जंतुओं को नियंत्रण और समन्वय क्यों चाहिए?
पलक झपकने से लेकर दौड़ने तक, हर काम में शरीर के कई अंगों को सही समय पर मिलकर काम करना पड़ता है। इसी तालमेल को समन्वय कहते हैं। जंतुओं में यह दो तंत्र करते हैं: तेज़ तंत्रिका तंत्र (नसों में विद्युत संदेश) और धीमा अंतःस्रावी तंत्र (रक्त में हॉर्मोन)।
विशेष तंत्रिका सिरे यानी ग्राही (receptor) आसपास के बदलाव (उद्दीपन) पकड़ते हैं: आँख में प्रकाश, कान में ध्वनि, नाक में गंध (घ्राणग्राही), जीभ पर स्वाद (स्वादग्राही), त्वचा पर स्पर्श और गर्मी।
न्यूरॉन की संरचना और संदेश कैसे चलता है
न्यूरॉन तंत्रिका तंत्र की काम करने वाली इकाई है। इसके तीन भाग हैं:
- द्रुमाकृतिक (डेंड्राइट): छोटी शाखाएँ जो संदेश इकट्ठा करती हैं।
- कोशिका काय: इसमें केंद्रक होता है, यह संदेश को सँभालती है।
- तंत्रिकाक्ष (एक्सॉन): लंबा रेशा जो संदेश को विद्युत आवेग बनाकर तंत्रिका सिरे तक ले जाता है।
संदेश हमेशा एक ही दिशा में चलता है: डेंड्राइट → कोशिका काय → एक्सॉन → सिरा।
सिनैप्स (अंतर्ग्रथन)
दो न्यूरॉन आपस में छूते नहीं। उनके बीच की बारीक खाली जगह सिनैप्स है। सिरे पर विद्युत आवेग कुछ रसायन छुड़वाता है, जो अंतर पार करके अगले न्यूरॉन में नया आवेग शुरू करते हैं। तंत्रिका और पेशी या ग्रंथि के मिलने की जगह पर भी ऐसा ही होता है।
प्रतिवर्ती क्रिया और प्रतिवर्ती चाप
प्रतिवर्ती क्रिया किसी उद्दीपन पर अचानक, अपने-आप होने वाली प्रतिक्रिया है, जिसमें सोचना नहीं पड़ता। जैसे: आग से हाथ हटाना, तेज़ रोशनी में पलक झपकना, छींकना, खाँसना, घुटने का झटका।
संदेश जिस रास्ते से जाता है वह प्रतिवर्ती चाप है: ग्राही (त्वचा) → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु में प्रसारण न्यूरॉन → प्रेरक न्यूरॉन → प्रभावक (पेशी)। फ़ैसला मेरुरज्जु करता है, इसलिए जवाब बहुत तेज़ होता है। संदेश आगे मस्तिष्क तक भी जाता है, जिसे बाद में पता चलता है।
प्रतिवर्ती चाप क्यों? मस्तिष्क में सोचने में समय लगता है; ख़तरे में इतनी देर नुकसान कर सकती है। ये चाप सरल तंत्रिका तंत्र वाले जंतुओं में बने और आज भी काम के हैं।
मानव तंत्रिका तंत्र: केंद्रीय और परिधीय
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) = मस्तिष्क + मेरुरज्जु। परिधीय तंत्रिका तंत्र वे सारी नसें हैं जो CNS को शरीर से जोड़ती हैं: मस्तिष्क से निकलने वाली कपाल तंत्रिकाएँ और मेरुरज्जु से निकलने वाली मेरु तंत्रिकाएँ।
जो काम हम सोचकर करते हैं (लिखना, गेंद मारना) वे ऐच्छिक हैं और अग्रमस्तिष्क चलाता है। धड़कन, साँस, लार बनना जैसे काम अनैच्छिक हैं, इन्हें मध्य और पश्चमस्तिष्क चलाते हैं।
मानव मस्तिष्क: अग्र, मध्य और पश्च मस्तिष्क
- अग्रमस्तिष्क (प्रमस्तिष्क): सबसे बड़ा और सोचने वाला भाग। इसमें संवेदनाएँ (देखना, सुनना, सूँघना, छूना) लेने वाले क्षेत्र, जानकारी जोड़ने और याद रखने वाले क्षेत्र, और ऐच्छिक पेशियों को आदेश भेजने वाले क्षेत्र हैं। भूख का एहसास भी यहीं के एक केंद्र से होता है।
- मध्यमस्तिष्क: अग्र और पश्च भाग को जोड़ता है, आँख और सिर की कुछ अनैच्छिक क्रियाएँ चलाता है।
- पश्चमस्तिष्क: अनुमस्तिष्क शरीर की मुद्रा और संतुलन रखता है, गतियों को सटीक बनाता है (सीधी लाइन में चलना, पेंसिल उठाना); मेडुला धड़कन, रक्तदाब, साँस, लार और उल्टी नियंत्रित करता है; पोंस साँस के नियंत्रण में मदद करता है।
मस्तिष्क और मेरुरज्जु की सुरक्षा कैसे होती है?
