France Terminale Life and Earth Sciences (specialty)
अध्याय: 5
1. Genetics and evolution
Origin of genotype: meiosis and mixing · Genome complexification · Evolution of genomes in populations · Other sources of diversity
- कोशिका चक्र और कोशिका विभाजन – कोशिका एक तय क्रम में बढ़ती है, DNA दोहराती है और बँटती है – इसे कोशिका चक्र कहते हैं: अंतरावस्था (G1, S, G2) और M प्रावस्था। S प्रावस्था में DNA दोगुना (2C → 4C) होता है, पर गुणसूत्र संख्या वही रहती है। समसूत्री विभाजन (पूर्वावस्था, मध्यावस्था, पश्चावस्था, अंत्यावस्था) और कोशिकाद्रव्य विभाजन से जनक जैसी दो कोशिकाएँ बनती हैं – यह समीकरणीय विभाजन वृद्धि और मरम्मत के लिए है। अर्धसूत्री विभाजन में दो विभाजन होते हैं; अर्धसूत्री I में समजात गुणसूत्र जोड़ा बनाते हैं, जीन विनिमय करते हैं और अलग होते हैं, जिससे गुणसूत्र संख्या आधी (2n → n) होती है। इससे युग्मकों के लिए चार अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं और विविधता आती है।
- जीनोम का विकास: जीनोम जटिल कैसे बनते हैं – जीनोम सिर्फ़ छोटे उत्परिवर्तनों से नहीं बदलते। वे पूरे जीन भी पा सकते हैं। क्षैतिज जीन स्थानांतरण असंबंधित कोशिकाओं के बीच जीन ले जाता है, जैसे जीवाणुओं के बीच। विषाणु एक कोशिका से दूसरी में जीन ले जा सकते हैं और मेज़बान DNA में प्रतियाँ छोड़ सकते हैं। अंतःसहजीविता से माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट बने: निगले गए जीवाणु मेज़बान कोशिका में ही रुक गए और अपना कुछ DNA रखा। जीन और जीनोम द्विगुणन अतिरिक्त प्रतियाँ देते हैं जो बदलने और नया काम सीखने के लिए आज़ाद होती हैं। ये घटनाएँ जीन तेज़ी से जोड़ती हैं और नए कार्यों का बड़ा स्रोत हैं।
- विकास: नए प्रकार के जीव कैसे बनते हैं – जनन के समय विविधताएँ आती हैं। प्रकृति उन विविधताओं को चुनती है जो जीवित रहने में मदद करें, और कई पीढ़ियों में आबादी बदल जाती है: यही विकास है। सिर्फ़ वंशागत (DNA वाले) बदलाव आगे जाते हैं, उपार्जित नहीं। अलग हुई आबादियाँ नई जातियाँ बन सकती हैं। समजात अंग, समरूप अंग और जीवाश्म बताते हैं कि कौन किससे संबंधित है, और जटिल अंग चरण-दर-चरण बने।
2. Earth’s geological past
Relative and absolute dating · Traces of Earth’s past
- रेडियोमीट्रिक काल-निर्धारण (Radiometric Dating) – सापेक्ष काल-निर्धारण चट्टानों और जीवाश्मों का क्रम बताता है (नीचे की परत आमतौर पर पुरानी)। निरपेक्ष (रेडियोमीट्रिक) काल-निर्धारण वर्षों में आयु देता है। क्रिस्टल बनते समय रेडियोधर्मी जनक परमाणु फँस जाते हैं, जो तय दर से संतति परमाणुओं में बदलते हैं। हर अर्ध-आयु में आधे जनक बचते हैं। आयु t = T½ × log₂(1 + D/P)।
- महासागरों और महाद्वीपों का वितरण: विस्थापन, विस्तार और प्लेटें – 1912 में अल्फ्रेड वेगनर ने कहा कि सारे महाद्वीप कभी एक भूखंड पैंजिया थे, जो एक महासागर पैंथालासा से घिरा था, और वे धीरे-धीरे अलग हुए। मिलते तट, चट्टानें, जीवाश्म, हिमनद जमाव और प्लेसर सोना उनके पक्ष में थे, पर वे बल नहीं समझा सके। समुद्र तल के मानचित्रण से कटक, मैदान और खाइयाँ मिलीं; फिर हैरी हेस ने सागरीय अधस्तल विस्तार दिया: मध्य-महासागरीय कटक पर नई भूपर्पटी बनती है और खाइयों में पुरानी डूबती है। इससे प्लेट विवर्तनिकी बनी: स्थलमंडल कठोर प्लेटों में टूटा है जो नरम दुर्बलतामंडल पर चलती हैं और अपसारी, अभिसारी और रूपांतर सीमाओं पर मिलती हैं। भारतीय प्लेट दक्षिण से अलग होकर उत्तर बढ़ी और एशिया से टकराकर हिमालय उठाया।
3. From wild to domesticated plants
Functional organisation of flowering plants · Plants make organic matter · Plant reproduction · Plant domestication
