Netherlands VWO 6 (eindexamenjaar) Biology
अध्याय: 4
1. Self-regulation (part 3)
Protein synthesis
- वंशागति का आणविक आधार – ज़्यादातर जीवों में DNA आनुवंशिक पदार्थ है (कुछ वायरस में RNA)। यह द्विकुंडली है: न्यूक्लियोटाइड के दो प्रतिसमांतर सूत्र; A–T दो हाइड्रोजन बंध से, G–C तीन से। लंबा DNA हिस्टोन पर लिपटकर न्यूक्लियोसोम और फिर क्रोमैटिन बनाता है। DNA अर्धसंरक्षी ढंग से प्रतिकृति बनाता है (मेसेल्सन–स्टाल)। केंद्रीय सिद्धांत: DNA → RNA → प्रोटीन। अनुलेखन एक सूत्र से RNA बनाता है; यूकैरियोट में hnRNA पर कैप, पूँछ और स्प्लाइसिंग होती है। आनुवंशिक कूट त्रिक है, 64 कोडॉन (61 अमीनो अम्ल, 3 समापन), AUG से शुरू, लगभग सार्वत्रिक और अपह्रासित। राइबोसोम tRNA की मदद से mRNA को प्रोटीन में बदलता है। जीन चालू-बंद होते हैं; लैक ओपेरॉन इसका उदाहरण है। मानव और चावल जीनोम परियोजनाओं ने पूरा जीनोम पढ़ा, और DNA फिंगरप्रिंटिंग दोहराव वाले DNA (VNTR) से व्यक्ति की पहचान करती है।
2. Self-organisation (part 2)
Self-organisation of cells · Self-organisation of ecosystems
- वंशागति का आणविक आधार – ज़्यादातर जीवों में DNA आनुवंशिक पदार्थ है (कुछ वायरस में RNA)। यह द्विकुंडली है: न्यूक्लियोटाइड के दो प्रतिसमांतर सूत्र; A–T दो हाइड्रोजन बंध से, G–C तीन से। लंबा DNA हिस्टोन पर लिपटकर न्यूक्लियोसोम और फिर क्रोमैटिन बनाता है। DNA अर्धसंरक्षी ढंग से प्रतिकृति बनाता है (मेसेल्सन–स्टाल)। केंद्रीय सिद्धांत: DNA → RNA → प्रोटीन। अनुलेखन एक सूत्र से RNA बनाता है; यूकैरियोट में hnRNA पर कैप, पूँछ और स्प्लाइसिंग होती है। आनुवंशिक कूट त्रिक है, 64 कोडॉन (61 अमीनो अम्ल, 3 समापन), AUG से शुरू, लगभग सार्वत्रिक और अपह्रासित। राइबोसोम tRNA की मदद से mRNA को प्रोटीन में बदलता है। जीन चालू-बंद होते हैं; लैक ओपेरॉन इसका उदाहरण है। मानव और चावल जीनोम परियोजनाओं ने पूरा जीनोम पढ़ा, और DNA फिंगरप्रिंटिंग दोहराव वाले DNA (VNTR) से व्यक्ति की पहचान करती है।
3. Interaction (part 2)
Molecular and cellular interaction · Interaction in ecosystems
- जीन नियमन: कोशिका जीन को चालू और बंद कैसे करती है – हर कोशिका में एक जैसा DNA है, पर वह कुछ ही जीन इस्तेमाल करती है। नियंत्रण ज़्यादातर अनुलेखन (transcription) की शुरुआत पर होता है। बैक्टीरिया में लैक ऑपेरॉन कई जीनों का एक समूह है जिसका एक प्रमोटर और एक ऑपरेटर है: लैक्टोज़ न हो तो रिप्रेसर उसे बंद रखता है; लैक्टोज़ रिप्रेसर को हटा देता है और जीन पढ़े जाते हैं (प्रेरणीय ऑपेरॉन)। यूकैरियोट में ट्रांसक्रिप्शन फ़ैक्टर, एन्हांसर और साइलेंसर हर जीन को नियंत्रित करते हैं, और एपिजेनेटिक निशान (DNA मिथाइलेशन, हिस्टोन पैकिंग) DNA का क्रम बदले बिना जीन बंद रख सकते हैं। अलग-अलग चालू/बंद पैटर्न से अलग कोशिकाएँ बनती हैं (विभेदन)।
4. Evolution
Selection · Speciation · Biodiversity · Origin of life
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।
- समष्टि आनुवंशिकी: जीन पूल, हार्डी-वाइनबर्ग और नई जातियाँ – समष्टि आनुवंशिकी (population genetics) पढ़ती है कि किसी आबादी में एलील आवृत्तियाँ कैसे बदलती हैं। सभी जीवों के सारे एलील मिलकर जीन पूल बनाते हैं। A और a एलील के लिए p + q = 1। अगर आबादी बड़ी हो, संगम यादृच्छिक हो, और प्रवास, उत्परिवर्तन व चयन न हो, तो हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत कहता है कि आवृत्तियाँ नहीं बदलतीं और जीनोटाइप p² (AA) + 2pq (Aa) + q² (aa) = 1 होते हैं। इससे हटना यानी विकास हो रहा है, जिसके कारण हैं आनुवंशिक विचलन (बॉटलनेक, संस्थापक प्रभाव), जीन प्रवाह, उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन या चुनकर संगम। जैविक जाति अवधारणा में जाति वह समूह है जो आपस में प्रजनन कर सके, यानी एक जीन पूल। नई जातियाँ तब बनती हैं जब जीन पूल प्रजनन पृथक्करण से कट जाते हैं: एलोपैट्रिक (भौगोलिक बाधा) या सिम्पैट्रिक (एक ही जगह, जैसे बहुगुणिता)। एक पूर्वज कई रूपों में फैल सकता है (अनुकूली विकिरण, अपसरण), और असंबंधित जीव एक जैसे बन सकते हैं (अभिसरण)।
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।