्मक वर्गिकी (कंप्यूटर से सैकड़ों गुणों की तुलना), कोशिका वर्गिकी (गुणसूत्रों की संख्या और आकार) और रसायन वर्गिकी (पौधे के रसायन) भी इस्तेमाल करते हैं।
शैवाल
शैवाल सरल, थैलसी (शरीर जड़, तना, पत्ती में बँटा नहीं), पर्णहरित वाले पौधे हैं, ज़्यादातर पानी में। कुछ एककोशिकी (क्लैमाइडोमोनास), कुछ कॉलोनी (वॉल्वॉक्स) और कुछ धागे (स्पाइरोगाइरा, यूलोथ्रिक्स) हैं। विशाल केल्प बहुत लंबे होते हैं।
जनन: कायिक, विखंडन से; अलैंगिक, चलबीजाणु (कशाभ वाले बीजाणु) से; लैंगिक, समयुग्मकी (एक जैसे युग्मक), असमयुग्मकी (आकार अलग) या विषमयुग्मकी/ऊगैमी (बड़ा अंडा, छोटा चलता शुक्राणु)।
उपयोग: धरती का लगभग आधा प्रकाश-संश्लेषण शैवाल करते हैं; अगर (जेलिडियम, ग्रेसिलेरिया), एल्जिन (भूरे शैवाल) और कैरागीन (लाल शैवाल) भोजन में काम आते हैं; क्लोरेला प्रोटीन पूरक है।
शैवाल के तीन वर्ग
| वर्ग | वर्णक | संचित भोजन | भित्ति | उदाहरण |
|---|---|---|---|---|
| क्लोरोफ़ाइसी (हरे) | पर्णहरित a, b | मंड (स्टार्च) | सेलुलोस | क्लैमाइडोमोनास, वॉल्वॉक्स, यूलोथ्रिक्स, स्पाइरोगाइरा, कारा |
| फ़ियोफ़ाइसी (भूरे) | पर्णहरित a, c + फ़्यूकोज़ैन्थिन | लैमिनेरिन, मैनिटॉल | सेलुलोस + एल्जिन | एक्टोकार्पस, डिक्टियोटा, लैमिनेरिया, सरगासम, फ़्यूकस |
| रोडोफ़ाइसी (लाल) | पर्णहरित a, d + r-फ़ाइकोइरिथ्रिन | फ़्लोरिडियन मंड | सेलुलोस, पेक्टिन | पॉलीसाइफ़ोनिया, पॉरफ़ाइरा, ग्रेसिलेरिया, जेलिडियम |
ब्रायोफ़ाइटा: पादप जगत के उभयचर
ब्रायोफ़ाइटा ज़मीन पर रहते हैं पर लैंगिक जनन के लिए पानी चाहिए, इसलिए इन्हें पादप जगत के उभयचर कहते हैं। ये नम, छायादार जगहों पर उगते हैं। शरीर में मूलाभास (जड़ जैसे धागे) हैं, पर सच्ची जड़, तना, पत्ती या संवहन ऊतक नहीं।
मुख्य पौधा अगुणित युग्मकोद्भिद है। यह पुंधानी (नर, तैरने वाले शुक्राणु) और स्त्रीधानी (मादा, सुराही जैसी, अंडा रखती है) बनाता है। निषेचन के बाद युग्मनज से छोटा बीजाणुद्भिद (पाद, सीटा, कैप्सूल) बनता है, जो भोजन के लिए युग्मकोद्भिद से जुड़ा रहता है। कैप्सूल के बीजाणुओं से नए युग्मकोद्भिद बनते हैं।
लिवरवर्ट
चपटा, थैलसी शरीर, जैसे मार्केन्शिया। प्यालों में छोटी हरी कलिकाओं, जेमा, से अलैंगिक जनन।
मॉस
दो अवस्थाएँ: बीजाणु से हरा धागे जैसा प्रोटोनिमा, फिर सीधी पत्तीदार अवस्था, जैसे फ़्यूनेरिया, पॉलीट्राइकम, स्फ़ैग्नम।
उपयोग: नंगी चट्टान पर लाइकेन के साथ मॉस सबसे पहले उगते हैं; स्फ़ैग्नम (पीट) ईंधन है और पैकिंग में पानी रोकता है।
टेरिडोफ़ाइटा: पहले नलियों वाले पौधे
टेरिडोफ़ाइटा पहले स्थलीय पौधे हैं जिनमें संवहन ऊतक है: जाइलम पानी ले जाता है, फ़्लोएम भोजन। उदाहरण: सिलैजिनेला, इक्वीसीटम (हॉर्सटेल), फ़र्न जैसे टेरिस, ड्रायोप्टेरिस और एडिएंटम।
