हॉर्मोन और अंतःस्रावी ग्रंथियाँ क्या हैं?
हॉर्मोन रासायनिक संदेशवाहक हैं जिन्हें अंतःस्रावी ग्रंथियाँ (नलिकाविहीन ग्रंथियाँ) बनाती हैं। ये सीधे रक्त में जाते हैं, पूरे शरीर में पहुँचते हैं, पर केवल उन कोशिकाओं या अंगों (लक्ष्य कोशिकाएँ) पर असर करते हैं जो उन्हें पहचानते हैं।
तंत्रिकाओं के साथ हॉर्मोन क्यों चाहिए?
तंत्रिका आवेग तेज़ है पर सिर्फ़ नसों से जुड़ी कोशिकाओं तक पहुँचता है, और न्यूरॉन को दोबारा तैयार होने में समय लगता है। शरीर की बहुत-सी कोशिकाएँ और वृद्धि जैसे धीमे, लंबे बदलाव हॉर्मोन से बेहतर नियंत्रित होते हैं, जो रक्त से हर कोशिका तक पहुँचते हैं।
मुख्य अंतःस्रावी ग्रंथियाँ और उनके हॉर्मोन
- हाइपोथैलेमस (मस्तिष्क): मोचक हॉर्मोन बनाता है जो पीयूष ग्रंथि को निर्देश देते हैं।
- पीयूष ग्रंथि: वृद्धि हॉर्मोन शरीर की वृद्धि और विकास नियंत्रित करता है। बचपन में कमी से बौनापन, अधिकता से भीमकायता। यह दूसरी ग्रंथियों को भी नियंत्रित करती है, इसलिए इसे मास्टर ग्रंथि कहते हैं।
- अवटु (थायरॉइड): थायरॉक्सिन कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का उपापचय नियंत्रित करता है। इसके लिए आयोडीन ज़रूरी; कमी से घेंघा (गॉयटर)।
- अधिवृक्क: एड्रीनलीन शरीर को आपात स्थिति के लिए तैयार करता है।
- अग्न्याशय: इंसुलिन रक्त शर्करा घटाता है। कमी से मधुमेह।
- वृषण (पुरुष): टेस्टोस्टेरॉन यौवनारंभ के बदलाव लाता है।
- अंडाशय (स्त्री): एस्ट्रोजन यौवनारंभ के बदलाव लाता है।
थाइमस और पीनियल भी अंतःस्रावी ग्रंथियाँ हैं, जिन्हें आप आगे पढ़ेंगे।
एड्रीनलीन: आपातकाल का हॉर्मोन
डर या उत्तेजना में एड्रीनलीन रक्त में आता है। दिल तेज़ धड़कता है ताकि पेशियों को ज़्यादा ऑक्सीजन मिले, पाचन तंत्र और त्वचा की ओर रक्त कम हो जाता है (छोटी धमनियों की पेशियाँ सिकुड़ती हैं), साँस तेज़ होती है, और शरीर लड़ने या भागने को तैयार हो जाता है। यह सब कुछ सेकंड में होता है।
पुनर्भरण क्रियाविधि: हॉर्मोन की मात्रा का नियंत्रण
हॉर्मोन का समय और मात्रा बिल्कुल सही होनी चाहिए। इसके लिए शरीर पुनर्भरण (फ़ीडबैक) का उपयोग करता है: हॉर्मोन के असर का नतीजा ही तय करता है कि और कितना निकले। उदाहरण: खाने के बाद रक्त शर्करा बढ़ने पर अग्न्याशय की कोशिकाएँ इसे पहचानकर ज़्यादा इंसुलिन छोड़ती हैं। इंसुलिन से कोशिकाएँ शर्करा ले लेती हैं और स्तर गिरता है। स्तर गिरते ही इंसुलिन कम निकलता है। इस तरह शर्करा स्थिर रहती है।
