पौधों को परिवहन तंत्र क्यों चाहिए
जड़ें मिट्टी से पानी और खनिज लेती हैं, पर भोजन पत्तियों में बनता है। पत्तियों को जड़ों का पानी चाहिए; जड़ों को पत्तियों का भोजन। छोटे पौधे में विसरण काफ़ी है, पर ऊँचे पेड़ में दूरी कई मीटर है, इसलिए पौधों में दो ख़ास नली तंत्र हैं: जाइलम और फ्लोएम, जिन्हें मिलाकर संवहन ऊतक कहते हैं।
पौधों की ऊर्जा ज़रूरत कम है (वे चलते नहीं और बहुत सी कोशिकाएँ मृत सहारा देने वाली हैं), इसलिए उनका परिवहन जंतुओं से धीमा है।
जल और खनिजों का परिवहन: जाइलम
जाइलम वाहिकाओं और वाहिनिकाओं (मृत, खोखली, जुड़ी कोशिकाओं) से बना है जो जड़, तने और पत्ती में एक अटूट जल-स्तंभ बनाती हैं।
मूल दाब
जड़ की कोशिकाएँ मिट्टी से सक्रिय रूप से आयन लेती हैं, इसलिए जड़ में आयन सांद्रता मिट्टी से ज़्यादा होती है। पानी परासरण से अंदर आता है और एक धक्का बनता है जो पानी को जाइलम में ऊपर भेजता है। यह रात में ज़्यादा ज़रूरी है, जब रंध्र बंद रहते हैं।
वाष्पोत्सर्जन खिंचाव
दिन में पत्ती की कोशिकाओं से पानी भाप बनकर रंध्रों से निकलता है। इससे चूषण बनता है जो जाइलम के जल-स्तंभ को ऊपर खींचता है, क्योंकि पानी के अणु एक-दूसरे से चिपके रहते हैं। ऊँचे पेड़ों में पानी चढ़ाने का यही मुख्य बल है।
वाष्पोत्सर्जन और उसका महत्व
वाष्पोत्सर्जन पौधे के वायवीय भागों से, ज़्यादातर रंध्रों द्वारा, जलवाष्प के रूप में पानी की हानि है।
- चूषण (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) बनाता है जो पानी और खनिज ऊपर ले जाता है।
- पत्तियों को ठंडा रखता है, जैसे पसीना हमें।
- पानी में घुले खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाने में मदद करता है।
तेज़ धूप, हवा, गर्मी और सूखी हवा में वाष्पोत्सर्जन तेज़; नम, शांत, ठंडी हवा और रात में धीमा होता है।
भोजन का परिवहन: फ्लोएम और स्थानांतरण
प्रकाश संश्लेषण से बने घुलनशील भोजन का पत्तियों से दूसरे भागों तक जाना स्थानांतरण (translocation) कहलाता है। यह फ्लोएम में होता है, जो चालनी नलिकाओं और साथी कोशिकाओं से बना है। फ्लोएम अमीनो अम्ल और दूसरे पदार्थ भी ले जाता है।
जाइलम के उलट, फ्लोएम परिवहन में ऊर्जा लगती है। सुक्रोज़ जैसी शर्करा ATP की मदद से चालनी नलिका में भरी जाती है। इससे अंदर का घोल सांद्र होता है, पानी परासरण से आता है और दाब भोजन को ज़रूरत की जगह, जैसे जड़, फल, बीज और बढ़ती कलियाँ, तक धकेलता है। वसंत में जड़ या तने में जमा शर्करा ऊपर कलियों तक भेजी जाती है; इसलिए फ्लोएम ऊपर-नीचे दोनों ओर बहता है।
जाइलम बनाम फ्लोएम और परीक्षा
| जाइलम | फ्लोएम |
|---|---|
| पानी और खनिज ले जाता है | भोजन (शर्करा, अमीनो अम्ल) ले जाता है |
| एक दिशा: जड़ → पत्ती | दोनों दिशाएँ, जहाँ भोजन चाहिए |
| ज़्यादातर मृत कोशिकाएँ: वाहिकाएँ, वाहिनिकाएँ | जीवित कोशिकाएँ: चालनी नलिकाएँ, साथी कोशिकाएँ |
| वाष्पोत्सर्जन खिंचाव और मूल दाब से; सीधे ATP नहीं | ATP से बने दाब से |
परीक्षा टिप: जाइलम-फ्लोएम सारणी, 'ऊँचे पेड़ की चोटी तक पानी कैसे पहुँचता है' और वाष्पोत्सर्जन का महत्व अक्सर 3 अंक के प्रश्न होते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जाइलम: जल + खनिज, जड़ → पत्ती (एक दिशा)
- फ्लोएम: भोजन, दोनों दिशाएँ (स्थानांतरण, ATP चाहिए)
- वाष्पोत्सर्जन: रंध्रों से जलवाष्प की हानि
- वाष्पोत्सर्जन खिंचाव: दिन में पानी उठाने का मुख्य बल
- मूल दाब: परासरण से जड़ का धक्का; रात में ज़रूरी
- संवहन ऊतक = जाइलम + फ्लोएम
हल किए गए उदाहरण
1. 30 मीटर ऊँचे पेड़ की सबसे ऊपरी पत्तियों तक पानी कैसे पहुँचता है?