मुख्य पौधा द्विगुणित बीजाणुद्भिद है, जिसमें सच्ची जड़, तना और पत्तियाँ हैं। पत्तियाँ छोटी (लघुपर्ण, सिलैजिनेला) या बड़ी (गुरुपर्ण, फ़र्न) हो सकती हैं। पत्ती जैसे बीजाणुपर्ण पर बीजाणुधानियाँ बीजाणु बनाती हैं। बीजाणु से छोटा, स्वतंत्र युग्मकोद्भिद बनता है, प्रोथैलस, जिसे ठंडी, नम, छायादार जगह और निषेचन के लिए पानी चाहिए।
ज़्यादातर एक तरह के बीजाणु बनाते हैं (समबीजाणुक)। सिलैजिनेला और साल्विनिया बड़े और छोटे बीजाणु बनाते हैं (विषमबीजाणुक)। यही बीज बनने की ओर पहला कदम है।
चार वर्ग: साइलोप्सिडा (साइलोटम), लाइकोप्सिडा (सिलैजिनेला, लाइकोपोडियम), स्फ़ीनोप्सिडा (इक्वीसीटम) और टेरोप्सिडा (ड्रायोप्टेरिस, टेरिस, एडिएंटम)।
अनावृतबीजी: नग्न बीज
अनावृतबीजी (जिम्नोस्पर्म) में बीजांड अंडाशय में बंद नहीं होते; बीज शंकु-शल्कों पर खुले रहते हैं। इनमें मध्यम से ऊँचे पेड़ हैं; विशाल रेडवुड सिकोया सबसे ऊँचे पेड़ों में है।
- जड़ प्रायः मूसला; पाइनस की जड़ों के साथ कवक साथी (कवकमूल); साइकस की प्रवाल जैसी जड़ों में नाइट्रोजन स्थिर करने वाले सायनोबैक्टीरिया।
- शंकुधारियों की पत्तियाँ सुई जैसी, मोटी उपत्वचा और धँसे रंध्र, जिससे पानी बचता है।
- ये विषमबीजाणुक हैं: नर शंकु लघुबीजाणु (परागकण) बनाते हैं, मादा शंकु के बीजांड में गुरुबीजाणु।
- पराग हवा से जाता है; परागनली नर युग्मक को अंडे तक ले जाती है। युग्मकोद्भिद कभी स्वतंत्र नहीं रहते।
उदाहरण: साइकस, पाइनस (चीड़), गिंको, सिड्रस (देवदार)।
आवृतबीजी: फूल वाले पौधे
आवृतबीजी (एंजियोस्पर्म) में बीजांड अंडाशय के अंदर होते हैं; निषेचन के बाद अंडाशय फल बनता है जो बीजों को ढकता है। फूल में पुंकेसर (नर) और स्त्रीकेसर (मादा) होते हैं। ये नन्हे वुल्फ़िया से ऊँचे यूकेलिप्टस तक होते हैं।
- द्विबीजपत्री: दो बीजपत्र, जैसे मटर, आम, सरसों।
- एकबीजपत्री: एक बीजपत्र, जैसे गेहूँ, धान, मक्का, केला।
द्विनिषेचन
मादा युग्मकोद्भिद भ्रूणकोष है, जिसमें 7 कोशिकाएँ (8 केंद्रक) हैं। एक नर युग्मक अंडे से मिलकर द्विगुणित युग्मनज बनाता है (युग्मक संलयन)। दूसरा दो ध्रुवीय केंद्रकों से मिलकर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक बनाता है (त्रिसंलयन)। दो संलयन होते हैं, इसलिए इसे द्विनिषेचन कहते हैं, जो केवल आवृतबीजी में होता है। भ्रूणपोष बढ़ते भ्रूण को भोजन देता है।
पौधों के जीवन-चक्र और पीढ़ी एकांतरण
पौधों में अगुणित (n) युग्मकोद्भिद, जो युग्मक बनाता है, और द्विगुणित (2n) बीजाणुद्भिद, जो अर्धसूत्री विभाजन से बीजाणु बनाता है, बारी-बारी आते हैं। कौन बड़ा है, यह समूह पर निर्भर है:
- अगुणितक (हैप्लॉन्टिक): युग्मकोद्भिद मुख्य पौधा; केवल युग्मनज द्विगुणित। कई शैवाल: वॉल्वॉक्स, स्पाइरोगाइरा, कुछ क्लैमाइडोमोनास।
- द्विगुणितक (डिप्लॉन्टिक): बीजाणुद्भिद मुख्य पौधा; युग्मकोद्भिद बहुत छोटा। सभी बीज वाले पौधे; शैवालों में फ़्यूकस।
