जनन के दौरान विविधता का संचय
जनन में DNA की नकल कभी पूरी तरह सही नहीं होती, इसलिए हर नई पीढ़ी में छोटे बदलाव आते हैं। अलैंगिक जनन (जैसे जीवाणु का बँटना) में अंतर बहुत कम होते हैं। लैंगिक जनन में आधे जीन माँ से और आधे पिता से आते हैं और नए मेल बनाते हैं, इसलिए विविधता बहुत ज़्यादा होती है।
ये विविधताएँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी जमा होती जाती हैं। कुछ विविधताएँ बदलते वातावरण में जीवित रहने में मदद करती हैं। इसलिए विविधता ही विकास का आधार है।
आनुवंशिकता और वंशागत लक्षण
आनुवंशिकता यानी माता-पिता से संतान में लक्षणों का जाना। लक्षण कोई भी दिखने या मापने वाली विशेषता है: लंबाई, आँखों का रंग, रक्त समूह, कान की लौ।
वंशागत लक्षण जीन से नियंत्रित होता है और अगली पीढ़ी में जाता है। जो लक्षण हम अपने जीवन में पाते हैं (चोट का निशान, कसरत से बनी मांसपेशी) वह उपार्जित है और आगे नहीं जाता।
मेंडल का योगदान: वंशागति के नियम
ग्रेगर जॉन मेंडल ने 1860 के दशक में मटर पर प्रयोग किए। मटर अच्छा चुनाव था: जल्दी उगता है, बहुत बीज देता है, स्वपरागण भी और हाथ से परपरागण भी हो सकता है, और इसके लक्षण साफ़ विपरीत होते हैं (लंबा/बौना, गोल/झुर्रीदार बीज, पीला/हरा बीज, बैंगनी/सफ़ेद फूल)।
मेंडल ने इन इकाइयों को कारक कहा; आज इन्हें जीन कहते हैं। एक जीन के अलग रूप युग्मविकल्पी (एलील) हैं (T और t)। TT या tt वाला पौधा शुद्ध / समयुग्मजी है, Tt वाला संकर / विषमयुग्मजी।
प्रभावी और अप्रभावी लक्षण
संकर में जो लक्षण दिखता है वह प्रभावी (लंबा, T) है। जो छुपा रहता है वह अप्रभावी (बौना, t) है। अप्रभावी लक्षण तभी दिखता है जब दोनों प्रतियाँ अप्रभावी हों (tt)। जीनों का मेल (TT, Tt, tt) जीनोटाइप (जीन प्रारूप) है, और जो दिखता है वह फ़ीनोटाइप (लक्षण प्रारूप)।
एकसंकर संकरण: एक लक्षण, 3:1
जनक (P): शुद्ध लंबा TT × शुद्ध बौना tt। युग्मक: T और t। F1: सभी Tt, सभी लंबे। F1 का स्वपरागण (Tt × Tt):
| T | t | |
|---|---|---|
| T | TT | Tt |
| t | Tt | tt |
F2 लक्षण अनुपात: 3 लंबे : 1 बौना। जीन अनुपात: 1 TT : 2 Tt : 1 tt। बौनापन F1 में गायब हुआ पर F2 में लौट आया — यानी कारक न खोया, न मिला-जुला। यही प्रभाविता का नियम और पृथक्करण का नियम है: युग्मक बनते समय दोनों प्रतियाँ अलग हो जाती हैं।
द्विसंकर संकरण: दो लक्षण, 9:3:3:1
जनक: गोल पीला (RRYY) × झुर्रीदार हरा (rryy)। F1: सभी RrYy, गोल और पीले। F1 × F1: हर पौधा चार तरह के युग्मक बनाता है (RY, Ry, rY, ry), तो पुनेट वर्ग में 4 × 4 = 16 खाने।
F2: 9 गोल पीले : 3 गोल हरे : 3 झुर्रीदार पीले : 1 झुर्रीदार हरा। दो नए मेल (गोल हरा, झुर्रीदार पीला) बनते हैं, जो किसी जनक में नहीं थे। इसलिए आकार और रंग स्वतंत्र रूप से वंशागत होते हैं: स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम। हर लक्षण अकेले देखें तो भी 12:4 = 3:1 ही है।
लक्षण कैसे प्रकट होते हैं? जीन, DNA और प्रोटीन
