जैव विविधता क्या है? तीन स्तर
जैव विविधता यानी जीवन के हर स्तर पर जीवों की विविधता। यह शब्द वैज्ञानिक एडवर्ड विल्सन ने लोकप्रिय किया।
- आनुवंशिक विविधता: एक ही जाति के अंदर जीनों की विविधता। भारत में धान की 50,000 से ज़्यादा और आम की लगभग 1,000 किस्में हैं। औषधीय पौधा राउवोल्फ़िया वोमिटोरिया अलग-अलग जगह रेसरपीन दवा की अलग ताकत बनाता है।
- जातीय विविधता: अलग-अलग जातियों की संख्या। पश्चिमी घाट में पूर्वी घाट से ज़्यादा उभयचर जातियाँ हैं।
- पारिस्थितिक विविधता: पारितंत्रों की विविधता: रेगिस्तान, वर्षावन, मैंग्रोव, प्रवाल भित्ति, आर्द्रभूमि, ज्वारनदमुख, अल्पाइन घास के मैदान। भारत में यह नॉर्वे जैसे देश से बहुत ज़्यादा है।
कितनी जातियाँ?
अब तक लगभग 15 लाख जातियों का वर्णन हुआ है, पर कुल लगभग 70 लाख हो सकती हैं। 70% से ज़्यादा दर्ज जातियाँ जंतु हैं, कीट सबसे बड़ा समूह। भारत के पास दुनिया की ज़मीन का सिर्फ़ 2.4% पर जातियों का लगभग 8% है, इसलिए यह 12 महाविविधता वाले देशों में है।
जैव विविधता के पैटर्न
अक्षांशीय प्रवणता
भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर विविधता घटती है। भूमध्य रेखा के पास कोलंबिया में लगभग 1,400 पक्षी जातियाँ हैं, उत्तर में ग्रीनलैंड में लगभग 56। अमेज़न वर्षावन में पृथ्वी की सबसे समृद्ध जैव विविधता है।
उष्णकटिबंध ज़्यादा समृद्ध क्यों: (1) लाखों सालों तक हिमयुग ने उन्हें नहीं छेड़ा, इसलिए जातियाँ बनने का लंबा समय मिला; (2) जलवायु स्थिर और अनुमानित है, इसलिए जातियाँ विशिष्ट बन सकीं; (3) साल भर ज़्यादा धूप, इसलिए ज़्यादा उत्पादकता।
जाति-क्षेत्र संबंध
खोजकर्ता अलेक्ज़ेंडर वॉन हम्बोल्ट ने देखा कि खोजे गए क्षेत्र के साथ जातियाँ बढ़ती हैं, पर एक सीमा तक। log–log ग्राफ़ पर यह सीधी रेखा है:
log S = log C + Z log A
S = जाति समृद्धि, A = क्षेत्र, Z = ढाल (समाश्रयण गुणांक), C = Y-अंतःखंड। छोटे क्षेत्रों में Z लगभग 0.1–0.2, बहुत बड़े क्षेत्र (पूरे महाद्वीप) में लगभग 0.6–1.2।
जैव विविधता का महत्व
स्थिरता और उत्पादकता
लंबे समय के प्रयोगों (डेविड टिलमैन) ने दिखाया कि ज़्यादा जातियों वाले भूखंडों में जीवभार साल-दर-साल कम बदलता है और उत्पादकता ज़्यादा होती है। समृद्ध पारितंत्र ज़्यादा स्थिर है।
रिवेट पॉपर परिकल्पना
पॉल एर्लिक ने पारितंत्र को हवाई जहाज़ और जातियों को उसकी कीलें कहा। कुछ कीलें निकलने से फ़र्क नहीं पड़ता, पर बहुत सारी, या कोई एक मुख्य कील ("पंख" वाली) निकले तो पूरा तंत्र गिर सकता है।
हमें क्यों परवाह करनी चाहिए?
