DNA आनुवंशिक पदार्थ है
ग्रिफ़िथ (1928), रूपांतरण: जीवित हानिरहित R-प्रकार स्ट्रेप्टोकॉकस न्यूमोनी + ताप से मारे गए घातक S-प्रकार → चूहे मर गए और उनमें जीवित S जीवाणु मिले। मरे S से किसी चीज़ ने R को S में "रूपांतरित" किया।
एवरी, मैकलॉड और मैककार्टी (1944): S के अर्क के भाग एक-एक कर नष्ट किए। प्रोटीएज़ और RNase से रूपांतरण नहीं रुका; DNase से रुक गया। इसलिए रूपांतरण करने वाला पदार्थ DNA था।
हर्शे और चेज़ (1952): जीवाणुभोजी को रेडियोधर्मी ³²P (DNA में जाता है) या ³⁵S (प्रोटीन में जाता है) के साथ उगाया। संक्रमण और ब्लेंडर के बाद जीवाणुओं में ³²P मिला, ³⁵S नहीं। यानी DNA अंदर जाता है, प्रोटीन नहीं।
अच्छे आनुवंशिक पदार्थ के गुण
- अपनी प्रतिकृति बना सके।
- रासायनिक और संरचना में स्थिर हो।
- धीरे-धीरे बदल सके (उत्परिवर्तन) ताकि विकास हो।
- मेंडलीय लक्षणों के रूप में व्यक्त हो सके।
RNA कम स्थिर है (2′-OH के कारण), इसलिए DNA सूचना रखने में बेहतर; RNA जल्दी के कामों में बेहतर। शायद पहला आनुवंशिक पदार्थ RNA था (RNA संसार)।
DNA और RNA की संरचना
न्यूक्लियोटाइड = नाइट्रोजन क्षार + पेंटोस शर्करा + फॉस्फेट। क्षार + शर्करा = न्यूक्लियोसाइड। प्यूरीन: एडेनीन (A), ग्वानीन (G)। पिरिमिडीन: साइटोसीन (C), थाइमीन (T, केवल DNA), यूरेसिल (U, केवल RNA)। DNA में डीऑक्सीराइबोस, RNA में राइबोस।
न्यूक्लियोटाइड 3′–5′ फॉस्फोडाइएस्टर बंध से जुड़ते हैं। वॉटसन और क्रिक (1953) ने रोज़ालिंड फ़्रैंकलिन और विल्किन्स के X-किरण चित्रों से द्विकुंडली मॉडल दिया:
- दो सूत्र, प्रतिसमांतर (5′→3′ और 3′→5′)।
- A=T (2 H-बंध), G≡C (3 H-बंध)। प्यूरीन हमेशा पिरिमिडीन के सामने, इसलिए चौड़ाई 2 nm रहती है।
- दक्षिणावर्ती कुंडली, एक चक्कर = 3.4 nm = 10 क्षार जोड़े, जोड़ों के बीच 0.34 nm।
- शारगॉफ़ नियम: A = T, G = C, इसलिए (A + G) = (C + T)।
RNA प्रायः एकल सूत्री। प्रकार: mRNA (संदेश), tRNA (अनुकूलक), rRNA (राइबोसोम का भाग)।
DNA की पैकेजिंग
DNA की लंबाई = क्षार जोड़े × 0.34 nm। मानव द्विगुणित कोशिका: 6.6 × 10⁹ × 0.34 × 10⁻⁹ m ≈ 2.2 m, जो लगभग 10⁻⁶ m के केंद्रक में बंद है।
- प्रोकैरियोट: केंद्रक नहीं। ऋण आवेशित DNA को धन आवेशित प्रोटीन न्यूक्लियॉइड क्षेत्र में फंदों के रूप में पकड़ते हैं।
- यूकैरियोट: DNA (ऋण) हिस्टोन (धन, लाइसीन और आर्जिनीन से भरपूर) पर लिपटता है। आठ हिस्टोन = हिस्टोन अष्टक; लगभग 200 bp DNA इस पर लिपटकर एक न्यूक्लियोसोम बनाता है। कतार में न्यूक्लियोसोम "धागे पर मोती" जैसे → क्रोमैटिन तंतु → कुंडलित → मेटाफ़ेज़ गुणसूत्र। NHC प्रोटीन आगे पैकिंग में मदद करते हैं।
