पौधे की संरचना और कार्य
फूल वाले पौधे में मूल तंत्र (जड़) और प्ररोह तंत्र (तना, पत्ती, फूल) होते हैं।
- जड़ पौधे को मिट्टी में पकड़ती है और पानी व खनिज लेती है। छोटे मूल रोम पीने के लिए ज़्यादा सतह देते हैं।
- तना पत्तियों को रोशनी तक उठाता है। इसके अंदर जाइलम पानी ऊपर ले जाता है और फ्लोएम भोजन सब जगह पहुँचाता है।
- पत्ती प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाती है: पानी + कार्बन डाइऑक्साइड + प्रकाश से शर्करा + ऑक्सीजन। छोटे छिद्र (रंध्र) हवा आने-जाने देते हैं।
- फूल, फल और बीज अगली पीढ़ी बनाने में मदद करते हैं।
एक कोशिका से पूरा पौधा क्यों बन सकता है
हर जीवित पादप कोशिका के केंद्रक में पौधे के सभी जीन की पूरी प्रति होती है। इस शक्ति को पूर्णशक्तता (टोटीपोटेंसी) कहते हैं। सही हालत में कोशिका बँटकर जड़, प्ररोह और पत्ती बना सकती है। पौधे विभज्योतक (मेरिस्टेम) से भी बढ़ते हैं, जो जड़ और प्ररोह के सिरों के वे भाग हैं जहाँ कोशिकाएँ लगातार बँटती रहती हैं। विभज्योतक की कोशिकाएँ अक्सर वायरस-मुक्त होती हैं, इसलिए साफ़ कल्चर के लिए सबसे अच्छी हैं।
यही ऊतक संवर्धन का आधार है, जो पादप ऊतक संवर्धन पाठ में पढ़ेंगे।
एसेप्टिक तकनीक की ज़रूरत क्यों है
एसेप्टिक यानी कीटाणु-रहित। कीटाणु हैं: जीवाणु, कवक (फफूँद, यीस्ट) और वायरस। शर्करा, खनिज और गर्मी वाला जेली-भोजन उनके लिए भी बढ़िया है। वे पौधे के टुकड़े से बहुत तेज़ बढ़ते हैं और पूरा जार घेर लेते हैं। इसे संदूषण (कंटैमिनेशन) कहते हैं। संदूषित जार धुंधला, चिपचिपा, या सफ़ेद-हरा-काला रोएँदार दिखता है, और उसे सुरक्षित तरीके से फेंक दिया जाता है।
कीटाणुओं के स्रोत: हाथ, बाल, साँस, औज़ार, मेज़, हवा और स्वयं पौधे का टुकड़ा।
एसेप्टिक काम के बुनियादी चरण
- व्यक्ति साफ़ करें: साबुन से हाथ धोएँ, बाल बाँधें, साफ़ कोट पहनें और हाथ 70% अल्कोहल से पोंछें।
- जगह साफ़ करें: मेज़ 70% अल्कोहल से पोंछें। सबसे अच्छा है लैमिनार एयर फ्लो कैबिनेट, जो छनी हुई साफ़ हवा मेज़ पर बहाता है।
- औज़ार जीवाणुरहित करें: चिमटी और स्केलपेल को अल्कोहल में डुबोकर लौ से गुज़ारें, फिर ठंडा होने दें। प्रेशर कुकर जैसे ऑटोक्लेव में 121 °C पर 15–20 मिनट गर्म करने से जार, जेली-भोजन और पानी जीवाणुरहित होते हैं।
- पौधे का टुकड़ा साफ़ करें: उसे धोएँ, हल्के कीटाणुनाशक (जैसे पतला ब्लीच) में थोड़ी देर डुबोएँ, फिर जीवाणुरहित पानी से धोएँ।
- तेज़ और बंद: ढक्कन उतनी ही देर खोलें जितनी ज़रूरत हो, तिरछा रखें और जार के ऊपर बात न करें।