- संकीर्ण उपयोगितावादी: सीधे फ़ायदे जैसे भोजन, रेशा, ईंधन, दवाएँ (25% से ज़्यादा दवाएँ पौधों से), रंग, राल। प्रकृति में उपयोगी अणु खोजना जैव-पूर्वेक्षण कहलाता है।
- व्यापक उपयोगितावादी: पारितंत्र सेवाएँ जैसे जंगलों से ऑक्सीजन, मधुमक्खियों-पक्षियों से परागण, साफ़ पानी, उपजाऊ मिट्टी और सुंदरता का आनंद।
- नैतिक: हर जाति को जीने का हक़ है; हम धरती साझा करते हैं और इसे अच्छी हालत में आगे सौंपना है।
जैव विविधता की क्षति: दुष्ट चौकड़ी
IUCN ने पिछले 500 सालों में लगभग 784 विलुप्तियाँ दर्ज कीं, जैसे डोडो (मॉरीशस), क्वागा (अफ़्रीका), थाइलेसीन (ऑस्ट्रेलिया) और स्टेलर समुद्री गाय (रूस)। आज की दर प्राकृतिक दर से 100 से 1,000 गुना तेज़ मानी जाती है, ज़्यादातर इंसानों के कारण: इसे छठी सामूहिक विलुप्ति कहते हैं।
जातियाँ खोने से पौधों का उत्पादन घटता है, सूखे और कीटों से लड़ने की ताकत कम होती है।
चार कारण (दुष्ट चौकड़ी)
- आवास हानि और विखंडन: सबसे बड़ा कारण। उष्णकटिबंधी वर्षावन पहले ज़मीन का लगभग 14% ढकते थे, अब लगभग 6%। बड़ा आवास टुकड़ों में बँटे तो बड़े क्षेत्र वाले जीव (बड़ी बिल्लियाँ, प्रवासी पक्षी) घटते हैं।
- अति-दोहन: ज़रूरत से ज़्यादा लेना। स्टेलर समुद्री गाय और पैसेंजर कबूतर शिकार से खत्म हुए। कई समुद्री मछलियाँ ज़्यादा पकड़ी जा रही हैं।
- विदेशी जातियों का आक्रमण: विक्टोरिया झील में डाली गई नील पर्च ने 200 से ज़्यादा सिक्लिड मछली जातियाँ खत्म कर दीं। गाजर घास (पार्थेनियम), लैंटाना और जलकुंभी भारत में नुकसान करते हैं। अफ़्रीकी कैटफ़िश क्लेरियस गैरीपिनस देसी कैटफ़िश के लिए ख़तरा है।
- सह-विलुप्ति: एक जाति खत्म हो तो उस पर निर्भर जातियाँ भी खत्म, जैसे पोषी के परजीवी, या पौधा और उसका एकमात्र परागणकर्ता।
संकटग्रस्त जातियाँ और रेड डेटा बुक
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) रेड लिस्ट रखता है, जो पहले रेड डेटा बुक के रूप में छपती थी। इसमें हर जाति का विलुप्ति के करीब होना दर्ज है।
| श्रेणी | आसान अर्थ |
|---|---|
| कम चिंता (LC) | आम, अभी ख़तरा नहीं |
| निकट संकट (NT) | जल्दी संकट में आ सकती है |
| सुभेद्य (VU) | जंगल में ऊँचा ख़तरा |
| संकटग्रस्त (EN) | बहुत ऊँचा ख़तरा |
| गंभीर संकटग्रस्त (CR) | अत्यधिक ख़तरा |
| वन में विलुप्त (EW) | सिर्फ़ चिड़ियाघर या फ़ार्म में |
| विलुप्त (EX) | कहीं कोई नहीं बचा |
VU, EN और CR मिलकर संकटापन्न कहलाते हैं। भारतीय उदाहरण: बाघ और गंगा डॉल्फ़िन संकटग्रस्त; सोन चिरैया (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड) और घड़ियाल गंभीर संकटग्रस्त। रेड डेटा बुक सुरक्षा की योजना, जागरूकता और तुरंत मदद वाली जातियाँ पहचानने में काम आती है।
संरक्षण: स्व-स्थाने और बाह्य-स्थाने
स्व-स्थाने (in situ) संरक्षण जाति को उसके प्राकृतिक घर में, पूरे पारितंत्र के साथ बचाता है। यह सबसे अच्छा तरीका है। उदाहरण: हॉटस्पॉट, संरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन।
बाह्य-स्थाने (ex situ) संरक्षण जाति को उसके घर से बाहर बचाता है, जब वह इतनी संकट में हो कि खास देखभाल चाहिए:
- प्राणि उद्यान, वानस्पतिक उद्यान, वन्यजीव सफ़ारी पार्क।
- बंदी प्रजनन और छोड़ना (भारत में गिद्ध और घड़ियाल)।
- क्रायो-संरक्षण: संकटग्रस्त जातियों के युग्मकों को तरल नाइट्रोजन में −196 °C पर रखना ताकि वे लंबे समय तक जीवित रहें।
- फ़सल और जंगली पौधों के बीज बैंक, ऊतक संवर्धन और पात्रे निषेचन।
