Ukraine 9 клас Biology
अध्याय: 8
1. Introduction
Biology as a science
- विज्ञान की प्रकृति: वैज्ञानिक ज्ञान कैसे बनता और बदलता है – विज्ञान जानने का एक तरीका है जो ऐसे साक्ष्य पर टिका है जिसे कोई भी जाँच सकता है। वैज्ञानिक प्रेक्षण करते हैं, अनुमान लगाते हैं, ऐसे विचार परखते हैं जो गलत भी साबित हो सकें, और दूसरे विशेषज्ञों से अपना काम जँचवाते हैं। नियम बताते हैं क्या होता है; सिद्धांत बताते हैं क्यों। वैज्ञानिक ज्ञान भरोसेमंद है पर हमेशा बदलाव के लिए खुला, और कभी-कभी देखने का पूरा ढाँचा (प्रतिमान) ही बदल जाता है।
2. Chemical composition of the cell
Inorganic compounds · Organic compounds · Non-cellular life forms
- जैव अणु – कोशिका में ज़्यादातर पानी है, और कार्बन यौगिकों के चार बड़े परिवार: प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और न्यूक्लिक अम्ल। ऊतक को अम्ल में पीसने से छोटे अणु (अम्ल-विलेय भाग) बड़े अणुओं – प्रोटीन, पॉलीसैकेराइड, न्यूक्लिक अम्ल (अम्ल-अविलेय भाग) – से अलग हो जाते हैं। प्रोटीन अमीनो अम्लों की शृंखलाएँ हैं जो चार स्तरों में मुड़ती हैं। पॉलीसैकेराइड शर्करा की शृंखलाएँ हैं; लिपिड ग्लिसरॉल पर वसा अम्ल; न्यूक्लिक अम्ल न्यूक्लियोटाइड की शृंखलाएँ। एंज़ाइम प्रोटीन उत्प्रेरक हैं जो सक्रिय स्थल पर क्रियाधार पकड़ते हैं, सक्रियण ऊर्जा घटाते हैं, और तापमान, pH, क्रियाधार मात्रा व संदमकों से प्रभावित होते हैं।
3. The cell
Cell structure · Cell metabolism · Cell cycle and cell theory
- कोशिका: जीवन की मूल इकाई – हर सजीव कोशिकाओं से बना है। 1665 में रॉबर्ट हुक ने कॉर्क में सबसे पहले कोशिकाएँ देखीं। कोशिकाएँ प्रोकैरियोटी (असली केंद्रक नहीं, जैसे जीवाणु) या यूकैरियोटी (असली केंद्रक) होती हैं। पादप कोशिका में कोशिका भित्ति, हरितलवक और बड़ी रिक्तिका होती है, जंतु कोशिका में नहीं। हर कोशिकांग का एक काम है। पानी परासरण से कोशिका में आता-जाता है। नई कोशिकाएँ समसूत्री (वृद्धि) और अर्धसूत्री (जनन कोशिकाएँ) विभाजन से बनती हैं।
- कोशिका विभाजन: एक कोशिका से दो (या चार) कैसे बनती हैं – हर जीव इसलिए बढ़ता है क्योंकि उसकी कोशिकाएँ बँटती हैं। हर कोशिका किसी दूसरी कोशिका से ही बनती है (कोशिका सिद्धांत)। बँटने से पहले कोशिका अपने गुणसूत्रों की कॉपी बनाती है। समसूत्री विभाजन (माइटोसिस) से 2 एक जैसी कोशिकाएँ बनती हैं, गुणसूत्र उतने ही रहते हैं; यह वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस) दो बार बँटकर 4 कोशिकाएँ बनाता है, हर एक में आधे गुणसूत्र; इससे युग्मक बनते हैं।
4. Heredity and variation
Genes and gene expression · Laws of inheritance · Variation · Human genetics
