Romania Clasa a IX-a Biology
अध्याय: 5
1. Science as a process
Scientific method and research ethics · Advanced investigation (CS)
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
2. The cell: structural and functional unit of life
Molecules of life · Roles of biomolecules (CS) · The cell · Cell biology extension (CS)
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
- एंजाइम (Enzymes) – एंजाइम प्रोटीन होते हैं जो जैव उत्प्रेरक (biological catalyst) का काम करते हैं: ये कोशिका की क्रियाओं को तेज़ करते हैं और ख़ुद ख़र्च नहीं होते। हर एंजाइम का एक सक्रिय स्थल (active site) होता है जिसमें सिर्फ़ एक तरह का सब्सट्रेट फिट होता है (विशिष्टता)। एंजाइम सक्रियण ऊर्जा घटाकर काम करते हैं। ये एक इष्टतम तापमान और pH पर सबसे अच्छा काम करते हैं; ज़्यादा गर्मी या ग़लत pH से इनका आकार बिगड़ जाता है (विकृतीकरण)।
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
- कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन – कोशिका एक तय क्रम में बढ़ती है, DNA दोहराती है और बँटती है – इसे कोशिका चक्र कहते हैं: अंतरावस्था (G1, S, G2) और M प्रावस्था। S प्रावस्था में DNA दोगुना (2C → 4C) होता है, पर गुणसूत्र संख्या वही रहती है। समसूत्री विभाजन (पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था) और कोशिकाद्रव्य विभाजन से जनक जैसी दो कोशिकाएँ बनती हैं – यह समीकरणीय विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन में दो विभाजन होते हैं; अर्धसूत्री I में समजात गुणसूत्र जोड़ा बनाते हैं, जीन विनिमय करते हैं और अलग होते हैं, जिससे गुणसूत्र संख्या आधी (2n → n) होती है। इससे युग्मकों के लिए चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं और विविधता आती है।
3. Levels of integration and organisation of life
Levels of organisation · Biotope and populations (CS)
- संगठन के स्तर: कोशिका से जीवमंडल तक – जीवन सीढ़ी की तरह स्तरों में बना है, जैसे डिब्बे के अंदर डिब्बा। कोशिकाएँ मिलकर ऊतक बनाती हैं, ऊतक मिलकर अंग, अंग मिलकर अंग तंत्र और अंग तंत्र मिलकर पूरा जीव। एक जाति के जीव मिलकर समष्टि बनाते हैं; कई समष्टियाँ मिलकर समुदाय; समुदाय और उसके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र; और धरती के सारे पारितंत्र मिलकर जीवमंडल। हर स्तर अपने नीचे वाले स्तर से बनता है और कुछ नया कर सकता है।
4. Diversity and conservation of life
Tree of life and classification · Prokaryotes: Bacteria and Archaea · Eukaryota: protists, algae, fungi · Plants · Animals · Health education: parasites and vectors · Value and conservation of biodiversity
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
- जीव जगत का वर्गीकरण – व्हिटेकर (1969) ने जीवों को पाँच जगत में बाँटा: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। आधार थे: कोशिका का प्रकार, कोशिका भित्ति, शरीर की बनावट, पोषण का तरीका, जनन और आपसी संबंध। मोनेरा प्रोकैरियोट हैं (बैक्टीरिया, आर्कीबैक्टीरिया, सायनोबैक्टीरिया, माइकोप्लाज़्मा)। प्रोटिस्टा एककोशिकी यूकैरियोट हैं, पाँच समूहों में। कवक काइटिन भित्ति वाले परपोषी हैं, चार वर्गों में। लाइकेन शैवाल और कवक की साझेदारी है। वायरस, विरोइड और प्रायन किसी जगत में नहीं।
- वनस्पति जगत – वनस्पति जगत नए गुणों की सीढ़ी चढ़ता है। शैवाल सरल, ज़्यादातर पानी के पौधे हैं, बिना जड़-तने के। ब्रायोफ़ाइटा (मॉस) नम ज़मीन पर रहते हैं पर संवहन ऊतक नहीं। टेरिडोफ़ाइटा (फ़र्न) में पहली बार जाइलम और फ़्लोएम आते हैं। अनावृतबीजी के बीज खुले (नग्न) होते हैं। आवृतबीजी में फूल होते हैं और बीज फल के अंदर ढके रहते हैं। सब में अगुणित युग्मकोद्भिद और द्विगुणित बीजाणुद्भिद बारी-बारी आते हैं: पीढ़ी एकांतरण।
- प्राणि जगत – जंतुओं को शरीर की बनावट से जुड़े कुछ सवालों से बाँटते हैं: संगठन का स्तर, सममिति, जनन स्तर (भ्रूणीय परतें), देहगुहा (प्रगुहा), खंडीभवन और पृष्ठरज्जु। इनसे 11 मुख्य संघ बनते हैं: पोरीफ़ेरा, सीलेंटरेटा, टीनोफ़ोरा, प्लेटीहेल्मिंथीज़, ऐस्केल्मिंथीज़, ऐनेलिडा, आर्थ्रोपोडा, मोलस्का, इकाइनोडर्मेटा, हेमीकॉर्डेटा और कॉर्डेटा। रज्जुकी में किसी न किसी अवस्था में पृष्ठरज्जु, पीठ की ओर खोखली तंत्रिका रज्जु और क्लोम छिद्र होते हैं; इनमें कशेरुकी सात वर्गों में हैं, जबड़ा-रहित मछली से स्तनधारी तक।
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
5. Human impact on ecosystems
Humans in the modern environment
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