यूक्रोमैटिन: ढीला, हल्का रँगता, सक्रिय। हेटेरोक्रोमैटिन: कसा, गहरा रँगता, निष्क्रिय।
DNA प्रतिकृतियन (अर्धसंरक्षी)
वॉटसन-क्रिक ने कहा था कि हर सूत्र साँचा बनेगा। मेसेल्सन और स्टाल (1958) ने साबित किया: ई. कोलाई को भारी ¹⁵N में उगाया, फिर सामान्य ¹⁴N में डाला। 1 पीढ़ी बाद सारा DNA संकर (¹⁵N–¹⁴N); 2 पीढ़ी बाद आधा संकर, आधा हल्का। टेलर ने बाकला की जड़ों में रेडियोधर्मी थाइमिडीन से यही दिखाया।
कैसे होता है
- हेलिकेज़ प्रतिकृति उद्गम पर कुंडली खोलता है, Y-आकार का प्रतिकृति द्विशाख बनता है।
- DNA-आश्रित DNA पॉलीमरेज़ केवल 5′→3′ दिशा में न्यूक्लियोटाइड जोड़ता है; डीऑक्सीन्यूक्लियोसाइड ट्राइफॉस्फेट इकाई और ऊर्जा दोनों देते हैं।
- एक सूत्र पर लगातार बनता है (अग्रग सूत्र); दूसरे पर छोटे टुकड़ों में (पश्चग सूत्र, ओकाज़ाकी खंड)।
- DNA लाइगेज़ टुकड़े जोड़ता है।
बहुत तेज़ (ई. कोलाई 4.6 × 10⁶ bp लगभग 18 मिनट में, करीब 2000 bp प्रति सेकंड) और बहुत सटीक। यूकैरियोट में S-प्रावस्था में होता है।
केंद्रीय सिद्धांत
फ़्रांसिस क्रिक ने कहा कि आनुवंशिक सूचना DNA → RNA → प्रोटीन बहती है। DNA → DNA = प्रतिकृतियन, DNA → RNA = अनुलेखन, RNA → प्रोटीन = अनुवादन।
उल्टा अनुलेखन (RNA → DNA) कुछ वायरस जैसे HIV में रिवर्स ट्रांसक्रिप्टेज़ से होता है। यानी कभी-कभी सूचना उल्टी भी बहती है।
अनुलेखन
केवल एक सूत्र पढ़ा जाता है। साँचा सूत्र (3′→5′) पढ़ा जाता है; दूसरा कोडिंग सूत्र (5′→3′) है, जिसका क्रम RNA जैसा ही है, बस U की जगह T।
अनुलेखन इकाई में उन्नायक (प्रमोटर) (ऊपर की ओर, जहाँ RNA पॉलीमरेज़ जुड़ता है), संरचनात्मक जीन और समापक (टर्मिनेटर) होते हैं।
जीवाणु में
एक ही RNA पॉलीमरेज़ सब RNA बनाता है। σ (सिग्मा) कारक से शुरुआत (प्रारंभन), RNA बढ़ता है (दीर्घीकरण), ρ (रो) कारक से रुकता है (समापन)। केंद्रक न होने से अनुलेखन और अनुवादन साथ-साथ हो सकते हैं।
यूकैरियोट में
- RNA pol I → rRNA (28S, 18S, 5.8S); RNA pol II → hnRNA (mRNA का पूर्वरूप); RNA pol III → tRNA, 5S rRNA, snRNA।
- जीन खंडित होते हैं: एक्सॉन (व्यक्त होने वाले) और इंट्रॉन (बीच वाले)। hnRNA का प्रसंस्करण: स्प्लाइसिंग से इंट्रॉन हटते हैं; कैपिंग में 5′ सिरे पर मिथाइल ग्वानोसीन ट्राइफॉस्फेट; टेलिंग में 3′ सिरे पर 200–300 एडेनीन (पॉली-A पूँछ)।
आनुवंशिक कूट
