पौधे के भाग और उनके कार्य
फूल वाले पौधे के तीन मुख्य भाग होते हैं। जड़ें पौधे को मिट्टी में थामती हैं और पानी तथा खनिज लेती हैं। तना पत्तियों को प्रकाश की ओर ऊपर रखता है और उसमें दो तरह की नलियाँ होती हैं। जाइलम (xylem) पानी को ऊपर ले जाता है। फ्लोएम (phloem) शर्करा को हर भाग तक पहुँचाता है। पत्ती वह जगह है जहाँ भोजन बनता है।
पत्ती पतली और चपटी होती है ताकि प्रकाश सब कोशिकाओं तक पहुँचे। ऊपरी कोशिकाओं में बहुत-से हरे हरितलवक (chloroplast) होते हैं। हरा रंग क्लोरोफ़िल (पर्णहरित) से आता है, जो प्रकाश की ऊर्जा पकड़ता है। पत्ती की त्वचा पर छोटे छिद्र होते हैं जिन्हें रंध्र (stomata; एक छिद्र = stoma) कहते हैं। हर रंध्र के दो सेम के आकार के द्वार कोशिकाएँ (guard cells) उसे दरवाज़े की तरह खोलती और बंद करती हैं।
पत्ती में प्रकाश संश्लेषण
प्रकाश संश्लेषण का मतलब है प्रकाश से भोजन बनाना। पत्ती रंध्रों से हवा की कार्बन डाइऑक्साइड लेती है और जाइलम से मिट्टी का पानी। क्लोरोफ़िल प्रकाश की ऊर्जा से इन्हें जोड़कर शर्करा (ग्लूकोज़) बनाता है। ऑक्सीजन बचा हुआ पदार्थ है, जो रंध्रों से बाहर निकल जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड + पानी, प्रकाश और क्लोरोफ़िल की मदद से, देते हैं ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन।
6CO2 + 6H2O → C6H12O6 + 6O2
शर्करा या तो तुरंत काम आती है या मंड (स्टार्च) बनाकर जमा हो जाती है। फ्लोएम शर्करा को जड़, फल और बढ़ते सिरों तक ले जाता है। प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश चाहिए, इसलिए यह दिन में ही होता है। प्रकाश ज़्यादा हो तो भोजन ज़्यादा बनता है, एक सीमा तक।
पौधों में श्वसन
शर्करा जमा की हुई ऊर्जा है। उसे काम में लाने के लिए हर जीवित कोशिका श्वसन करती है: वह ऑक्सीजन से शर्करा को तोड़कर ऊर्जा निकालती है। कार्बन डाइऑक्साइड और पानी अपशिष्ट बनते हैं।
C6H12O6 + 6O2 → 6CO2 + 6H2O + ऊर्जा
पौधे दिन-रात श्वसन करते हैं, पत्तियों, तने और जड़ों में। जड़ों को भी मिट्टी की हवा की जगहों से ऑक्सीजन चाहिए, इसीलिए पानी भरी मिट्टी में पौधा मर सकता है। रात में सिर्फ़ श्वसन चलता है, इसलिए पौधा कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ता है। दिन में प्रकाश संश्लेषण तेज़ होता है, इसलिए पौधा जितनी ऑक्सीजन लेता है उससे ज़्यादा छोड़ता है।
प्रकाश संश्लेषण ऊर्जा जमा करता है; श्वसन उसे छोड़ता है। ये उलटे काम हैं, एक ही काम नहीं।
वाष्पोत्सर्जन और जल परिवहन
पानी जड़ों के पतले मूल रोमों से अंदर आता है। फिर जाइलम की लंबी खोखली नलियों से पत्ती तक चढ़ता है। पत्ती की कोशिकाओं से पानी वाष्प बनकर खुले रंध्रों से निकल जाता है। इस हानि को वाष्पोत्सर्जन (transpiration) कहते हैं।
वाष्पोत्सर्जन केवल नुकसान नहीं है। जैसे पानी पत्ती से निकलता है, वैसे ही वह अपने पीछे का पानी जाइलम में ऊपर खींच लेता है, जैसे स्ट्रॉ से चूसते हैं। यह खिंचाव खनिजों को भी ऊपर लाता है और गर्मी में पत्ती को ठंडा रखता है।
द्वार कोशिकाएँ द्वार को नियंत्रित करती हैं। पानी भरपूर हो तो वे फूलकर रंध्र खोल देती हैं। हवा बहुत सूखी हो या पानी कम हो तो वे ढीली पड़ जाती हैं और रंध्र बंद हो जाता है। इससे पानी बचता है, पर कार्बन डाइऑक्साइड का आना भी रुक जाता है। वाष्पोत्सर्जन गर्म, सूखी, हवादार और तेज़ धूप वाली स्थिति में तेज़ होता है और ठंडी, नम, शांत हवा में धीमा।