- वंशागति का आणविक आधार – ज़्यादातर जीवों में DNA आनुवंशिक पदार्थ है (कुछ वायरस में RNA)। यह द्विकुंडली है: न्यूक्लियोटाइड के दो प्रतिसमांतर सूत्र; A–T दो हाइड्रोजन बंध से, G–C तीन से। लंबा DNA हिस्टोन पर लिपटकर न्यूक्लियोसोम और फिर क्रोमैटिन बनाता है। DNA अर्धसंरक्षी ढंग से प्रतिकृति बनाता है (मेसेल्सन–स्टाल)। केंद्रीय सिद्धांत: DNA → RNA → प्रोटीन। अनुलेखन एक सूत्र से RNA बनाता है; यूकैरियोट में hnRNA पर कैप, पूँछ और स्प्लाइसिंग होती है। आनुवंशिक कूट त्रिक है, 64 कोडॉन (61 अमीनो अम्ल, 3 समापन), AUG से शुरू, लगभग सार्वत्रिक और अपह्रासित। राइबोसोम tRNA की मदद से mRNA को प्रोटीन में बदलता है। जीन चालू-बंद होते हैं; लैक ओपेरॉन इसका उदाहरण है। मानव और चावल जीनोम परियोजनाओं ने पूरा जीनोम पढ़ा, और DNA फिंगरप्रिंटिंग दोहराव वाले DNA (VNTR) से व्यक्ति की पहचान करती है।
- आनुवंशिकता और मेंडल के नियम – माता-पिता से बच्चों में लक्षणों का जाना आनुवंशिकता है। हर लक्षण के लिए माँ और पिता दोनों एक-एक जीन देते हैं। प्रभावी जीन अप्रभावी को छुपा देता है, इसलिए एकसंकर में 3:1 और द्विसंकर में 9:3:3:1 अनुपात आता है। जीन DNA का टुकड़ा है जो प्रोटीन बनवाता है, और प्रोटीन से लक्षण बनता है।
- जीवों में विभिन्नता – एक ही जाति के जीवों के बीच के अंतर को विभिन्नता कहते हैं। सतत विभिन्नता में किसी सीमा के भीतर हर मान हो सकता है (लंबाई, भार); असतत विभिन्नता साफ़ समूहों में बँटी होती है (रक्त समूह, फूल का रंग)। विभिन्नता जीन से, वातावरण से या दोनों से आती है। सिर्फ जीन वाले बदलाव ही अगली पीढ़ी में जाते हैं। मनुष्य चयनात्मक और संकर प्रजनन में विभिन्नता का उपयोग करता है, और आनुवंशिक संशोधन (GM) सीधे एक उपयोगी जीन जोड़ देता है।
5. Reproduction and development of organisms
Reproduction · Ontogenesis
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
- जीव जनन कैसे करते हैं? DNA प्रतिकृति और अलैंगिक जनन – जनन में DNA की प्रतिकृति (कॉपी) बनती है। कॉपी कभी पूरी तरह एक जैसी नहीं होती; यही छोटे बदलाव (विभिन्नताएँ) बदलते माहौल में प्रजाति को बचाते हैं। अलैंगिक जनन में एक ही जनक विखंडन, खंडन, पुनरुद्भवन, मुकुलन, कायिक प्रवर्धन या बीजाणु से नए जीव बनाता है।
- पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन – लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक मिलते हैं, जिससे दो जनकों का DNA मिलता है और विभिन्नता बढ़ती है। फूल में परागकोश का पराग वर्तिकाग्र पर पहुँचता है (परागण), परागनलिका बीजांड तक बढ़ती है और नर युग्मक अंडकोशिका से मिलता है (निषेचन)। युग्मनज भ्रूण बनता है, बीजांड बीज और अंडाशय फल।
- विकास: एक कोशिका से पूरा शरीर – विकास (व्यक्तिवृत्त, ontogenesis) एक जीव की जीवन कहानी है। युग्मनज विदलन से बँटकर कोशिकाओं की गेंद (कोरकपुटी) बनाता है। कंदुकन में कोशिकाएँ अंदर जाती हैं और तीन जनन स्तर बनते हैं: बाह्यत्वचा, मध्यजनस्तर, अंतर्जनस्तर। फिर कोशिकाएँ विभेदित होती हैं: सबमें एक जैसे जीन, पर हर प्रकार अलग जीन चालू करता है। कोशिकाओं के संकेत (प्रेरण) और Hox जैसे मुख्य जीन तय करते हैं कि कौन-सा अंग कहाँ बने। जन्म के बाद जीव बढ़ता है, सीधे या कायांतरण से विकसित होता है, बूढ़ा होता है और कभी-कभी अंग दोबारा उगा सकता है।