- अगुणितक-द्विगुणितक: दोनों अवस्थाएँ बहुकोशिकी। ब्रायोफ़ाइटा (युग्मकोद्भिद प्रभावी) और टेरिडोफ़ाइटा (बीजाणुद्भिद प्रभावी); शैवालों में एक्टोकार्पस, पॉलीसाइफ़ोनिया, केल्प।
करके देखें: आसपास के समूह ढूँढिए
बरसात में नम दीवार देखिए: हरी मख़मल मॉस (ब्रायोफ़ाइट) है। बगीचे में फ़र्न की पत्ती पलटिए: भूरे बिंदु सोरस हैं, बीजाणुधानियों के समूह। चीड़ का शंकु तोड़िए: बीज खुली शल्कों पर हैं। मटर की फली खोलिए: बीज फल से ढके हैं। एक हफ़्ते में पाँचों समूह ढूँढिए! 3D के आख़िरी चरण में गुण चालू-बंद करके अपना अनुमान जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- शैवाल → ब्रायोफ़ाइटा (ज़मीन) → टेरिडोफ़ाइटा (जाइलम + फ़्लोएम) → अनावृतबीजी (नग्न बीज) → आवृतबीजी (फल में बीज)
- युग्मकोद्भिद = n, युग्मक बनाता है; बीजाणुद्भिद = 2n, अर्धसूत्री विभाजन से बीजाणु
- द्विनिषेचन: युग्मक संलयन (अंडा + नर युग्मक = 2n युग्मनज) + त्रिसंलयन (2 ध्रुवीय केंद्रक + नर युग्मक = 3n भ्रूणपोष)
- हरे: पर्णहरित a, b, मंड · भूरे: a, c, फ़्यूकोज़ैन्थिन, लैमिनेरिन · लाल: a, d, r-फ़ाइकोइरिथ्रिन, फ़्लोरिडियन मंड
- अगुणितक (शैवाल) · द्विगुणितक (बीज वाले पौधे) · अगुणितक-द्विगुणितक (ब्रायोफ़ाइटा, टेरिडोफ़ाइटा)
हल किए गए उदाहरण
1. एक समुद्री शैवाल लाल है, फ़्लोरिडियन मंड जमा करता है और अगर देता है। वर्ग और एक वंश बताइए।
रोडोफ़ाइसी (लाल शैवाल)। वंश: जेलिडियम या ग्रेसिलेरिया।
2. ब्रायोफ़ाइटा को पादप जगत का उभयचर क्यों कहते हैं?
ये ज़मीन पर रहते हैं पर इनके शुक्राणु को अंडे तक तैरकर पहुँचने के लिए पानी चाहिए, इसलिए लैंगिक जनन पानी पर निर्भर है।
3. एक पौधे में सच्ची जड़, तना, पत्ती, जाइलम और फ़्लोएम हैं, पर बीज नहीं। कौन सा समूह?
टेरिडोफ़ाइटा, जैसे फ़र्न ड्रायोप्टेरिस।
4. चीड़ के बीज नग्न क्यों कहलाते हैं?
बीजांड खुली शंकु-शल्कों पर होते हैं, चारों ओर अंडाशय नहीं, इसलिए बीज फल से ढके नहीं होते।
5. एक आवृतबीजी के अंडे में 12 गुणसूत्र हैं। युग्मनज और भ्रूणपोष में कितने होंगे?
अंडा n = 12। युग्मनज = 2n = 24। भ्रूणपोष = 3n = 36 (दो ध्रुवीय केंद्रक + एक नर युग्मक)।
6. जीवन-चक्र पहचानिए: स्पाइरोगाइरा, पाइनस, फ़्यूनेरिया।
स्पाइरोगाइरा: अगुणितक। पाइनस: द्विगुणितक। फ़्यूनेरिया (मॉस): अगुणितक-द्विगुणितक, युग्मकोद्भिद प्रभावी।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि दिखने वाला मॉस पौधा बीजाणुद्भिद है। ब्रायोफ़ाइटा में पत्तीदार पौधा युग्मकोद्भिद है।
- कहना कि फ़र्न में बीज होते हैं। टेरिडोफ़ाइटा बीजाणु से फैलते हैं; बीज अनावृतबीजी से शुरू होते हैं।
- भ्रूणपोष को द्विगुणित कहना। आवृतबीजी में यह त्रिगुणित (3n) है।
- लाल और भूरे शैवाल के वर्णक मिलाना: फ़्यूकोज़ैन्थिन भूरा, r-फ़ाइकोइरिथ्रिन लाल।