एक द्वार, तीन काम: सब कुछ जोड़कर
रंध्र वह जगह है जहाँ तीनों काम मिलते हैं। प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड अंदर और ऑक्सीजन बाहर। श्वसन के लिए ऑक्सीजन अंदर और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर। वाष्पोत्सर्जन के लिए जलवाष्प बाहर। रंध्र बंद हो तो तीनों धीमे पड़ जाते हैं। पौधा भोजन पाने और पानी बचाने में से चुनाव करता है।
| क्रिया | कहाँ | क्या चाहिए | क्या मिलता है |
|---|---|---|---|
| प्रकाश संश्लेषण | हरी कोशिकाएँ (पत्ती) | प्रकाश, CO2, पानी | शर्करा, O2 |
| श्वसन | सब जीवित कोशिकाएँ | शर्करा, O2 | ऊर्जा, CO2, पानी |
| वाष्पोत्सर्जन | पत्ती के रंध्र | पानी, खुले रंध्र | वाष्प, ऊपर का खिंचाव |
करके देखो
3D में: स्लाइडर चलाने से पहले अंदाज़ा लगाओ कि हवा बहुत सूखी होने पर बना भोजन कैसे बदलेगा। फिर "सूखी हवा" को ऊपर तक ले जाकर जाँचो।
घर पर (थैली का प्रयोग): सुबह गमले के पौधे की पत्तेदार टहनी पर पारदर्शी पॉलिथीन की थैली बाँधो और दो घंटे धूप में रखो। थैली के अंदर पानी की छोटी बूँदें दिखेंगी। यह वही जलवाष्प है जो रंध्रों से निकला। बिना पत्तों की डंडी पर थैली बाँधकर देखो: बूँदें नहीं बनेंगी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- 6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ (प्रकाश संश्लेषण, प्रकाश और क्लोरोफ़िल चाहिए)
- C₆H₁₂O₆ + 6O₂ → 6CO₂ + 6H₂O + ऊर्जा (श्वसन)
- पानी की हानि की दर = खोया पानी ÷ समय
- रंध्र = छोटा द्वार; द्वार कोशिकाएँ = उसे खोलने-बंद करने वाली दो कोशिकाएँ
- जाइलम = पानी ऊपर; फ्लोएम = शर्करा सब भागों तक
- वाष्पोत्सर्जन = पत्ती के रंध्रों से जलवाष्प का निकलना
हल किए गए उदाहरण
1. पत्ती प्रकाश संश्लेषण से ग्लूकोज़ का 1 अणु बनाती है। कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन के कितने अणु लगते हैं?
6CO₂ + 6H₂O → C₆H₁₂O₆ + 6O₂ से: हर 1 ग्लूकोज़ के लिए CO₂ के 6 अणु अंदर जाते हैं और O₂ के 6 अणु बाहर आते हैं।
2. गमले का पौधा 6 घंटे में 18 mL पानी खोता है। प्रति घंटे वाष्पोत्सर्जन की दर क्या है?
दर = खोया पानी ÷ समय = 18 ÷ 6 = 3 mL प्रति घंटा।
3. गर्म सूखी दोपहर में पौधा मुरझा जाता है और रंध्र बंद हो जाते हैं। भोजन बनने पर क्या असर होगा और क्यों?
बंद रंध्र कार्बन डाइऑक्साइड को अंदर आने नहीं देते, इसलिए कच्चा माल कम पड़ता है और प्रकाश होने पर भी प्रकाश संश्लेषण धीमा हो जाता है। पौधे ने पानी बचाया पर भोजन कम बनाया।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि पौधे केवल रात में श्वसन करते हैं। वे हर समय श्वसन करते हैं; रात में बस वही अकेला चलता दिखता है।
- जाइलम और फ्लोएम को उलझाना। याद रखो: जाइलम पानी को ऊपर उठाता है, फ्लोएम शर्करा को सब जगह भेजता है।
- श्वसन को साँस अंदर-बाहर लेना समझना। श्वसन कोशिकाओं के भीतर ऊर्जा निकालने का काम है; गैसों का आना-जाना तो केवल सप्लाई है।
- वाष्पोत्सर्जन को केवल बर्बादी मानना। यह पानी और खनिजों को ऊपर खींचता है और पत्ती को ठंडा भी रखता है।