जॉर्ज गैमो ने सोचा: 4 क्षारों से 20 अमीनो अम्ल बनने हैं। 4¹ = 4 और 4² = 16 कम हैं; 4³ = 64 काफ़ी है। इसलिए कूट त्रिक है। निरेनबर्ग, खुराना और ओचोआ ने कोडॉन खोजे।
- 64 कोडॉन: 61 अमीनो अम्ल के, 3 समापन (UAA, UAG, UGA)।
- AUG = मेथियोनीन और प्रारंभ कोडॉन भी (दोहरा काम)।
- स्पष्ट और विशिष्ट: एक कोडॉन → एक अमीनो अम्ल।
- अपहृासित: कई अमीनो अम्लों के एक से ज़्यादा कोडॉन।
- कॉमा-रहित, लगातार पढ़ा जाता है।
- लगभग सार्वत्रिक: UUU = Phe जीवाणु से मनुष्य तक (माइटोकॉन्ड्रिया में कुछ अपवाद)।
उत्परिवर्तन और कूट
बिंदु उत्परिवर्तन (एक क्षार बदले) एक अमीनो अम्ल बदल सकता है (सिकल-सेल)। 1 या 2 क्षार जुड़ें/हटें तो पढ़ने का ढाँचा खिसकता है (फ़्रेमशिफ़्ट); 3 जुड़ें/हटें तो एक अमीनो अम्ल बढ़ता/घटता है, ढाँचा वही रहता है। tRNA अनुकूलक है: उसका प्रतिकोडॉन लूप कोडॉन पढ़ता है और 3′ सिरा (CCA) अमीनो अम्ल ले जाता है। 2D में तिपतिया पत्ती, 3D में उल्टा L आकार।
अनुवादन
- tRNA का आवेशन (एमीनोएसिलेशन): हर अमीनो अम्ल अपने tRNA से ATP की मदद से जुड़ता है।
- प्रारंभन: राइबोसोम की छोटी उप-इकाई mRNA के AUG पर आती है; बड़ी उप-इकाई जुड़ती है। राइबोसोम में tRNA के लिए दो स्थान।
- दीर्घीकरण: tRNA कोडॉन-दर-कोडॉन अमीनो अम्ल लाते हैं; पेप्टाइड बंध बनता है (23S rRNA एंज़ाइम का काम करता है = राइबोज़ाइम)। राइबोसोम 5′→3′ खिसकता है।
- समापन: समापन कोडॉन पर मोचन कारक पॉलीपेप्टाइड छोड़ देता है।
mRNA में AUG से पहले और समापन कोडॉन के बाद अननुवादित क्षेत्र (UTR) भी होते हैं; ये अनुवादन को कुशल बनाते हैं।
जीन अभिव्यक्ति का नियमन: लैक ओपेरॉन
कोशिका ज़रूरत पर ही जीन चालू करती है। जीवाणु में एक काम के कई जीन एक उन्नायक और एक प्रचालक के साथ = ओपेरॉन। जैकब और मोनो ने ई. कोलाई का लैक ओपेरॉन बताया:
- i जीन: दमनकारी (रिप्रेसर) प्रोटीन बनाता है (हमेशा चालू)।
- z जीन: β-गैलेक्टोसाइडेज़ — लैक्टोज़ को ग्लूकोज़ और गैलेक्टोज़ में तोड़ता है।
- y जीन: परमिएज़ — लैक्टोज़ को कोशिका में आने देता है।
- a जीन: ट्रांसएसिटाइलेज़।
लैक्टोज़ नहीं: दमनकारी प्रचालक पर बैठकर RNA पॉलीमरेज़ रोकता है → जीन बंद।
लैक्टोज़ है: लैक्टोज़ (प्रेरक) दमनकारी से जुड़कर उसका आकार बदलता है, वह प्रचालक से हट जाता है → z, y, a का अनुलेखन → एंज़ाइम बनते हैं। यह प्रेरणीय ओपेरॉन का ऋणात्मक नियमन है। लैक्टोज़ ख़त्म होने पर दमनकारी फिर बैठ जाता है।
मानव जीनोम परियोजना और चावल जीनोम