6. Biology for breeding, biotechnology and medicine
Breeding · Biotechnology
- पादप प्रजनन: बेहतर फ़सलें बनाना – पादप प्रजनन = फ़सल के जीन जान-बूझकर बदलकर बेहतर क़िस्में बनाना: अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता, रोग-कीट प्रतिरोध, और सूखा, लवण, गर्मी या ठंड सहनशीलता। सबसे पुरानी विधि कृत्रिम चयन है: पीढ़ी दर पीढ़ी केवल अच्छे पौधों के बीज रखना। संकरण दो जनकों को मिलाता है ताकि संतान को दोनों के अच्छे गुण मिलें। अंतःप्रजनन (निकट संबंधी या स्व-परागण) शुद्ध वंश बनाता है; ज़्यादा हो तो अंतःप्रजनन अवसाद। बहिःप्रजनन असंबंधित वंशों को मिलाता है; दो शुद्ध वंशों का F1 संकर अक्सर दोनों से बेहतर होता है (संकर ओज)। अंतरजातीय संकरण (गेहूँ × राई = ट्रिटिकेल) में गुणसूत्र दोगुने करने पड़ते हैं। आधुनिक औज़ार: उत्परिवर्तन, बहुगुणिता, ऊतक संवर्धन, DNA मार्कर और जीन संपादन। वाविलोव ने बताया कि फ़सलों के उत्पत्ति केंद्र होते हैं और संबंधित प्रजातियों में विविधता की समजात श्रेणी होती है।
7. Humans and the biosphere
Ecosystems · Human impact and sustainability
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
- पर्यावरणीय समस्याएँ: कारण, प्रभाव और समाधान – पर्यावरणीय समस्याएँ हवा, पानी, ज़मीन, जलवायु और जीवों में होने वाले हानिकारक बदलाव हैं, जो ज़्यादातर इंसानों के कामों से होते हैं। मुख्य समस्याएँ हैं: वायु, जल और भूमि प्रदूषण, कचरा, जलवायु परिवर्तन, वनों की कटाई, जैव विविधता की हानि और संसाधनों का ज़रूरत से ज़्यादा इस्तेमाल। ये लोगों की संख्या और हर व्यक्ति की खपत (पारिस्थितिक पदचिह्न) के साथ बढ़ती हैं। साफ़ ऊर्जा, बचत, रीसाइक्लिंग, गंदे पानी की सफ़ाई, जंगलों की रक्षा और अच्छे कानूनों से हम इन्हें घटा सकते हैं।
8. Evolution of the living world
Evolutionary theory · Origin and history of life
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
- विकास: जीवन की उत्पत्ति, क्रियाविधि और मानव विकास – शुरुआती पृथ्वी पर सरल रसायनों से जीवन शुरू हुआ: ओपेरिन और हाल्डेन ने कहा और मिलर ने फ्लास्क में अमीनो अम्ल बनाए। विकास के प्रमाण जीवाश्म, समजात और समरूप अंग, भ्रूण, अणु और आज दिखने वाले बदलाव (औद्योगिक मेलानिनता, दवा प्रतिरोध) से मिलते हैं। डार्विन ने इसे आबादी की विभिन्नता पर प्राकृतिक वरण से समझाया; आधुनिक संश्लेषित सिद्धांत जीन जोड़ता है: उत्परिवर्तन, पुनर्योजन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक विचलन और प्राकृतिक वरण अलील आवृत्ति बदलते हैं। अगर इनमें से कुछ न हो, आवृत्तियाँ स्थिर रहती हैं: हार्डी–वाइनबर्ग, p² + 2pq + q² = 1। वरण स्थायीकारी, दिशात्मक या विदारक होता है। एक पूर्वज का कई आवासों में फैलकर कई जातियाँ बनाना अनुकूली विकिरण है (डार्विन की फिंच, ऑस्ट्रेलियाई शिशुधानी)। मनुष्य ड्रायोपिथेकस जैसे कपियों से ऑस्ट्रेलोपिथेकस, होमो हैबिलिस, होमो इरेक्टस और निएंडरथल होते हुए होमो सेपियंस बना।