विज्ञान क्या है?
विज्ञान प्रकृति को समझने का तरीका है: प्रश्न पूछो और साक्ष्य (evidence) से उत्तर दो। साक्ष्य यानी ऐसे प्रेक्षण और माप जिन्हें दूसरे जाँच और दोहरा सकें।
- विज्ञान उन चीज़ों को पढ़ता है जिन्हें सीधे या उपकरणों से देखा-मापा जा सके।
- यह प्राकृतिक कारण ढूँढता है, जादू या किस्मत नहीं।
- बेहतर साक्ष्य आने पर इसके उत्तर बदल सकते हैं।
हर शाखा का अपना ध्यान है। भौतिकी पदार्थ, ऊर्जा और गति के मूल नियम खोजती है, जिन्हें बाकी सब विज्ञान इस्तेमाल करते हैं। जीवविज्ञान जीवों को पढ़ता है। भूविज्ञान पृथ्वी और उसके इतिहास को। मिलकर ये एक जुड़ा हुआ वैज्ञानिक विश्व-दृष्टिकोण बनाते हैं।
प्रेक्षण और अनुमान
प्रेक्षण (observation) वह है जो इंद्रियों या उपकरणों से पता चले: "पत्ता पीला है"। अनुमान (inference) प्रेक्षण से निकाली गई व्याख्या है: "पौधे को और नाइट्रोजन चाहिए"। अनुमान को परखना ज़रूरी है।
साक्ष्य-आधारित सोच
अच्छे वैज्ञानिक दावे साक्ष्य पर बनते हैं, इस पर नहीं कि कहने वाला कौन है।
- आनुभविक (empirical): प्रेक्षण और प्रयोग पर आधारित।
- दोहराने योग्य: वही तरीका अपनाकर दूसरे को भी मिलते-जुलते नतीजे मिलें।
- नियंत्रित: एक बार में एक चर बदलो, नियंत्रण समूह से तुलना करो।
- सहसंबंध कारण नहीं है: गर्मी में आइसक्रीम की बिक्री और डूबने की घटनाएँ साथ बढ़ती हैं, पर एक दूसरे का कारण नहीं; दोनों का कारण गर्मी है।
तर्क
आगमनात्मक तर्क (inductive) कई उदाहरणों से सामान्य नियम तक जाता है ("जितनी धातुएँ गरम कीं, सब फैलीं, तो धातुएँ गरम होकर फैलती हैं")। निगमनात्मक तर्क (deductive) नियम से भविष्यवाणी तक ("ताँबा धातु है, तो फैलेगा")। विज्ञान दोनों इस्तेमाल करता है।
सहकर्मी समीक्षा और समुदाय
नतीजे छपने से पहले दूसरे विशेषज्ञ तरीका और आँकड़े जाँचते हैं (सहकर्मी समीक्षा, peer review)। जब दूसरे काम दोहराते हैं, गलतियाँ और धोखा पकड़े जाते हैं। विज्ञान देशों और सदियों में फैला टीम-वर्क है।
परिकल्पना, नियम, सिद्धांत और मॉडल
| शब्द | अर्थ | उदाहरण |
|---|---|---|
| परिकल्पना | परखने योग्य संभावित व्याख्या या भविष्यवाणी | "बीजों को अंकुरित होने के लिए रोशनी चाहिए" |
| नियम | बताता है क्या हमेशा होता है, अक्सर समीकरण में | न्यूटन का गुरुत्वाकर्षण नियम, ओम का नियम |
| सिद्धांत | क्यों होता है, इसकी अच्छी तरह परखी व्याख्या, जो कई तथ्यों को जोड़े | परमाणु सिद्धांत, विकास का सिद्धांत, प्लेट विवर्तनिकी |
| मॉडल | असली चीज़ की सरल तस्वीर, चित्र, समीकरण या कंप्यूटर प्रोग्राम | गेंद-छड़ अणु मॉडल, जलवायु मॉडल |
रोज़ की बोलचाल में "बस एक थ्योरी" का मतलब अंदाज़ा होता है। विज्ञान में सिद्धांत सबसे मज़बूत ज्ञान है। "सिद्ध" होने पर सिद्धांत नियम नहीं बनता: दोनों अलग प्रश्नों के उत्तर हैं।
