National Year 11 Biology
अध्याय: 3
1. 4.5 Homeostasis and response
4.5.1 Homeostasis · 4.5.2 The human nervous system · 4.5.3 Hormonal coordination in humans · 4.5.4 Plant hormones (Biology only)
- समस्थापन (Homeostasis) – समस्थापन वह तरीका है जिससे शरीर अपना आंतरिक वातावरण (रक्त और ऊतक द्रव) स्थिर रखता है, चाहे बाहर का मौसम बदले। यह शरीर का ताप (लगभग 37 °C), रक्त ग्लूकोज़ (लगभग 4–6 mmol/L), पानी-लवण और रक्त pH (लगभग 7.4) नियंत्रित करता है। ज़्यादातर यह ऋणात्मक पुनर्भरण से होता है: ग्राही बदलाव पहचानता है, नियंत्रण केंद्र तय करता है, और प्रभावक स्तर को निर्धारित बिंदु पर लौटाता है।
- तंत्रिका तंत्र, प्रतिवर्ती क्रिया और मानव मस्तिष्क – तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन) संदेश को विद्युत आवेग के रूप में ले जाती हैं और सिनैप्स नाम के छोटे अंतर को रसायनों से पार करती हैं। झटपट बचाव वाली क्रियाएँ (प्रतिवर्ती क्रिया) मेरुरज्जु सँभालता है; सोचना और नियंत्रण मस्तिष्क करता है, जिसे खोपड़ी और तरल की गद्दी बचाती है।
- जंतुओं में हॉर्मोन: अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और पुनर्भरण – अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हॉर्मोन नाम के रासायनिक संदेशवाहक सीधे रक्त में छोड़ती हैं। रक्त उन्हें पूरे शरीर में ले जाता है, पर वे केवल लक्ष्य कोशिकाओं पर असर करते हैं। हॉर्मोन वृद्धि, उपापचय, आपातकालीन प्रतिक्रिया, रक्त शर्करा और यौवनारंभ नियंत्रित करते हैं, और उनकी मात्रा पुनर्भरण (फ़ीडबैक) से ठीक रहती है।
- पौधों में समन्वय: अनुवर्तन गतियाँ और पादप हॉर्मोन – पौधों में न तंत्रिका है न पेशी, फिर भी वे प्रतिक्रिया करते हैं। कुछ प्रतिक्रियाएँ तुरंत होती हैं और वृद्धि से नहीं जुड़ीं (छुईमुई की पत्तियाँ पानी हटने से मुड़ती हैं)। कुछ धीमी, दिशा वाली वृद्धि गतियाँ हैं जिन्हें अनुवर्तन कहते हैं, और इन्हें ऑक्सिन, जिबरेलिन, साइटोकाइनिन और एब्सिसिक अम्ल जैसे हॉर्मोन नियंत्रित करते हैं।
2. 4.6 Inheritance, variation and evolution
4.6.1 Reproduction · 4.6.2 Variation and evolution · 4.6.3 The development of understanding of genetics and evolution · 4.6.4 Classification of living organisms
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
- जीव जनन कैसे करते हैं? DNA प्रतिकृति और अलैंगिक जनन – जनन में DNA की प्रतिकृति (कॉपी) बनती है। कॉपी कभी पूरी तरह एक जैसी नहीं होती; यही छोटे बदलाव (विभिन्नताएँ) बदलते माहौल में प्रजाति को बचाते हैं। अलैंगिक जनन में एक ही जनक विखंडन, खंडन, पुनरुद्भवन, मुकुलन, कायिक प्रवर्धन या बीजाणु से नए जीव बनाता है।
- पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन – लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक मिलते हैं, जिससे दो जनकों का DNA मिलता है और विभिन्नता बढ़ती है। फूल में परागकोश का पराग वर्तिकाग्र पर पहुँचता है (परागण), परागनलिका बीजांड तक बढ़ती है और नर युग्मक अंडकोशिका से मिलता है (निषेचन)। युग्मनज भ्रूण बनता है, बीजांड बीज और अंडाशय फल।
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
3. 4.7 Ecology
4.7.1 Adaptations, interdependence and competition · 4.7.2 Organisation of an ecosystem · 4.7.3 Biodiversity and the effect of human interaction on ecosystems · 4.7.4 Trophic levels in an ecosystem (Biology only) · 4.7.5 Food production (Biology only)
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
- जैव विविधता और पारितंत्र पर मानव गतिविधियों का प्रभाव – जैव विविधता यानी धरती पर या एक पारितंत्र में अलग-अलग प्रजातियों की विविधता। ज़्यादा जैव विविधता पारितंत्र को स्थिर बनाती है, क्योंकि जीव भोजन, आश्रय और स्थिर पर्यावरण के लिए एक-दूसरे पर निर्भर हैं, और हमें भोजन, दवाएँ, साफ़ हवा-पानी देती है। बढ़ती आबादी ज़्यादा संसाधन लेती है और ज़्यादा कचरा बनाती है। पानी, ज़मीन और हवा का प्रदूषण, निर्माण-खेती-खदान-कचरा स्थल के लिए ज़मीन, पीट खुदाई, वनों की कटाई और वैश्विक तापन जैव विविधता घटाते हैं। प्रजनन कार्यक्रम, आवास की बहाली, खेतों की बाड़ और किनारे, कम कटाई व कम CO₂, और रीसाइक्लिंग से इसे बचा सकते हैं।
- खाद्य उत्पादन – खाद्य उत्पादन यानी इंसान पर्याप्त भोजन कैसे उगाता, पालता और पकड़ता है। खाद्य सुरक्षा का मतलब है हर व्यक्ति को हमेशा पर्याप्त, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले। बढ़ती आबादी, बदलता खान-पान, नए कीट, जलवायु परिवर्तन, युद्ध और लागत इसके लिए ख़तरा हैं। हम खेती के तरीक़ों (उर्वरक, कीट नियंत्रण, सिंचाई, गहन पशुपालन), जाल के छेद और कोटा के नियमों और जैव प्रौद्योगिकी (माइकोप्रोटीन, GM फ़सलें) से उत्पादन बढ़ाते हैं।