Russia 9 класс Biology (advanced)
अध्याय: 17
1. Introduction
Sciences about humans
- मानव से जुड़े विज्ञान: शरीर-रचना, शरीर-क्रिया और स्वच्छता – शरीर-रचना (anatomy) बताती है कि शरीर कैसे बना है, शरीर-क्रिया विज्ञान (physiology) बताता है कि वह कैसे काम करता है और स्वच्छता (hygiene) बताती है कि स्वस्थ कैसे रहें। वैज्ञानिक अवलोकन, मापन और प्रयोग से सीखते हैं। डॉक्टर, सर्जन, फिज़ियोलॉजिस्ट, खेल-वैज्ञानिक और पोषण-विशेषज्ञ इन्हीं विज्ञानों का उपयोग करते हैं।
2. Cells and tissues
Biomolecules and cells
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
3. Nervous system
Nervous system
- तंत्रिका तंत्र, प्रतिवर्ती क्रिया और मानव मस्तिष्क – तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन) संदेश को विद्युत आवेग के रूप में ले जाती हैं और सिनैप्स नाम के छोटे अंतर को रसायनों से पार करती हैं। झटपट बचाव वाली क्रियाएँ (प्रतिवर्ती क्रिया) मेरुरज्जु सँभालता है; सोचना और नियंत्रण मस्तिष्क करता है, जिसे खोपड़ी और तरल की गद्दी बचाती है।
4. Sensory systems
Receptors and senses
- ज्ञानेंद्रियाँ – ज्ञानेंद्रियाँ हमें आसपास के बदलाव (उद्दीपन) पहचानने देती हैं। आँख प्रकाश, कान ध्वनि और संतुलन, नाक गंध, जीभ स्वाद और त्वचा स्पर्श, दबाव, गरमी, ठंडक व दर्द पहचानती है। हर इंद्रिय में ग्राही कोशिकाएँ उद्दीपन को तंत्रिका संकेत में बदलती हैं। संकेत संवेदी तंत्रिका से मस्तिष्क या मेरुरज्जु तक जाता है, जो मांसपेशी को आदेश भेजता है: यही अनुक्रिया है।
5. Endocrine system
Hormones
- जंतुओं में हॉर्मोन: अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और पुनर्भरण – अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हॉर्मोन नाम के रासायनिक संदेशवाहक सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त उन्हें पूरे शरीर में ले जाता है, पर वे केवल लक्ष्य कोशिकाओं पर असर करते हैं। हॉर्मोन वृद्धि, उपापचय, आपातकालीन प्रतिक्रिया, रक्त शर्करा और यौवनारंभ नियंत्रित करते हैं, और उनकी मात्रा पुनर्भरण (फ़ीडबैक) से ठीक रहती है।
6. Behaviour
Reflexes and learning
जल्द आ रहा है
7. Musculoskeletal system
Bones and muscles
- कंकाल तंत्र – कंकाल शरीर का ढाँचा है; बड़े व्यक्ति में 206 हड्डियाँ होती हैं। इसके पाँच मुख्य कार्य हैं: सहारा और आकार, सुरक्षा, गति (मांसपेशियों के साथ), लाल अस्थि-मज्जा में रक्त कोशिकाएँ बनाना और कैल्शियम जैसे खनिज जमा करना। हड्डियाँ जोड़ों (संधि) पर मिलती हैं: कब्ज़ा जोड़ (कोहनी, घुटना) एक दिशा में मुड़ता है, कंदुक-खल्लिका जोड़ (कंधा, कूल्हा) हर दिशा में घूमता है। स्नायुबंधन हड्डी को हड्डी से, कंडरा मांसपेशी को हड्डी से जोड़ती है, उपास्थि सिरों पर गद्दी है। मांसपेशियाँ सिर्फ़ खींचती हैं, इसलिए जोड़ी में काम करती हैं, जैसे बाइसेप्स और ट्राइसेप्स।
8. Circulatory and lymphatic systems
Heart, vessels, blood
- मनुष्य में परिवहन: हृदय, रुधिर वाहिकाएँ, रुधिर और लसीका – हृदय चार कक्षों वाला मांसपेशी पंप है। एक पूरे चक्कर में रुधिर हृदय से दो बार गुज़रता है: एक बार फेफड़ों से ऑक्सीजन लेने, और एक बार पूरे शरीर तक। यही दोहरा परिसंचरण है। धमनियाँ रुधिर को हृदय से दूर ले जाती हैं, शिराएँ वापस लाती हैं और केशिकाएँ आदान-प्रदान करती हैं। रुधिर (प्लाज़्मा, लाल व श्वेत कणिकाएँ, प्लेटलेट्स) और लसीका मिलकर भोजन, गैसें, हॉर्मोन और अपशिष्ट ढोते हैं।
