हमें परिवहन तंत्र क्यों चाहिए?
आंत में सोखा भोजन, फेफड़ों की ऑक्सीजन और ग्रंथियों के हॉर्मोन शरीर की अरबों कोशिकाओं तक पहुँचने चाहिए। CO₂ और यूरिया जैसे अपशिष्ट दूर ले जाने हैं। इतनी दूरी पर अकेला विसरण बहुत धीमा है, इसलिए मनुष्य में परिसंचरण तंत्र है: एक पंप (हृदय), नलियाँ (रुधिर वाहिकाएँ) और एक द्रव (रुधिर), साथ में एक दूसरा द्रव, लसीका।
मानव हृदय: चार कक्ष और वाल्व
हृदय आपकी मुट्ठी जितना बड़ा है और दोनों फेफड़ों के बीच, थोड़ा बाईं ओर होता है। पट (septum) नाम की दीवार इसे दाएँ और बाएँ हिस्से में बाँटती है, ताकि ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर न मिलें।
- अलिंद (ऊपर, पतली दीवार): रुधिर लेते हैं।
- निलय (नीचे, मोटी पेशीय दीवार): रुधिर बाहर पंप करते हैं। बाएँ निलय की दीवार सबसे मोटी है क्योंकि वह पूरे शरीर में रुधिर भेजता है।
- वाल्व: एक ही दिशा में खुलने वाले पल्ले, ताकि कक्ष सिकुड़ने पर रुधिर उल्टा न बहे।
दोहरा परिसंचरण
फुफ्फुसीय परिसंचरण: दायाँ निलय → फुफ्फुस धमनी → फेफड़े → फुफ्फुस शिराएँ → बायाँ अलिंद।
दैहिक परिसंचरण: बायाँ निलय → महाधमनी → शरीर → महाशिरा → दायाँ अलिंद।
एक पूरे चक्कर में रुधिर हृदय से दो बार गुज़रता है, इसलिए इसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं। ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर अलग रहने से शरीर को ऑक्सीजन बहुत कुशलता से मिलती है, जो पक्षियों और स्तनधारियों को शरीर का तापमान स्थिर और गर्म रखने के लिए चाहिए।
दूसरे जंतु: मछली का हृदय दो कक्ष वाला है और रुधिर एक चक्कर में हृदय से एक ही बार गुज़रता है (एकल परिसंचरण)। उभयचरों और ज़्यादातर सरीसृपों में तीन कक्ष होते हैं और थोड़ा मिश्रण सह लेते हैं।
रुधिर वाहिकाएँ: धमनी, शिरा और केशिका
| धमनी | शिरा | केशिका |
|---|---|---|
| रुधिर को हृदय से दूर ले जाती है | रुधिर को हृदय तक वापस लाती है | धमनी को शिरा से जोड़ती है |
| मोटी, लचीली, पेशीय दीवार (उच्च दाब) | पतली दीवार, अंदर ज़्यादा जगह | दीवार केवल एक कोशिका मोटी |
| वाल्व नहीं (शुरुआत को छोड़कर) | वाल्व उल्टा बहाव रोकते हैं | कोशिकाओं से भोजन, O₂, CO₂ और अपशिष्ट का आदान-प्रदान |
याद रखने लायक अपवाद: फुफ्फुस धमनी कम ऑक्सीजन वाला और फुफ्फुस शिरा ऑक्सीजन भरपूर रुधिर ले जाती है। नियम दिशा का है, रंग का नहीं।
रक्तदाब वह बल है जो रुधिर वाहिका की दीवार पर लगाता है; इसे स्फिग्मोमैनोमीटर से मापते हैं। सामान्य लगभग 120/80 mm Hg (प्रकुंचन/अनुशिथिलन) है। लंबे समय तक उच्च रक्तदाब से धमनी फट सकती है।
रुधिर और लसीका
रुधिर एक तरल संयोजी ऊतक है:
- प्लाज़्मा: तरल भाग; भोजन, घुली CO₂, लवण, हॉर्मोन और नाइट्रोजनी अपशिष्ट ढोता है।
- लाल रुधिर कणिकाएँ: हीमोग्लोबिन से ऑक्सीजन ले जाती हैं।
- श्वेत रुधिर कणिकाएँ: कीटाणुओं से लड़ती हैं।
- प्लेटलेट्स (बिंबाणु): कटने पर रिसाव बंद करके रुधिर का थक्का बनाते हैं, ताकि ज़्यादा ख़ून न बहे।
