कोशिकाएँ क्यों बँटती हैं? कोशिका सिद्धांत
कोशिका अपनी बाहरी परत, कोशिका झिल्ली (cell membrane), से भोजन और ऑक्सीजन लेती है। कोशिका बढ़ती है तो अंदर का हिस्सा झिल्ली से ज़्यादा तेज़ी से बढ़ता है। बहुत बड़ी कोशिका को पूरा भोजन नहीं मिल पाता, इसलिए वह दो में बँट जाती है।
कोशिकाएँ तीन कारणों से बँटती हैं:
- वृद्धि: बच्चा बड़ा होता है क्योंकि कोशिकाएँ गिनती में बढ़ती हैं, आकार में नहीं।
- मरम्मत: टूटी या पुरानी कोशिकाओं की जगह नई (त्वचा, रक्त)।
- जनन: नया जीव बनाना।
कोशिका सिद्धांत (cell theory) की तीन बातें: (1) सभी जीव कोशिकाओं से बने हैं; (2) कोशिका जीवन की मूल इकाई है; (3) हर नई कोशिका पहले से मौजूद कोशिका से बनती है। यह विचार 1800 के दशक में श्लाइडेन, श्वान और विरशो ने दिया।
गुणसूत्र: निर्देशों की किताब
गुणसूत्र (chromosome) DNA का एक लंबा धागा है जो प्रोटीन पर लिपटा रहता है। DNA में शरीर के सारे निर्देश होते हैं। गुणसूत्र केंद्रक में रहते हैं।
शरीर की कोशिकाओं में गुणसूत्र जोड़ों में होते हैं: जोड़े का एक माँ से और एक पिता से आता है। इन्हें समजात गुणसूत्र (homologous chromosomes) कहते हैं। कुल संख्या 2n लिखी जाती है। मनुष्य में 2n = 46 (23 जोड़े)।
बँटने से पहले हर गुणसूत्र की कॉपी बनती है। दोनों प्रतियाँ, सिस्टर क्रोमैटिड (sister chromatids), एक बिंदु (सेंट्रोमियर) पर जुड़ी रहती हैं, इसलिए गुणसूत्र X जैसा दिखता है।
| जीव | शरीर कोशिका में गुणसूत्र (2n) |
|---|---|
| मनुष्य | 46 |
| कुत्ता | 78 |
| धान (चावल) | 24 |
| फल मक्खी | 8 |
कोशिका चक्र
एक विभाजन से अगले विभाजन तक कोशिका का जीवन कोशिका चक्र (cell cycle) कहलाता है। इसके दो बड़े भाग हैं:
- अंतरावस्था (interphase, ज़्यादातर समय): G1 – कोशिका बढ़ती है और अपना काम करती है; S – DNA की कॉपी बनती है; G2 – बँटने की तैयारी।
- M प्रावस्था (छोटी): केंद्रक बँटता है (माइटोसिस), फिर कोशिकाद्रव्य बँटता है (साइटोकाइनेसिस)।
त्वचा की कोशिका लगभग एक दिन में एक चक्र पूरा कर सकती है। तंत्रिका कोशिकाएँ ज़्यादातर बँटना बंद कर देती हैं। जो कोशिकाएँ बिना ज़रूरत बँटती रहें, वे गाँठ (ट्यूमर) बना सकती हैं; कैंसर में यही होता है।
समसूत्री विभाजन (माइटोसिस): दो एक जैसी कोशिकाएँ
माइटोसिस की चार अवस्थाएँ हैं। याद रखने का तरीका: PMAT।
- प्रोफ़ेज़ (पूर्वावस्था): गुणसूत्र सिकुड़कर मोटे और दिखाई देने लगते हैं। केंद्रक की दीवार टूट जाती है।
- मेटाफ़ेज़ (मध्यावस्था): गुणसूत्र कोशिका की बीच वाली रेखा पर लग जाते हैं। पतले रेशे (तर्कु) उन्हें पकड़ते हैं।
- एनाफ़ेज़ (पश्चावस्था): हर गुणसूत्र के सिस्टर क्रोमैटिड उलटी दिशाओं में खिंचते हैं।
- टीलोफ़ेज़ (अंत्यावस्था): दोनों सिरों पर नया केंद्रक बनता है। फिर कोशिका बँट जाती है। जंतु कोशिका में झिल्ली अंदर दबती है; पादप कोशिका में बीच में नई दीवार (कोशिका पट्टिका) बनती है।
परिणाम: 2 संतति कोशिकाएँ, माँ कोशिका जैसी, गुणसूत्र उतने ही (2n → 2n)। उपयोग: वृद्धि, मरम्मत और अलैंगिक जनन।
अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस): आधे गुणसूत्रों वाली चार कोशिकाएँ
मियोसिस केवल जनन अंगों (वृषण, अंडाशय, परागकोश, बीजांड) में होता है। इससे युग्मक (gametes) बनते हैं: शुक्राणु, अंडाणु।