9. Immune system
Immunity
- प्रतिरक्षा तंत्र: शरीर रोगाणुओं से कैसे लड़ता है – रोगाणु (रोगजनक) संक्रामक रोग करते हैं। शरीर में रक्षा की तीन पंक्तियाँ हैं: अवरोध (त्वचा, श्लेष्मा, अम्ल), तेज़ सामान्य (सहज) प्रतिरक्षा (सूजन, बुखार, भक्षक कोशिकाएँ) और धीमी पर विशिष्ट (उपार्जित) प्रतिरक्षा (B कोशिकाएँ एंटीबॉडी बनाती हैं, T कोशिकाएँ संक्रमित कोशिकाएँ मारती हैं)। स्मृति कोशिकाएँ दूसरे हमले को जल्दी रोकती हैं। टीका सुरक्षित रूप से स्मृति बनाता है। गड़बड़ी: एलर्जी, स्व-प्रतिरक्षी रोग, प्रतिरक्षा की कमी (जैसे HIV)।
10. Respiratory system
Respiration
- श्वसन: वायवीय, अवायवीय और मानव फेफड़े – श्वसन वह प्रक्रम है जिसमें कोशिका के अंदर भोजन (ज़्यादातर ग्लूकोज) टूटकर ऊर्जा देता है, जो ATP में जमा होती है। ऑक्सीजन के साथ (वायवीय) ग्लूकोज पूरा टूटकर CO₂ और जल बनता है और बहुत ऊर्जा मिलती है; ऑक्सीजन के बिना (अवायवीय) थोड़ी ऊर्जा मिलती है और एथेनॉल (यीस्ट) या लैक्टिक अम्ल (पेशी) बनता है। फेफड़ों की लाखों कूपिकाएँ रक्त तक ऑक्सीजन पहुँचाती हैं।
11. Digestive system
Digestion
- मानव पाचन तंत्र और विषमपोषी पोषण – विषमपोषी जीव दूसरे जीवों से बना-बनाया भोजन लेते हैं। मनुष्य प्राणिसम (holozoic) पोषण करता है: पूरा भोजन खाकर एक लंबी नली, आहार नाल, में उसे तोड़ता है। दाँत, लार, आमाशय का अम्ल, एंज़ाइम, पित्त और अग्न्याशयी रस बड़े अणुओं को छोटा करते हैं, जिन्हें क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम रक्त में सोख लेते हैं।
12. Excretory system
Kidneys
- मनुष्य और पौधों में उत्सर्जन: वृक्क, वृक्काणु और अधिक – उत्सर्जन शरीर में बने हानिकारक नाइट्रोजनी अपशिष्ट को बाहर निकालना है। दोनों वृक्कों में लगभग दस-दस लाख वृक्काणु रक्त छानते हैं: कोशिकागुच्छ छानता है, नलिका उपयोगी ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण और जल वापस लेती है, और बचा यूरिया व अतिरिक्त जल मूत्र बनता है। पौधे रंध्रों, गिरती पत्तियों, छाल, रेज़िन और गोंद से अपशिष्ट निकालते हैं।
13. Reproductive system
Reproduction
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
14. Skin
Skin
- मानव त्वचा: परतें, काम और धूप से सुरक्षा – त्वचा शरीर का सबसे बड़ा अंग है। इसकी तीन परतें हैं: बाह्यत्वचा (बाहरी, जलरोधी, मेलानिन वाली), अंतःत्वचा (रक्त नलिकाएँ, तंत्रिकाएँ, ग्रंथियाँ, बालों की जड़ें) और नीचे चर्बी की परत। यह रक्षा करती है, छूना और दर्द महसूस कराती है, पसीने और रक्त प्रवाह से शरीर का तापमान सँभालती है और धूप में विटामिन D बनाती है। बहुत ज़्यादा UV त्वचा की कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाता है, बुढ़ापा जल्दी लाता है और मेलेनोमा जैसा त्वचा कैंसर कर सकता है।
15. Adaptations of the human body
Adaptations
जल्द आ रहा है
16. Human genetics
Genetics
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
17. Anthropogenesis
Human evolution
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।