केंद्रक में DNA गुणसूत्रों के रूप में रहता है। जीन DNA का वह भाग है जिसमें एक प्रोटीन बनाने का निर्देश होता है। प्रोटीन ही लक्षण बनाने का काम करते हैं।
उदाहरण: पौधे की लंबाई एक वृद्धि हॉर्मोन पर निर्भर है। एक जीन एक एंज़ाइम (प्रोटीन) बनवाता है जो यह हॉर्मोन बनाता है। जीन की प्रति अच्छी हो तो ज़्यादा एंज़ाइम, ज़्यादा हॉर्मोन, लंबा पौधा। कम कुशल हो तो कम हॉर्मोन, बौना पौधा। यानी जीन → प्रोटीन (एंज़ाइम) → हॉर्मोन → लक्षण।
शरीर की हर कोशिका में हर गुणसूत्र की दो प्रतियाँ होती हैं, एक माँ से और एक पिता से। युग्मक में सिर्फ़ एक सेट होता है, इसलिए निषेचन पर जोड़ी फिर बन जाती है और गुणसूत्रों की संख्या हर पीढ़ी में स्थिर रहती है।
बोर्ड परीक्षा में क्या पूछा जाता है
- 1 अंक: प्रभावी/अप्रभावी, जीनोटाइप/फ़ीनोटाइप की परिभाषा; F2 अनुपात।
- 3 अंक: पुनेट वर्ग से एकसंकर संकरण; लक्षणों की स्वतंत्र वंशागति।
- 5 अंक: द्विसंकर संकरण अनुपात और निष्कर्ष सहित; जीन लक्षण को कैसे नियंत्रित करते हैं।
लिंग निर्धारण भी इसी अध्याय में है: मानव में लिंग निर्धारण देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जीन: DNA का भाग जो एक प्रोटीन बनवाता है
- एलील (युग्मविकल्पी): जीन का एक रूप (T या t)
- जीनोटाइप: TT, Tt, tt; फ़ीनोटाइप: लंबा/बौना
- समयुग्मजी: TT या tt; विषमयुग्मजी (संकर): Tt
- एकसंकर F2: लक्षण 3 : 1, जीन 1 : 2 : 1
- द्विसंकर F2: 9 : 3 : 3 : 1 (16 मेल)
- युग्मकों के प्रकार = 2^n (n = संकर जीन जोड़ियों की संख्या)
हल किए गए उदाहरण
1. शुद्ध बैंगनी फूल वाला मटर (VV) और शुद्ध सफ़ेद फूल वाला मटर (vv) क्रॉस किए गए। F1 कैसा होगा?
युग्मक: एक से V, दूसरे से v। F1 = Vv। बैंगनी प्रभावी है, इसलिए सभी F1 पौधों के फूल बैंगनी होंगे।
2. दो Tt पौधों के क्रॉस से 400 बीज उगाए गए। लगभग कितने बौने होंगे?
पुनेट वर्ग: TT, Tt, Tt, tt। बौना = tt = 4 में 1। 400 × 1/4 = 100 बौने (300 लंबे)।
3. एक लंबे पौधे (जीनोटाइप अज्ञात) को बौने (tt) से क्रॉस किया। आधे बच्चे बौने निकले। लंबा जनक कैसा था?
बौने बच्चे tt हैं, तो उन्हें लंबे जनक से t मिला। लंबा जनक Tt था। (TT होता तो सभी Tt, लंबे होते।) इसे परीक्षार्थ संकरण (टेस्ट क्रॉस) कहते हैं।
4. RrYy × RrYy से 160 बीज बने। कितने झुर्रीदार हरे होंगे?
झुर्रीदार हरा = rryy = 16 में 1। 160 × 1/16 = 10 बीज।
5. बौनापन F1 में क्यों गायब होता है और F2 में क्यों लौटता है?
F1 Tt है। T प्रभावी है और t को छुपा देता है। F2 में दोनों Tt जनक t दे सकते हैं, तो 4 में से 1 बच्चे को t + t = tt मिलता है, जो बौना है। t छुपा था, खोया नहीं था।
आम गलतियाँ
- जीनोटाइप और फ़ीनोटाइप मिला देना: Tt जीनोटाइप है, 'लंबा' फ़ीनोटाइप है।
- यह सोचना कि अप्रभावी लक्षण कमज़ोर या दुर्लभ है। अप्रभावी का मतलब सिर्फ़ इतना कि प्रभावी प्रति हो तो छुप जाता है।
- एकसंकर में युग्मक में दो अक्षर लिखना। युग्मक में एक ही प्रति: T या t, Tt नहीं।
- 1:2:1 को लक्षण अनुपात लिखना। 1:2:1 जीन अनुपात है; लक्षण अनुपात 3:1 है।