- फूल वाला पौधा कैसे काम करता है – फूल वाला पौधा चल नहीं सकता, इसलिए उसका शरीर इकट्ठा करने के लिए बना है: लाखों बालों वाली जड़ें मिट्टी से पानी और खनिज लेती हैं, चौड़ी पत्तियाँ कार्बन डाइऑक्साइड और रोशनी लेती हैं। जाइलम कच्चा रस (पानी + खनिज) ऊपर ले जाता है, पत्तियों से भाप उड़ने का खिंचाव इसे चलाता है। फ्लोएम तैयार रस (चीनी) पत्तियों से जड़, फल और कलियों तक ले जाता है। हार्मोन बढ़वार चलाते हैं, रक्षा के तरीक़े पौधे को बचाते हैं, और जगह के हिसाब से उसकी बनावट बदलती है।
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन – फूल पौधे का जनन अंग है। पुंकेसर परागकण (नर युग्मकोद्भिद) बनाता है। बीजांड के अंदर भ्रूणकोष (मादा युग्मकोद्भिद) होता है, जिसमें 7 कोशिकाएँ और 8 केंद्रक होते हैं। परागण से परागकण वर्तिकाग्र तक पहुँचता है, स्त्रीकेसर उसकी जाँच करता है, और पराग नली दो नर युग्मक भ्रूणकोष तक लाती है। एक अंड से मिलकर युग्मनज (2n) बनाता है, दूसरा दो ध्रुवीय केंद्रकों से मिलकर प्राथमिक भ्रूणपोष केंद्रक (3n) बनाता है। यही दोहरा निषेचन है। बीजांड बीज बनता है और अंडाशय फल।
- फसलों का पालतूकरण: जंगली पौधे से फसल तक – पालतूकरण (domestication) का मतलब है: लोगों ने हर बार सबसे अच्छे पौधों के बीज रखकर जंगली पौधों को धीरे-धीरे फसल बना दिया। चुने गए गुण: बीज पौधे पर टिके रहें, दाने बड़े हों, कड़वाहट कम हो, फसल साथ पके। इसकी कीमत है आनुवंशिक विविधता का घटना: एक किस्म वाले खेत को एक बीमारी पूरा नष्ट कर सकती है। संकरण दो पौधों के अच्छे गुण जोड़ता है, और आनुवंशिक इंजीनियरी एक जीन फसल में डाल देती है।
4. Contemporary planetary issues
Past and future climates
- जलवायु परिवर्तन और हरितगृह प्रभाव – जलवायु किसी जगह का लगभग 30 साल का औसत मौसम है। कार्बन डाइऑक्साइड और मीथेन जैसी हरितगृह गैसें पृथ्वी से निकलने वाली कुछ ऊष्मा रोक लेती हैं। मनुष्यों ने ईंधन जलाकर और जंगल काटकर ये गैसें बहुत बढ़ा दी हैं, इसलिए पृथ्वी गर्म हो रही है। इससे बर्फ़ पिघलती है, समुद्र तल बढ़ता है और मौसम उग्र होता है। हम गैसें घटा सकते हैं (शमन) और बदलाव के लिए तैयार हो सकते हैं (अनुकूलन)।
5. Human body and health
Behaviour, movement and nervous system · Producing movement: muscle contraction and energy supply · Stress response
- तंत्रिका तंत्र, प्रतिवर्ती क्रिया और मानव मस्तिष्क – तंत्रिका कोशिकाएँ (न्यूरॉन) संदेश को विद्युत आवेग के रूप में ले जाती हैं और सिनैप्स नाम के छोटे अंतर को रसायनों से पार करती हैं। झटपट बचाव वाली क्रियाएँ (प्रतिवर्ती क्रिया) मेरुरज्जु सँभालता है; सोचना और नियंत्रण मस्तिष्क करता है, जिसे खोपड़ी और तरल की गद्दी बचाती है।
- पेशी शरीर क्रिया: पेशियाँ कैसे सिकुड़ती हैं – कंकाल पेशी लंबी कोशिकाओं से बनी है जिन्हें पेशी तंतु कहते हैं। हर तंतु में सार्कोमियर नाम की छोटी इकाइयों की कतारें होती हैं। सार्कोमियर में पतले एक्टिन और मोटे मायोसिन तंतु एक दूसरे पर चढ़े रहते हैं। तंत्रिका संकेत आने पर कैल्शियम छूटता है, मायोसिन के सिर एक्टिन को पकड़कर बीच की ओर खींचते हैं और पेशी छोटी हो जाती है। हर खिंचाव में ATP लगता है। ATP आता है क्रिएटिन फॉस्फेट (कुछ सेकंड), किण्वन (लगभग दो मिनट तक, लैक्टेट बनता है) और वायवीय श्वसन (लंबी कसरत) से। ATP कम होने पर पेशी थकती है।
- तनाव के हार्मोन: एड्रेनालिन, कॉर्टिसोल और पुनर्भरण – ख़तरा दिमाग़ के अलार्म केंद्र को जगाता है। तेज़ तंत्रिका संकेत (स्वायत्त तंत्रिका तंत्र) अधिवृक्क ग्रंथियों से एड्रेनालिन छुड़वाता है, जिससे दिल ज़्यादा रक्त पंप करता है। धीमी हार्मोन-कड़ी कॉर्टिसोल छोड़ती है, जो शर्करा ऊँची रखता है। फिर कॉर्टिसोल दिमाग़ में लौटकर ऋणात्मक पुनर्भरण से अलार्म बंद कर देता है। अगर तनाव कभी न रुके तो ब्रेक कमज़ोर होता है, कॉर्टिसोल ऊँचा रहता है और शरीर व याददाश्त को नुक़सान होता है।