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जीव जगत का वर्गीकरण

व्हिटेकर (1969) ने जीवों को पाँच जगत में बाँटा: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। आधार थे: कोशिका का प्रकार, कोशिका भित्ति, शरीर की बनावट, पोषण का तरीका, जनन और आपसी संबंध। मोनेरा प्रोकैरियोट हैं (बैक्टीरिया, आर्कीबैक्टीरिया, सायनोबैक्टीरिया, माइकोप्लाज़्मा)। प्रोटिस्टा एककोशिकी यूकैरियोट हैं, पाँच समूहों में। कवक काइटिन भित्ति वाले परपोषी हैं, चार वर्गों में। लाइकेन शैवाल और कवक की साझेदारी है। वायरस, विरोइड और प्रायन किसी जगत में नहीं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. पाँच अलमारियाँ आईं, हर जगत की एक। तीन सवाल देखिए जो अलमारी तय करते हैं: केंद्रक है? एक कोशिका या कई? भोजन कैसे मिलता है?
  2. मोनेरा को पास से देखिए। इन कोशिकाओं में केंद्रक नहीं। बैक्टीरिया की चार आकृतियाँ गिनिए: गोल, छड़, कॉमा और सर्पिल।
  3. अब प्रोटिस्टा: एक कोशिका, पर केंद्रक के साथ। पाँच समूह लाइन में: क्राइसोफाइट, डाइनोफ़्लैजेलेट, यूग्लीनॉइड, अवपंक कवक और प्रोटोज़ोआ।
  4. कवक पतले धागों से बढ़ते हैं जिन्हें कवकतंतु (हाइफ़ी) कहते हैं। धागे मिलकर जाल बनाते हैं: कवकजाल। चार वर्ग बीजाणु बनाने के तरीके में अलग हैं।
  5. लाइकेन एक शरीर में दो साथी: शैवाल भोजन बनाता है, कवक आश्रय और पानी देता है। पास में: वायरस, विरोइड और प्रायन, जो किसी अलमारी में नहीं आते।
  6. आपकी बारी। कोई भी जीव छुएँ और उसे तीन सवालों के जवाब देकर अपनी अलमारी पर पहुँचते देखें। वायरस भी आज़माइए!

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

कवक पौधे क्यों नहीं? वे भी तो चलते नहीं।

कवक में पर्णहरित नहीं, वे भोजन नहीं बनाते और उनकी भित्ति काइटिन की है, सेलुलोस की नहीं। 3D में पोषण वाला सवाल उन्हें अलग अलमारी पर भेजता है।

नील-हरित शैवाल बाकी शैवालों के साथ न होकर मोनेरा में क्यों?

इसमें केंद्रक नहीं। सबसे पहला सवाल (केंद्रक है?) यह तय कर देता है।

यूग्लीना पौधा है या जंतु?

दोनों नहीं; यह प्रोटिस्ट है। रोशनी में पौधे की तरह भोजन बनाता है और अँधेरे में जंतु की तरह खाता है।

कुछ कवकों की एक लंबी कोशिका में कई केंद्रक क्यों?

उनके कवकतंतु में आड़ी दीवार नहीं (संकोशिकी), इसलिए केंद्रक एक ही लगातार नली में बँटते रहते हैं।

लाइकेन एक जीव है या दो?

दो साथी, एक शरीर की तरह। तोड़कर देखें तो कवक के धागों में लिपटी हरी शैवाल कोशिकाएँ मिलेंगी।

क्या वायरस जीवित हैं?

कोशिका के बाहर ये क्रिस्टल जैसे हैं। मेज़बान के अंदर अपनी प्रतियाँ बनाते हैं। इसलिए ये सीमा पर हैं और किसी जगत में नहीं।

दो जगत से पाँच जगत तक

लिनियस ने केवल दो जगत रखे थे: पादप और जंतु। इससे बैक्टीरिया, कवक और एककोशिकी जीव ग़लत जगह चले गए। 1969 में आर.एच. व्हिटेकर ने पाँच जगत सुझाए: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु।

व्हिटेकर के आधार

पाँचों जगत की तुलना

जगतकोशिकाभित्तिशरीरपोषण
मोनेराप्रोकैरियोटिकसेलुलोस नहीं (पेप्टिडोग्लाइकन)एककोशिकीस्वपोषी या परपोषी
प्रोटिस्टायूकैरियोटिककुछ मेंएककोशिकीस्वपोषी या परपोषी
कवकयूकैरियोटिककाइटिनबहुकोशिकी, ऊतक नहींपरपोषी (अवशोषण)
पादपयूकैरियोटिकसेलुलोसऊतक और अंगस्वपोषी
जंतुयूकैरियोटिकनहींऊतक, अंग, तंत्रपरपोषी (भोजन निगलना)

मोनेरा जगत

सारे मोनेरा बैक्टीरिया (जीवाणु) हैं: बहुत छोटे, एककोशिकी, बिना केंद्रक। ये लगभग हर जगह रहते हैं, गर्म झरनों और गहरी बर्फ़ में भी।