तंत्रिका ऊतक बहुत मुलायम होता है। मस्तिष्क हड्डी के डिब्बे खोपड़ी (कपाल) में रहता है और तरल से भरे गुब्बारे जैसी परत से घिरा है, जो झटके सोख लेती है। मेरुरज्जु को कशेरुक दंड (रीढ़ की हड्डी) बचाता है, जो छल्लों जैसी हड्डियों की कड़ी है।
तंत्रिका ऊतक से गति कैसे होती है?
जब प्रेरक तंत्रिका का आवेग पेशी तक पहुँचता है, तो पेशी कोशिकाओं में मौजूद विशेष प्रोटीन अपनी बनावट और व्यवस्था बदल लेते हैं, जिससे कोशिका छोटी हो जाती है। बहुत-सी कोशिकाएँ एक साथ सिकुड़कर हड्डी को खींचती हैं और गति होती है। जिन पेशियों को हम मर्ज़ी से चलाते हैं वे ऐच्छिक पेशियाँ हैं; हृदय और आँत की पेशियाँ अनैच्छिक हैं।
बोर्ड परीक्षा टिप: प्रतिवर्ती चाप, न्यूरॉन का चित्र और मस्तिष्क के भागों के कार्य लगभग हर साल पूछे जाते हैं (2 से 5 अंक)।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- न्यूरॉन: डेंड्राइट → कोशिका काय → एक्सॉन → सिरा (एक ही दिशा)
- सिनैप्स: विद्युत आवेग → रसायन अंतर पार → नया विद्युत आवेग
- प्रतिवर्ती चाप: ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → प्रसारण न्यूरॉन (मेरुरज्जु) → प्रेरक न्यूरॉन → प्रभावक
- CNS = मस्तिष्क + मेरुरज्जु; PNS = कपाल तंत्रिकाएँ + मेरु तंत्रिकाएँ
- अग्रमस्तिष्क: सोचना, संवेदनाएँ, ऐच्छिक क्रियाएँ, भूख
- मध्यमस्तिष्क: आँख-सिर की अनैच्छिक क्रियाएँ
- पश्चमस्तिष्क: अनुमस्तिष्क (संतुलन), मेडुला (धड़कन, साँस, उल्टी), पोंस (साँस)
- सुरक्षा: खोपड़ी + तरल गद्दी (मस्तिष्क); कशेरुक दंड (मेरुरज्जु)
हल किए गए उदाहरण
1. न्यूरॉन का कौन-सा भाग संदेश सबसे पहले पकड़ता है और किस भाग से वह आवेग बनकर जाता है?
संदेश डेंड्राइट पकड़ते हैं। फिर वह एक्सॉन से विद्युत आवेग के रूप में आगे जाता है।
2. पैर में पिन चुभी और आपने तुरंत पैर उठा लिया। संदेश का रास्ता बताइए।
पैर की त्वचा के दर्द ग्राही → संवेदी न्यूरॉन → मेरुरज्जु में प्रसारण न्यूरॉन → प्रेरक न्यूरॉन → टाँग की पेशियाँ सिकुड़कर पैर उठाती हैं। यह प्रतिवर्ती चाप है; मस्तिष्क को थोड़ी देर बाद पता चलता है।
3. सिर की चोट के बाद कोई व्यक्ति लड़खड़ाकर चलता है और छोटी चीज़ें ठीक से नहीं उठा पाता। कौन-सा भाग प्रभावित है?
अनुमस्तिष्क (पश्चमस्तिष्क का भाग)। यह संतुलन रखता है और गतियों को सटीक बनाता है।
4. सिनैप्स पर संदेश एक ही दिशा में क्यों जाता है?
रसायन सिर्फ़ एक्सॉन के सिरे से निकलते हैं और डेंड्राइट वाली तरफ़ केवल ग्रहण होते हैं। इसलिए संदेश एक्सॉन से अगले न्यूरॉन के डेंड्राइट की ओर ही जाता है।
5. दोपहर में क्या खाएँ, यह सोचना क्या प्रतिवर्ती क्रिया है?
नहीं। इसमें याददाश्त, चुनाव और फ़ैसला चाहिए जो अग्रमस्तिष्क करता है और समय लगता है। प्रतिवर्ती क्रिया अपने-आप, तेज़ और मेरुरज्जु से होती है।
आम गलतियाँ
- यह लिखना कि प्रतिवर्ती क्रिया मस्तिष्क चलाता है। फ़ैसला मेरुरज्जु करता है; मस्तिष्क को बाद में ख़बर मिलती है।
- न्यूरॉन में रास्ता उल्टा लिखना। सही है: डेंड्राइट → कोशिका काय → एक्सॉन।
- यह मानना कि न्यूरॉन एक-दूसरे को छूते हैं। बीच में हमेशा सिनैप्स होता है, जिसे रसायन पार करते हैं।
- प्रमस्तिष्क और अनुमस्तिष्क में गड़बड़। प्रमस्तिष्क (अग्र) सोचता है; अनुमस्तिष्क (पश्च) संतुलन रखता है।