France Première Biology-Ecology
अध्याय: 2
1. Contemporary environmental issues
Acquiring resources: photosynthesis · Food webs and consumers · Reproduction modes and environment · The ecological niche · Biodiversity surveys and community structure
- जैव प्रक्रम और प्रकाश संश्लेषण – जैव प्रक्रम वे काम हैं जो ज़िंदा रहने के लिए शरीर को लगातार करने पड़ते हैं: पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन। हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण से पोषण करते हैं: सूर्य के प्रकाश और क्लोरोफिल की मदद से वे कार्बन डाइऑक्साइड और जल से ग्लूकोज बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं।
- पारितंत्र, आहार श्रृंखला और ऊर्जा प्रवाह – किसी जगह के सभी जीव और उनके आस-पास की निर्जीव चीज़ें मिलकर पारितंत्र बनाते हैं। ऊर्जा सूर्य से आती है, आहार श्रृंखला में एक ही दिशा में ऊपर जाती है, और हर अगले स्तर तक सिर्फ़ लगभग 10% पहुँचती है।
- मानव में जनन और जनन स्वास्थ्य – यौवनारंभ पर मस्तिष्क के हॉर्मोन वृषण और अंडाशय को सक्रिय करते हैं। नर तंत्र शुक्राणु बनाता और ले जाता है; मादा तंत्र अंडाणु बनाता है और गर्भाशय में शिशु के बढ़ने की जगह देता है। निषेचन अंडवाहिनी में होता है और भ्रूण को प्लेसेंटा से पोषण मिलता है। जनन स्वास्थ्य में सुरक्षित निर्णय, गर्भनिरोध, भ्रूण हत्या पर रोक और HIV/AIDS जैसे रोगों से बचाव शामिल हैं।
- जीव जनन कैसे करते हैं? DNA प्रतिकृति और अलैंगिक जनन – जनन में DNA की प्रतिकृति (कॉपी) बनती है। कॉपी कभी पूरी तरह एक जैसी नहीं होती; यही छोटे बदलाव (विभिन्नताएँ) बदलते माहौल में प्रजाति को बचाते हैं। अलैंगिक जनन में एक ही जनक विखंडन, खंडन, पुनरुद्भवन, मुकुलन, कायिक प्रवर्धन या बीजाणु से नए जीव बनाता है।
- पुष्पी पादपों में लैंगिक जनन – लैंगिक जनन में नर और मादा युग्मक मिलते हैं, जिससे दो जनकों का DNA मिलता है और विभिन्नता बढ़ती है। फूल में परागकोश का पराग वर्तिकाग्र पर पहुँचता है (परागण), परागनलिका बीजांड तक बढ़ती है और नर युग्मक अंडकोशिका से मिलता है (निषेचन)। युग्मनज भ्रूण बनता है, बीजांड बीज और अंडाशय फल।
- पारिस्थितिक निकेत – हर जीव एक आवास (उसका पता) में रहता है और उसका एक निकेत होता है (उसकी भूमिका: क्या खाता है, कहाँ और कब सक्रिय है, दूसरों पर क्या असर डालता है)। उसके जीवन पर अजैविक कारक (तापमान, प्रकाश, पानी, pH) और जैविक कारक (भोजन, शिकारी, प्रतिस्पर्धी) असर डालते हैं। हर कारक के लिए उसकी एक सहनशीलता सीमा होती है, जिसके बीच में इष्टतम होता है। संभावित (मौलिक) निकेत वह सब है जो वह इस्तेमाल कर सकता है; वास्तविक निकेत वह छोटा हिस्सा है जो प्रतिस्पर्धियों और शिकारियों के रहते वह सच में इस्तेमाल करता है। दो जातियों के निकेत पूरे मेल खाएँ तो एक दूसरी को बाहर कर देती है (प्रतिस्पर्धी अपवर्जन); आंशिक मेल वाली जातियाँ संसाधन बाँटकर साथ रह सकती हैं। संकरी सहनशीलता वाली जातियाँ जैव-सूचक का काम करती हैं।