बोर्ड परीक्षा टिप: ग्रंथि-हॉर्मोन-कार्य की तालिका, आयोडीन युक्त नमक और घेंघा, बौनापन/भीमकायता, मधुमेह और पुनर्भरण क्रियाविधि पर 1 से 3 अंक के प्रश्न आम हैं।
तंत्रिका नियंत्रण बनाम हॉर्मोन नियंत्रण
| तंत्रिका | हॉर्मोन |
|---|---|
| नसों में विद्युत आवेग | रक्त में बहते रसायन |
| बहुत तेज़, थोड़ी देर का असर | धीमा, लंबे समय का असर |
| सिर्फ़ नस से जुड़ी कोशिकाएँ | सब कोशिकाओं तक; असर लक्ष्य कोशिकाओं पर |
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हाइपोथैलेमस → मोचक हॉर्मोन → पीयूष ग्रंथि
- पीयूष → वृद्धि हॉर्मोन (बौनापन / भीमकायता)
- थायरॉइड → थायरॉक्सिन (आयोडीन ज़रूरी; कमी → घेंघा)
- अधिवृक्क → एड्रीनलीन (लड़ो या भागो)
- अग्न्याशय → इंसुलिन (शर्करा घटाए; कमी → मधुमेह)
- वृषण → टेस्टोस्टेरॉन; अंडाशय → एस्ट्रोजन (यौवनारंभ)
- पुनर्भरण: शर्करा ज़्यादा → इंसुलिन ज़्यादा → शर्करा घटी → इंसुलिन कम
हल किए गए उदाहरण
1. भोजन में आयोडीन युक्त नमक क्यों सलाह दिया जाता है?
थायरॉइड को थायरॉक्सिन बनाने के लिए आयोडीन चाहिए। कमी होने पर थायरॉक्सिन ठीक से नहीं बनता और थायरॉइड फूल जाता है (घेंघा)। आयोडीन युक्त नमक यह आयोडीन देता है।
2. एक बच्चा अपनी उम्र से बहुत ज़्यादा लंबा हो रहा है। कौन-सी ग्रंथि और हॉर्मोन ज़्यादा सक्रिय हो सकते हैं?
पीयूष ग्रंथि, जो ज़्यादा वृद्धि हॉर्मोन छोड़ रही है (भीमकायता)।
3. अचानक कुत्ता पीछे पड़ जाए तो दिल क्यों तेज़ धड़कता है?
डर से अधिवृक्क ग्रंथियाँ एड्रीनलीन रक्त में छोड़ती हैं। यह दिल तक पहुँचकर धड़कन तेज़ करता है, जिससे पेशियों को ज़्यादा ऑक्सीजन मिलती है और आप भाग पाते हैं।
4. एक उदाहरण से समझाइए कि पुनर्भरण हॉर्मोन को कैसे नियंत्रित करता है।
मीठा खाने पर रक्त शर्करा बढ़ती है। अग्न्याशय इसे भाँपकर इंसुलिन छोड़ता है। इंसुलिन शर्करा घटाता है। शर्करा घटते ही अग्न्याशय कम इंसुलिन छोड़ता है। यानी हॉर्मोन का असर ही उसकी मात्रा तय करता है।
5. हॉर्मोन रक्त से हर अंग तक जाते हैं, फिर हर अंग हर हॉर्मोन पर प्रतिक्रिया क्यों नहीं करता?
किसी हॉर्मोन के लिए सही ग्राही सिर्फ़ लक्ष्य कोशिकाओं में होते हैं, इसलिए वही प्रतिक्रिया करती हैं; बाकी उसे अनदेखा करती हैं।
आम गलतियाँ
- अंतःस्रावी ग्रंथियों को नलिका वाली ग्रंथियाँ कहना। ये नलिकाविहीन हैं; हॉर्मोन सीधे रक्त में जाते हैं।
- यह कहना कि इंसुलिन रक्त शर्करा बढ़ाता है। यह घटाता है।
- घेंघा को विटामिन की कमी से जोड़ना। यह आयोडीन की कमी से होता है।
- यह लिखना कि पीयूष ग्रंथि पर किसी का नियंत्रण नहीं। हाइपोथैलेमस मोचक हॉर्मोन से इसे नियंत्रित करता है।