पेशियों के प्रकार और कंकाल पेशी की बनावट
शरीर में तीन तरह की पेशियाँ हैं:
- कंकाल पेशी: हड्डियाँ हिलाती है; हमारे बस में; सूक्ष्मदर्शी में धारीदार (रेखित)।
- चिकनी पेशी: आँत और रक्त वाहिकाओं में; अपने आप काम करती है; धारियाँ नहीं।
- हृद पेशी: सिर्फ़ हृदय में; धारीदार; कभी नहीं थकती।
कंकाल पेशी कंडरा (tendon) से हड्डी से जुड़ी है। यह लंबी कोशिकाओं यानी पेशी तंतुओं का गट्ठर है। हर तंतु में कई केंद्रक और भरे हुए पेशी तंतुक (myofibril) होते हैं। पेशी तंतुक सार्कोमियर की कतार है, जो सिकुड़ने वाली इकाई है। सार्कोमियर एक Z-रेखा से अगली तक होता है और इसमें पतले एक्टिन व मोटे मायोसिन तंतु होते हैं।
पेशी समूह और विरोधी जोड़े
पेशी सिर्फ़ खींच सकती है, धक्का नहीं दे सकती। इसलिए जोड़े में काम करती हैं: बाइसेप्स कोहनी मोड़ती है, ट्राइसेप्स सीधी करती है।
संकुचन और शिथिलन: सर्पी तंतु मॉडल
- प्रेरक तंत्रिका तंतु को संकेत भेजती है।
- तंतु अपने अंदर के भंडार से कैल्शियम आयन छोड़ता है।
- कैल्शियम एक्टिन पर जुड़ने की जगहें खोलता है।
- मायोसिन के सिर एक्टिन से जुड़कर झुकते हैं और उसे बीच की ओर खींचते हैं (शक्ति स्ट्रोक)।
- ATP सिर से जुड़ता है तो सिर छूटता है; ATP टूटने से सिर अगली पकड़ के लिए तैयार होता है।
तंतु छोटे नहीं होते, एक दूसरे पर सरकते हैं, इसलिए Z-रेखाएँ पास आती हैं।
शिथिलन: संकेत रुकने पर कैल्शियम वापस भंडार में पंप होता है (इसमें भी ATP लगता है), जगहें बंद होती हैं और साथी पेशी इसे फिर खींच देती है।
स्थैतिक और गतिशील कार्य
गतिशील कार्य में पेशी की लंबाई बदलती है और चीज़ हिलती है (चलना, उठाना)। स्थैतिक कार्य में पेशी बिना हिले तनी रहती है (बस्ता थामे रहना)। स्थैतिक कार्य जल्दी थकाता है क्योंकि दबी रक्त वाहिकाएँ कम ऑक्सीजन लाती हैं।
संकुचन की ऊर्जा: ATP, श्वसन और किण्वन
पेशी में सिर्फ़ लगभग 2 सेकंड की कड़ी मेहनत भर का ATP होता है। ATP फिर से तीन तरह बनता है:
- क्रिएटिन फॉस्फेट: अपना फॉस्फेट ADP को देता है। बहुत तेज़, लगभग 10 सेकंड।
- लैक्टिक किण्वन (अवायवीय): ग्लूकोज़ → लैक्टेट। ऑक्सीजन नहीं चाहिए, तेज़, पर प्रति ग्लूकोज़ सिर्फ़ 2 ATP। लगभग 10 s से 2 मिनट।
- वायवीय श्वसन: ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन → कार्बन डाइऑक्साइड + पानी, माइटोकॉन्ड्रिया में प्रति ग्लूकोज़ लगभग 30–32 ATP। धीरे शुरू, पर घंटों चलता है। वसा भी काम आती है।
ग्लूकोज़ रक्त से और पेशी व यकृत में जमा ग्लाइकोजन से आता है।
रक्त शर्करा और मधुमेह
इंसुलिन (अग्न्याशय से) भोजन के बाद कोशिकाओं को ग्लूकोज़ लेने में मदद करता है; ग्लूकागॉन भोजन के बीच यकृत से ग्लूकोज़ छुड़वाता है। मधुमेह में यह नियंत्रण बिगड़ता है: टाइप 1 में इंसुलिन नहीं बनता, टाइप 2 में कोशिकाएँ उस पर ठीक से असर नहीं लेतीं। नियमित कसरत से पेशियाँ ग्लूकोज़ ज़्यादा उपयोग करती हैं और टाइप 2 का ख़तरा घटता है।