- मियोसिस I: समजात गुणसूत्र जोड़े बनाते हैं। वे छोटे टुकड़े आपस में बदल सकते हैं (क्रॉसिंग ओवर)। फिर जोड़े अलग होते हैं: हर नई कोशिका को हर जोड़े में से एक गुणसूत्र मिलता है। संख्या यहीं आधी होती है।
- मियोसिस II: माइटोसिस की तरह सिस्टर क्रोमैटिड अलग होते हैं।
परिणाम: 4 कोशिकाएँ, हर एक में आधे गुणसूत्र (2n → n), और सब एक-दूसरे से अलग। मनुष्य के युग्मक में n = 23। निषेचन में शुक्राणु (23) और अंडाणु (23) मिलते हैं, तो शिशु की पहली कोशिका में फिर 46।
आधा क्यों? अगर युग्मक में 46 होते, तो बच्चे में 92 होते और हर पीढ़ी में संख्या दोगुनी होती जाती।
समसूत्री बनाम अर्धसूत्री विभाजन
| समसूत्री (माइटोसिस) | अर्धसूत्री (मियोसिस) | |
|---|---|---|
| कहाँ | शरीर की सभी कोशिकाएँ | केवल जनन अंग |
| कितनी बार बँटना | 1 | 2 |
| बनी कोशिकाएँ | 2 | 4 |
| गुणसूत्र संख्या | उतनी ही (2n → 2n) | आधी (2n → n) |
| संतति कोशिकाएँ | माँ कोशिका जैसी | माँ से और आपस में अलग |
| उपयोग | वृद्धि, मरम्मत | युग्मक बनाना; संतान में विविधता |
करके देखो: जीवविज्ञानी की तरह गिनो
घर पर: लाल कागज़ की 2 लंबी और 2 छोटी पट्टियाँ लो, और नीले की भी वैसी ही (2n = 4)। हर पट्टी की कॉपी बनाकर X बनाओ। अब माइटोसिस करो: सबको बीच में लगाओ और हर X के दोनों आधे अलग करो। गिनो: 2 कोशिकाएँ, हर एक में 4 पट्टियाँ। फिर मियोसिस: पहले लाल-नीले साथी अलग, फिर आधे। गिनो: 4 कोशिकाएँ, हर एक में 2।
3D में: आखिरी चरण में 2n = 8 (फल मक्खी जैसा) रखो, चलाने से पहले अनुमान लगाओ कि क्या होगा।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- समसूत्री: 1 कोशिका (2n) → 2 कोशिकाएँ (2n)
- अर्धसूत्री: 1 कोशिका (2n) → 4 कोशिकाएँ (n)
- निषेचन: n + n = 2n
- n बार माइटोसिस के बाद: 1 कोशिका → 2ⁿ कोशिकाएँ
- कोशिका चक्र: G1 → S → G2 → M (अंतरावस्था = G1 + S + G2)
हल किए गए उदाहरण
1. कुत्ते की शरीर कोशिका में 78 गुणसूत्र हैं। (क) माइटोसिस से बनी त्वचा कोशिका में, (ख) शुक्राणु में कितने गुणसूत्र होंगे?
(क) माइटोसिस संख्या नहीं बदलता: 78। (ख) मियोसिस आधा करता है: 78 ÷ 2 = 39।
2. एक कोशिका हर घंटे माइटोसिस से बँटती है। 5 घंटे बाद कितनी कोशिकाएँ होंगी?
हर बार संख्या दोगुनी: 1 → 2 → 4 → 8 → 16 → 32। यानी 2⁵ = 32 कोशिकाएँ।
3. 2n = 4 वाली कोशिका में मियोसिस होता है। कितनी कोशिकाएँ बनेंगी और हर एक में कितने गुणसूत्र?
मियोसिस से 4 कोशिकाएँ। हर एक में n = 4 ÷ 2 = 2 गुणसूत्र, हर जोड़े में से एक।
4. एक चक्र 24 घंटे का है: G1 = 10 घं, S = 8 घं, G2 = 4 घं। M प्रावस्था कितनी लंबी है, और अंतरावस्था चक्र का कितना भाग है?
M = 24 − (10 + 8 + 4) = 2 घं। अंतरावस्था = 22 घं, यानी 22/24 ≈ 92% समय।
आम गलतियाँ
- यह मानना कि गुणसूत्रों की कॉपी माइटोसिस के दौरान बनती है। कॉपी पहले ही, अंतरावस्था के S चरण में बनती है।
- कहना कि मियोसिस से 2 कोशिकाएँ बनती हैं। यह दो बार बँटता है और 4 बनाता है।
- X जैसे गुणसूत्र को दो गुणसूत्र गिनना। X एक ही गुणसूत्र है, जिसके दो सिस्टर क्रोमैटिड हैं।
- यह सोचना कि मियोसिस पूरे शरीर में होता है। यह केवल युग्मक बनाने वाले अंगों में होता है।