बड़े मूल सिद्धांत: पदार्थ का परमाणु सिद्धांत, कोशिका सिद्धांत, प्राकृतिक वरण द्वारा विकास, गुरुत्व और सापेक्षता का सिद्धांत, क्वांटम सिद्धांत, और प्लेट विवर्तनिकी।
अस्थायी ज्ञान, मिथ्याकरणीयता और प्रतिमान परिवर्तन
वैज्ञानिक दावा मिथ्याकरणीय (falsifiable) होना चाहिए: ऐसा कोई नतीजा सोचा जा सके जो उसे गलत दिखा दे। "कल पुणे में बारिश होगी" परखा जा सकता है; "अदृश्य आत्माएँ बादलों को ऐसे चलाती हैं जिसे कोई पकड़ नहीं सकता" नहीं।
वैज्ञानिक ज्ञान अस्थायी (tentative) है: मज़बूत, पर बदलाव के लिए खुला। ज़्यादातर बदलाव छोटे और धीरे होते हैं। कभी-कभी पूरा ढाँचा बदल जाता है। इतिहासकार थॉमस कुन ने इसे प्रतिमान परिवर्तन (paradigm shift) कहा।
इतिहास से उदाहरण
- खगोल: पृथ्वी-केंद्रित ब्रह्मांड से कोपरनिकस के सूर्य-केंद्रित मॉडल तक, जिसे गैलीलियो की दूरबीन और केप्लर की कक्षाओं ने सहारा दिया। भारत में आर्यभट पहले ही कह चुके थे कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
- भूविज्ञान: जेम्स हटन ने दिखाया कि पृथ्वी बहुत पुरानी है। वेगनर का महाद्वीपीय विस्थापन का विचार दशकों तक ठुकराया गया, फिर 1960 के दशक में समुद्र-तल के साक्ष्य आने पर प्लेट विवर्तनिकी के रूप में माना गया।
- चिकित्सा: "खराब हवा" (मियाज़्मा) की जगह पाश्चर और कोख के काम के बाद रोगाणु सिद्धांत आया।
- भौतिकी: न्यूटन की यांत्रिकी रोज़ की गतियों पर अब भी चलती है, पर बहुत तेज़ और बहुत छोटी चीज़ों के लिए सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत ने उसकी जगह ली।
विज्ञान, दूसरे विषय और समाज
विज्ञान बताता है कि प्रकृति कैसे काम करती है। दूसरे विषय अलग प्रश्न पूछते हैं: नैतिकता पूछती है हमें क्या करना चाहिए, कला और साहित्य अनुभव व्यक्त करते हैं, इतिहास मानव घटनाएँ पढ़ता है। विज्ञान बता सकता है कि जीन कैसे बदलें; नैतिकता और कानून तय करने में मदद करते हैं कि बदलें या नहीं।
विज्ञान और छद्म-विज्ञान
छद्म-विज्ञान (pseudoscience) वैज्ञानिक दिखता है पर है नहीं: ऐसे दावे जो परखे न जा सकें, सिर्फ़ किस्सों या अधिकार पर टिके हों, विरोधी साक्ष्य को अनदेखा करें, या कभी न बदलें। उदाहरण: राशि से स्वभाव बताना, बिना परीक्षण वाले "चमत्कारी" इलाज।
विज्ञान और सभ्यता
विज्ञान कई संस्कृतियों में पला: बेबीलोन का खगोल, यूनान की ज्यामिति, भारत का गणित (स्थानीय मान और शून्य), चीन के आविष्कार, और इस्लामी दुनिया का प्रकाशिकी व रसायन। आज विज्ञान, तकनीक और समाज एक-दूसरे को आकार देते हैं।
घर पर करके देखो
किसी विज्ञापन का दावा चुनो ("यह ड्रिंक तुम्हें तेज़ दौड़ाएगा")। पूछो: साक्ष्य क्या है? नियंत्रण समूह था? क्या नतीजा संयोग हो सकता है? किसने जाँचा?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रेक्षण = जो इंद्रियों या उपकरण से पता चले; अनुमान = उससे निकाला निष्कर्ष