थकान, चोट, प्राथमिक उपचार और डोपिंग
थकान
कड़ी मेहनत में ATP और क्रिएटिन फॉस्फेट घटते हैं, लैक्टेट और अम्ल बढ़ते हैं, कैल्शियम का काम धीमा होता है। खिंचाव कमज़ोर पड़ता है। आराम, ऑक्सीजन और भोजन से पेशी ठीक होती है। अभ्यास से माइटोकॉन्ड्रिया और केशिकाएँ बढ़ती हैं, तो थकान देर से आती है।
आम चोटें और प्राथमिक उपचार
- ऐंठन (cramp): अचानक दर्द भरा संकुचन। धीरे खींचो और मालिश करो।
- खिंचाव (strain) या मोच (sprain): RICE अपनाओ: आराम, बर्फ़ (कपड़े में, 15–20 मिनट), दबाव पट्टी, अंग ऊपर रखना।
- जोड़ खिसकना या हड्डी टूटना: अंग मत हिलाओ, सहारा दो, डॉक्टर बुलाओ।
मुद्रा और बचाव
वार्म-अप, स्ट्रेचिंग, ताकत धीरे बढ़ाना, सीधी पीठ से बैठना-उठाना, बस्ता दोनों कंधों पर।
डोपिंग
प्रदर्शन बढ़ाने के लिए प्रतिबंधित दवाएँ या तरीके अपनाना डोपिंग है, जैसे एनाबॉलिक स्टेरॉयड, EPO या उत्तेजक। यह अनुचित और ख़तरनाक है: हृदय, यकृत और हार्मोन को नुकसान। एंटी-डोपिंग संस्थाएँ खिलाड़ियों की जाँच करती हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सार्कोमियर: Z-रेखा → एक्टिन + मायोसिन → Z-रेखा
- संकुचन: तंत्रिका संकेत → Ca²⁺ → मायोसिन एक्टिन से जुड़ा → शक्ति स्ट्रोक (ATP)
- ATP → ADP + फॉस्फेट + ऊर्जा
- क्रिएटिन फॉस्फेट + ADP → क्रिएटिन + ATP
- ग्लूकोज़ → 2 लैक्टेट + 2 ATP (किण्वन)
- ग्लूकोज़ + 6 O₂ → 6 CO₂ + 6 H₂O + लगभग 30 ATP (वायवीय)
हल किए गए उदाहरण
1. एक्टिन और मायोसिन की लंबाई वही रहती है, फिर सार्कोमियर छोटा कैसे होता है?
तंतु एक दूसरे पर सरकते हैं। मायोसिन एक्टिन को बीच की ओर खींचता है, चढ़ाव बढ़ता है और Z-रेखाएँ पास आती हैं।
2. एक धाविका 100 m, 11 s में दौड़ती है। मुख्य ऊर्जा स्रोत?
पहले कुछ सेकंड जमा ATP और क्रिएटिन फॉस्फेट, फिर लैक्टिक किण्वन। वायवीय श्वसन के पूरा चलने का समय ही नहीं।
3. किण्वन से प्रति ग्लूकोज़ 2 ATP, वायवीय श्वसन से लगभग 30। एक ग्लूकोज़ के वायवीय ATP जितना पाने को किण्वन कितने ग्लूकोज़ खर्च करेगा?
30 ÷ 2 = 15 ग्लूकोज़। इसलिए किण्वन ग्लाइकोजन जल्दी खत्म करता है।
4. भारी बस्ता स्थिर पकड़ना उसे झुलाने से जल्दी क्यों थकाता है?
स्थैतिक कार्य में पेशी दबी रहती है, रक्त वाहिकाएँ दबती हैं, ऑक्सीजन कम आती है; पेशी किण्वन पर चलती है और जल्दी थकती है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि एक्टिन और मायोसिन तंतु छोटे हो जाते हैं। लंबाई वही रहती है, वे सरकते हैं।
- सोचना कि ATP सिर्फ़ खींचने में लगता है। मायोसिन के छूटने और शिथिलन में कैल्शियम वापस पंप करने में भी ATP लगता है।
- कहना कि पेशी धक्का दे सकती है। पेशी सिर्फ़ खींचती है; साथी पेशी हड्डी को वापस खींचती है।
- अगले दिन के दर्द का कारण सिर्फ़ लैक्टेट मानना। अगले दिन का दर्द मुख्यतः तंतुओं की बारीक टूट-फूट से होता है; लैक्टेट घंटे भर में साफ़ हो जाता है।