लसीका (ऊतक तरल): प्लाज़्मा, कुछ प्रोटीन और रुधिर कोशिकाएँ केशिकाओं से रिसकर कोशिकाओं के बीच की जगह में आ जाती हैं। यह रंगहीन द्रव, जिसमें प्लाज़्मा से कम प्रोटीन है, लसीका वाहिकाओं से होकर अंत में बड़ी शिराओं में लौटता है। लसीका आंत से सोखी पची वसा (दीर्घरोम की लैक्टियल से) ढोती है, अतिरिक्त द्रव को रुधिर में लौटाती है और संक्रमण से लड़ने वाले लसीकाणु ले जाती है।
परीक्षा टिप: हृदय का चित्र, दोहरा परिसंचरण, धमनी-शिरा सारणी, प्लेटलेट्स और लसीका के कार्य लगभग हर साल पूछे जाते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- फुफ्फुसीय: दायाँ निलय → फुफ्फुस धमनी → फेफड़े → फुफ्फुस शिरा → बायाँ अलिंद
- दैहिक: बायाँ निलय → महाधमनी → शरीर → महाशिरा → दायाँ अलिंद
- धमनी: हृदय से दूर; शिरा: हृदय की ओर; केशिका: आदान-प्रदान
- रुधिर = प्लाज़्मा + लाल कणिकाएँ + श्वेत कणिकाएँ + प्लेटलेट्स
- लसीका = ऊतक तरल; सोखी वसा ढोती है, द्रव को रुधिर में लौटाती है
- सामान्य रक्तदाब ≈ 120/80 mm Hg (प्रकुंचन/अनुशिथिलन)
हल किए गए उदाहरण
1. बाएँ निलय की दीवार दाएँ निलय से मोटी क्यों होती है?
दायाँ निलय रुधिर को केवल पास के फेफड़ों तक भेजता है। बायाँ निलय महाधमनी से पूरे शरीर, सिर से पैर की उँगलियों तक, रुधिर धकेलता है, इसलिए उसे ज़्यादा पेशी और बल चाहिए।
2. फुफ्फुस शिरा ऑक्सीजन भरपूर रुधिर ले जाती है, फिर भी उसे शिरा क्यों कहते हैं?
वाहिकाओं का नाम बहाव की दिशा से रखा जाता है, ऑक्सीजन से नहीं। फुफ्फुस शिरा रुधिर को हृदय (बाएँ अलिंद) तक वापस लाती है, इसलिए वह शिरा है।
3. स्तनधारियों और पक्षियों में हृदय के दाएँ-बाएँ भाग अलग होना क्यों उपयोगी है?
इससे ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर नहीं मिलते, और हर अंग को ऑक्सीजन भरा रुधिर मिलता है। इन जंतुओं को शरीर गर्म रखने के लिए बहुत ऊर्जा चाहिए, जो भरपूर ऑक्सीजन से संभव होती है।
4. शिराओं में वाल्व होते हैं पर धमनियों में ज़्यादातर क्यों नहीं?
धमनियों में धड़कन से रुधिर उच्च दाब पर हमेशा आगे बहता है। शिराओं में दाब कम है और पैरों से रुधिर को गुरुत्व के विरुद्ध ऊपर चढ़ना है; वाल्व उसे वापस गिरने से रोकते हैं।
5. एक बच्चे का कटने पर कुछ मिनट में ख़ून रुक जाता है, पर बहुत कम प्लेटलेट्स वाले व्यक्ति का बहता रहता है। समझाइए।
प्लेटलेट्स कटे स्थान पर इकट्ठा होकर थक्का बनाना शुरू करते हैं और रिसाव को बंद कर देते हैं। प्लेटलेट्स कम हों तो थक्का धीरे बनता है और ख़ून देर तक बहता है।
6. लसीका रुधिर से कैसे अलग है?
लसीका में लाल रुधिर कणिकाएँ नहीं होतीं, इसलिए वह रंगहीन है, और उसमें प्रोटीन कम होता है। यह लसीका वाहिकाओं में केवल एक दिशा, हृदय की ओर, बहती है और सोखी वसा व लसीकाणु ढोती है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि सारी धमनियाँ ऑक्सीजन भरपूर रुधिर ले जाती हैं। फुफ्फुस धमनी कम ऑक्सीजन वाला रुधिर ले जाती है।
- हृदय को अपने शरीर जैसा बनाना: चित्रों में हृदय का दायाँ भाग देखने वाले की बाईं ओर होता है।
- यह लिखना कि अलिंद की दीवार मोटी होती है। निलय, ख़ासकर बायाँ, सबसे मोटे होते हैं।
- लसीका को प्लाज़्मा जैसा ही मानना। लसीका में प्रोटीन कम, लाल कणिकाएँ नहीं, और वह अलग वाहिकाओं में बहती है।