मानव जीनोम परियोजना (HGP) 1990 से 2003 तक चली, ताकि मानव DNA के ~3 × 10⁹ bp पढ़े जाएँ। तरीके: व्यक्त अनुक्रम टैग (EST) (व्यक्त जीन खोजना) और अनुक्रम टिप्पणीकरण (सब पढ़कर जीन ढूँढना)। DNA को टुकड़ों में काटा, BAC/YAC वाहकों में क्लोन किया, स्वचालित मशीनों (सैंगर विधि) से पढ़ा और कंप्यूटर से मेल वाले सिरों से जोड़ा।
मुख्य बातें
- लगभग 3164.7 मिलियन bp; औसत जीन ~3000 क्षार; सबसे बड़ा जीन डिस्ट्रोफ़िन, 2.4 मिलियन क्षार।
- लगभग 30,000 जीन (सोच से बहुत कम); सब लोगों में 99.9% क्षार एक जैसे।
- 2% से कम जीनोम प्रोटीन बनाता है; बड़ा भाग दोहराव वाला।
- गुणसूत्र 1 पर सबसे ज़्यादा जीन (2968); Y पर सबसे कम (231)।
- लगभग 14 लाख स्थान जहाँ एक क्षार का अंतर (SNP)।
अन्य पढ़े गए जीनोम: चावल, जीवाणु, यीस्ट, सीनोरैब्डाइटिस एलिगेंस, फल मक्खी, एरेबिडॉप्सिस। चावल जीनोम से उपज, रोग प्रतिरोध और तनाव सहन के जीन खोजने में मदद मिलती है।
DNA फिंगरप्रिंटिंग
सब मनुष्यों का 99.9% DNA एक जैसा है, इसलिए अलग 0.1% की तुलना करते हैं, ख़ासकर दोहराव वाला DNA। घनत्व प्रवणता अपकेंद्रण में ये छोटी चोटियाँ बनाते हैं = अनुषंगी (सैटेलाइट) DNA। ये प्रोटीन नहीं बनाते और लोगों में बहुत अलग होते हैं (बहुरूपता)। एलेक जेफ़्रीज़ ने VNTR (परिवर्ती संख्या अग्रानुक्रमी दोहराव) से यह विधि बनाई।
- DNA अलग करो (ख़ून, बाल की जड़, लार, वीर्य)।
- प्रतिबंधन एंज़ाइम से काटो।
- जेल वैद्युतकणसंचलन से टुकड़े अलग करो।
- नाइलॉन/नाइट्रोसेलुलोज़ झिल्ली पर स्थानांतरित करो (सदर्न ब्लॉटिंग)।
- चिह्नित VNTR प्रोब डालो जो मेल वाले टुकड़ों से चिपके (संकरण)।
- X-किरण फ़िल्म पर पट्टियाँ देखो (ऑटोरेडियोग्राफ़ी)।
बच्चे की आधी पट्टियाँ माँ से, आधी पिता से। उपयोग: अपराध जाँच, पितृत्व परीक्षण, आबादी और विकास अध्ययन। PCR से छोटे नमूने को पहले बढ़ाया जा सकता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्षार युग्मन: A = T (2 H-बंध), G ≡ C (3 H-बंध)
- शारगॉफ़: A = T, G = C, इसलिए A + G = C + T (प्यूरीन = पिरिमिडीन)
- DNA की लंबाई = क्षार जोड़े × 0.34 nm
- एक चक्कर = 10 bp = 3.4 nm
- कोडॉन = 4³ = 64 (61 अर्थपूर्ण + 3 समापन)
- प्रोटीन में अमीनो अम्ल = (कोडिंग क्षार ÷ 3) − 1 समापन कोडॉन
- मेसेल्सन–स्टाल, ¹⁴N में n पीढ़ी बाद: संकर भाग = 2/2ⁿ, हल्का = 1 − 2/2ⁿ
हल किए गए उदाहरण
1. एक DNA में 20% एडेनीन है। T, G और C का % निकालो।
चरण 1: A = T, तो T = 20%। चरण 2: A + T = 40%, तो G + C = 60%। चरण 3: G = C = 30% प्रत्येक।
2. 1000 क्षार जोड़ों वाले DNA में 300 A–T जोड़े हैं। दोनों सूत्रों को कितने हाइड्रोजन बंध जोड़ते हैं?