आकृतियाँ

आर्कीबैक्टीरिया

कठोर जगहों के ख़ास बैक्टीरिया: हैलोफ़ाइल (बहुत खारा पानी), थर्मोएसिडोफ़ाइल (गर्म, अम्लीय झरने) और मेथेनोजन (दलदल और गाय की आँत, जहाँ बायोगैस की मीथेन बनाते हैं)। इनकी भित्ति अलग होती है, जो इन्हें बचाती है।

यूबैक्टीरिया (सत्य जीवाणु)

बैक्टीरिया मुख्यतः द्विविभाजन से बढ़ते हैं; बुरे समय में बीजाणु बनाते हैं और एक सरल लैंगिक तरीके से DNA बदल सकते हैं।

माइकोप्लाज़्मा

सबसे छोटी जीवित कोशिकाएँ। इनमें कोशिका भित्ति नहीं, ये बिना ऑक्सीजन जी सकते हैं और पौधों-जंतुओं में रोग करते हैं।

प्रोटिस्टा जगत और उसके पाँच समूह

प्रोटिस्ट एककोशिकी यूकैरियोट हैं, ज़्यादातर पानी में। ये सरल कोशिकाओं को पौधों, जंतुओं और कवकों से जोड़ते हैं।

कवक जगत और उसके चार वर्ग

कवक यूकैरियोटिक परपोषी हैं, जिनकी भित्ति काइटिन की होती है। एककोशिकी यीस्ट को छोड़कर, शरीर लंबे धागों से बना होता है: कवकतंतु (हाइफ़ी); इनका जाल कवकजाल (माइसीलियम) है। कुछ कवकतंतुओं में आड़ी दीवार नहीं होती और कई केंद्रक होते हैं (संकोशिकी)।

पोषण: मृतजीवी (मरे पदार्थ पर), परजीवी (जीवित मेज़बान पर) या साझेदारी (लाइकेन, पौधों की जड़ों के साथ कवकमूल)।

जनन: कायिक (विखंडन, विभाजन, मुकुलन), अलैंगिक (कोनिडिया, स्पोरैंजियोस्पोर, चलबीजाणु) और लैंगिक (ऊस्पोर, ऐस्कोस्पोर, बेसिडियोस्पोर)। लैंगिक जनन के तीन चरण: प्लाज़्मोगैमी (कोशिकाद्रव्य मिलना), कैरियोगैमी (केंद्रक मिलना) और अर्धसूत्री विभाजन। कभी-कभी हर कोशिका में दो केंद्रक वाली अवस्था होती है: द्विकेंद्रकी (डाइकैरियॉन)।

चार वर्ग

पादप और जंतु जगत संक्षेप में

पादप: यूकैरियोटिक, पर्णहरित, सेलुलोस भित्ति; कुछ आंशिक परपोषी हैं (कीटभक्षी ब्लैडरवर्ट, परजीवी अमरबेल (कस्कुटा))। इनके जीवन-चक्र में युग्मकोद्भिद और बीजाणुद्भिद पीढ़ियाँ बारी-बारी आती हैं। जंतु: बहुकोशिकी परपोषी, भित्ति नहीं; भोजन निगलते हैं, ग्लाइकोजन या वसा के रूप में जमा करते हैं, ज़्यादातर चल सकते हैं। दोनों के अलग पाठ आगे हैं।

लाइकेन: एक साझेदारी

लाइकेन एक शैवाल (फ़ाइकोबायंट) और एक कवक (माइकोबायंट) का सहजीवी संबंध है, यानी ऐसी पक्की साझेदारी जिसमें दोनों का फ़ायदा है। शैवाल प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाता है; कवक आश्रय देता है और पानी-खनिज सोखता है। ये नंगी चट्टानों और छाल पर उगकर मिट्टी बनना शुरू करते हैं। लाइकेन प्रदूषित हवा में नहीं उगते, इसलिए ये वायु प्रदूषण के सूचक हैं।

वायरस, विरोइड और प्रायन

इन्हें किसी जगत में नहीं रखा जाता क्योंकि ये असली कोशिकाएँ नहीं हैं।

वायरस (विषाणु)

वायरस आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA, दोनों कभी नहीं) का टुकड़ा है, जो प्रोटीन के खोल, कैप्सिड, में बंद है; कैप्सिड छोटी इकाइयों, कैप्सोमियर, से बनता है। जीवित कोशिका के बाहर यह क्रिस्टल जैसा निष्क्रिय है। मेज़बान कोशिका के अंदर यह कोशिका पर क़ब्ज़ा कर अपनी प्रतियाँ बनवाता है, अक्सर कोशिका मर जाती है। पौधों के वायरस में प्रायः RNA; जंतु वायरस में RNA या DNA; बैक्टीरिया पर हमला करने वाले वायरस (बैक्टीरियोफ़ेज) में प्रायः दोहरे सूत्र वाला DNA। इवानोव्स्की (1892) ने तंबाकू मोज़ेक का कारक खोजा; बेजेरिंक ने इसे कंटेजियम वाइवम फ़्लुइडम कहा; स्टैनली ने दिखाया कि वायरस क्रिस्टल बन सकते हैं। रोग: ज़ुकाम, फ़्लू, पोलियो, एड्स, कनफेड़, खसरा; पौधों में पत्ती मुड़ना और मोज़ेक।