पत्तियाँ रंध्रों से जलवाष्प खोती हैं। खोया पानी जाइलम से भरता है, और पानी के अणु एक-दूसरे से चिपके रहते हैं, इसलिए जाइलम का पूरा स्तंभ स्ट्रॉ में द्रव की तरह ऊपर खिंचता है। नीचे से मूल दाब थोड़ा अतिरिक्त धक्का देता है।
2. गमले के पौधे को पॉलीथीन से ढका। कुछ घंटों बाद थैली के अंदर पानी की बूँदें दिखीं। क्यों?
पौधे ने वाष्पोत्सर्जन से जलवाष्प छोड़ी। वाष्प थैली से बाहर नहीं जा सकी, इसलिए ठंडी होकर अंदर बूँदों के रूप में जम गई।
3. गर्म, तेज़ हवा वाले दिन गीली मिट्टी होने पर भी पौधा क्यों मुरझा जाता है?
गर्मी और हवा से वाष्पोत्सर्जन बहुत तेज़ हो जाता है। अगर जड़ें उतनी तेज़ी से पानी न ले सकें जितना पत्तियाँ खो रही हैं, तो कोशिकाएँ पानी खोकर ढीली पड़ती हैं और पौधा मुरझा जाता है।
4. फ्लोएम में परिवहन को 'सक्रिय' और जाइलम में 'निष्क्रिय' क्यों कहते हैं?
फ्लोएम में शर्करा भरने में ATP की ऊर्जा लगती है, जिससे दाब बनता है। जाइलम में गति वाष्पन (वाष्पोत्सर्जन खिंचाव) और जड़ के परासरण से होती है, जाइलम कोशिकाएँ ख़ुद कोई ऊर्जा ख़र्च नहीं करतीं।
5. पेड़ के तने से छाल (जिसमें फ्लोएम है) का एक छल्ला हटा दिया गया। समय के साथ जड़ों का क्या होगा?
पत्तियों का भोजन छल्ले को पार करके जड़ों तक नहीं जा पाएगा, इसलिए जड़ें भूखी रहकर धीरे-धीरे मर जाएँगी, और फिर पूरा पेड़। पानी कुछ समय तक चढ़ता रहेगा क्योंकि जाइलम अंदर गहराई में है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि फ्लोएम पानी ऊपर ले जाता है। पानी और खनिज जाइलम ले जाता है; फ्लोएम भोजन।
- यह लिखना कि भोजन केवल नीचे जाता है। फ्लोएम भोजन को ऊपर और नीचे दोनों ओर, जहाँ ज़रूरत हो, ले जाता है।
- वाष्पोत्सर्जन को केवल बर्बादी मानना। यह पानी ऊपर खींचता है, खनिज पहुँचाता है और पत्तियों को ठंडा रखता है।
- भूल जाना कि मूल दाब मुख्यतः रात में ज़रूरी है; दिन में मुख्य बल वाष्पोत्सर्जन खिंचाव है।