- लेबल और निगरानी: तारीख़ लिखें, कुछ दिन पर जाँचें और ख़राब जार हटा दें।
सुरक्षा: अल्कोहल जलता है, इसलिए बोतल को लौ से दूर रखें। हमेशा किसी बड़े या शिक्षक के साथ काम करें।
करके देखिए: घर पर कीटाणु-वृद्धि परीक्षण
आलू के दो छोटे टुकड़े 10 मिनट उबालकर साफ़ करें। हर एक को साफ़, ढक्कन वाले जार में रखें। एक टुकड़े को गरम पानी से अभी धोए साफ़ चम्मच से छुएँ। दूसरे को बिना धुली उँगली से छुएँ। दोनों बंद करके गर्म कमरे में रखें। 4–7 दिन बाद तुलना करें। उँगली वाले जार में फफूँद पहले दिखेगी। पौधा-प्रयोगशाला इसी कारण इतनी सावधानी रखती है। (फफूँद वाला जार न खोलें, न सूँघें; बंद करके फेंक दें।)
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: पूर्णशक्तता = जीवित कोशिका से पूरा पौधा बन सकता है
- मुख्य शब्द: प्रकाश-संश्लेषण: पानी + कार्बन डाइऑक्साइड + प्रकाश → शर्करा + ऑक्सीजन
- मुख्य शब्द: जाइलम पानी ऊपर ले जाता है; फ्लोएम भोजन
- मुख्य शब्द: एसेप्टिक = कीटाणु-रहित; संदूषण = कल्चर में कीटाणु घुसना
- ऑटोक्लेव: 121 °C, लगभग 15 पाउंड दाब, 15–20 मिनट
- अल्कोहल की सफ़ाई-शक्ति: 70% (आयतन)
हल किए गए उदाहरण
1. एक छात्र को जार में जेली-भोजन पर सफ़ेद रोएँदार धागे दिखे। क्या हुआ और क्या करना चाहिए?
कवक (फफूँद) घुस गई। यह संदूषण है। जार बंद करके सुरक्षित फेंक दें और देखें कि सफ़ाई का कौन सा चरण छूटा (औज़ार, हाथ या मेज़)।
2. 300 mL 70% अल्कोहल चाहिए। शुद्ध अल्कोहल कितना लगेगा?
300 mL का 70% = 0.70 × 300 = 210 mL अल्कोहल। फिर पानी मिलाकर कुल 300 mL कर लें।
3. जड़ के सिरे का टुकड़ा हफ़्तों बढ़ता है, पर सूखी छाल का टुकड़ा नहीं। क्यों?
जड़ के सिरे में जीवित विभज्योतक कोशिकाएँ हैं जो बँटती रहती हैं। सूखी छाल की कोशिकाएँ मृत हैं और बँट नहीं सकतीं। पूर्णशक्तता केवल जीवित कोशिकाओं में होती है।
4. जेली-भोजन प्रेशर कुकर में और चिमटी लौ में जीवाणुरहित क्यों की जाती है?
भोजन और पानी लौ में बिगड़ते या उड़ जाते हैं, इसलिए 121 °C की भाप वाली गर्मी लगाई जाती है। चिमटी धातु की है और जल्दी लौ दिखाई जा सकती है। दोनों में गर्मी से कीटाणु मरते हैं।
आम गलतियाँ
- "एसेप्टिक" का मतलब केवल "साफ़ दिखना" समझना। कीटाणु दिखते नहीं, इसलिए लौ, अल्कोहल और गर्मी लगती है।
- औज़ार गर्म रहते हुए इस्तेमाल करना। कुछ सेकंड ठंडा होने दें, नहीं तो पौधे का टुकड़ा जल जाएगा।
- यह मानना कि केवल जड़ें भोजन बनाती हैं। भोजन पत्तियाँ बनाती हैं; जड़ें पानी लेती हैं।
- खुले जार के ऊपर बोलना, खाँसना या हाथ हिलाना। इससे कल्चर में कीटाणु गिरते हैं।