देश मिलकर भी काम करते हैं: पृथ्वी सम्मेलन (रियो डी जनेरियो, 1992) से जैव विविधता पर समझौता बना, और विश्व सतत विकास सम्मेलन (जोहान्सबर्ग, 2002) ने क्षति की दर घटाने का लक्ष्य रखा।
जैव विविधता हॉटस्पॉट
हॉटस्पॉट वह क्षेत्र है जहाँ (1) जातियाँ बहुत ज़्यादा हों, (2) बहुत सी स्थानिक जातियाँ हों (जो कहीं और न मिलें), और (3) भारी ख़तरा हो। यह विचार नॉर्मन मायर्स ने दिया।
पहले 25 हॉटस्पॉट बताए गए, बाद में बढ़कर 34 (अब लगभग 36)। ये पृथ्वी की ज़मीन का 2% से कम हैं पर जातियों का बहुत बड़ा हिस्सा रखते हैं। इनकी मज़बूत सुरक्षा से विलुप्ति दर लगभग 30% तक घट सकती है।
भारत से जुड़े हॉटस्पॉट: पश्चिमी घाट और श्रीलंका, इंडो-बर्मा और हिमालय (निकोबार द्वीप सुंडालैंड हॉटस्पॉट में आते हैं)।
संरक्षित क्षेत्र: राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, रामसर स्थल
- राष्ट्रीय उद्यान: सिर्फ़ वन्यजीवों के लिए। निजी अधिकार, चराई, खेती, पेड़ काटना मना। उदाहरण: जिम कॉर्बेट (उत्तराखंड, पहला, 1936), काज़ीरंगा (असम), गिर (गुजरात)।
- वन्यजीव अभयारण्य: जानवरों की रक्षा, पर कुछ मानव गतिविधियाँ जैसे लकड़ी या वन उपज इकट्ठा करना चल सकती हैं अगर वन्यजीवों को नुकसान न हो। उदाहरण: पेरियार (केरल); भरतपुर (केवलादेव) पहले पक्षी अभयारण्य था, फिर राष्ट्रीय उद्यान बना।
- जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र: पूरे पारितंत्र और स्थानीय लोगों के लिए बड़ा क्षेत्र। तीन क्षेत्र: कोर (कोई मानव गतिविधि नहीं), बफ़र (शोध, शिक्षा, सीमित उपयोग), संक्रमण (गाँव, खेती, पर्यटन)। उदाहरण: नीलगिरि, सुंदरबन, नंदा देवी, मन्नार की खाड़ी। भारत में 18 हैं।
- रामसर स्थल: रामसर संधि (ईरान, 1971) के तहत अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि। आर्द्रभूमियाँ पानी साफ़ करती हैं, बाढ़ रोकती हैं और प्रवासी पक्षियों का घर हैं। उदाहरण: चिल्का झील (ओडिशा), केवलादेव (राजस्थान), लोकटक झील (मणिपुर), वुलर झील (जम्मू-कश्मीर), सांभर झील (राजस्थान)। भारत में 85 से ज़्यादा रामसर स्थल हैं और संख्या बढ़ रही है।
भारत में 100 से ज़्यादा राष्ट्रीय उद्यान और 550 से ज़्यादा वन्यजीव अभयारण्य हैं।
पवित्र उपवन
पवित्र उपवन जंगल के वे टुकड़े हैं जिन्हें स्थानीय समुदाय धार्मिक या सांस्कृतिक मान्यता के कारण बचाते हैं। वहाँ कोई पेड़ नहीं काटता और शिकार नहीं करता, इसलिए ये दुर्लभ और स्थानिक पौधों-जंतुओं के सुरक्षित घर बनते हैं।
उदाहरण: मेघालय की खासी और जयंतिया पहाड़ियाँ, राजस्थान की अरावली पहाड़ियाँ, कर्नाटक और महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट, और मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ के सरगुजा, चंदा और बस्तर। मेघालय में कुछ पवित्र उपवन कई दुर्लभ पौधों का आख़िरी ठिकाना हैं। ये दिखाते हैं कि समुदाय की परंपराएँ संरक्षण का मज़बूत औज़ार हैं।
बोर्ड परीक्षा में क्या पूछा जाता है
आम प्रश्न: जाति-क्षेत्र संबंध और समीकरण; उष्णकटिबंध में ज़्यादा विविधता के कारण; रिवेट पॉपर परिकल्पना; दुष्ट चौकड़ी उदाहरण सहित; हॉटस्पॉट की परिभाषा और भारत के हॉटस्पॉट; स्व-स्थाने और बाह्य-स्थाने, तथा राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र में अंतर; पवित्र उपवन; रेड डेटा बुक। केस-आधारित प्रश्न अक्सर किसी विदेशी जाति या खोए परागणकर्ता का वर्णन करके कारण पूछते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. किसी पौध समूह के लिए C = 20, Z = 0.2। 1,00,000 m² क्षेत्र (log = 5) में कितनी जातियाँ?
