त्वचा के कार्य
त्वचा शरीर का बाहरी आवरण है। इसके काम हैं: कीटाणु, धूल, पानी के नुकसान और धूप से रक्षा; छूना, दर्द, गर्मी और ठंड महसूस करना; तापमान नियंत्रण; पसीने में थोड़ा अपशिष्ट निकालना; और विटामिन D बनाना।
त्वचा के भाग और उनके काम
बाह्यत्वचा (एपिडर्मिस) पतली और मज़बूत है। ऊपर की मृत कोशिकाएँ जलरोधी ढाल बनाती हैं। नीचे की कोशिकाएँ मेलानिन बनाती हैं, एक भूरा वर्णक जो UV सोखता है।
अंतःत्वचा (डर्मिस) मोटी है। इसमें रक्त नलिकाएँ (भोजन और गर्मी), तंत्रिकाएँ (छूना और दर्द), स्वेद ग्रंथियाँ, तेल ग्रंथियाँ और बालों की जड़ें हैं। तेल त्वचा और बालों को नरम रखता है।
चर्बी की परत ऊर्जा जमा करती है, चोट से बचाती है और गर्मी रोकती है।
त्वचा और ताप नियंत्रण
शरीर का तापमान लगभग 37 °C रहता है। गर्मी में अंतःत्वचा की नलिकाएँ फैलती हैं ताकि गर्म रक्त सतह के पास आए, और स्वेद ग्रंथियाँ पसीना छोड़ती हैं। पसीना भाप बनते समय गर्मी ले जाता है। ठंड में नलिकाएँ सिकुड़ती हैं, बाल खड़े होते हैं (रोंगटे) और कँपकँपी आ सकती है।
प्रोविटामिन D से विटामिन D बनना
त्वचा में कोलेस्ट्रॉल का एक रूप, प्रोविटामिन D, UV-B किरणें पड़ने पर विटामिन D में बदलता है। विटामिन D शरीर को कैल्शियम लेने में मदद करता है, जिससे हड्डियाँ मज़बूत होती हैं। सुबह या देर शाम की धूप में हाथ-चेहरे पर दस से बीस मिनट आम तौर पर काफ़ी हैं।
UV, त्वचा का बुढ़ापा और रोग का खतरा
UV किरणें त्वचा की कोशिकाओं के DNA को नुकसान पहुँचा सकती हैं। थोड़े समय में धूप से जलन होती है। सालों में झुर्रियाँ और रूखी, धब्बेदार त्वचा (फोटो-एजिंग) होती है और त्वचा कैंसर का खतरा बढ़ता है। बचाव: सुबह 11 से दोपहर 3 बजे छाया में रहो, टोपी, पूरी बाँह के कपड़े, चश्मा और सनस्क्रीन (SPF 30+)।
कब डॉक्टर को दिखाएँ
डॉक्टर को दिखाओ अगर तिल बढ़े, रंग या आकार बदले, किनारे ऊबड़-खाबड़ हों, खुजली या खून आए; अगर घाव कुछ हफ़्तों में न भरे; अगर दाने फैलें, दर्द करें या बुखार आए; या कट लाल, सूजा और मवाद वाला दिखे।
त्वचा रोग: फफूँद संक्रमण, मेलेनोमा और बचाव
फफूँद संक्रमण (दाद, एथलीट फुट) गर्म और नम जगहों में पनपते हैं। इनसे गोल, खुजली वाले चकत्ते होते हैं। बचाव: त्वचा सूखी रखो, तौलिया और कंघी साझा मत करो, साफ़ सूती कपड़े पहनो। डॉक्टर फफूँदरोधी दवा देता है।
मेलेनोमा एक गंभीर त्वचा कैंसर है जो मेलानिन कोशिकाओं से शुरू होता है, अक्सर बदलते गहरे तिल के रूप में। देर से पता चले तो फैलता है, पर जल्दी पकड़ में आए तो आम तौर पर ठीक हो जाता है। बचाव: धूप से जलने से बचो, धूप से ढको और तिलों की जाँच करते रहो।
करके देखो
3D में गर्मी का स्लाइडर ठंड से गर्मी तक चलाओ और बताओ नलिका, बाल और पसीने का क्या होता है। UV स्लाइडर चलाओ और मेलानिन के बिंदु गिनो। घर पर: दौड़ने के बाद हथेली की त्वचा देखो और फैली नलिकाओं का गुलाबी रंग ढूँढो। सूरज को कभी सीधा मत देखो, बस अपनी परछाईं देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परतें: बाह्यत्वचा (ऊपर), अंतःत्वचा (बीच), चर्बी की परत (नीचे)
- गर्मी: नलिकाएँ फैलें + पसीना। ठंड: नलिकाएँ सिकुड़ें + बाल खड़े
- UV-B + त्वचा का प्रोविटामिन D = विटामिन D
- ज़्यादा UV = ज़्यादा मेलानिन; बहुत ज़्यादा UV = DNA को नुकसान
हल किए गए उदाहरण
1. दौड़ने के बाद गाल लाल क्यों हो जाते हैं?
दौड़ने से गर्मी बनती है। अंतःत्वचा की नलिकाएँ फैलकर गर्म रक्त सतह के पास लाती हैं ताकि गर्मी निकले। सतह के पास ज़्यादा रक्त लाल दिखता है।
2. एक तिल बड़ा हो गया है और किनारे ऊबड़-खाबड़ हैं। क्या करें?
जल्दी डॉक्टर को दिखाओ। आकार, रंग या किनारों का बदलना मेलेनोमा की चेतावनी है, जिसका इलाज जल्दी पकड़ने पर आसान होता है।
3. सुबह की थोड़ी धूप में टहलना हड्डियों के लिए क्यों अच्छा है?
UV-B किरणें त्वचा के प्रोविटामिन D को विटामिन D में बदलती हैं, जो कैल्शियम सोखने में मदद करता है।
आम गलतियाँ
- पसीना खुद ठंडा करता है, ऐसा सोचना। वह भाप बनते समय ठंडक देता है।
- टैन को सेहतमंद कहना। टैन का मतलब है कि त्वचा UV से खुद को बचा रही है।
- सोचना कि विटामिन D के लिए घंटों धूप चाहिए। थोड़ा सुरक्षित समय काफ़ी है।
- फफूँद संक्रमण वाले के साथ तौलिया या कंघी साझा करना।