विरोइड

टी.ओ. डाइनर (1971) ने खोजा। विरोइड बिना प्रोटीन खोल का मुक्त RNA है, वायरस से बहुत छोटा। यह आलू का स्पिंडल ट्यूबर रोग करता है।

प्रायन

प्रायन ग़लत मुड़े प्रोटीन हैं, इनमें कोई न्यूक्लिक अम्ल नहीं। ये मस्तिष्क के रोग करते हैं, जैसे गायों में मैड काउ रोग (BSE) और मनुष्य में क्रुट्ज़फ़ेल्ट–जैकब रोग।

करके देखें: घर पर मोनेरा और कवक

नम ब्रेड का टुकड़ा बंद डिब्बे में 4–5 दिन रखिए। काला रोएँदार हिस्सा राइज़ोपस कवक है: पतले धागे (कवकतंतु) और काले बिंदु (बीजाणुधानी) देखिए। साफ़ काँच पर दही की एक बूँद रखिए: स्कूल के सूक्ष्मदर्शी में दिखने वाली छोटी छड़ें लैक्टोबैसिलस बैक्टीरिया हैं। 3D के आख़िरी चरण में हर जीव को छूकर उसकी अलमारी जाँचिए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक एककोशिकी जीव में केंद्रक है; रोशनी में भोजन बनाता है और अँधेरे में भोजन खाता है। जगत और उदाहरण बताइए।

प्रोटिस्टा, समूह यूग्लीनॉइड। उदाहरण: यूग्लीना।

2. नॉस्टॉक और ऐनाबीना के नाम में 'शैवाल' है, फिर भी ये मोनेरा में क्यों?

इनकी कोशिका में केंद्रक नहीं (प्रोकैरियोटिक)। ये सायनोबैक्टीरिया हैं, प्रकाश-संश्लेषण करने वाले सत्य जीवाणु।

3. एक कवक थैलियों के अंदर बीजाणु बनाता है। उसका वर्ग और दो उदाहरण बताइए।

ऐस्कोमाइसिटीज़ (थैली कवक)। उदाहरण: यीस्ट और पेनिसिलियम।

4. आलू के कंद तकली जैसे हो गए। कारक बिना प्रोटीन खोल का RNA है। यह क्या है?

विरोइड (पोटैटो स्पिंडल ट्यूबर विरोइड)।

5. गाँव में लाइकेन मिलते हैं पर पास के औद्योगिक शहर में नहीं। इससे क्या पता चलता है?

शहर की हवा प्रदूषित है, शायद सल्फ़र डाइऑक्साइड से। लाइकेन संवेदनशील हैं और प्रदूषण सूचक हैं।

6. पेनिसिलिन बैक्टीरिया की भित्ति बनना रोकती है, पर माइकोप्लाज़्मा पर असर नहीं करती। क्यों?

माइकोप्लाज़्मा में भित्ति है ही नहीं, इसलिए भित्ति रोकने वाली दवा के पास असर करने को कुछ नहीं।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. पाँच जगत वर्गीकरण किसने दिया?
2. कवक की कोशिका भित्ति किससे बनी है?
3. समुद्र में लाल ज्वार किससे होता है?
4. बिना भित्ति वाली सबसे छोटी जीवित कोशिका:
5. केवल प्रोटीन से बना संक्रामक कारक:

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पाँच जगत कौन से हैं?

मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु; आर.एच. व्हिटेकर ने 1969 में दिए।

वायरस और विरोइड में क्या अंतर है?

वायरस में प्रोटीन खोल के अंदर DNA या RNA है। विरोइड केवल छोटा मुक्त RNA है, कोई प्रोटीन खोल नहीं।

लाइकेन को प्रदूषण सूचक क्यों कहते हैं?

ये सल्फ़र डाइऑक्साइड जैसी गैसों से दूषित हवा में नहीं उगते, इसलिए इनका न होना गंदी हवा का संकेत है।

यह कहाँ पढ़ाया जाता है

कनाडा (ओंटारियो)Grade 11B. Diversity of Living Things
रोमानियाClasa a IX-aDiversity and conservation of life
स्पेन1º BachilleratoHistory of Earth and life
स्पेन2º BachilleratoThe Earth system
यूक्रेन10 класBiodiversity
यूक्रेन10 класBiodiversity
सीबीएसई (भारत)कक्षा 11जीव जगत में विविधता
इंग्लैंडYear 123.4 Genetic information, variation and relationships
जापान高校2年Evolution
दक्षिण कोरिया고등학교 2학년Continuity and diversity of life
दक्षिण कोरिया고등학교 3학년Evolution and diversity

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