South 고등학교 3학년 History of Science
अध्याय: 4
1. What is science?
Science and nature · Deduction and induction · Hypothetico-deductive method · Paradigm shifts · Ways to understand history of science · Science and other disciplines
- विज्ञान की प्रकृति: वैज्ञानिक ज्ञान कैसे बनता और बदलता है – विज्ञान जानने का एक तरीका है जो ऐसे साक्ष्य पर टिका है जिसे कोई भी जाँच सकता है। वैज्ञानिक प्रेक्षण करते हैं, अनुमान लगाते हैं, ऐसे विचार परखते हैं जो गलत भी साबित हो सकें, और दूसरे विशेषज्ञों से अपना काम जँचवाते हैं। नियम बताते हैं क्या होता है; सिद्धांत बताते हैं क्यों। वैज्ञानिक ज्ञान भरोसेमंद है पर हमेशा बदलाव के लिए खुला, और कभी-कभी देखने का पूरा ढाँचा (प्रतिमान) ही बदल जाता है।
- वैज्ञानिक विधि – वैज्ञानिक विधि वह सावधान तरीका है जिससे वैज्ञानिक पता लगाते हैं कि दुनिया कैसे चलती है। कुछ देखो (प्रेक्षण), परखने लायक प्रश्न पूछो, परिकल्पना बनाओ (साफ़, परखने योग्य अनुमान), निष्पक्ष प्रयोग से परखो (एक चर बदलो, एक मापो, बाकी सब एक जैसा), दोहराओ और आँकड़े लिखो, विश्लेषण करो, निष्कर्ष निकालो और साझा करो ताकि दूसरे जाँच सकें। जो नतीजे परिकल्पना से मेल न खाएँ, वे भी काम के हैं: वे नई परिकल्पना की ओर ले जाते हैं।
- विज्ञान का इतिहास: प्रकृति के बारे में हमारी सोच कैसे बदली – विज्ञान 5,000 सालों में धीरे-धीरे बढ़ा। शुरुआती सभ्यताओं ने आकाश देखकर कैलेंडर बनाए। यूनानी विचारकों ने 'क्यों' पूछा और तर्क से सोचा। भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों ने शून्य, बीजगणित और सावधान प्रयोग दिए। वैज्ञानिक क्रांति में कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने पृथ्वी-केंद्रित मॉडल की जगह सूर्य-केंद्रित मॉडल रखा और प्रयोग से जाँचना सिखाया। आधुनिक विज्ञान ने परमाणु, विकास, सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत दिए। हर दौर एक ही बात सिखाता है: पक्का सबूत पुरानी सोच बदल सकता है।
2. Western science
Egypt and Mesopotamia · Greece and Rome · Medieval to Renaissance · Renaissance changes · Astronomical revolution · Mechanics · Chemical revolution · Darwin and modern biology · Thermodynamics · Light and colour · Quantum theory and relativity · DNA structure · Earth science theories · Social impact of revolutions · New medicines and materials
- विज्ञान का इतिहास: प्रकृति के बारे में हमारी सोच कैसे बदली – विज्ञान 5,000 सालों में धीरे-धीरे बढ़ा। शुरुआती सभ्यताओं ने आकाश देखकर कैलेंडर बनाए। यूनानी विचारकों ने 'क्यों' पूछा और तर्क से सोचा। भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों ने शून्य, बीजगणित और सावधान प्रयोग दिए। वैज्ञानिक क्रांति में कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने पृथ्वी-केंद्रित मॉडल की जगह सूर्य-केंद्रित मॉडल रखा और प्रयोग से जाँचना सिखाया। आधुनिक विज्ञान ने परमाणु, विकास, सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत दिए। हर दौर एक ही बात सिखाता है: पक्का सबूत पुरानी सोच बदल सकता है।
- वैज्ञानिक क्रांति: विज्ञान ने विचारों को परखना कैसे सीखा – लगभग 1540 से 1700 के बीच यूरोप के विचारकों ने प्रकृति को समझने का तरीका बदल दिया। कोपरनिकस ने सूर्य को केंद्र में रखा, गैलीलियो ने दूरबीन से सबूत जुटाए, केप्लर ने पाया कि कक्षाएँ दीर्घवृत्त हैं, और न्यूटन ने एक ही गुरुत्व नियम से आसमान और धरती दोनों को समझाया। बेकन और देकार्त ने अवलोकन, प्रयोग, तर्क और गणित पर टिकी नई विधि बताई। यही वैज्ञानिक क्रांति है।
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
- ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम – आंतरिक ऊर्जा U निकाय के अंदर के अणुओं की कुल ऊर्जा है। यह दो ही तरीकों से बदलती है: ऊष्मा Q (ताप के अंतर से बहने वाली ऊर्जा) और कार्य W (बल से दी गई ऊर्जा, जैसे खिसकता पिस्टन)। प्रथम नियम: ΔQ = ΔU + ΔW. गैस को दी गई ऊष्मा का एक भाग आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है, बाकी से गैस कार्य करती है। स्थिर दाब पर कार्य PΔV है। आदर्श गैस के लिए Cp − Cv = R.