चरण 1: G–C जोड़े = 700। चरण 2: 300 × 2 + 700 × 3 = 600 + 2100। उत्तर: 2700 H-बंध।
3. 5386 क्षार जोड़ों (φX174 जितना) वाले DNA की लंबाई निकालो।
चरण 1: लंबाई = bp × 0.34 nm। चरण 2: 5386 × 0.34 = 1831.24 nm। उत्तर: लगभग 1.83 µm।
4. साँचा सूत्र 3′-TACGCAATG-5′ से बना mRNA लिखो।
चरण 1: हर क्षार का जोड़ा: T→A, A→U, C→G, G→C। चरण 2: mRNA 5′-AUGCGUUAC-3′। चरण 3: यह कोडिंग सूत्र 5′-ATGCGTTAC-3′ जैसा है, बस T की जगह U।
5. mRNA 5′-AUG UUU GGC AAA UGA-3′ से प्रोटीन में कितने और कौन से अमीनो अम्ल?
चरण 1: AUG (Met), UUU (Phe), GGC (Gly), AAA (Lys), UGA (समापन)। चरण 2: समापन कोडॉन कुछ नहीं जोड़ता। उत्तर: 4 अमीनो अम्ल: Met–Phe–Gly–Lys।
6. एक प्रोटीन में 300 अमीनो अम्ल हैं। mRNA के कोडिंग भाग (समापन कोडॉन सहित) में कम से कम कितने क्षार?
चरण 1: 300 कोडॉन + 1 समापन = 301 कोडॉन। चरण 2: 301 × 3 = 903 क्षार।
7. केवल ¹⁵N DNA वाले ई. कोलाई को ¹⁴N में डाला। 3 पीढ़ी बाद कितना भाग DNA संकर होगा?
चरण 1: एक अणु से 3 पीढ़ी में 2³ = 8 अणु। चरण 2: केवल 2 में पुराना ¹⁵N सूत्र → संकर। चरण 3: 2/8 = 1/4 संकर, 3/4 हल्का।
8. mRNA AUG CCU AAA UGA में चौथा क्षार (C) हट गया। क्या होगा?
चरण 1: नया क्रम AUG CUA AAU GA… चरण 2: हटने के बाद के कोडॉन बदल गए: Met–Leu–Asn… चरण 3: यह फ़्रेमशिफ़्ट उत्परिवर्तन है: आगे के सब अमीनो अम्ल बदलते हैं, समापन कोडॉन भी खो सकता है।
आम गलतियाँ
- कहना कि अनुलेखन में कोडिंग सूत्र पढ़ा जाता है। साँचा सूत्र पढ़ा जाता है; RNA कोडिंग सूत्र जैसा होता है (U के साथ)।
- समापन कोडॉन को अमीनो अम्ल गिनना। समापन कोडॉन कुछ नहीं जोड़ता।
- सोचना कि लैक दमनकारी केवल लैक्टोज़ न होने पर बनता है। i जीन हमेशा चालू है; लैक्टोज़ बस दमनकारी को निष्क्रिय करता है।
- एकल सूत्री DNA या RNA पर शारगॉफ़ नियम लगाना। A = T, G = C केवल दोहरे सूत्र पर।