- जैव विविधता एवं संरक्षण – जैव विविधता यानी जीवन की विविधता, तीन स्तरों पर: आनुवंशिक, जातीय और पारिस्थितिक। यह भूमध्य रेखा के पास सबसे ज़्यादा है और क्षेत्र के साथ बढ़ती है (log S = log C + Z log A)। हर जाति ज़रूरी है, जैसे हवाई जहाज़ की कीलें। 'दुष्ट चौकड़ी' के कारण जातियाँ तेज़ी से खो रही हैं: आवास हानि और विखंडन, अति-दोहन, विदेशी जातियों का आक्रमण और सह-विलुप्ति। IUCN रेड लिस्ट (रेड डेटा बुक) जातियों को 'कम चिंता' से 'विलुप्त' तक बाँटती है। संरक्षण स्व-स्थाने (हॉटस्पॉट, राष्ट्रीय उद्यान, अभयारण्य, जैवमंडल आरक्षित क्षेत्र, पवित्र उपवन, रामसर आर्द्रभूमि) और बाह्य-स्थाने (चिड़ियाघर, वानस्पतिक उद्यान, बीज बैंक) होता है।
- जीवों में विविधता और वर्गीकरण – धरती पर लाखों तरह के जीव हैं, और भारत सबसे समृद्ध जगहों में है। इन्हें पढ़ने के लिए हम आसान सवाल पूछकर समूह बनाते हैं: केंद्रक है या नहीं? एक कोशिका या कई? भोजन खुद बनाता है? इससे पाँच जगत बनते हैं: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक, पादप और जंतु। जंतु अकशेरुकी और कशेरुकी में बँटते हैं। हर जाति का दो शब्दों का वैज्ञानिक नाम होता है। वायरस कोशिका नहीं है, इसलिए किसी जगत में नहीं आता।
2. Contemporary health issues
Balanced diet, digestion and absorption · Malnutrition; diabetes and blood sugar · Locomotor system, injuries, doping, muscle metabolism · Single-gene disorders and genetic engineering
- मानव पाचन तंत्र और विषमपोषी पोषण – विषमपोषी जीव दूसरे जीवों से बना-बनाया भोजन लेते हैं। मनुष्य प्राणिसम (holozoic) पोषण करता है: पूरा भोजन खाकर एक लंबी नली, आहार नाल, में उसे तोड़ता है। दाँत, लार, आमाशय का अम्ल, एंज़ाइम, पित्त और अग्न्याशयी रस बड़े अणुओं को छोटा करते हैं, जिन्हें क्षुद्रांत्र के दीर्घरोम रक्त में सोख लेते हैं।
- समस्थापन (Homeostasis) – समस्थापन वह तरीका है जिससे शरीर अपना आंतरिक वातावरण (रक्त और ऊतक द्रव) स्थिर रखता है, चाहे बाहर का मौसम बदले। यह शरीर का ताप (लगभग 37 °C), रक्त ग्लूकोज़ (लगभग 4–6 mmol/L), पानी-लवण और रक्त pH (लगभग 7.4) नियंत्रित करता है। ज़्यादातर यह ऋणात्मक पुनर्भरण से होता है: ग्राही बदलाव पहचानता है, नियंत्रण केंद्र तय करता है, और प्रभावक स्तर को निर्धारित बिंदु पर लौटाता है।
- पेशी शरीर क्रिया: पेशियाँ कैसे सिकुड़ती हैं – कंकाल पेशी लंबी कोशिकाओं से बनी है जिन्हें पेशी तंतु कहते हैं। हर तंतु में सार्कोमियर नाम की छोटी इकाइयों की कतारें होती हैं। सार्कोमियर में पतले एक्टिन और मोटे मायोसिन तंतु एक दूसरे पर चढ़े रहते हैं। तंत्रिका संकेत आने पर कैल्शियम छूटता है, मायोसिन के सिर एक्टिन को पकड़कर बीच की ओर खींचते हैं और पेशी छोटी हो जाती है। हर खिंचाव में ATP लगता है। ATP आता है क्रिएटिन फॉस्फेट (कुछ सेकंड), किण्वन (लगभग दो मिनट तक, लैक्टेट बनता है) और वायवीय श्वसन (लंबी कसरत) से। ATP कम होने पर पेशी थकती है।
- आनुवंशिक विकार – आनुवंशिक विकार (genetic disorder) वह बीमारी है जो किसी जीन में बदलाव या गुणसूत्रों की संख्या/बनावट में गड़बड़ी से होती है। एक-जीन विकार अप्रभावी (सिस्टिक फाइब्रोसिस, सिकल सेल एनीमिया: दो ख़राब प्रतियाँ चाहिए), प्रभावी (हंटिंगटन रोग: एक ख़राब प्रति काफ़ी) या X-लिंक्ड (हीमोफीलिया, वर्णांधता: ज़्यादातर लड़कों में) होते हैं। डाउन सिंड्रोम जैसे गुणसूत्र विकार (21वें गुणसूत्र की एक अतिरिक्त प्रति) अंडाणु या शुक्राणु बनते समय की गलती से होते हैं। पनेट वर्ग हर संतान की संभावना बताता है; आनुवंशिक जाँच, परामर्श और जीन थेरेपी परिवारों की मदद करते हैं।