log S = log 20 + 0.2 × 5 = 1.301 + 1 = 2.301। S = 10^2.301 ≈ 200 जातियाँ।
2. Z = 0.2 हो और क्षेत्र 32 गुना हो जाए, तो जातियाँ कितनी गुना?
S ∝ A^Z, इसलिए 32^0.2 = 2 गुना (2⁵ = 32)। 32 गुना क्षेत्र से जातियाँ सिर्फ़ दोगुनी।
3. 10 km² द्वीप पर 40 छिपकली जातियाँ। Z = 0.3 से 1,000 km² द्वीप पर अनुमान?
क्षेत्र अनुपात = 100। S₂ = 40 × 100^0.3 = 40 × 3.98 ≈ 159, लगभग 160 जातियाँ।
4. कारण बताओ: (a) विक्टोरिया झील में नील पर्च, (b) पोषी मछली विलुप्त होने पर उसका परजीवी भी, (c) पैसेंजर कबूतर का शिकार, (d) हाईवे के लिए जंगल कटा।
(a) विदेशी जाति, (b) सह-विलुप्ति, (c) अति-दोहन, (d) आवास हानि और विखंडन।
5. किसी जाति की जंगली संख्या खत्म होकर वह सिर्फ़ चिड़ियाघर में बची। रेड लिस्ट श्रेणी? क्या वह 'संकटापन्न' है?
वन में विलुप्त (EW)। यह तीन संकटापन्न श्रेणियों (VU, EN, CR) से आगे है; सिर्फ़ बाह्य-स्थाने आबादी बची।
6. स्व-स्थाने या बाह्य-स्थाने: काज़ीरंगा, बीज बैंक, मेघालय का पवित्र उपवन, दुर्लभ हिरण के क्रायो-संरक्षित शुक्राणु, चिल्का रामसर स्थल।
स्व-स्थाने: काज़ीरंगा, पवित्र उपवन, चिल्का। बाह्य-स्थाने: बीज बैंक, क्रायो-संरक्षित शुक्राणु।
7. गाँव वाला मवेशी चराना और लकड़ी बीनना चाहता है। राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य और जैवमंडल के संक्रमण क्षेत्र में कहाँ क्या हो सकता है?
राष्ट्रीय उद्यान: कुछ नहीं। अभयारण्य: वन्यजीवों को नुकसान न हो तो लकड़ी बीनना हो सकता है; चराई सीमित। संक्रमण क्षेत्र: हाँ, लोग वहाँ टिकाऊ तरीके से रहते और ज़मीन उपयोग करते हैं।
आम गलतियाँ
- हॉटस्पॉट को सिर्फ़ 'बहुत जातियाँ' समझना। उसमें ज़्यादा स्थानिकता और ज़्यादा ख़तरा भी चाहिए।
- राष्ट्रीय उद्यान और अभयारण्य को एक समझना: उद्यान में कोई मानव उपयोग नहीं; अभयारण्य में कुछ हो सकता है।
- सोचना कि Z छोटे क्षेत्र और महाद्वीप दोनों में बराबर है। छोटे में 0.1–0.2, महाद्वीप में 0.6–1.2।
- चिड़ियाघर और बीज बैंक को स्व-स्थाने कहना। ये बाह्य-स्थाने हैं।