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज: खोजें हमारा जीवन कैसे बदलती हैं – विज्ञान पता लगाता है कि प्रकृति कैसे काम करती है; प्रौद्योगिकी (तकनीक) उस ज्ञान से औज़ार बनाती और समस्याएँ सुलझाती है। समाज भी विज्ञान को दिशा देता है: सवाल पूछकर, शोध के लिए पैसा देकर और नियम बनाकर। छापाख़ाना, भाप इंजन, बिजली, टीके और इंटरनेट ने काम करने, जीने और सोचने का तरीक़ा बदल दिया। हर तकनीक के लाभ और जोखिम दोनों होते हैं। सही फ़ैसले के लिए हम प्रमाण देखते हैं, लाभ और जोखिम तौलते हैं, पूछते हैं किसे फ़ायदा और किसे नुक़सान, नैतिकता और भविष्य सोचते हैं, और सुरक्षा नियम अपनाते हैं।
- उन्नत प्रौद्योगिकी के अंदर का विज्ञान – उन्नत प्रौद्योगिकी असल में साधारण विज्ञान का होशियारी से इस्तेमाल है। सेंसर स्पर्श, प्रकाश और गति को बिजली के संकेत में बदलते हैं। चिप सिलिकॉन की बनती है। ग्राफ़ीन जैसे नए पदार्थ अपनी ताकत परमाणुओं के जमने के ढंग से पाते हैं। नई दवा को लक्ष्य के आकार में फिट होने के लिए बनाया जाता है, जैसे चाबी ताले में। जीव-विज्ञान, सूचना और नैनो-विज्ञान मिलते हैं तो नए क्षेत्र बनते हैं।
3. Eastern and Korean science
Traditional Chinese science · Western science in East Asia · Indian mathematics and science · Islamic science · Korean science to Joseon · Modern Korean science
- विज्ञान का इतिहास: प्रकृति के बारे में हमारी सोच कैसे बदली – विज्ञान 5,000 सालों में धीरे-धीरे बढ़ा। शुरुआती सभ्यताओं ने आकाश देखकर कैलेंडर बनाए। यूनानी विचारकों ने 'क्यों' पूछा और तर्क से सोचा। भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों ने शून्य, बीजगणित और सावधान प्रयोग दिए। वैज्ञानिक क्रांति में कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने पृथ्वी-केंद्रित मॉडल की जगह सूर्य-केंद्रित मॉडल रखा और प्रयोग से जाँचना सिखाया। आधुनिक विज्ञान ने परमाणु, विकास, सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत दिए। हर दौर एक ही बात सिखाता है: पक्का सबूत पुरानी सोच बदल सकता है।
4. Science and modern society
Lessons from history · Recent technologies and society · Science, technology, society
- विज्ञान का इतिहास: प्रकृति के बारे में हमारी सोच कैसे बदली – विज्ञान 5,000 सालों में धीरे-धीरे बढ़ा। शुरुआती सभ्यताओं ने आकाश देखकर कैलेंडर बनाए। यूनानी विचारकों ने 'क्यों' पूछा और तर्क से सोचा। भारत और इस्लामी दुनिया के विद्वानों ने शून्य, बीजगणित और सावधान प्रयोग दिए। वैज्ञानिक क्रांति में कोपरनिकस, गैलीलियो और न्यूटन ने पृथ्वी-केंद्रित मॉडल की जगह सूर्य-केंद्रित मॉडल रखा और प्रयोग से जाँचना सिखाया। आधुनिक विज्ञान ने परमाणु, विकास, सापेक्षता और क्वांटम सिद्धांत दिए। हर दौर एक ही बात सिखाता है: पक्का सबूत पुरानी सोच बदल सकता है।
- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और समाज: खोजें हमारा जीवन कैसे बदलती हैं – विज्ञान पता लगाता है कि प्रकृति कैसे काम करती है; प्रौद्योगिकी (तकनीक) उस ज्ञान से औज़ार बनाती और समस्याएँ सुलझाती है। समाज भी विज्ञान को दिशा देता है: सवाल पूछकर, शोध के लिए पैसा देकर और नियम बनाकर। छापाख़ाना, भाप इंजन, बिजली, टीके और इंटरनेट ने काम करने, जीने और सोचने का तरीक़ा बदल दिया। हर तकनीक के लाभ और जोखिम दोनों होते हैं। सही फ़ैसले के लिए हम प्रमाण देखते हैं, लाभ और जोखिम तौलते हैं, पूछते हैं किसे फ़ायदा और किसे नुक़सान, नैतिकता और भविष्य सोचते हैं, और सुरक्षा नियम अपनाते हैं।