- परिकल्पना = परखने योग्य विचार; नियम = क्या होता है; सिद्धांत = क्यों होता है (अच्छी तरह परखा)
- मॉडल = सरल रूप (चित्र, समीकरण, कंप्यूटर प्रोग्राम)
- मिथ्याकरणीय = कोई संभव नतीजा दावे को गलत दिखा सके
- अस्थायी = अभी भरोसेमंद, पर नए साक्ष्य से बदल सकता है
- सहकर्मी समीक्षा = छपने से पहले विशेषज्ञ जाँचते हैं
- प्रतिमान परिवर्तन = किसी विज्ञान के पूरे ढाँचे का बदलना
हल किए गए उदाहरण
1. इन्हें प्रेक्षण या अनुमान में बाँटो: (क) सड़क गीली है, (ख) कल रात बारिश हुई, (ग) थर्मामीटर 31 °C दिखा रहा है।
(क) प्रेक्षण, (ग) प्रेक्षण: दोनों देखे या मापे गए। (ख) अनुमान: यह गीली सड़क की व्याख्या है, पर पानी का टैंकर भी कारण हो सकता है।
2. एक छात्र कहता है "विकास तो बस एक सिद्धांत है, यानी अंदाज़ा।" गलती क्या है?
विज्ञान में सिद्धांत कई साक्ष्यों (जीवाश्म, DNA, बैक्टीरिया में देखे गए बदलाव) से समर्थित, अच्छी तरह परखी व्याख्या है। यह अंदाज़ा नहीं। अंदाज़ा तो परखने से पहले की परिकल्पना होती है।
3. "सभी धातुएँ गरम करने पर फैलती हैं" नियम है या सिद्धांत? क्या यह मिथ्याकरणीय है?
यह बताता है क्या होता है, तो नियम जैसा कथन है। मिथ्याकरणीय है: गरम होकर सिकुड़ने वाली एक धातु इसे गलत कर देगी। (कुछ खास मिश्रधातुएँ लगभग नहीं बदलतीं, इसलिए नियमों में शर्तें लिखी जाती हैं।)
4. महाद्वीपीय विस्थापन पहले क्यों ठुकराया गया और बाद में क्यों माना गया?
वेगनर के पास साक्ष्य थे (मिलते तट, जीवाश्म, चट्टानें) पर कोई भरोसेमंद क्रियाविधि नहीं, इसलिए कई भूवैज्ञानिकों ने नहीं माना। 1950–60 के दशक में समुद्र-तल प्रसरण और चुंबकीय पट्टियों ने क्रियाविधि दी। तब यह प्लेट विवर्तनिकी बनकर स्वीकार हुआ: साक्ष्य ने राय बदली।
5. एक अध्ययन में ज़्यादा किताबों वाले बच्चों के अंक ज़्यादा आए। क्या कह सकते हैं कि किताबें अंक बढ़ाती हैं?
नहीं। यह सहसंबंध है। दूसरे कारक (परिवार की आय, पढ़ने का समय, स्कूल) दोनों का कारण हो सकते हैं। नियंत्रित प्रयोग या बाकी चरों का सावधान अध्ययन चाहिए।
6. छद्म-विज्ञान के दो लक्षण बताओ।
इसे परखा या गलत सिद्ध नहीं किया जा सकता, और यह विरोधी साक्ष्य को अनदेखा करता है। और लक्षण: सिर्फ़ निजी किस्सों पर टिकना, बिना आँकड़ों के वैज्ञानिक-से शब्द, और कभी न बदलना।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सिद्ध होने पर सिद्धांत नियम बन जाता है। ये अलग तरह के कथन हैं।
- अनुमान को प्रेक्षण मान लेना।
- मानना कि विज्ञान चीज़ें हमेशा के लिए "सिद्ध" करता है। वह मज़बूत समर्थन देता है, पर नए साक्ष्य के लिए खुला रहता है।
- सहसंबंध को कारण समझ लेना।